By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
रायपुर | 22 मई
छत्तीसगढ़ में सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग इन दिनों राज्य की राजनीति में एक भयंकर चर्चा का विषय बन गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर सरकारी संपत्तियों और जन सुविधा केंद्रों से नियम विरुद्ध ‘किराया’ कमाने और मुनाफाखोरी करने का एक बहुत बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है।
ताजा मामला रायपुर जिले की तिल्दा नगर पालिका (Tilda Nagar Palika) का है, जहाँ बेसहारा और गरीब लोगों के लिए बनाए गए एक “आश्रय स्थल” (Shelter Home) को व्यावसायिक उपयोग के लिए व्यापारियों को किराए पर दे दिया गया है। इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है।
तिल्दा आश्रय स्थल विवाद: गरीबों का हक 21 हजार में बेचा
तिल्दा नगर पालिका में शासन द्वारा एक ‘आश्रय स्थल’ का निर्माण कराया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य गरीब, मजदूर, बेघर और जरूरतमंद लोगों को सिर छुपाने के लिए एक सुरक्षित छत उपलब्ध कराना था। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने इस जनहित के भवन को मात्र 21 हजार रुपए महीने के किराए पर स्थानीय व्यापारियों को सौंप दिया है।
सुरेंद्र वर्मा ने इसे सरकार की मुनाफाखोरी नीति करार देते हुए कहा:
“शासन की आश्रय स्थलों के निर्माण और संचालन की यह योजना किसी निजी किराएदारी या व्यावसायिक उपयोग के लिए बिल्कुल नहीं बनाई गई थी। लेकिन भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के लालच में पैसों का भारी लेनदेन करके इसे व्यापारियों को दे दिया गया है।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जनता के टैक्स के पैसों से निर्मित जन सुविधा केंद्रों को इस तरह से व्यावसायिक उपयोग के लिए सौंपना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि पूरी तरह से अनैतिक भी है।
पहले भी हो चुका है छत्तीसगढ़ में सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग
कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि राज्य में सरकारी संपत्तियों का इस तरह का दुरुपयोग कोई पहली बार नहीं हो रहा है। छत्तीसगढ़ में सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग भाजपा सरकार के कार्यकाल में एक आम बात हो गई है।
सुरेंद्र वर्मा ने कुछ पुराने और विवादित मामलों की याद दिलाते हुए भाजपा सरकार को घेरा:
- सी-मार्ट में शराब दुकान: अंबिकापुर (Ambikapur) में महिलाओं और स्थानीय स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को बेचने के लिए बनाए गए ‘सी-मार्ट’ (C-Mart) के सरकारी भवन में नियम विरुद्ध ‘प्रीमियम दारू दुकान’ (Liquor Shop) खोल दी गई थी।
- गौठानों में ठेके: घुमका क्षेत्र के गौठान, जिसे गायों के संरक्षण के लिए बनाया गया था, वहां भी शराब की दुकान खोली गई।
- शमशान घाट भी नहीं बख्शा: संडी के शमशान घाट तक में शराब दुकान खोलकर जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया।
और अब तिल्दा नगर पालिका में गरीबों के आश्रय स्थल में दुकानें खुलवाकर सरकार ने साबित कर दिया है कि उनका लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना रह गया है।
प्रशासन का मौन: भाजपा नेताओं के कब्जे में जन सुविधा केंद्रों की चाबी
कांग्रेस ने सत्ता और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि सरकारी संपत्तियों के खुलेआम दुरुपयोग पर स्थानीय प्रशासन और शासन दोनों ने पूरी तरह से मौन साध रखा है, जो कि एक ‘संगठित लूट’ और आर्थिक अपराध का जीता-जागता प्रमाण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है मानो भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकारी संपत्तियों को अपनी ‘निजी प्रॉपर्टी’ (Private Property) मान लिया है। सरकारी भवनों और जन सुविधा केंद्रों की चाबियां अब सीधे तौर पर भाजपा नेताओं की जेब और कब्जे में हैं।
निष्कर्ष: आम आदमी पर कार्रवाई, रसूखदारों को छूट
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता ने अपने बयान के अंत में प्रशासन के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में यदि कोई आम नागरिक या गरीब व्यक्ति छोटी सी भी गलती कर दे या फुटपाथ पर दुकान लगा ले, तो प्रशासन उस पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करता है।
लेकिन, जब रसूखदार लोगों और भाजपा नेताओं से जुड़े छत्तीसगढ़ में सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग के बड़े मामले सामने आते हैं, तो प्रशासन पूरी तरह से मौन नजर आता है। लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि जनता के पैसों की इस खुली लूट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।