Gyanbharatam Survey Damakheda CG: दामाखेड़ा के कबीर आश्रम में मिलीं 326 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां, मिला वीर नारायण सिंह का ‘फांसी आदेश’

Gyanbharatam Survey Damakheda CG

By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
रायपुर/सिमगा | 28 अप्रैल


छत्तीसगढ़ की धरती ने एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व की एक अद्भुत झलक दुनिया को दिखाई है। राज्य में चल रहे ‘ज्ञानभारतम्’ (राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान) के तहत दो ऐसी ऐतिहासिक खोजें हुई हैं, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास के पन्नों को एक नई रोशनी प्रदान करेंगी।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड सिमगा के Gyanbharatam Survey Damakheda CG (दामाखेड़ा) स्थित ‘सदगुरु कबीर आश्रम’ में 326 वर्ष पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। कलेक्टर श्री कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में इस पूरे इतिहास को अब ‘ज्ञानभारतम्’ एप के जरिए डिजिटल किया जा रहा है।


326 साल पुराने 4 प्राचीन ग्रंथों का हुआ डिजिटल संरक्षण

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इन ग्रंथों के नाम अवश्य नोट करने चाहिए। कबीर धर्म नगर, दामाखेड़ा (Sadguru Kabir Ashram Damakheda) में सर्वेक्षण के दौरान सन् 1700 ईस्वी की अत्यंत प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं।
सरपंच की उपस्थिति में कुल चार (4) प्राचीन ग्रंथों का सर्वेक्षण कर उन्हें डिजिटल किया गया।

  • चार ग्रंथों के नाम: अनुरागसागर, अम्बूसागर, दीपकसागर और ज्ञान प्रकाश
  • लेखक और लिपि: ये सभी ग्रंथ कबीरपंथ के 9वें आचार्य ‘प्रगट नाम साहब’ द्वारा लिखे गए हैं और इनकी लिपि ‘देवनागरी’ (Devanagari) है।
    ये पांडुलिपियां न केवल धार्मिक दृष्टि से अमूल्य हैं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का जीवंत प्रमाण भी हैं।

ऐतिहासिक खोज: शहीद वीर नारायण सिंह के ‘फांसी के आदेश’ की प्रति मिली

इस अभियान की दूसरी सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि बलौदाबाजार के सोनाखान (Sonakhan) में देखने को मिली।
सर्वेक्षण टीम को ‘सोनाखान संग्रहालय’ में छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह (Shaheed Veer Narayan Singh) की फांसी के आदेश (Death Warrant) की मूल पांडुलिपि प्राप्त हुई है।

यह ऐतिहासिक दस्तावेज अंग्रेजी सरकार द्वारा 10 दिसम्बर 1857 को जारी किया गया था। यह दस्तावेज़ छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद की शहादत का एक अनमोल ऐतिहासिक साक्ष्य है, जिसे अब हमेशा के लिए डिजिटल रूप में सुरक्षित कर लिया गया है।


कलेक्टर की अपील: ताड़पत्र और ताम्रपत्र लाएं सामने

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि किसी के पास कोई भी हस्तलिखित प्राचीन ग्रंथ, ताम्रपत्र (Copper plates) या ताड़पत्र हो तो वे सर्वे टीम को सूचित करें। इस कार्य में मूल प्रति स्वामी (Owner) के पास ही रहेगी, सर्वे टीम सिर्फ फोटो लेकर उसे ज्ञानभारतम् पोर्टल पर अपलोड करेगी।


Gyanbharatam Survey Damakheda CG: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: ज्ञानभारतम् सर्वेक्षण के दौरान दामाखेड़ा के कबीर आश्रम से कौन से 4 प्राचीन ग्रंथ प्राप्त हुए हैं?
उत्तर: दामाखेड़ा के सदगुरु कबीर आश्रम से सन् 1700 ईस्वी की देवनागरी लिपि में लिखी गई 4 हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं, जिनके नाम हैं— अनुरागसागर, अम्बूसागर, दीपकसागर और ज्ञान प्रकाश।

प्रश्न 2: शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजी सरकार द्वारा फांसी का आदेश कब जारी किया गया था, जिसकी पांडुलिपि हाल ही में प्राप्त हुई है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह की फांसी का आदेश अंग्रेजी सरकार द्वारा 10 दिसम्बर 1857 को जारी किया गया था। इसकी प्रति सोनाखान संग्रहालय से प्राप्त हुई है।


📚 The Exam Hub – छत्तीसगढ़ का इतिहास (Fact-Check)

आगामी CGPSC, Vyapam और अन्य परीक्षाओं के लिए इस खबर से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण तथ्य (Short Notes):

  • अभियान का नाम: “ज्ञानभारतम्” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण।
  • कहाँ मिली पांडुलिपियां: सदगुरु कबीर आश्रम, दामाखेड़ा (विकासखंड सिमगा)।
  • प्राप्त ग्रंथ (सन् 1700): अनुरागसागर, अम्बूसागर, दीपकसागर और ज्ञान प्रकाश (देवनागरी लिपि)।
  • ग्रंथों के रचयिता: 9वें आचार्य प्रगट नाम साहब।
  • स्वतंत्रता संग्राम साक्ष्य: 10 दिसम्बर 1857 को जारी शहीद वीर नारायण सिंह के ‘फांसी के आदेश’ की प्रति (सोनाखान संग्रहालय से प्राप्त)।

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