आजादी की धुन छत्तीसगढ़: पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में 100 युवा कलाकारों के लाइव बैंड ने बिखेरी देशभक्ति की अनूठी छटा; मुख्यमंत्री साय हुए शामिल

आजादी की धुन छत्तीसगढ़ आजादी की धुन छत्तीसगढ़

Published on 12 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ की कलात्मक विविधता और देशभक्ति के सुरों को एकीकृत करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित आजादी की धुन छत्तीसगढ़ कार्यक्रम ने दर्शकों को राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर कर दिया। आज 12 अगस्त 2026 को राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस भव्य और अनूठे संगीत समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से आए 100 युवा कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया एक भव्य लाइव बैंड प्रदर्शन रहा। कलाकारों ने गिटार, ड्रम, मांदर, और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी से देशभक्ति के अमर गीतों की ऐसी तान छेड़ी कि पूरा प्रेक्षागृह राष्ट्रप्रेम के जयघोष से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने स्वयं सभी युवा कलाकारों के मंच पर जाकर उनका उत्साहवर्धन किया और इस अभिनव पहल की सराहना की।

महत्वपूर्ण संकेतकआजादी की धुन छत्तीसगढ़ समारोह के प्रमुख तथ्य व विवरण
समारोह का नाम‘आजादी की धुन’ राष्ट्रीय संगीत सभा (Aazadi Ki Dhun)
मुख्य आयोजन तिथि व स्थान12 अगस्त 2026, पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर
मुख्य आयोजकसंस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
विशेष आकर्षण100 युवा संगीतकारों द्वारा एक साथ दी गई लाइव बैंड की शानदार प्रस्तुति
मुख्यमंत्री का मूल विज़न“‘आजादी की धुन’ में इतिहास का गौरव, वर्तमान का कर्तव्य और भविष्य का संकल्प निहित है”
याद किए गए छत्तीसगढ़ के महानायकसोनाखान के जमींदार शहीद वीर नारायण सिंह और बस्तर के जननायक गुंडाधुर
उपस्थित प्रमुख कला प्रतिनिधिमोना सेन (अध्यक्ष, फिल्म विकास निगम) व शशांक शर्मा (अध्यक्ष, साहित्य अकादमी)

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आजादी की धुन छत्तीसगढ़: 100 युवा कलाकारों की ऐतिहासिक लाइव जुगलबंदी

छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी शासकीय मंच पर 100 युवा संगीतकारों को एक साथ जोड़कर लाइव राष्ट्रीय आर्केस्ट्रा प्रस्तुत किया गया, जो कला के एकीकरण का सुंदर उदाहरण है:

  • संगीत की राष्ट्रीय कूटनीति: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि संगीत में लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की अद्भुत क्षमता होती है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ जैसे गीतों, कविताओं और नारों ने लाखों देशवासियों के भीतर स्वाधीनता की चेतना जगाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
  • इतिहास का गौरव और भविष्य का संकल्प: मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धुन हमें हमारे पूर्वजों के त्याग, तपस्या और अमर बलिदानों का स्मरण कराती है। इसके साथ ही, यह हमें वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प के तहत ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का कर्तव्यबोध भी कराती है।

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राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में संगीत का महत्व और छत्तीसगढ़ के महानायक

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश के महान क्रांतिकारियों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की माटी के अमर सेनानियों को भी कड़ा नमन किया:

  • राष्ट्रीय नायकों को श्रद्धांजलि: मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदानों को याद करते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।
  • शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर का स्मरण: छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह के ऐतिहासिक संघर्ष और बस्तर के ‘भूमकाल आंदोलन’ के प्रणेता गुंडाधुर के अदम्य साहस को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह गौरवशाली विरासत हमारी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा की सबसे बड़ी कसौटी है।
  • कला अकादमियों का समन्वय: समारोह में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा और स्थानीय औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला सहित कला जगत की कई बड़ी हस्तियां उपस्थित थीं।

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  • छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम: छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति, फिल्मों (Chhollywood) को बढ़ावा देने और फिल्म नीति 2021 के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार संस्था, जिसकी वर्तमान अध्यक्ष सुश्री मोना सेन हैं।
  • छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी: राज्य में हिंदी, छत्तीसगढ़ी, गोंडी, कुड़ुख और हलबी जैसी स्थानीय भाषाओं के साहित्यकारों को मंच देने और उनके संरक्षण के लिए गठित संस्था, जिसके वर्तमान अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा हैं।
  • वंदे मातरम् का ऐतिहासिक संदर्भ: बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा वर्ष 1875 में लिखित (आनंदमठ उपन्यास का हिस्सा) राष्ट्रगीत, जिसे पहली बार वर्ष 1896 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा गाया गया था। इसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक मुख्य ‘स्वतंत्रता की धुन’ का कार्य किया था।

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मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से आजादी की धुन छत्तीसगढ़ जैसी रणनीतिक पहलों को राज्य के ‘सांस्कृतिक पुनरुत्थान’ (Cultural Revivalism), अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) के संरक्षण और युवा कल्याण नीतियों के एकीकरण के रूप में विश्लेषित किया जाना चाहिए।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (Cultural Nationalism) केवल इतिहास को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं में राष्ट्रीय कर्तव्यों (Fundamental Duties – Article 51A) के प्रति संवेदनशीलता पैदा करने का एक सशक्त माध्यम है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के 100 युवा कलाकारों को राजधानी रायपुर के मुख्य मंच पर लाकर लाइव बैंड के माध्यम से प्रस्तुत करना, कला के लोकतांत्रिकरण (Democratisation of Art) को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, फिल्म विकास निगम और साहित्य अकादमी जैसी स्वायत्त राज्य संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी यह प्रमाणित करती है कि छत्तीसगढ़ सरकार अपनी लोक-कलाओं को व्यावसायिक रूप दे रही है, जिससे स्थानीय कलाकारों के लिए रचनात्मक रोजगार (Creative Jobs) के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यह एकीकृत दृष्टिकोण अंततः बस्तर और सरगुजा के संवेदनशील क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा की कला प्रणालियों से जोड़कर ‘विकसित छत्तीसगढ़ @ 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की सबसे मजबूत सामाजिक और नैतिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और कलात्मक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित हुए प्रसिद्ध आजादी की धुन छत्तीसगढ़ कार्यक्रम के संदर्भ में, राज्य के कुल कितने युवा कलाकारों ने एक साथ विभिन्न वाद्ययंत्रों पर लाइव बैंड की ऐतिहासिक प्रस्तुति दी?

(A) 50 कलाकार
(B) 100 कलाकार (100 Artists)
(C) 150 कलाकार
(D) 200 कलाकार

उत्तर: (B) 100 कलाकार (100 Artists)
व्याख्या: संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से आए 100 प्रतिभावान युवा कलाकारों ने एक साथ लाइव बैंड प्रस्तुति देकर देशभक्ति का अनुपम वातावरण निर्मित किया।

प्रश्न 2: भारत के प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित किस प्रसिद्ध उपन्यास से लिया गया है, जिसे पहली बार 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था?

(A) गोदान
(B) आनंदमठ (Anandamath)
(C) गीतांजलि
(D) भारत भारती

उत्तर: (B) आनंदमठ (Anandamath)
व्याख्या: भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ बंकिम चंद्र चटर्जी के प्रसिद्ध बंगाली उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया है। इसे पहली बार वर्ष 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा गाया गया था।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. आजादी की धुन छत्तीसगढ़ कार्यक्रम क्या है और इसका आयोजन कहाँ किया गया?

यह छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य देशभक्ति संगीत समारोह है। इसका आयोजन 12 अगस्त 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

Q2. इस समारोह की मुख्य तकनीकी और कलात्मक विशेषता क्या रही?

इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि छत्तीसगढ़ में पहली बार विभिन्न अंचलों से आए 100 युवा संगीतकारों ने एक साथ विभिन्न वाद्ययंत्रों (जैसे गिटार, ड्रम, मांदर, कीबोर्ड) पर एक साथ लाइव बैंड की जुगलबंदी प्रस्तुत कर देशभक्ति का अद्भुत माहौल बनाया।

Q3. इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की कला और साहित्य को बढ़ावा देने वाली किन संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित थे?

इस गरिमामयी समारोह में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन और छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित कला और संस्कृति विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • 100 कलाकारों का ऐतिहासिक लाइव बैंड: आजादी की धुन छत्तीसगढ़ के तहत राज्य के 100 युवा संगीतकारों को एक साथ मंच देकर छत्तीसगढ़ी लोक-वाद्यों और आधुनिक उपकरणों का शानदार फ्यूजन तैयार किया गया।
  • संगीत के माध्यम से नागरिक कर्तव्यबोध: मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह धुन हमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की याद दिलाने के साथ-साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण में युवाओं को अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है।
  • कला और साहित्य अकादमी की सक्रियता: फिल्म विकास निगम और साहित्य अकादमी जैसी स्वायत्त राज्य संस्थाओं की सहभागिता यह दर्शाती है कि राज्य सरकार लोक कलाकारों के स्वरोजगार और संरक्षण के प्रति गंभीर है।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय संस्कृति के विविध रूप—संगीत और ललित कलाएं, आधुनिक इतिहास—स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रीय प्रतीक) और सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, लोक-गीत, वाद्ययंत्र और कला संस्थान) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी, और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 12 अगस्त 2026 को रायपुर में आयोजित ‘आजादी की धुन’ समारोह के उपरांत जारी की गई आधिकारिक प्रेस समीक्षा और विवरणों पर आधारित है।

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