Published on 17 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
रायपुर, 17 अगस्त 2026 : छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को संजोने तथा सावन सोमवार और नागपंचमी के पावन पर्व पर लोक-कल्याण की मंगलकामना करने के उद्देश्य से श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग के निर्माण और पूजन का तीन-दिवसीय महा-अनुष्ठान शुरू किया गया है। आज 17 अगस्त 2026 को सावन मास की पुण्य बेला में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय और परिवार के सदस्यों के साथ अपने गृहग्राम बगिया स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर में भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
मैनी नदी के सुरम्य तट पर स्थित इस मंदिर परिसर में 17 से 19 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान के पहले दिन मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्नी ने स्वयं अपने हाथों से मिट्टी के पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और वैदिक मंत्रोच्चार व ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के बीच महादेव का जलाभिषेक किया।
| महत्वपूर्ण संकेतक | श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर और तीन-दिवसीय महा-अनुष्ठान के कड़े आंकड़े |
|---|---|
| मंदिर का नाम व अधिष्ठाता देव | श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर (भगवान शिव) |
| भौगोलिक स्थिति (नदी तट) | मैनी नदी (Maini River) के सुरम्य तट पर स्थित है |
| भौगोलिक अवस्थिति (गाँव) | गृहग्राम बगिया, जशपुर जिला (छत्तीसगढ़) |
| अनुष्ठान की तिथि | 17 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक (तीन-दिवसीय विशेष अनुष्ठान) |
| पार्थिव शिवलिंगों का कुल संकल्प | एक लाख 11 हजार 111 (1,11,111) पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण व पूजन |
| मुख्य यजमान (प्रतिभागी) | मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय |
| अनुष्ठान का अंतिम पड़ाव | 19 अगस्त 2026 को विशेष पूर्णाहुति और महाप्रसाद वितरण |
| सांस्कृतिक कूटनीति | “प्रकृति और परमात्मा के प्रति अटूट श्रद्धा का अद्भुत समन्वय” |
श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर: सावन सोमवार और नागपंचमी का पावन योग
सावन मास का सोमवार और नागपंचमी का एक साथ आना सनातन संस्कृति में अत्यंत दुर्लभ और फलदायी संयोग माना जाता है। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता को बधाई देते हुए अध्यात्म और प्रकृति के संरक्षण का कड़ा विज़न प्रस्तुत किया:
- प्रकृति और परमात्मा का समन्वय: मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति नदियाँ, वनों, पर्वतों और समस्त जीव-जगत को परमात्मा के समान मानती है। सावन के पवित्र महीने में की जाने वाली शिव आराधना हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने, जल स्रोतों को सहेजने और प्राणिमात्र की सेवा का संदेश देती है।
- अन्नदाताओं की समृद्धि की कामना: मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की कि उनकी असीम कृपा छत्तीसगढ़ के प्रत्येक परिवार पर बनी रहे, हमारे अन्नदाता किसानों के खेत-खलिहान बंपर फसलों से समृद्ध हों और प्रदेश में सुख, शांति व खुशहाली निरंतर बढ़ती रहे।
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मैनी नदी (Maini River) के सुरम्य तट पर 1.11 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण
तीन दिनों तक चलने वाले इस महा-अनुष्ठान को लेकर जशपुर जिले और आस-पास के क्षेत्रों में भारी धार्मिक उत्साह का वातावरण है, जहाँ हजारों श्रद्धालु शिवभक्ति में डूबे हुए हैं:
- तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का रोडमैप:
- प्रथम दिन (17 अगस्त): सामूहिक पार्थिव शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक, महाआरती और महाप्रसाद वितरण।
- द्वितीय दिन (18 अगस्त): पार्थिव शिवलिंग निर्माण की निरंतरता, पूजन-अभिषेक, और विशेष संध्या आरती।
- तृतीय दिन (19 अगस्त): तीन-दिवसीय अनुष्ठान का समापन, विशेष पूर्णाहुति, और विसर्जन अनुष्ठान।
- सामूहिक शिव आराधना की शक्ति: इस विशेष आयोजन में 1,11,111 पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का संकल्प लिया गया है। श्रद्धालु सामूहिक रूप से मिट्टी लेकर शिवलिंग तैयार कर रहे हैं, जो प्राचीन वैदिक काल की ‘पार्थिव पूजन’ परंपरा को जीवित करता है।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: Maini River, Parthiv Shivling & Nag Panchami
- मैनी नदी (Maini River): छत्तीसगढ़ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र (जशपुर जिले) से उद्गमित होने वाली एक प्रमुख सुरम्य नदी, जो आगे चलकर ‘इब नदी’ (Ib River) में मिल जाती है। इब नदी अंततः महानदी घाटी तंत्र (Mahanadi River Basin) का हिस्सा बनती है।
- पार्थिव शिवलिंग (Parthiv Shivling): मिट्टी, गाय के गोबर या पवित्र नदी की मुरमी मिट्टी से हाथों द्वारा निर्मित क्षणिक (Temporary) शिवलिंग। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और अभिषेक करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- नागपंचमी (Nag Panchami): हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला एक पारंपरिक त्योहार, जिसमें नाग देवता की पूजा की जाती है, जो पर्यावरण और जीव-जगत के संतुलन के महत्व को दर्शाता है।
UPSC & State PCS Mains Analysis: सांस्कृतिक पर्यटन, नदी घाटी पारिस्थितिकी और लोक आस्था का आर्थिक एकीकरण
मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, जशपुर के बगिया में मैनी नदी के तट पर स्थित श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में आयोजित इस प्रकार के वृहद धार्मिक अनुष्ठानों को सांस्कृतिक पर्यटन (Cultural Tourism), नदी घाटी संरक्षण (River Basin Conservation) और ग्रामीण सामाजिक समरसता के रूप में विश्लेषणात्मक रूप से देखा जाना चाहिए।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और राज्य सरकार के विज़न ‘विकास भी, विरासत भी’ (Vikas alongside Heritage) के तहत, स्थानीय और नदी-घाटी धार्मिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाना सुशासन का एक आवश्यक स्तंभ है। जशपुर का क्षेत्र अपनी प्राकृतिक जैव-विविधता और जनजातीय बहुलता के लिए जाना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों (जैसे 1.11 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण) का आयोजन करना समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को एक सूत्र में पिरोने (Social Cohesion) का सबसे मजबूत माध्यम है।
इसके अतिरिक्त, मैनी नदी के सुरम्य तट का चयन करना नदी घाटी पारिस्थितिकी (River Valley Ecology) के प्रति आम जनता में संवेदनशीलता जगाता है। जब लोग नदी के जल और उसकी मिट्टी का उपयोग कर ‘पार्थिव पूजन’ करते हैं, तो वे स्वतः ही नदी की स्वच्छता और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक होते हैं, जो सतत विकास लक्ष्य-15 (SDG-15: थल पर जीवन/जैव-विविधता) और लक्ष्य-6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह कड़ा समन्वय अंततः राज्य के उत्तरी अंचलों में सांस्कृतिक पर्यटन को समृद्ध कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की सबसे मजबूत सुशासनात्मक और आर्थिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और भौगोलिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में चर्चा में रहे प्रसिद्ध श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में सावन सोमवार और नागपंचमी के पावन अवसर पर 1,11,111 पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का तीन-दिवसीय महा-अनुष्ठान शुरू किया गया है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के किस जिले में स्थित है?
(A) रायपुर जिला
(B) जशपुर जिला (Jashpur)
(C) बस्तर जिला
(D) गरियाबंद जिला
उत्तर: (B) जशपुर जिला (Jashpur)
व्याख्या: श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृहग्राम बगिया, जिला जशपुर (छत्तीसगढ़) में स्थित है, जहाँ 17 से 19 अगस्त 2026 तक तीन-दिवसीय विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध नदी तंत्र के संदर्भ में, जशपुर जिले में बहने वाली सुरम्य ‘मैनी नदी’ (Maini River) निम्नलिखित में से किस नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, जो अंततः महानदी घाटी तंत्र का हिस्सा बनती है?
(A) शिवनाथ नदी
(B) इब नदी (Ib River)
(C) हसदेव नदी
(D) केलो नदी
उत्तर: (B) इब नदी (Ib River)
व्याख्या: मैनी नदी जशपुर जिले की एक प्रमुख नदी है, जो आगे चलकर ‘इब नदी’ में विलीन हो जाती है। इब नदी महानदी की सहायक नदी है, जो हीराकुंड जलाशय (ओडिशा) में जाकर मिलती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर कहाँ स्थित है और यहाँ किस विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है?
यह मंदिर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के गृहग्राम बगिया में मैनी नदी के सुरम्य तट पर स्थित है। यहाँ सावन सोमवार और नागपंचमी के पावन अवसर पर 17 से 19 अगस्त 2026 तक एक लाख 11 हजार 111 (1,11,111) पार्थिव शिवलिंगों के निर्माण और सामूहिक पूजन का तीन-दिवसीय महा-अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
Q2. पार्थिव शिवलिंग (Parthiv Shivling) का हिंदू धर्म शास्त्रों में क्या धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व है?
पार्थिव शिवलिंग का निर्माण मिट्टी या नदी की स्वच्छ मिट्टी से हाथों द्वारा किया जाता है। यह वैदिक काल से चली आ रही ‘पृथ्वी तत्त्व’ (Earth Worship) की आराधना का प्रतीक है, जो मनुष्यों को मिट्टी, प्रकृति, और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होने और उनके संरक्षण का संदेश देता है।
Q3. इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन कब होगा और इसमें मुख्यमंत्री की क्या सहभागिता रही?
इस तीन-दिवसीय अनुष्ठान का समापन 19 अगस्त 2026 को विशेष महा-पूर्णाहुति और विसर्जन के साथ होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने इस अनुष्ठान के पहले दिन (17 अगस्त) को स्वयं अपने हाथों से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और जलाभिषेक किया।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- 1.11 लाख पार्थिव शिवलिंग का संकल्प: श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में लोक-कल्याण और छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि के लिए एक लाख 11 हजार 111 मिट्टी के पार्थिव शिवलिंगों के निर्माण और पूजन का भव्य अनुष्ठान शुरू किया गया है।
- मैनी नदी के तट पर आध्यात्मिक चेतना: जशपुर की प्रमुख जीवन रेखा ‘मैनी नदी’ के सुरम्य तट पर स्थित यह मंदिर इस तीन-दिवसीय आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र के लिए आस्था और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य केंद्र बन गया है।
- प्रकृति और संस्कृति का सुदृढ़ समन्वय: मुख्यमंत्री ने शिव आराधना को प्रकृति संरक्षण का संदेश बताते हुए कहा कि नदियाँ, पर्वत और वनों के प्रति संवेदनशीलता ही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का असली आधार है।
UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय संस्कृति—विविधता, धार्मिक त्योहार और स्थापत्य कला, भौतिक भूगोल—नदी प्रणालियाँ) और सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का भूगोल और नदी घाटी तंत्र) व पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य और लोक आस्था) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग, आदिम जाति विकास विभाग, जशपुर जिला प्रशासन, और मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा 17 अगस्त 2026 को माणसा/बगिया में आयोजित तीन-दिवसीय महा-अनुष्ठान के उपरांत जारी की गई आधिकारिक प्रेस समीक्षा और विवरणों पर आधारित है।