By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
रायपुर | 6 जून
छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती नहीं होने को लेकर नया शिक्षा सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक घमासान मच गया है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर बेहद तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि सरकार की हठधर्मिता और वित्तीय कंगाली का खामियाजा प्रदेश के लाखों गरीब बच्चों को उठाना पड़ रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शिक्षा विभाग की अव्यवस्थाओं, बंद होते स्कूलों और सरकार के अधूरे वादों की पोल खोली है। उन्होंने इसे भाजपा सरकार की ‘शिक्षा विरोधी नीति’ करार दिया है।
50 हजार शिक्षकों की कमी, कैसे सुधरेगी गुणवत्ता?
धनंजय सिंह ठाकुर ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नया शिक्षा सत्र बस शुरू ही होने वाला है, लेकिन अभी तक स्कूलों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 50 हजार से अधिक शिक्षकों की भारी कमी है। जब स्कूल में पढ़ाने के लिए गुरुजी ही नहीं होंगे, तो ऐसे में शिक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत होगी और गुणवत्ता कैसे सुधरेगी? यह पूरे प्रदेश के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने की साजिश
कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस अनिर्णय की स्थिति के कारण गरीब बच्चों को उनके निःशुल्क शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि: “सरकार जानबूझकर ऐसी अव्यवस्था पैदा कर रही है ताकि सरकारी स्कूलों की बदहाली से निराश होकर पालक अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए मजबूरन निजी स्कूलों (Private Schools) की ओर रुख करें। इससे गरीब माता-पिता मोटी फीस भरेंगे और निजी स्कूलों की कमाई बढ़ेगी। यह प्रदेश के आने वाले भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।”
10 हजार से ज्यादा स्कूल बंद, 48 हजार पद हुए समाप्त
प्रेस वार्ता में धनंजय सिंह ठाकुर ने शिक्षा विभाग के कुछ बेहद चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने बताया कि किस तरह से राज्य में शिक्षा का ढांचा सिकुड़ रहा है:
- स्कूल बंद: बीते शिक्षा सत्र में करीब 10,463 सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया।
- पद समाप्त: स्कूलों के बंद होने से 48 हजार शिक्षकों के पद भी समाप्त कर दिए गए।
- छात्र-शिक्षक अनुपात बिगड़ा: इस सरकार ने ‘नए सेटअप’ के नाम पर छत्तीसगढ़ के सभी 56,895 स्कूलों में शिक्षकों के न्यूनतम पदों की संख्या में कटौती कर दी है।
- एकल शिक्षकीय स्कूल: पदों की कटौती के बावजूद आज भी कई सरकारी स्कूलों में सिर्फ एक या दो शिक्षक ही पदस्थ हैं।
- आत्मानंद स्कूलों का बुरा हाल: सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों’ में भी 3 हजार से अधिक शिक्षकों की कमी है, लेकिन वहां भी भर्ती नहीं हो रही है।
वादे 57 हजार के, घोषणाएं बार-बार बदलीं
कांग्रेस ने भाजपा को विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं से किए गए वादों की याद दिलाई। धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा ने युवाओं से 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का बड़ा वादा किया था। आज प्रदेश के लाखों युवा और बीएड/डीएड (B.Ed/D.Ed) पास बेरोजगार शिक्षक भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन पिछले ढाई साल में सरकार सिर्फ कोरी घोषणाएं कर रही है।
सरकार के स्टैंड में विरोधाभास:
- सबसे पहले पूर्व शिक्षा मंत्री ने 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी।
- इसके बाद सदन में वित्त मंत्री ने 20 हजार पदों पर भर्ती की बात कही।
- और अंत में मुख्यमंत्री ने केवल 5 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा कर दी।
कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अपने ही स्टैंड पर कायम नहीं है, उसे खुद नहीं पता कि कितने पदों पर भर्ती करनी है। सरकार की इस लेटलतीफी और झूठे वादों का सीधा नुकसान प्रदेश के गरीब बच्चों और रोजगार की राह ताक रहे युवाओं को उठाना पड़ रहा है।