Padma Shri Dr Ramchandra Godbole: 40 साल बस्तर के घने जंगलों में किया आदिवासियों का इलाज, जानें ‘मसीहा’ गोडबोले दंपत्ति के त्याग की कहानी पढ़ें पूरी खबर..

Padma Shri Dr Ramchandra Godbole

By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
नई दिल्ली/बस्तर | 25 मई


भारतीय समाज सेवा (Social Work) और चिकित्सा के इतिहास में आज एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक अध्याय जुड़ गया है। जब भी प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, CGPSC, Vyapam) में ‘पद्म पुरस्कारों (Padma Awards)’ से जुड़े सवाल आते हैं, तो एग्जामिनर हमेशा उन ‘अनसंग हीरोज (Padma Shri Dr Ramchandra Godbole)’ को चुनता है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से समाज को दे दिया।

आज देश के ऐसे ही दो सच्चे नायकों— Padma Shri Dr Ramchandra Godbole (डॉ. रामचंद्र गोडबोले) और उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले को भारत सरकार द्वारा देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया है। आइए डिकोड करते हैं इस महान डॉक्टर दंपत्ति के संघर्ष, त्याग और उनकी संस्थाओं की कहानी, जो आपके करेंट अफेयर्स का सबसे बड़ा टॉपिक बन गई है।

डॉ. रामचंद्र गोडबोले: ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ से 114 हेल्थ कैंप्स का सफर

महाराष्ट्र के सतारा में जन्मे डॉ. रामचंद्र गोडबोले ने आयुर्वेद (BAMS) की पढ़ाई की थी। अपनी प्रैक्टिस शहर में करने के बजाय उन्होंने ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ के जरिए नासिक के भील आदिवासियों का इलाज शुरू किया।

वर्ष 1990 में अपनी शादी के तुरंत बाद, डॉ. गोडबोले अपनी पत्नी के साथ बस्तर (छत्तीसगढ़) शिफ्ट हो गए। उस समय बस्तर भारत के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक था।

  • अबूझमाड़ में क्लिनिक: उन्होंने दंतेवाड़ा जिले के बारसूर (Barsur) में अबूझमाड़ के जंगलों के पास अपना क्लिनिक खोला।
  • अनोखा रिकॉर्ड: बस्तर में अपने पहले 12 वर्षों में ही उन्होंने लगभग 3,000 गंभीर रूप से बीमार आदिवासी मरीजों का सफल इलाज किया।
  • बनफूल (Banphool) संस्था: वर्तमान में वे बस्तर में “बनफूल” नामक संस्था के अध्यक्ष हैं, जो आदिवासी बच्चों में कुपोषण (Malnutrition) और स्वास्थ्य समस्याओं पर काम करती है। पिछले 15 सालों में उन्होंने 114 हेल्थ कैंप लगाए, जिससे 9,000 से ज्यादा मरीजों को नया जीवन मिला।

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श्रीमती सुनीता गोडबोले: ‘गोंडी-हल्बी’ सीखकर जीता आदिवासियों का दिल

प्रतियोगी छात्रों को श्रीमती सुनीता गोडबोले की प्रोफाइल भी गहराई से समझनी चाहिए। पुणे से M.S.W. (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) की डिग्री हासिल करने वाली सुनीता जी ने आपातकाल (Emergency) के विरोध में डेढ़ महीने जेल भी काटी थी।

  • सीखी स्थानीय भाषा: बस्तर शिफ्ट होने के बाद, आदिवासियों से सीधा संवाद करने के लिए उन्होंने वहां की स्थानीय बोलियां गोंडी (Gondi) और हल्बी (Halbi) सीखीं। इससे आदिवासी महिलाओं ने उन पर गहरा भरोसा जताना शुरू किया।
  • कुपोषण पर प्रहार: उन्होंने 24 गांवों के 460 बच्चों को कुपोषण के चंगुल से बाहर निकाला। हर साल 37 स्कूलों के 2,000 बच्चे उनके स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में हिस्सा लेते हैं।
  • प्रशासनिक योगदान: वे बाल अधिकारों की रक्षा के लिए एक ‘अर्ध-न्यायिक बोर्ड’ की आधिकारिक सदस्य भी रहीं, जिनके पास ‘प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट’ के बराबर शक्तियां थीं।
Padma Shri Dr Ramchandra Godbole

📚 The Exam Hub – पुरस्कार एवं सम्मान (Fact-Check)

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  • सम्मानित व्यक्ति: डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले।
  • प्राप्त पुरस्कार: पद्मश्री (Padma Shri)
  • क्षेत्र (Category): समाज सेवा और चिकित्सा (Social Work & Healthcare)।
  • चर्चित संस्थाएं: ‘बनफूल’ (Banphool) और वनवासी कल्याण आश्रम।
  • कार्यक्षेत्र (Region): दंतेवाड़ा (बारसूर) और बस्तर का नक्सल प्रभावित क्षेत्र।
  • अन्य प्राप्त सम्मान: सेवा गौरव पुरस्कार (2001), बया कर्वे पुरस्कार (2017)।

Padma Shri Dr Ramchandra Godbole: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: हाल ही में बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों में 40 वर्षों तक चिकित्सा सेवा देने वाले किस डॉक्टर दंपत्ति को ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया है?
उत्तर: महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ (विशेषकर बस्तर) के नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में 40 सालों तक आदिवासियों का इलाज और कुपोषण दूर करने वाले ‘डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले’ को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

प्रश्न 2: डॉ. रामचंद्र गोडबोले बस्तर में किस प्रमुख संस्था के अध्यक्ष हैं?
उत्तर: डॉ. रामचंद्र गोडबोले बस्तर में “बनफूल” (Banphool) नामक संस्था के अध्यक्ष हैं, जो विशेष रूप से आदिवासी बच्चों में कुपोषण (Malnutrition) और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान पर केंद्रित है।


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