Ishan Verma | Founder & Editor, theexamhub.in
प्रकाशित: 18 जून 2026 | रायपुर
Gyan Bharatam Chhattisgarh — भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में चले तीन महीने के सघन सर्वेक्षण में कुल 11,808 दुर्लभ पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया गया। 15 मार्च से 15 जून 2026 तक चले इस अभियान में महासमुंद जिला 3,498 पांडुलिपियों के साथ प्रथम स्थान पर रहा। Gyan Bharatam Chhattisgarh की यह उपलब्धि — सदियों पुराने प्राचीन ज्ञान को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। ताड़पत्रों और भोजपत्रों पर लिखे सैकड़ों वर्ष पुराने ग्रंथ — धर्म, आध्यात्म, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन, इतिहास और स्थापत्य कला से जुड़ी बहुमूल्य जानकारियां समेटे हुए हैं।
अगर आप CGPSC, UPSC, SSC या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं — Gyan Bharatam Chhattisgarh का यह अभियान संस्कृति, विरासत और डिजिटलीकरण से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स है।
📜 GYAN BHARATAM CHHATTISGARH — 11,808 MANUSCRIPTS FOUND
ज्ञान भारतम् मिशन | 3 महीने | 11,808 पांडुलिपियां | महासमुंद अव्वल | ताड़पत्र | डिजिटलीकरण | भारतीय ज्ञान परंपरा
Quick Overview — Gyan Bharatam Chhattisgarh
| अभियान: | ज्ञान भारतम् मिशन (Gyan Bharatam) |
| संचालक: | भारत सरकार — संस्कृति मंत्रालय |
| समन्वय: | छत्तीसगढ़ शासन — संस्कृति विभाग |
| अवधि: | 15 मार्च — 15 जून 2026 (3 महीने) |
| कुल पांडुलिपियां: | 11,808 |
| प्रथम जिला: | महासमुंद — 3,498 पांडुलिपियां |
| द्वितीय: | रायपुर — 1,770 |
| तृतीय: | बस्तर — 1,610 |
| चतुर्थ: | रायगढ़ — 1,553 |
| माध्यम: | ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप |
| नोडल अधिकारी: | श्री प्रभात सिंह |
| विशेषज्ञ: | डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र — प्रसिद्ध इतिहासकार |
जिलेवार आंकड़े — कहां कितनी पांडुलिपियां मिलीं?
Gyan Bharatam Chhattisgarh के सर्वेक्षण में विभिन्न जिलों से पांडुलिपियों की संख्या:
| क्रम | जिला | पांडुलिपियां | स्थान |
|---|---|---|---|
| 1 | महासमुंद | 3,498 | प्रथम |
| 2 | रायपुर | 1,770 | द्वितीय |
| 3 | बस्तर | 1,610 | तृतीय |
| 4 | रायगढ़ | 1,553 | चतुर्थ |
| 5 | कोरबा, सारंगढ़-बिलाईगढ़, राजनांदगांव, मुंगेली, कोरिया | भारी मात्रा | अन्य |
Gyan Bharatam Chhattisgarh — कहां-कहां मिलीं पांडुलिपियां?
ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप के जरिए पूरे किए गए इस सर्वेक्षण में पांडुलिपियां कहां-कहां मिलीं:
पांडुलिपियों के स्रोत
- निजी संग्रह: व्यक्तिगत परिवारों के पास सुरक्षित
- प्राचीन मंदिर: मंदिरों में संरक्षित
- आश्रम: आश्रमों में रक्षित
- पारिवारिक धरोहर: पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजी गई
विशेषता: ताड़पत्रों की संख्या सर्वाधिक
भाषा और लिपियों की अनूठी विविधता
ज्ञान भारतम् मिशन के राज्य नोडल अधिकारी श्री प्रभात सिंह ने बताया कि इन पांडुलिपियों में भाषा और लिपियों की अनूठी विविधता मिली:
| माध्यम | भाषा | लिपि |
|---|---|---|
| ताड़पत्र | उड़िया भाषा | उड़िया लिपि |
| कागज | ब्रज भाषा, अवधी भाषा | देवनागरी लिपि |
यह विविधता — छत्तीसगढ़ के प्राचीन सांस्कृतिक संपर्कों और ऐतिहासिक आदान-प्रदान को प्रमाणित करती है।
किन विषयों की जानकारियां दर्ज हैं?
Gyan Bharatam Chhattisgarh में मिली पांडुलिपियों में दर्ज विषय:
पांडुलिपियों में दर्ज विषय
- धर्म: धार्मिक ग्रंथ और ज्ञान
- आध्यात्म: आध्यात्मिक दर्शन
- कर्मकांड: अनुष्ठान और विधि-विधान
- वैदिक चिकित्सा: आयुर्वेद — प्राचीन चिकित्सा पद्धति
- ज्योतिष: खगोलीय गणनाएं
- दर्शन: भारतीय दार्शनिक परंपराएं
- इतिहास: ऐतिहासिक घटनाएं और अभिलेख
- स्थापत्य कला: वास्तुकला और निर्माण विधि
मूल मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेंगी पांडुलिपियां
प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र ने इसे “भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्जागरण” बताया। उन्होंने स्पष्ट किया:
डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र — प्रमुख बिंदु
- कार्य: शासन द्वारा केवल पंजीयन और दस्तावेजीकरण
- सुरक्षा: पांडुलिपियां मूल मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेंगी
- उद्देश्य: भविष्य में शोध और व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा
- खोज: कई ऐसे विषय जिनके सिर्फ किस्से सुने जाते थे — मूल दस्तावेज पहली बार सामने आए
“विलुप्त हो रही ज्ञान परंपराओं को बचाने का राष्ट्रीय प्रयास”
यह अभियान महज कागजों की गिनती नहीं — बल्कि भारतीय सभ्यता के बिखरे हुए ज्ञान को समेटने का एक बड़ा राष्ट्रीय अनुष्ठान है।
| तुलना | विवरण |
|---|---|
| नालंदा | नष्ट होने से ज्ञान का बड़ा भंडार खो गया |
| ज्ञान भारतम् | विलुप्त हो रही ज्ञान परंपराओं को नया जीवन दे रहा है |
| डिजिटलीकरण | 11,808 पांडुलिपियां — आने वाली पीढ़ियों को गौरवशाली अतीत से जोड़ेंगी |
डिजिटलीकरण — संरक्षण का सबसे प्रभावी कदम
Gyan Bharatam Chhattisgarh के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों को सहेजने की दिशा में दो सबसे प्रभावी कदम:
संरक्षण विधि
- डिजिटलीकरण (Digitization): डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करना
- वैज्ञानिक संरक्षण: भौतिक रूप से पांडुलिपियों की सुरक्षा
- माध्यम: ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप
- उद्देश्य: आने वाली पीढ़ियों को गौरवशाली अतीत से जोड़ना
Gyan Bharatam Chhattisgarh: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- Q: अभियान का नाम? → ज्ञान भारतम् मिशन (Gyan Bharatam Mission)
- Q: संचालक? → भारत सरकार — संस्कृति मंत्रालय
- Q: कब और कहां? → 15 मार्च — 15 जून 2026 — छत्तीसगढ़
- Q: कुल पांडुलिपियां? → 11,808
- Q: कौन सा जिला अव्वल? → महासमुंद — 3,498 पांडुलिपियां
- Q: भाषा-लिपि? → ताड़पत्र: उड़िया | कागज: देवनागरी, ब्रज, अवधी
- Q: नोडल अधिकारी? → श्री प्रभात सिंह
- Q: इतिहासकार? → डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र — “भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्जागरण”
- Q: पांडुलिपियां किसके पास? → मूल मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेंगी
- Q: विषय? → धर्म, आध्यात्म, कर्मकांड, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन, इतिहास, स्थापत्य कला
जिलेवार सारांश — एक नज़र में
| क्रम | जिला | पांडुलिपियां |
|---|---|---|
| 1 | महासमुंद | 3,498 |
| 2 | रायपुर | 1,770 |
| 3 | बस्तर | 1,610 |
| 4 | रायगढ़ | 1,553 |
| 5 | कोरबा | भारी मात्रा |
| 6 | सारंगढ़-बिलाईगढ़ | भारी मात्रा |
| 7 | राजनांदगांव | भारी मात्रा |
| 8 | मुंगेली | भारी मात्रा |
| 9 | कोरिया | भारी मात्रा |
निष्कर्ष: Gyan Bharatam Chhattisgarh — “नालंदा के बाद सबसे बड़ा ज्ञान अनुष्ठान”
Gyan Bharatam Chhattisgarh — 11,808 दुर्लभ पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण — यह महज कागजों की गिनती नहीं है। जिस तरह नालंदा विश्वविद्यालय के नष्ट होने से ज्ञान का बड़ा भंडार खो गया था — ज्ञान भारतम् मिशन वैसी ही विलुप्त हो रही ज्ञान परंपराओं को नया जीवन दे रहा है।
महासमुंद की 3,498 पांडुलिपियों से लेकर बस्तर की 1,610 तक — ताड़पत्रों पर उड़िया लिपि से लेकर कागज पर देवनागरी तक — भारतीय सभ्यता का बिखरा हुआ ज्ञान — अब डिजिटल स्वरूप में आने वाली पीढ़ियों को गौरवशाली अतीत से जोड़ेगा।
स्रोत: छत्तीसगढ़ जनसंपर्क, 18 जून 2026 | अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ सरकार देखें