UPSC Face Authentication Protocol: सिविल सेवा परीक्षा में मुन्नाभाइयों का खेल खत्म! UPSC और MeitY ने मिलकर तैयार किया सुरक्षा का नया चक्रव्यूह

UPSC Face Authentication Protocol

By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
नई दिल्ली | 4 जून


UPSC Face Authentication Protocol: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने और फर्जीवाड़े (Impersonation) को जड़ से खत्म करने के लिए एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया है। आयोग ने हाल ही में आयोजित सिविल सर्विसेज और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2026 के दौरान ‘फेस ऑथेंटिकेशन‘ का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया है।

इस नई तकनीक की मदद से अब यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जो उम्मीदवार आवेदन पत्र भरते समय फोटो अपलोड करता है, वही उम्मीदवार परीक्षा हॉल में परीक्षा देने आ रहा है। इनविजिलेटर के मोबाइल फोन के माध्यम से वास्तविक समय (Real-time) में लाइव सत्यापन की इस प्रक्रिया ने फर्जी कैंडिडेट बैठाने की संभावना को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

📱 कैसे काम करती है यह तकनीक और क्या हैं इसकी खूबियां?

इस स्वदेशी तकनीक को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह परीक्षा की गति और प्रशासनिक कार्य को प्रभावित किए बिना सुरक्षा सुनिश्चित करती है:

  • कोई महंगा हार्डवेयर नहीं: इस समाधान की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी महंगे आईरिस स्कैनर या फिंगरप्रिंट डिवाइस की आवश्यकता नहीं होती। यह किसी भी साधारण एंड्रॉइड (Android) स्मार्टफोन पर काम करता है। इनविजिलेटर ने अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग करके इसे आसानी से संचालित किया।
  • बिजली जैसी रफ्तार: परीक्षा केंद्रों पर लंबी लाइनें न लगें, इसके लिए ऐप को बेहद तेज बनाया गया है। एक उम्मीदवार के चेहरे का सत्यापन करने में मात्र 6 से 8 सेकंड का समय लगता है।
  • अतुल्य स्केलेबिलिटी (Scalability): परीक्षा के दौरान इस ऐप का उपयोग एक साथ 7,000 से अधिक इनविजिलेटर्स द्वारा किया गया। प्रवेश के व्यस्त समय (Peak hours) के दौरान, इस प्रणाली ने प्रति मिनट लगभग 12,000 ऑथेंटिकेशन्स को सफलतापूर्वक प्रोसेस किया।

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📊 देश के 2,072 केंद्रों पर एक साथ ऐतिहासिक सफल परीक्षण

इस साल सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 के दौरान देश भर के सभी 2,072 परीक्षा केंद्रों पर रीयल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन का सफल आयोजन किया गया।

इस विशेष फेस ऑथेंटिकेशन एप्लीकेशन को यूपीएससी (UPSC) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के तकनीकी सहयोग से इन-हाउस (स्वदेशी रूप से) विकसित किया गया है। परीक्षा से पहले इनविजिलेटर्स को कई चरणों में व्यापक प्रशिक्षण भी दिया गया था ताकि वे इसका सही उपयोग कर सकें।

‘यूपीएससी का ऐतिहासिक कदम’ — चेयरमैन डॉ. अजय कुमार

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बात करते हुए यूपीएससी के नवनियुक्त अध्यक्ष (Chairman) डॉ. अजय कुमार ने कहा, “यह यूपीएससी द्वारा परीक्षाओं को पूरी तरह फर्जीवाड़ा-मुक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, असली चुनौती इस तकनीक को इतने बड़े पैमाने पर लागू करना और कम समय में परीक्षा स्टाफ को प्रशिक्षित करना था। लेकिन यूपीएससी, NeGD और MeitY की टीमों ने देश भर के 2,000 से अधिक केंद्रों पर लगभग 5.5 लाख उम्मीदवारों के लिए इसे सफलतापूर्वक लागू करके एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।”

UPSC Face Authentication Protocol

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आगामी UPSC, Civil Services और स्टेट पीएससी परीक्षाओं के लिए इस तकनीक से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु:

  • प्रोटोकॉल का नाम: यूपीएससी फेस ऑथेंटिकेशन प्रोटोकॉल (UPSC Face Authentication Protocol)।
  • विकासकर्ता: यूपीएससी (UPSC) और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) – MeitY।
  • सत्यापन का समय: प्रति उम्मीदवार केवल 6 से 8 सेकंड।
  • चोटी की क्षमता (Peak Capacity): 12,000 ऑथेंटिकेशन प्रति मिनट।
  • कुल परीक्षा केंद्र: देश भर में 2,072 केंद्र।
  • सत्यापित उम्मीदवार: लगभग 5.5 लाख सिविल सेवा अभ्यर्थी।
  • यूपीएससी के वर्तमान अध्यक्ष: डॉ. अजय कुमार।

UPSC Face Authentication Protocol: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सिविल सेवा परीक्षा 2026 में लागू किया गया ‘UPSC Face Authentication Protocol’ क्या है?
उत्तर: यह यूपीएससी द्वारा विकसित एक मोबाइल-आधारित सुरक्षा प्रणाली है, जिसके तहत इनविजिलेटर अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन से केवल 6-8 सेकंड में उम्मीदवार के चेहरे का मिलान उसके आवेदन पत्र की फोटो से करके उसकी पहचान सत्यापित करते हैं, ताकि परीक्षा में फर्जी कैंडिडेट (Impersonation) को रोका जा सके।

प्रश्न 2: इस फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक को विकसित करने में यूपीएससी को किस सरकारी एजेंसी का तकनीकी सहयोग मिला है?
उत्तर: इस तकनीक को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के तकनीकी सहयोग से इन-हाउस विकसित किया गया है।

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