Chakradhar Samaroh Classical Dance: 41वें चक्रधर समारोह की 5वीं सांस्कृतिक संध्या में बिखरा कथक और कुचिपुड़ी का जादू, शार्वी, श्वेता नायक और अनंता ने मोहा मन

Chakradhar Samaroh Classical Dance Chakradhar Samaroh Classical Dance

रायगढ़, 19 सितम्बर 2026: भारतीय शास्त्रीय कला, ताल और घुंघरुओं की ऐतिहासिक तीर्थस्थली रायगढ़ के रामलीला मैदान में आयोजित 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 की पांचवी सांस्कृतिक संध्या सुर, लय और भाव के अप्रतिम संगम की साक्षी बनी। Chakradhar Samaroh Classical Dance के इस विशेष मंच पर जहां युवा कथक साधिका शार्वी सिंह परिहार और खैरागढ़ वि.वि. की नृत्यांगना अनंता पांडेय ने उत्तर भारतीय कथक की जटिल पदचाप से दर्शकों को रोमांचित किया, वहीं बिलासपुर की प्रसिद्ध गुरु श्वेता नायक एंड ग्रुप ने आंध्र प्रदेश के शास्त्रीय कुचिपुड़ी नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति से समूचे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख आकर्षण बिलासपुर की श्वेता नायक एवं उनके 9 सदस्यीय दल द्वारा प्रस्तुत ‘शिवशक्ति समर्पण’ रहा, जिसमें भगवान शिव के रौद्र तांडव और माता पार्वती के सौम्य लास्य का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। प्रस्तुति के दौरान कुचिपुड़ी की पारंपरिक और कठिन विधा ‘तरंगम’ (पीतल की थाली के किनारों पर संतुलित पदसंचालन) ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। वहीं, लखनऊ घराने की युवा नृत्यांगना शार्वी सिंह परिहार ने ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ शिव वंदना से शुरुआत कर ठाट, गदनिक, परन और चक्रदार तोड़ों की शास्त्रीय शुद्धता प्रस्तुत की।

इसके साथ ही, थाईलैंड में अंतरराष्ट्रीय नृत्य चैंपियनशिप जीत चुकीं और वर्तमान में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में अध्ययनरत युवा नृत्यांगना अनंता पांडेय ने भाव, लय और ताल के साथ सधी हुई कथक प्रस्तुति देकर दर्शकों की भारी वाहवाही बटोरी। चक्रधर समारोह के इस 5वें दिन शास्त्रीय परंपरा के संरक्षण और युवा पीढ़ी के समर्पण का जीवंत प्रमाण देखने को मिला।

चक्रधर समारोह 5वीं संध्या: मुख्य प्रस्तुतियां (Quick Facts)विवरण
मुख्य उत्सवChakradhar Samaroh Classical Dance (41वां अंतर्राष्ट्रीय संस्करण)
आयोजन स्थल एवं तिथिऐतिहासिक रामलीला मैदान, रायगढ़ (19 सितम्बर 2026 – 5वीं संध्या)
प्रथम प्रमुख प्रस्तुतिशार्वी सिंह परिहार (कथक – लखनऊ घराना, गुरु तरुण कुमार शर्मा के शिष्य)
द्वितीय प्रमुख प्रस्तुतिश्वेता नायक एंड ग्रुप, बिलासपुर (कुचिपुड़ी नृत्य – ‘शिवशक्ति समर्पण’ एवं ‘तरंगम’)
तृतीय प्रमुख प्रस्तुतिअनंता पांडेय (कथक – खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय छात्रा, थाईलैंड चैंपियन)
कुचिपुड़ी प्रस्तुति की राग-तालरागमालिका एवं आदि ताल (‘मीनाक्षी पंचरत्नम्’)

शार्वी सिंह परिहार: 12 वर्षों की अनवरत साधना और कथक की शास्त्रीय बारीकियां

41वें चक्रधर समारोह-2026 की पांचवी सांस्कृतिक संध्या में युवा कथक नृत्यांगना शार्वी सिंह परिहार ने कथक की तकनीकी शुद्धता से दर्शकों को अभिभूत किया:

  • प्रस्तुति का आरंभ: शार्वी ने मंच पर उठान और आदिदेव महादेव की स्तुति ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ पर आधारित शिव वंदना से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की।
  • शास्त्रीय अंगों का प्रदर्शन: इसके उपरांत उन्होंने कथक के पारंपरिक अंगों—ठाट, गदनिक, तोड़ा-तुकड़ा, परन, लड़ी, तिहाई और तीव्र गति के चक्रदार तोड़ों के माध्यम से लखनऊ घराने की नजाकत और पदचाप को प्रस्तुत किया।
  • साधना एवं पृष्ठभूमि: बाल्यावस्था से कथक की साधना कर रहीं शार्वी पिछले करीब 12 वर्षों से इस विधा का विधिवत प्रशिक्षण ले रही हैं। वे गुरु तरुण कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में लखनऊ घराने की कथक परंपरा सीख रही हैं। शार्वी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं और चक्रधर समारोह में पूर्व में भी समूह व एकल प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।

श्वेता नायक एंड ग्रुप (बिलासपुर): कुचिपुड़ी में ‘शिवशक्ति समर्पण’ और थाली नृत्य (तरंगम)

बिलासपुर से आईं गुरु श्वेता नायक और उनके साथी कलाकारों ने कुचिपुड़ी नृत्य से भक्ति, शक्ति और सौंदर्य का दिव्य वातावरण रच दिया:

  • मीनाक्षी पंचरत्नम्: कार्यक्रम का आरंभ ‘मीनाक्षी पंचरत्नम्’ से हुआ। रागमालिका और आदि ताल में निबद्ध इस रचना के माध्यम से देवी मीनाक्षी के दिव्य स्वरूप, सौंदर्य और महिमा को भावपूर्ण आंगिक चेष्टाओं से प्रस्तुत किया गया।
  • तरंगम का आकर्षण: प्रस्तुति का चरम बिंदु ‘तरंगम’ रहा, जिसमें कलाकारों ने पीतल की थाली के किनारों पर पैर रखकर संतुलित, द्रुत और जटिल पदसंचालन करते हुए अद्भुत लय-ताल का प्रदर्शन किया।
  • शिव-पार्वती संगम: ‘शिवशक्ति समर्पण’ में भगवान शिव के गंगाधर, चंद्रचूड़ और आनंद नटराज स्वरूपों का भावपूर्ण निरूपण किया गया। विशेषकर मां गंगा के शिव की जटाओं में अवतरण और लोककल्याण हेतु शिव द्वारा उन्हें जटाओं में धारण करने के प्रसंग को नृत्य के जरिए जीवंत किया गया।
  • सहयोगी कलाकार दल: गुरु श्वेता नायक के कुशल निर्देशन में डी. धारणी, श्री दिप्ता पॉल, चेतन्या साहू, मेघा सारथी, ऐश्वर्या, श्वेता सालिनी नायक, एन. स्तुति रेड्डी, एन. दिव्यांका तथा हर्षिता कैवर्त ने सह-प्रस्तुति दी।
Chakradhar Samaroh Classical Dance, Sharvi Singh Parihar, Shweta Nayak, Ananta Pandey
Chakradhar Samaroh Classical Dance, Sharvi Singh Parihar, Shweta Nayak, Ananta Pandey

अनंता पांडेय: 8 वर्ष की उम्र से घुंघरू बांधने वाली अंतरराष्ट्रीय विजेता की कथक प्रस्तुति

पांचवी शाम की एक अन्य प्रमुख कथक प्रस्तुति युवा नृत्यांगना अनंता पांडेय द्वारा दी गई:

  • मंचीय प्रदर्शन: अनंता ने भाव, लय और ताल के उत्कृष्ट समन्वय के साथ कथक के तकनीकी और अभिनय पक्षों को मंच पर साकार किया।
  • उपलब्धियां एवं शिक्षण: अनंता ने मात्र 8 वर्ष की उम्र से मंच पर नृत्य करना शुरू कर दिया था। उन्होंने थाईलैंड में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय नृत्य चैंपियनशिप’ में प्रथम स्थान प्राप्त कर देश का मान बढ़ाया है।
  • भवप्रीता डांस एकेडमी: वर्ष 2019 में अनंता ने मात्र पांच बच्चों के साथ ‘भवप्रीता डांस एकेडमी’ की शुरुआत की थी। वर्तमान में वे सैकड़ों बच्चों को कथक, सेमी-क्लासिकल और वेस्टर्न डांस का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे देश के विख्यात इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में वर्तमान में अध्ययनरत हैं।
Chakradhar Samaroh Classical Dance, Sharvi Singh Parihar, Shweta Nayak, Ananta Pandey.
Chakradhar Samaroh Classical Dance, Sharvi Singh Parihar, Shweta Nayak, Ananta Pandey.

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CGPSC Static Facts: कथक घराने, कुचिपुड़ी का तरंगम एवं खैरागढ़ विश्वविद्यालय (100% प्रामाणिक तथ्य)

प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-6 छत्तीसगढ़ की कला व संस्कृति तथा UPSC GS-1 भारतीय शास्त्रीय नृत्य) के लिए मानक तथ्य:

  • कथक नृत्य एवं लखनऊ घराना:
    • उत्पत्ति: ‘कथा कहे सो कथक कहावे’—कथावाचकों की परंपरा से विकसित उत्तर भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य।
    • लखनऊ घराना: अवध के नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में ठाकुर प्रसाद जी और महाराज बिंदादीन द्वारा पल्लवित। इसकी मुख्य विशेषता भाव, लास्य, नजाकत और ठुमरी पर आधारित सूक्ष्म अभिनय है।
  • कुचिपुड़ी नृत्य एवं ‘तरंगम’ (Kuchipudi – Andhra Pradesh):
    • मूल: आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के ‘कुचेलापुरम’ ग्राम से उत्पन्न। इसे 17वीं शताब्दी में वैष्णव संत सिद्धेंद्र योगी ने यक्षगान से परिष्कृत कर शास्त्रीय रूप दिया।
    • तरंगम (Tarangam): कुचिपुड़ी नृत्य की सबसे विशिष्ट और लोकप्रिय प्रस्तुति। इसमें नर्तक/नर्तकी पीतल की थाली के उभरे हुए किनारों पर संतुलन बनाकर तीव्र लय में पदसंचालन करते हैं। यह भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित ‘कृष्ण लीला तरंगिणी’ (नारायण तीर्थ द्वारा रचित) पर किया जाता है।
  • नाट्यशास्त्र में तांडव एवं लास्य:
    • भरत मुनि के नाट्यशास्त्र के अनुसार, तांडव भगवान शिव द्वारा किया जाने वाला पौरुष, ओजस्वी, वीर एवं लयबद्ध नृत्य है। वहीं लास्य माता पार्वती से संबद्ध सौम्य, ललित, शृंगारिक और कोमल भावों का नृत्य है।
  • इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (IKSV):
    • स्थापना: 14 अक्टूबर 1956 (मध्य भारत/एशिया का प्रथम संगीत एवं ललित कला विश्वविद्यालय)।
    • इतिहास: खैरागढ़ रियासत के राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती देवी ने अपनी कला-प्रेमी दिवंगत राजकुमारी ‘इंदिरा’ की स्मृति में अपना भव्य राजमहल (कमल विलास पैलेस) दान कर इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।

विश्लेषण: शास्त्रीय नृत्य शैलियों का राष्ट्रीय समन्वय और चक्रधर समारोह का मंच

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Art, Culture & National Integration)

1. उत्तर-दक्षिण शास्त्रीय शैलियों का संगम (‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’): Chakradhar Samaroh Classical Dance का यह मंच भारतीय शास्त्रीय परंपरा की विविधता में एकता को सिद्ध करता है। एक ही शाम में उत्तर भारत की दरबारी और मंदिर परंपरा से निकले कथक (लखनऊ घराना) तथा दक्षिण भारत के भागवत मेला से उपजे आंध्र के कुचिपुड़ी का एक साथ प्रदर्शन भारत की समग्र सांस्कृतिक आत्मा को प्रदर्शित करता है। यह क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकात्मकता को मजबूत बनाता है।

2. गुरु-शिष्य परंपरा और औपचारिक विश्वविद्यालयीन शिक्षण का संतुलन: शार्वी सिंह परिहार द्वारा गुरु तरुण कुमार शर्मा के चरणों में बैठकर 12 वर्षों की व्यक्तिगत साधना (पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा) और दूसरी ओर अनंता पांडेय द्वारा खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय जैसे एशिया के पहले कला विश्वविद्यालय से औपचारिक अकादमिक डिग्री लेना—यह दर्शाता है कि भारत में शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण के दोनों स्तंभ (पारंपरिक घराना पद्धति और आधुनिक विश्वविद्यालयीन प्रणाली) एक-दूसरे के पूरक बनकर नई पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. 41वें चक्रधर समारोह की 5वीं संध्या में कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति किस दल द्वारा दी गई?

बिलासपुर की विख्यात नृत्यांगना गुरु श्वेता नायक एंड ग्रुप द्वारा ‘शिवशक्ति समर्पण’ शीर्षक से कुचिपुड़ी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।

Q2. कुचिपुड़ी नृत्य में ‘तरंगम’ प्रस्तुति की क्या विशेषता है?

‘तरंगम’ कुचिपुड़ी की विशिष्ट तकनीकी प्रस्तुति है, जिसमें नर्तक पीतल की थाली के किनारों पर पैर रखकर जटिल और द्रुत गति से लयबद्ध पदसंचालन करते हैं।

Q3. कथक नृत्यांगना अनंता पांडेय छत्तीसगढ़ के किस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं?

अनंता पांडेय देश एवं एशिया के प्रथम संगीत विश्वविद्यालय—’इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़’ में अध्ययनरत हैं।

स्रोत (Source)

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 19 सितम्बर 2026.

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