Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026: संत रविदास की 650वीं जयंती पर छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला; माघी पूर्णिमा को रहेगा सार्वजनिक अवकाश, संत रविदास के नाम पर मिलेगा राज्य अलंकरण पुरस्कार

Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 Launch Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 Launch

Published on 05 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारतीय समाज में सामाजिक समरसता, समानता, सामाजिक न्याय और भक्ति की अविरल धारा बहाने वाले महान संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ में एक भव्य राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कल 4 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 (कलश वंदन महाअभियान) में शामिल होकर देश के सबसे बड़े समरसता आंदोलन का शंखनाद किया।

इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने संत रविदास की जन्मस्थली, वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर (Seer Goverdhanpur, Varanasi) से लाए गए पवित्र जल और मिट्टी से भरे कलश का विधिवत पूजन-अर्चन किया और उसे श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण किया। इस राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संरक्षण अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने संत रविदास के सम्मान में कई ऐतिहासिक नीतिगत घोषणाएं कीं, जो राज्य में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होंगी।

महत्वपूर्ण संकेतकSant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 के प्रमुख तथ्य व कड़े प्रशासनिक निर्णय
अभियान का नाम व विषयकलश वंदन महाअभियान (Sant Ravidas 650th Birth Anniversary Year)
मुख्य आयोजन तिथि व स्थान4 अगस्त 2026, दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर
सार्वजनिक अवकाश की घोषणाअगले वर्ष 2027 से संत रविदास जयंती (माघी पूर्णिमा) पर संपूर्ण राज्य में शासकीय अवकाश रहेगा
मांस-मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंधसंत रविदास जयंती के दिन प्रदेश भर में मांस और मदिरा (Dry Day) की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी
नया राज्य अलंकरण पुरस्कारछत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर ‘संत शिरोमणि गुरु रविदास राज्य अलंकरण’ दिया जाएगा
नवा रायपुर में नामकरणनवा रायपुर (Nawa Raipur) के एक प्रमुख चौराहे (Chowk) का नाम संत गुरु रविदास के नाम पर होगा
विधानसभा में प्रसिद्ध दोहे का अंकन‘ऐसा चाहूं राज मैं…’ दोहे को छत्तीसगढ़ विधानसभा में अंकित करने का प्रयास होगा
कलश प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्वकर्ताडॉ. सनम जांगड़े (11-सदस्यीय दल वाराणसी से पवित्र कलश लेकर रायपुर पहुंचा)

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Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026: मुख्यमंत्री द्वारा की गई ऐतिहासिक घोषणाएं

संत गुरु रविदास महाराज के सामाजिक योगदान और उनकी शिक्षाओं को चिरस्थायी बनाने के लिए, इस पावन अवसर पर Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 के दौरान मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणाएं कीं, जिनका विवरण निम्नलिखित है:

  • माघी पूर्णिमा को सार्वजनिक अवकाश और पूर्ण प्रतिबंध: अगले वर्ष 2027 से संत रविदास की जयंती (माघी पूर्णिमा) पर पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय अवकाश घोषित किया जाएगा। इस पवित्र दिन पर संपूर्ण प्रदेश में मांस और मदिरा (Liquor & Meat sale) की बिक्री पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध रहेगा।
  • विशिष्ट राज्य अलंकरण सम्मान: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों की शृंखला में अब ‘संत शिरोमणि गुरु रविदास राज्य अलंकरण पुरस्कार’ को शामिल किया जाएगा, जो सामाजिक समरसता और जनसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को दिया जाएगा।
  • नवा रायपुर में चौराहे का नामकरण: राज्य की प्रशासनिक राजधानी नवा रायपुर के एक प्रमुख और व्यस्ततम चौराहे का नामकरण अब आधिकारिक रूप से ‘संत गुरु रविदास चौक’ किया जाएगा।
  • विधानसभा में संत रविदास के अमर संदेश का अंकन: मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर विधानसभा भवन के भीतर संत रविदास के सुशासन से जुड़े प्रसिद्ध दोहे—“ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।”—को स्थायी रूप से अंकित कराने का प्रयास करेंगे।

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Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026: सीर गोवर्धनपुर से रायपुर तक का सफर

राष्ट्रीय समरसता के प्रतीक इस कलश वंदन अभियान के अंतर्गत वाराणसी (उत्तर प्रदेश) स्थित संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से एक पवित्र कलश छत्तीसगढ़ लाया गया:

  • 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत: डॉ. सनम जांगड़े के नेतृत्व में वाराणसी से पवित्र मिट्टी और जल लेकर पहुंचे 11 सदस्यीय दल का मुख्यमंत्री ने आत्मीय अभिनंदन किया।
  • गाँव-गाँव तक यात्रा का विस्तार: मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पावन कलश को राज्य के विभिन्न जिलों से आए समाज के प्रतिनिधियों को सौंपा। इसके साथ ही, इस संदेश को राज्य के प्रत्येक गाँव और प्रत्येक घर तक पहुंचाने के लिए प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान पूरे छत्तीसगढ़ में सामाजिक चेतना के जनआंदोलन के रूप में कार्य करेगा।

“विकास भी, विरासत भी”: सांस्कृतिक कूटनीति का नया मार्ग

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र “विकास भी, विरासत भी” (Development alongside Heritage) का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक भौतिक प्रगति तभी टिकाऊ हो सकती है जब वह अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ी हो।

संत रविदास का जीवन श्रम, स्वावलंबन और आंतरिक शुद्धता का प्रतीक है। उनके प्रसिद्ध उपदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर केवल बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि निर्मल मन और निष्काम कर्म में वास करते हैं। संत रविदास ने सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के भारी राजनीतिक दबाव का भी साहसपूर्वक विरोध किया था और सनातन संस्कृति व सामाजिक समानता का मार्ग कभी नहीं छोड़ा था।

UPSC Prelims Fact Box: Bhakti Movement, Sant Ravidas & State Awards

  • संत रविदास (Guru Ravidas): 15वीं-16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के एक महान समाज सुधारक, कवि और आध्यात्मिक गुरु थे। वे प्रसिद्ध संत रामानंद के शिष्य थे और मीराबाई के आध्यात्मिक गुरु माने जाते हैं। उनके 41 पवित्र भजनों को सिखों के पवित्र ग्रंथ ‘आदि ग्रंथ’ (Guru Granth Sahib) में शामिल किया गया है।
  • सीर गोवर्धनपुर (Seer Goverdhanpur): वाराणसी, उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के तट पर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली, जिसे ‘बेगमपुरा’ (बिना गम का शहर—संत रविदास का सुशासन विज़न) की तर्ज पर एक विशाल धार्मिक और समरसता केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
  • छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण पुरस्कार: छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस (1 नवंबर) पर विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कला, साहित्य, खेल, सामाजिक समरसता) में विशिष्ट योगदान देने वाली महान हस्तियों को दिए जाने वाले राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान।

UPSC & State PCS Mains Analysis: भक्ति आंदोलन की प्रासंगिकता और सामाजिक समरसता कूटनीति

मुख्य परीक्षा और समाजशास्त्र के दृष्टिकोण से Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 जैसी सांस्कृतिक संरक्षण पहलों का महत्व केवल धार्मिक आस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारतीय समाज में धर्मनिरपेक्षता, समतावादी सिद्धांतों और सुशासन (Good Governance) को लागू करने की एक प्रभावी प्रशासनिक कूटनीति है।

संत रविदास का सुशासन विज़न ‘बेगमपुरा’ (एक ऐसा समाज जहाँ कोई दुःख, गरीबी या छुआछूत न हो) वास्तव में भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों (Directive Principles) और प्रस्तावना में उल्लेखित ‘सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय’ का मध्यकालीन आध्यात्मिक प्रारूप है। विधानसभा में उनके दोहे का अंकन करना यह दर्शाता है कि आधुनिक विधायी संस्थाएं अपने लोकतांत्रिक कर्तव्यों को संतों की नैतिक और दार्शनिक सीमाओं से जोड़ रही हैं।

इसके अतिरिक्त, ऐसे कलश अभियानों को गाँव-गाँव तक ले जाना समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को मुख्यधारा के सामाजिक ताने-बाने से जोड़ने (Social Integration) का सबसे सशक्त साधन है। यह सांस्कृतिक कूटनीति समाज को जाति और धर्म के संकीर्ण विभाजन से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की एक मजबूत और टिकाऊ बुनियाद प्रदान करती है, जो विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक आवश्यक नैतिक और सामाजिक पूंजी (Social Capital) साबित होगी।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्रशासनिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित किए गए Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 के तहत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किस वर्ष से संत रविदास जयंती (माघी पूर्णिमा) पर पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश और मांस-मदिरा प्रतिबंध की घोषणा की है?

(A) वर्ष 2026 से
(B) वर्ष 2027 से
(C) वर्ष 2028 से
(D) वर्ष 2030 से

उत्तर: (B) वर्ष 2027 से
व्याख्या: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती के पावन उपलक्ष्य में अगले वर्ष 2027 से माघी पूर्णिमा (संत रविदास जयंती) के दिन छत्तीसगढ़ में शासकीय अवकाश रहेगा और इस दिन प्रदेश भर में ड्राई-डे (मांस-मदिरा बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित) रहेगा।

प्रश्न 2: भक्ति आंदोलन के प्रसिद्ध संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. वे प्रसिद्ध वैष्णव संत रामानंद के शिष्य थे तथा उनके भजनों को सिखों के पवित्र आदि ग्रंथ (गुरु ग्रंथ साहिब) में शामिल किया गया है।
2. उनकी ऐतिहासिक जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर वर्तमान में मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (A) केवल 1
व्याख्या: कथन 1 बिल्कुल सत्य है क्योंकि संत रविदास रामानंद के शिष्य थे और उनके 41 भजन गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि उनकी प्रसिद्ध जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर मध्य प्रदेश में नहीं, बल्कि वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 क्या है और इसके मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

यह छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक वृहद राष्ट्रीय समरसता अभियान (कलश वंदन महाअभियान) है। इसका मुख्य उद्देश्य संत रविदास की जन्मस्थली (वाराणसी) से लाए गए पवित्र कलश को राज्य के प्रत्येक जिले और गाँव तक पहुँचाकर सामाजिक समानता और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना है।

Q2. छत्तीसगढ़ के राज्य स्थापना दिवस पर दिया जाने वाला कौन-सा नया पुरस्कार हाल ही में घोषित किया गया है?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में अब ‘संत शिरोमणि गुरु रविदास राज्य अलंकरण सम्मान’ को भी आधिकारिक रूप से शामिल किया जाएगा, जो सामाजिक समरसता और समाज सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाएगा।

Q3. नवा रायपुर में किस चौराहे का नामकरण संत रविदास के नाम पर करने की घोषणा की गई है?

प्रशासनिक सुधारों और सांस्कृतिक कूटनीति के तहत, राज्य की नई स्मार्ट प्रशासनिक राजधानी नवा रायपुर (Nawa Raipur) के एक अत्यंत प्रमुख चौराहे (Chowk) का नामकरण अब आधिकारिक रूप से ‘संत गुरु रविदास चौक’ किया जाएगा।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • ऐतिहासिक शासकीय अवकाश और प्रतिबंध: Sant Ravidas Kalash Yatra CG 2026 के माध्यम से राज्य सरकार ने माघी पूर्णिमा को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने और इस दिन संपूर्ण प्रदेश में मांस-मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कड़ा निर्णय लिया है।
  • सांस्कृतिक सुशासन का प्रतीक: नवा रायपुर में ‘संत गुरु रविदास चौक’ का नामकरण, विधानसभा में उनके प्रसिद्ध दोहे का अंकन, और राज्य स्थापना दिवस पर उनके नाम से नया राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू करना राज्य सरकार की सांस्कृतिक कूटनीति का प्रमाण है।
  • सीर गोवर्धनपुर से छत्तीसगढ़ तक जुड़ाव: वाराणसी से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल के कलशों को गाँव-गाँव तक पहुँचाकर समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने और सामाजिक समरसता स्थापित करने का एक बड़ा जनआंदोलन शुरू किया गया है।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय संस्कृति, भक्ति आंदोलन के संत, समाज सुधारक), सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सामाजिक न्याय, कमजोर और संवेदनशील वर्गों का सशक्तिकरण), तथा सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, लोक-संस्कृति और जनजातीय नीतियां) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG) और मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा 4 अगस्त 2026 को रायपुर में संत रविदास जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और बजटीय ब्योरों पर आधारित है।

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