By: Ishan Verma (Founder & Editor, theexamhub.in)
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने Loktantra Senani Chhattisgarh (लोकतंत्र सेनानियों) के संघर्ष और त्याग को याद करते हुए उन्हें नई पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बताया।
राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम (DDU Auditorium) में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री ने आपातकाल के दौर के कड़े संघर्षों को रेखांकित किया। इस अवसर पर उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के जीवन और संघर्ष पर आधारित एक विशेष स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन भी किया।
आपातकाल के दौर की स्मृतियां और पारिवारिक पीड़ा
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने पारिवारिक संघर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अनेक परिवारों ने असहनीय दर्द और कठिनाइयों का सामना किया था।
- 19 महीने की जेल: मुख्यमंत्री के बड़े पिताजी स्वर्गीय श्री नरहरि साय ने इस आंदोलन के दौरान 19 महीनों तक जेल जीवन की कठिनाइयां झेली थीं।
- स्वयंसेवकों का योगदान: श्री साय ने याद किया कि जब घरों के मुखिया जेल में बंद थे और परिवारों के सामने जीवन निर्वाह का संकट था, तब स्वयंसेवक भेष बदलकर चुपचाप उनके घरों तक अनाज पहुंचाया करते थे ताकि कोई भूखा न सोए।
- पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल: आने वाली पीढ़ियों को इस ऐतिहासिक संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों से अवगत कराने के लिए इस विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा को उन्होंने एक सराहनीय पहल बताया।
“राष्ट्र प्रथम” की भावना ही वास्तविक शक्ति: इंद्रेश कुमार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री इंद्रेश कुमार ने लोकतंत्र, राष्ट्र निर्माण और देश के सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि जीवन जीने का मूल्य है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इतिहास की सीख से अपना भविष्य बेहतर बनाएं। सामाजिक समरसता को मजबूत करने, नशामुक्त समाज के निर्माण और “राष्ट्र प्रथम” (Nation First) की भावना को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी मजबूत संस्कृति और मूल्यों के बल पर विश्व पटल पर अपनी पहचान को और सुदृढ़ कर सकता है।
आपातकाल लोकतांत्रिक सजगता की प्रेरणा देता है: डॉ. रमन सिंह
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बेहद गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के हनन और असंवैधानिक संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय Loktantra Senani Chhattisgarh के संघर्षों की बदौलत लोकतंत्र की मजबूती और जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सच्चिदानंद उपासने एवं अन्य गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में Loktantra Senani Chhattisgarh संघ की ओर से कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में विशेष रूप से लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सच्चिदानंद उपासने उपस्थित रहे, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों को अक्षुण्ण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके साथ ही लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दिवाकर तिवारी ने भी कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
इनके अतिरिक्त गरिमामयी समारोह में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ श्री कैलाश सोनी, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्रीमती गोमती साय सहित अनेक प्रबुद्धजन और लोकतंत्र सेनानी सपरिवार मौजूद रहे।
राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान
इस अवसर पर लोकतंत्र और संविधान के प्रति युवाओं की जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इस प्रतियोगिता में पूरे छत्तीसगढ़ से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था।
विजेताओं की सूची (Winners Table)
| वर्ग / स्तर | विषय | प्रथम स्थान | द्वितीय स्थान | तृतीय स्थान |
|---|---|---|---|---|
| विद्यालय स्तर (School Level) | “आपातकाल कभी विस्मृत न हो” | जागृति जांगड़े (जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर) – ₹31,000 प्रोत्साहन राशि | सूरज तांडिया (विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा) | अंश देशमुख (अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग) |
| महाविद्यालय स्तर (College Level) | “25 जून : संविधान हत्या दिवस” | सुश्री कल्याणी पटले (रायपुर) | सीमा साव (रायगढ़) | सुश्री खुशबू (दुर्ग) |
निष्कर्ष
रायपुर में आयोजित यह गरिमामयी समारोह केवल एक औपचारिक सम्मान कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन का एक जीवंत प्रयास था। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार Loktantra Senani Chhattisgarh के सम्मान और उनके ऐतिहासिक योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार की अन्य लोक-कल्याणकारी योजनाओं और आधिकारिक घोषणाओं की अधिक जानकारी के लिए आप छत्तीसगढ़ शासन के आधिकारिक वेब पोर्टल https://dprcg.gov.in/ पर जा सकते हैं।
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