Published on 05 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कल 4 अगस्त 2026 को रायपुर में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ विषयक गरिमामयी संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की समृद्धि हेतु संचालित Krishak Unnati Yojana CG 2026 के माध्यम से राज्य में फसल विविधीकरण, सिंचाई सुविधाओं के आधुनिकीकरण और कृषि यंत्रीकरण का एक समग्र रोडमैप साझा किया।
संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को उनकी उत्कृष्ट खेती, नवाचारों और कृषि में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेती छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सामाजिक संरचना और अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ है, और सरकार इसे केवल आजीविका का साधन न मानकर ग्रामीण विकास के मुख्य चालक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
| महत्वपूर्ण संकेतक | Krishak Unnati Yojana CG 2026 व छत्तीसगढ़ कृषि के प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| योजना का नाम | कृषक उन्नति योजना, छत्तीसगढ़ (Krishak Unnati Yojana CG) |
| संवाद कार्यक्रम की तिथि व स्थान | 4 अगस्त 2026, रायपुर (छत्तीसगढ़) |
| फसल विविधीकरण आदान सहायता | धान के स्थान पर अन्य फसल लगाने पर ₹15,000 प्रति एकड़ (Input Subsidy) |
| प्रोत्साहित की जाने वाली फसलें | दलहन (Pulses), तिलहन (Oilseeds), मक्का, कोदो-कुटकी (Millets) |
| धान खरीदी की वर्तमान दर | ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी |
| विगत सीजन धान खरीदी का रिकॉर्ड | 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी संपन्न |
| इंद्रावती नदी बैराज परियोजना (बस्तर) | मटनार और देऊरगांव में लगभग ₹2,000 करोड़ की लागत से बैराज निर्माण को स्वीकृति |
| सिकासार-कोडार लिंकिंग परियोजना | मैदानी छत्तीसगढ़ के लिए लगभग ₹3,000 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति |
| सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ीकरण | विभिन्न पुरानी नहरों व संरचनाओं के सुधार हेतु ₹2,800 करोड़ की अतिरिक्त स्वीकृति |
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Krishak Unnati Yojana CG 2026: फसल विविधीकरण और धान खरीदी के ऐतिहासिक मूल्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के किसानों की आय को बहुगुणित करने के लिए एकल-फसल (मोनो-क्रॉपिंग) पद्धति के स्थान पर बहु-फसल चक्र को अपनाने पर बल दिया है। इस दिशा में Krishak Unnati Yojana CG 2026 के कड़े प्रावधानों के तहत धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है:
- ₹15,000 प्रति एकड़ की भारी इनपुट सब्सिडी: यदि कोई किसान धान की पारंपरिक खेती के स्थान पर दलहन (जैसे अरहर, मूंग, उड़द), तिलहन (जैसे सोयाबीन, सरसों), मक्का या पोषक अनाजों (कोदो-कुटकी, रागी जैसे मिलेट्स) की खेती करता है, तो राज्य सरकार उसे ₹15,000 प्रति एकड़ की दर से वित्तीय इनपुट सहायता प्रदान करेगी।
- धान का देश में सर्वाधिक मूल्य: छत्तीसगढ़ वर्तमान में देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है जहाँ किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। सरकार ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है। पिछले सीजन में रिकॉर्ड 141 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी से ग्रामीण बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ा है।
- 0% ब्याज पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई केसीसी योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार अब किसानों को शून्य प्रतिशत (0%) ब्याज दर पर केसीसी ऋण उपलब्ध करा रही है, जिससे वे साहूकारों के चंगुल से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं।
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Krishak Unnati Yojana CG 2026: सिंचाई सुविधाओं का आधुनिकीकरण और वित्तीय स्वीकृति
फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए खेतों तक पानी पहुँचाना सबसे आवश्यक बुनियादी जरूरत है। इसके लिए मुख्यमंत्री श्री साय ने लगभग ₹7,800 करोड़ की विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की जानकारी साझा की:
- बस्तर की इंद्रावती नदी पर बैराज (₹2,000 करोड़): बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव में विशाल बैराजों का निर्माण किया जाएगा, जिससे बस्तर संभाग के हजारों जनजातीय किसानों को सिंचाई का स्थायी पानी मिल सकेगा।
- सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना (₹3,000 करोड़): इस महत्वाकांक्षी अंतर-नदी लिंकिंग परियोजना के माध्यम से मैदानी छत्तीसगढ़ के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में नहरों का जाल बिछाया जाएगा। इसके लिए ₹3,000 करोड़ की कड़ी प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई है।
- पुरानी परियोजनाओं का जीर्णोद्धार (₹2,800 करोड़): राज्य की मौजूदा पुरानी नहरों, एनीकटों और वाटर-चैनलों के पुनर्निर्माण व सुधार कार्यों के लिए ₹2,800 करोड़ अतिरिक्त स्वीकृत किए गए हैं।
- आधुनिक कृषि तकनीक: राज्य में सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘ड्रोन दीदी’ (Drone Didi) कार्यक्रम के तहत ग्रामीण महिलाएं कृषि ड्रोनों के माध्यम से खेतों में नैनो डीएपी (Nano DAP) का सुरक्षित और त्वरित छिड़काव कर रही हैं।
नक्सलवाद की समाप्ति से बस्तर में ‘सेवाडेरा’ का तीव्र विकास
मुख्यमंत्री ने बस्तर में सुरक्षा और सुशासन के एकीकरण (Integration of Security & Governance) का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया:
- सुरक्षा कैंपों का सेवाडेरा में रूपांतरण: 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ के पूर्ण नक्सलमुक्त होने के बाद, जिन सुरक्षा शिविरों (CAPF Camps) की अब आवश्यकता नहीं बची है, उन्हें लोक-कल्याणकारी ‘सेवाडेरा’ (Service Centers) में बदला जा रहा है। कुल 70 कैंपों को इसमें परिवर्तित किया जा रहा है।
- स्थानीय आजीविका संवर्धन: नेतानार स्थित सेवाडेरा में स्थानीय आदिवासियों के लिए इमली की वैज्ञानिक पैकेजिंग जैसी लघु वनोपज आधारित प्रसंस्करण इकाइयां शुरू की जा चुकी हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार और वनों से प्राप्त उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: KCC, Indravati River & Prasad Initiatives
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना: इसकी शुरुआत वर्ष 1998 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के कार्यकाल में नाबार्ड (NABARD) और आर.वी. गुप्ता समिति की सिफारिशों पर की गई थी, ताकि किसानों को समय पर और आसान ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
- इंद्रावती नदी (Indravati River): यह गोदावरी नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, जिसका उद्गम ओडिशा के कालाहांडी जिले की पूर्वी घाट पहाड़ियों से होता है। यह बस्तर संभाग की जीवन रेखा कहलाती है और इस पर प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात स्थित है।
- सूक्ष्म सिंचाई और ड्रोन दीदी योजना: कृषि मंत्रालय की उप-योजना जिसके तहत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिला सदस्यों को ड्रोन उड़ाने और उनके माध्यम से उर्वरकों के कुशल छिड़काव के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय अनुदान दिया जाता है।
UPSC & CGPSC Mains Analysis: फसल विविधीकरण का पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व
मुख्य परीक्षा और कृषि भूगोल के दृष्टिकोण से Krishak Unnati Yojana CG 2026 के तहत की गई पहलों का रणनीतिक महत्व केवल किसानों को दी जाने वाली नकद इनपुट सब्सिडी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की पारिस्थितिक सुरक्षा (Ecological Security) और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता का आधार है।
छत्तीसगढ़ में लंबे समय से धान की मोनो-क्रॉपिंग (केवल धान उगाने की प्रवृत्ति) के कारण भूमि के भूजल स्तर (Water Table) में भारी गिरावट दर्ज की गई थी और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित हो रही थी। कृषक उन्नति योजना के तहत वैकल्पिक फसलों जैसे दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों (मिलेट्स) के लिए दी जा रही ₹15,000 प्रति एकड़ की इनपुट सहायता किसानों के लिए फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाती है। मोटे अनाजों को कम पानी और कम रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है, जिससे न केवल इनपुट लागत घटती है बल्कि यह जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) भी प्रदान करता है।
इसके अतिरिक्त, बस्तर में ‘नियद नेल्लानार’ (Niyad Nellanar) योजना के तहत सुरक्षा कैंपों को जनकल्याणकारी ‘सेवाडेरा’ में परिवर्तित करना एक अभिनव ‘संघर्ष-पश्चात पुनर्निर्माण’ (Post-conflict Reconstruction) का मॉडल है। जब भूतपूर्व सुरक्षा कैंपों में इमली और कोदो-कुटकी के प्रसंस्करण केंद्र खुलते हैं, तो यह सीधे तौर पर आदिवासियों को देश की मुख्यधारा की बाजार प्रणाली से जोड़ता है। यह एकीकृत और संवेदनशील शासन मॉडल अंततः ‘धान के कटोरे’ छत्तीसगढ़ को विविधतापूर्ण, तकनीकी रूप से उन्नत और देश के सर्वाधिक विकसित कृषि राज्यों की श्रेणी में समयबद्ध तरीके से स्थापित करने की प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और कृषि-आर्थिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में घोषित Krishak Unnati Yojana CG 2026 के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलें (दलहन, तिलहन, मिलेट्स) उगाने वाले किसानों को कितनी राशि की इनपुट आदान सहायता प्रति एकड़ प्रदान करने का प्रावधान किया गया है?
(A) ₹5,000 प्रति एकड़
(B) ₹10,000 प्रति एकड़
(C) ₹15,000 प्रति एकड़
(D) ₹20,000 प्रति एकड़
उत्तर: (C) ₹15,000 प्रति एकड़
व्याख्या: छत्तीसगढ़ सरकार कृषक उन्नति योजना के तहत फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का या मिलेट्स की खेती करने वाले किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ की इनपुट आदान सहायता प्रदान करती है।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ की नवनिर्मित सिंचाई परियोजनाओं के संदर्भ में, ‘सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना’ मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के किस भौगोलिक क्षेत्र के किसानों को लाभान्वित करेगी?
(A) बस्तर संभाग के जनजातीय क्षेत्र को
(B) सरगुजा संभाग के पहाड़ी पठारी अंचल को
(C) मैदानी छत्तीसगढ़ (महानदी बेसिन क्षेत्र) को
(D) केवल जशपुर के बागवानी क्षेत्र को
उत्तर: (C) मैदानी छत्तीसगढ़ (महानदी बेसिन क्षेत्र) को
व्याख्या: सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना के लिए ₹3,000 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य मैदानी छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्रों में सूखे की समस्या को समाप्त करना और सिंचाई का स्थायी विस्तार करना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Krishak Unnati Yojana CG 2026 क्या है और इसके तहत फसल विविधीकरण के लिए क्या प्रोत्साहन दिया जा रहा है?
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ सरकार की एक प्रमुख कल्याणकारी कृषि योजना है। इसके तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का या कोदो-कुटकी जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति एकड़ ₹15,000 की वित्तीय इनपुट सहायता (आदान सहायता) सीधे बैंक खातों में प्रदान की जा रही है।
Q2. बस्तर संभाग में सिंचाई के विस्तार के लिए इंद्रावती नदी पर किन स्थानों पर बैराजों का निर्माण स्वीकृत किया गया है?
बस्तर के आदिवासियों और किसानों को सिंचाई का स्थायी साधन देने के लिए इंद्रावती नदी पर ‘मटनार’ (Matnar) और ‘देऊरगांव’ (Deurgaon) में लगभग ₹2,000 करोड़ की संयुक्त लागत से दो विशाल बैराजों के निर्माण की कड़ी प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई है।
Q3. नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में शुरू किया जा रहा ‘सेवाडेरा’ (Sewa Dera) मॉडल क्या है?
31 मार्च 2026 को राज्य के पूर्ण नक्सलमुक्त होने के बाद, सुरक्षा बलों के जिन 70 कैंपों की अब आवश्यकता नहीं बची है, उन्हें ‘सेवाडेरा’ नागरिक सेवा केंद्रों में बदला जा रहा है। यहाँ आदिवासियों के लिए स्कूल, अस्पताल, मोबाइल टावर और इमली पैकेजिंग जैसी लघु वनोपज आधारित प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कर उन्हें सीधे रोजगार दिया जा रहा है।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- ऐतिहासिक फसल विविधीकरण सहायता: Krishak Unnati Yojana CG 2026 के तहत दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती करने वाले किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ की इनपुट सब्सिडी देकर राज्य सरकार कृषि के पारिस्थितिक और आर्थिक कायाकल्प की दिशा में बढ़ रही है।
- ₹7,800 करोड़ की वृहद सिंचाई परियोजनाएं: इंद्रावती नदी पर ₹2,000 करोड़ के बैराजों और ₹3,000 करोड़ की सिकासार-कोडार लिंकिंग परियोजना से राज्य के लाखों किसानों को सिंचाई का स्थायी पानी मिल सकेगा।
- सुरक्षा कैंपों का सेवाडेरा में विकास: बस्तर में भूतपूर्व 70 सुरक्षा कैंपों को लोक-कल्याणकारी विनिर्माण केंद्रों (जैसे इमली पैकेजिंग इकाइयां) में बदलना संघर्ष-पश्चात सुशासन का सर्वश्रेष्ठ मॉडल प्रस्तुत करता है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का आर्थिक भूगोल, कृषि क्षेत्र का विकास, सिंचाई परियोजनाएं), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ की सामाजिक-आर्थिक नीतियां और बस्तर का कल्याणकारी प्रशासन), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (आर्थिक विकास, फसल विविधीकरण, सिंचाई तकनीक और आपदा पश्चात सुशासन मॉडल) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG) और कृषि विभाग द्वारा 4 अगस्त 2026 को रायपुर में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ शिखर संगोष्ठी के उपरांत जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।
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