BRICS Space Economy meeting Bengaluru: डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिया 2026 का शानदार वैश्विक विजन, अंतरिक्ष में सहयोग की नई पहल

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By: Ishan Verma (Founder & Editor, theexamhub.in) बेंगलुरु/नई दिल्ली | 25 जून


BRICS Space Economy meeting Bengaluru: वैश्विक विकास और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के बढ़ते नेतृत्व को एक नया और बड़ा आयाम मिला है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच एक मजबूत और लचीली “ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी” (BRICS Space Economy) के निर्माण की वकालत की है।

भारत की अध्यक्षता में बेंगलुरु में आयोजित दो दिवसीय ‘ब्रिक्स अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों’ (BRICS Heads of Space Agencies – HOSA) की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस बैठक का आयोजन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह प्रौद्योगिकी और नवाचारों के क्षेत्र में सह-विकास को बढ़ावा देना है।

बेंगलुरु में ब्रिक्स अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक का सफल समापन

इस दो दिवसीय बैठक में ब्रिक्स के मूल सदस्यों के साथ-साथ हाल ही में शामिल हुए नए देशों के अंतरिक्ष प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के दौरान अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग, अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।

‘ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह का आह्वान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास वह वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी शक्ति और औद्योगिक आधार मौजूद है जो उन्हें तेजी से बढ़ रही वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित कर सकता है।

1. को-ऑर्डिनेशन से को-क्रिएशन (सह-निर्माण) की ओर बढ़ने का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग का भविष्य अलग-अलग काम करने से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से तय होगा। भारत की दृष्टि ब्रिक्स देशों के अंतरिक्ष सहयोग को केवल ‘परामर्श या समन्वय’ से आगे ले जाकर ‘सह-विकास’ (Co-development) और ‘सह-निर्माण’ (Co-creation) के स्तर पर पहुंचाने की है।

2. ब्रिक्स स्पेस काउंसिल और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नक्षत्र

बैठक के दौरान ‘ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन’ (RSSC) के माध्यम से उपग्रह डेटा साझा करने की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, अंतरिक्ष सहयोग को अधिक संस्थागत और सतत बनाने के लिए प्रस्तावित ‘ब्रिक्स स्पेस काउंसिल’ (BRICS Space Council) के गठन पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया गया।


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अंतरिक्ष कचरे से मुक्ति और मिशन मौसम के तहत सुरक्षा

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता (Space Sustainability) पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष को सुरक्षित और साफ रखना हमारी जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्होंने ‘मलबे से मुक्त अंतरिक्ष मिशनों’ (Debris-free missions) के विकास और पारदर्शी अंतरिक्ष संचालन प्रणालियों के निर्माण का आह्वान किया।

भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने चंद्रयान-3, आदित्य-एल1 और गगनयान (Gaganyaan) जैसी ऐतिहासिक सफलताओं का जिक्र किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘इंडियन स्पेस इंडस्ट्री ब्रोशर’ भी जारी किया और देश के उभरते हुए न्यूस्पेस (NewSpace) स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों के प्रतिनिधियों से बातचीत की।

BRICS Space Economy meeting
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बैठक में शामिल 9 ब्रिक्स सदस्य देशों की भागीदारी

भारत की मेजबानी में आयोजित इस बैठक में नौ प्रमुख देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए:

  • सदस्य देश: भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
  • प्रमुख उपस्थित अधिकारी: इस समापन सत्र में इसरो (ISRO) के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन, इन-स्पेस (IN-SPACe) के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका और सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुख उपस्थित रहे।

द एग्जाम हब – विज्ञान व प्रौद्योगिकी करंट अफेयर्स (Fact-Check)

आगामी यूपीएससी, पीएससी (जैसे CGPSC), और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इस अंतरराष्ट्रीय शिखर बैठक से जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी नोट्स:

  • बैठक का नाम: ब्रिक्स अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक (BRICS Heads of Space Agencies Meeting) 2026।
  • मेजबान देश: भारत (भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत)।
  • आयोजन स्थल: बेंगलुरु, कर्नाटक।
  • मुख्य विचार: ‘ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी’ (BRICS Space Economy) का निर्माण।
  • सहयोग का नया दृष्टिकोण: समन्वय से सह-निर्माण (Co-creation) की ओर बढ़ना।
  • मुख्य संस्थागत चर्चा: प्रस्तावित ब्रिक्स स्पेस काउंसिल (BRICS Space Council)।
  • प्रतिभागी देश: भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई।
  • इसरो (ISRO) के अध्यक्ष: डॉ. वी. नारायणन।
  • इन-स्पेस (IN-SPACe) के अध्यक्ष: डॉ. पवन गोयनका।

FAQs

प्रश्न 1: ब्रिक्स अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक (HOSA) 2026 का आयोजन कहाँ किया गया है और इसकी अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: इस दो दिवसीय बैठक का आयोजन कर्नाटक के बेंगलुरु में किया गया है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत इसके समापन सत्र को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबोधित किया।

प्रश्न 2: ‘ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी’ बैठक में अंतरिक्ष पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए किन मुद्दों पर विशेष बल दिया गया?
उत्तर: बैठक में अंतरिक्ष स्थिरता (Space Sustainability), मलबे से मुक्त मिशनों (Debris-free missions) के संचालन और ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नक्षत्र (RSSC) के विस्तार पर विशेष बल दिया गया।

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