By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
बिलासपुर/रायपुर | 15 मई
छत्तीसगढ़ की हृदयस्थली में बसा बिलासपुर जिले का ‘ताला’ (Tala) गांव केवल एक पुरातत्व स्थल नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्थापत्य कला की उस पराकाष्ठा का प्रमाण है, जहाँ ‘पत्थर बोलते हैं’। रायपुर-बिलासपुर राजमार्ग पर मनियारी नदी के शांत तट पर स्थित Devrani Jethani Temple Bilaspur (देवरानी-जेठानी मंदिर) अपनी अद्वितीय मूर्तिकला के कारण दुनिया भर के इतिहासकारों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC, Vyapam, UPSC) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए ‘कला एवं संस्कृति (Art & Culture)’ का यह एक ऐसा टॉपिक है जो हर साल एग्जाम में नए तरीके से पूछा जाता है।
1500 साल पुराना गुप्तकालीन वैभव और तांत्रिक साधना का केंद्र
पुरातत्वविदों के अनुसार, ताला गांव में स्थित ये दो शिव मंदिर (देवरानी और जेठानी मंदिर) लगभग 1500 वर्ष पुराने हैं। इनका निर्माण छठवीं-सातवीं शताब्दी में हुआ था।
- स्थापत्य कला: ये मंदिर ‘गुप्तकालीन स्थापत्य कला’ (Gupta Period Architecture CG) का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मंदिरों की संरचना में अर्द्धमंडप, अंतराल और गर्भगृह का शास्त्रीय नियोजन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
- शैव और तांत्रिक केंद्र: ताला प्राचीन काल से ही शैव मत और तांत्रिक क्रियाओं का गढ़ रहा है। यहाँ की मूर्तियों के विन्यास से पता चलता है कि यह स्थल महामृत्युंजय जाप और शिव उपासना का मुख्य केंद्र था। पास ही स्थित ऐतिहासिक नगर ‘मल्हार’ और ‘धूमनाथ मंदिर’ इस बात की पुष्टि करते हैं।

दुनिया की सबसे रहस्यमयी मूर्ति: ‘रुद्र शिव’ का अद्भुत खजाना
भले ही समय की मार से जेठानी मंदिर आज जीर्ण-शीर्ण (भग्न) अवस्था में है, लेकिन इसी ताला की सबसे बड़ी विशेषता और रहस्य यहाँ की ‘रूद्र शिव’ (Rudra Shiva) प्रतिमा है।
- उत्खनन (Excavation): वर्ष 1987-88 की खुदाई में यह 2.54 मीटर ऊंची और 5 टन वजनी विशाल प्रतिमा प्राप्त हुई थी।
- क्या है रहस्य: यह विश्व की दुर्लभतम मूर्तियों में से एक है। इस प्रतिमा का हर अंग किसी न किसी ‘जीव (Animal)’ की आकृति से बना है! इसके चेहरे पर मयूर (Peacock), कंधों पर मकर (Crocodile), जंघाओं पर हाथी (Elephant) और पेट पर केकड़े (Crab) जैसी आकृतियां उकेरी गई हैं।
यह अनोखा संयोजन भगवान शिव के ‘अघोर स्वरूप’ को साक्षात प्रस्तुत करता है। इसके अलावा यहाँ चतुर्भुज कार्तिकेय, अर्धनारीश्वर और शालभंजिका की दुर्लभ प्रतिमाएं भी मिली हैं, जो भारतीय मूर्तिकला के स्वर्ण युग की याद दिलाती हैं।

📚 The Exam Hub – कला एवं संस्कृति (Fact-Check)
आगामी CGPSC, Vyapam और अन्य परीक्षाओं के लिए ‘ताला (देवरानी-जेठानी मंदिर)’ के महत्वपूर्ण बिंदु (Short Notes):
- ऐतिहासिक स्थल: देवरानी-जेठानी मंदिर (ताला गांव)।
- भौगोलिक स्थिति: बिलासपुर जिला, मनियारी नदी के तट पर।
- निर्माण काल: 6वीं-7वीं शताब्दी (मुख्यतः गुप्तकालीन और शरभपुरीय राजवंश के समय)।
- चर्चित प्रतिमा: रूद्र शिव की प्रतिमा (वर्ष 1987-88 की खुदाई में प्राप्त, ऊंचाई- 2.54 मीटर)।
- प्रतिमा की विशेषता: शरीर के विभिन्न अंग 11 अलग-अलग जीव-जंतुओं (मोर, मगरमच्छ, केकड़ा, सर्प, मछली आदि) की आकृतियों से बने हैं।
- धर्म/संप्रदाय: यह प्राचीन काल में शैव मत (Shaivism) का प्रमुख केंद्र था।
Devrani Jethani Temple Bilaspur: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: ‘देवरानी-जेठानी मंदिर’ छत्तीसगढ़ के किस जिले में और किस नदी के तट पर स्थित है?
उत्तर: ऐतिहासिक ‘देवरानी-जेठानी मंदिर’ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ताला (Tala) गांव में, मनियारी नदी के तट पर स्थित है।
प्रश्न 2: ताला (बिलासपुर) में प्राप्त ‘रूद्र शिव’ की प्रतिमा दुनिया भर में क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर: वर्ष 1987-88 की खुदाई में ताला से प्राप्त ‘रूद्र शिव’ की प्रतिमा इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि इस 2.54 मीटर ऊंची प्रतिमा का हर अंग किसी न किसी जीव-जंतु (जैसे- मोर, हाथी, केकड़ा, मगरमच्छ) की आकृति से मिलकर बना है, जो शिव के अघोर स्वरूप को दर्शाता है।
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