Next Gen CG Dial 112: ‘चलता-फिरता फोरेंसिक लैब’ और ‘नेक्स्ट जेन डायल-112’, अमित शाह ने की लॉन्चिंग, 7 साल की सजा वाले अपराधों में अनिवार्य हुई वैज्ञानिक जांच

Next Gen CG Dial 112

By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
रायपुर | 18 मई


छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग और न्याय व्यवस्था (Justice System) को अब ‘कछुआ गति’ से निकालकर ‘बुलेट ट्रेन’ की रफ्तार दी जा रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह (Amit Shah) ने आज राजधानी रायपुर के माना पुलिस परेड ग्राउंड में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक Next Gen CG Dial 112 (नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112) सेवा और 32 मोबाइल फोरेंसिक वैन का भव्य शुभारंभ किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उप-मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा भी मौजूद थे। प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC/CGPSC) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह ‘आंतरिक सुरक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण (Internal Security)’ का सबसे बड़ा करेंट अफेयर्स है। आइए जानते हैं क्या है यह तकनीक और कैसे बदलेगी यह राज्य की तस्वीर।


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112 की नई थीम: ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ (सभी 33 जिलों में लागू)

वर्ष 2018 में शुरू हुई ‘डायल 112’ आपात सेवा पहले सिर्फ 16 जिलों में काम करती थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर इसे राज्य के सभी 33 जिलों में पूरी तरह लागू कर दिया गया है।

  • नई थीम: इसे “एक्के नंबर, सब्बो बर” थीम पर लॉन्च किया गया है, जहाँ पुलिस, मेडिकल (एंबुलेंस) और फायर ब्रिगेड की सुविधाएं एक ही नंबर पर मिलेंगी।
  • क्या है नया: इस सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आधारित लोकेशन ट्रैकिंग को जोड़ा गया है। इसके अलावा 400 नए आपातकालीन वाहन और 60 हाईवे पेट्रोलिंग (Highway Patrolling) वाहन रवाना किए गए हैं।
  • कंट्रोल रूम: सिविल लाइंस के साथ-साथ अब नया रायपुर पुलिस मुख्यालय में भी एक ‘वैकल्पिक बैकअप कंट्रोल रूम’ बनाया गया है।

📖 UPSC Fact: नए आपराधिक कानून (BNSS की धारा 176) और फोरेंसिक वैन

इस कार्यक्रम का सबसे अहम ‘एग्जाम फैक्ट’ देश के नए आपराधिक कानूनों से जुड़ा है।

  • नया कानून क्या कहता है? ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)‘ की धारा 176 के तहत अब उन सभी गंभीर अपराधों में (जिनमें 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा है) घटनास्थल पर ‘फोरेंसिक विज्ञान दल’ की उपस्थिति और वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) एकत्र करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • इसी कानून को जमीन पर उतारने के लिए “Science on Wheels – Towards Faster Justice” थीम पर 32 ‘मोबाइल फोरेंसिक वैन’ लॉन्च की गई हैं।

क्या है ‘मोबाइल फोरेंसिक वैन’ (चलता-फिरता लैब)?

ये 32 वैन असल में चलते-फिरते ‘फोरेंसिक लैब’ हैं। लगभग 65 लाख रुपये प्रति वैन की लागत से तैयार इन गाड़ियों में खून की जांच, डिजिटल साक्ष्य संग्रहण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन (Fingerprint detection), नार्कोटिक्स किट, और गनशॉट (GSR) परीक्षण की सुविधा है।

अब पुलिस को साक्ष्यों (Evidences) को लैब तक भेजने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। फोरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल (Crime scene) पर त्वरित रूप से पहुंचकर वैज्ञानिक जांच कर सकेंगे, जिससे कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश करने में मदद मिलेगी।

📚 The Exam Hub – आंतरिक सुरक्षा (Fact-Check)

आगामी UPSC, SSC, Police और State PSC परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Short Notes):

  • लांच की गई सेवा: नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 (Next Gen CG Dial 112)।
  • लॉन्चकर्ता: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह (माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर)।
  • चर्चित थीम: ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ और ‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’।
  • कवरेज: राज्य के सभी 33 जिले।
  • लॉन्च हुए वाहन: 400 डायल-112 वाहन और 32 मोबाइल फोरेंसिक वैन।
  • संबंधित कानून: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) – धारा 176।

Next Gen CG Dial 112: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ पुलिस की ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा की मुख्य थीम क्या है?
उत्तर: इस आधुनिक आपातकालीन सेवा को “एक्के नंबर, सब्बो बर” थीम पर लॉन्च किया गया है, जिसके तहत पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की सुविधाएं राज्य के सभी 33 जिलों में एक ही नंबर पर उपलब्ध होंगी।

प्रश्न 2: भारत के नए आपराधिक कानून (BNSS) के अनुसार किन मामलों में घटनास्थल पर ‘फोरेंसिक जांच’ अनिवार्य कर दी गई है?
उत्तर: ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)’ की धारा 176 के अनुसार, ऐसे सभी गंभीर आपराधिक मामलों में घटनास्थल पर फोरेंसिक जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना अनिवार्य है, जिनमें ‘7 वर्ष या उससे अधिक’ की सजा का प्रावधान है।


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