नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लोकसभा में पारित नहीं होने देने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला है। रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने कहा कि महिलाओं के साथ यह ऐतिहासिक अन्याय करने का खामियाजा कांग्रेस को भविष्य में जरूर भुगतना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लाकर देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का ऐतिहासिक प्रयास किया गया था। 16 से 18 अप्रैल के बीच बुलाए गए संसद के विशेष सत्र से पहले पूरे देश में महिलाओं में इस अधिनियम को लेकर गजब का उत्साह था।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और समाजवादी पार्टी के महिला विरोधी रवैये के कारण यह सपना साकार नहीं हो सका। साय ने स्पष्ट किया कि भाजपा का संकल्प अडिग है और सभी बाधाओं को दूर कर देश की 70 करोड़ माताओं-बहनों को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाकर रहेंगे।
CM साय का संदेश: “परिसीमन, धर्म आधारित आरक्षण और उत्तर-दक्षिण वैमनस्य फैलाकर कांग्रेस ने नारी शक्ति के साथ घोर अन्याय किया है — देश की मातृशक्ति इसे कभी नहीं भूलेगी।”
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण के आंकड़े
CM साय ने अपनी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाते हुए बताया:
त्रि-स्तरीय पंचायतों में महिलाओं का नेतृत्व 50% से बढ़कर 57% हो गया है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला प्रतिनिधित्व लगभग 22% तक पहुँच गया है।
डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया था।
अरुण सिंह बोले: 17 अप्रैल 2026 एक काला अध्याय
BJP राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने कहा कि नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के विरोध के कारण 17 अप्रैल की तारीख इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। उन्होंने कहा कि जब-जब महिलाओं के अधिकारों की बात आई, कांग्रेस ने उनके साथ विश्वासघात किया — चाहे शाहबानो प्रकरण हो, ट्रिपल तलाक हो या अब यह महिला आरक्षण बिल।
सिंह ने यह भी याद दिलाया कि 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित हुआ था, लेकिन UPA सरकार ने सालों तक इसे लोकसभा में पेश नहीं किया।
सबसे शर्मनाक: बिल गिरने पर विपक्ष ने मनाई खुशी
अरुण सिंह ने कहा कि जब महिला आरक्षण बिल गिरा और महिलाओं की आँखों में आँसू थे, उस वक्त कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने संसद में ताली बजाई, मेज थपथपाई और सदन के बाहर जाकर खुशियाँ मनाईं। यह देश की महिलाओं के अपमान की पराकाष्ठा है।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के हर तर्क का ठोस जवाब दिया और PM मोदी ने बिल का पूरा क्रेडिट विपक्ष को देने तक की पेशकश की, फिर भी कांग्रेस का इरादा साफ नहीं था।
परिसीमन पर भी उठाए सवाल
भाजपा महामंत्री सिंह ने परिसीमन के विरोध को भी बेबुनियाद बताते हुए कहा:
1971 में भारत की जनसंख्या 54 करोड़ थी, आज यह 140 करोड़ है।
कुछ लोकसभा क्षेत्रों में आबादी 28 से 38 लाख तक पहुँच गई है।
छत्तीसगढ़ में परिसीमन के बाद विधानसभा सीटें 135 और लोकसभा सीटें 18 हो जाती।
उन्होंने कहा कि BJP इस मुद्दे को बूथ-मंडल स्तर तक लेकर जाएगी और कांग्रेस के झूठ का पर्दाफाश करेगी।
PM मोदी का लक्ष्य: 2029 से पहले लागू हो अधिनियम
अरुण सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी चाहते थे कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन विधेयक को 2029 के चुनाव से पहले लागू किया जाए, ताकि देश की महिलाएँ अगले आम चुनाव में बढ़-चढ़कर सक्रिय राजनीति में आ सकें। लेकिन कांग्रेस ने इस सपने को रोकने का काम किया।
प्रेस वार्ता में उपस्थित प्रमुख नेता
इस प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी, सांसद रूपकुमारी चौधरी, कमलेश जांगड़े, महापौर मीनल चौबे सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम पर BJP और कांग्रेस का टकराव अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है। CM साय और अरुण सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा इस मुद्दे को जमीनी स्तर तक ले जाएगी। देश की 70 करोड़ महिलाओं के अधिकार का यह सवाल आने वाले चुनावों में एक निर्णायक मुद्दा बन सकता है।