हरेली तिहार 2026: छत्तीसगढ़ के पहले लोक-पर्व ‘हरेली’ का पूरे प्रदेश में दिखा उल्लास; गेड़ी दौड़, पारंपरिक पकवानों का भोग और कृषि यंत्रों की पूजा से सजी छत्तीसगढ़ी माटी

हरेली तिहार 2026 हरेली तिहार 2026

Published on 11 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति, माटी के प्रति अगाध प्रेम और कृषि परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाले हरेली तिहार 2026 की शुरुआत आज पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ हो गई है। जनसंपर्क विभाग द्वारा आज 10 अगस्त 2026 को जारी विशेष विवरणी के अनुसार, सावन माह की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को मनाया जाने वाला यह पर्व छत्तीसगढ़ का पहला ‘तिहार’ माना जाता है, जहाँ से राज्य के प्रमुख लोक-पर्वों की वार्षिक शृंखला शुरू होती है।

हरेली मुख्य रूप से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, फसलों की रक्षा करने और कृषि उपकरणों व पशुधन (गाय और बैलों) की पूजा करने का एक पवित्र उत्सव है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़िया क्रांति’ के तहत हरेली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर और पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देकर इस अमूल्य लोक-सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

महत्वपूर्ण संकेतकहरेली तिहार 2026 के प्रमुख तथ्य व पारंपरिक रीति-रिवाज
पर्व का नाम और तिथिहरेली तिहार (Hariyali Amavasya) – 10 अगस्त 2026
सांस्कृतिक महत्वछत्तीसगढ़ का पहला लोक-पर्व (First festival of CG), जो मानसून की शुरुआत का प्रतीक है
मुख्य धार्मिक और कृषि अनुष्ठानहल, कुदाल, आरी, खुर्पी आदि कृषि औजारों की ‘हाथा’ (चावल आटा) और चीला रोटी से पूजा
पशुधन का सत्कार (गहूंता)बैलों को आटा, नमक और जड़ी-बूटियों से बना पौष्टिक मिश्रण ‘गहूंता’ खिलाया जाता है
गौठान की विशेष औषधिवायुजनित रोगों से बचाव के लिए अरंडी व खम्हार के पत्तों में लपेटकर दी जाने वाली दवा
पारंपरिक साहसिक खेलबांस से निर्मित ‘गेड़ी’ (Gedi) पर चढ़ना, गेड़ी दौड़ और नारियल फेंक प्रतियोगिता
पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनगुड़ का चीला, अइरसा, चौसेला, बोबरा, बड़ा, ठेठरी और खुरमी
सुरक्षा और टोटका विधानबुरी ताकतों से रक्षा के लिए चौखट पर नीम की पत्तियां और लोहे की कीलें लगाना
शासकीय संवर्धन पहलराज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक अवकाश की घोषणा और छत्तीसगढ़िया खेलों का आयोजन

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कृषि यंत्रों की पूजा और ‘बलराम रूप’ का आभार

छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में हल और अन्य उपकरणों को देव-तुल्य माना जाता है। हरेली के दिन किसान अपने औजारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं:

  • औजारों का शुद्धिकरण: बोनी और ब्यासी (धान की रोपाई) का कार्य संपन्न होने के बाद, किसान अपने हल, फावड़ा, कुदाल, कुदाली, आरी, हँसिया और खुर्पी को धोकर स्वच्छ करते हैं।
  • चीला रोटी का भोग: औजारों को मुरमी (लाल मिट्टी) के आसन पर सजाया जाता है। इसके बाद पिसे हुए चावल के गीले आटे से उन पर ‘हाथा’ (हाथ के छापे) लगाया जाता है और चंदन, फूल, धूप-दीप और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ‘चीला रोटी’ (Cheela Roti) व श्रीफल अर्पित कर उनकी पूजा की जाती है।

पशुधन का सत्कार और पारंपरिक ‘गहूंता’ व गौठान औषधि

पशुधन (विशेष रूप से बैल) छत्तीसगढ़ के लघु और सीमांत किसानों के जीवन की रीढ़ हैं। हरेली के दिन पशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए दो अलग-अलग स्तरों पर घरेलू उपचार किया जाता है:

  • गहूंता का पौष्टिक भोग: गाय और बैलों को नहला-धुलाकर आरती उतारी जाती है और उन्हें ‘गहूंता’ (flour, salt, and herbs—आटा, नमक और जड़ी-बूटियों का पौष्टिक मिश्रण) खिलाया जाता है।
  • गौठान में पारंपरिक टीकाकरण (औषधि): गहूंता खिलाने के अतिरिक्त, किसान पशुओं को गौठान लेकर जाते हैं। वहां अरंडी (Arand) और खम्हार (Khamhar) के पत्तों में नमक और चावल या गेहूं के गोले के साथ दवा डालकर पशुओं को खिलाया जाता है। अरंडी और खम्हार के पत्ते वायुजनित रोगों (Air-borne diseases) को दूर करने वाली प्राकृतिक औषधि हैं, जबकि नमक उत्प्रेरक का कार्य करता है। यह पशुओं के लिए मानसून पूर्व का स्वदेशी ‘टीकाकरण’ है।
हरेली
हरेली

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गेड़ी दौड़, नारियल फेंक और पारंपरिक ‘टोटका’ विधान

हरेली का त्योहार केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक खेलों और लोक-विश्वासों का एक सुंदर संगम है:

  • गेड़ी चढ़ने का आनंद (Gedi): बांस के मोटे डंडों पर लकड़ी के पहुए बांधकर ‘गेड़ी’ बनाई जाती है। मानसून के समय दलदली और कीचड़ युक्त रास्तों पर आसानी से चलने के उद्देश्य से शुरू हुई यह तकनीक आज एक रोमांचक खेल बन चुकी है। बच्चे और युवा रंग-बिरंगे परिधानों में सजे होकर गेड़ी दौड़, एक पैर पर खड़े होना और पानी पिलाने जैसी स्पर्धाओं में भाग लेते हैं।
  • नारियल फेंक प्रतियोगिता: गाँव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोलियाँ जुटती हैं और नारियल फेंकने की रोमांचक प्रतियोगिताएं होती हैं, जो देर रात तक चलती हैं। इसके साथ ही फुगड़ी, खो-खो और बिल्लस जैसे खेलों का भी आयोजन किया जाता है।
  • बुरी ताकतों से रक्षा का विधान (नीम टोटका): लोक मान्यताओं के अनुसार, सावन अमावस्या को नकारात्मक शक्तियों से गाँव की रक्षा के लिए घर के मुख्य दरवाजों पर नीम की पत्तियां बांधी जाती हैं। स्थानीय लोहारों द्वारा मुख्य चौखट पर नीम की टहनियाँ और लोहे की कीलें ठोंकी जाती हैं। यह प्रथा नीम के ज्ञात रोगाणुनाशक और औषधीय गुणों से प्रेरित है।

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  • हरियाली अमावस्या (सावन अमावस्या): हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जिसे देश भर में पर्यावरण संरक्षण के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में इसे ‘हरेली’ कहा जाता है।
  • पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान: हरली के अवसर पर बनाए जाने वाले मुख्य व्यंजनों में—
    • चीला (Cheela): चावल के घोल से तवे पर बनने वाली रोटी।
    • बोबरा (Bobra) और चौसेला: मीठे और नमकीन गहरे तले हुए चावल के पकवान।
    • ठेठरी और खुरमी: बेसन से बनी नमकीन ठेठरी और गेहूं व गुड़ से बनी कुरकुरी खुरमी।
  • छत्तीसगढ़िया ओलंपिक: राज्य के पारंपरिक लोक खेलों (जैसे गेड़ी दौड़, गिल्ली-डंडा, फुगड़ी, और लंगड़ी दौड़) को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और युवाओं में शारीरिक दक्षता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई एक अनूठी खेल पहल।

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मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से हरेली तिहार 2026 जैसे पारंपरिक कृषि त्योहारों का वैज्ञानिक और प्रशासनिक महत्व केवल एक धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) और कृषि पारिस्थितिकी (Agro-ecology) के सिद्धांतों का जीवंत दस्तावेज है।

हरेली का त्योहार मानव, पशुधन और प्रकृति के बीच के उस ‘सह-अस्तित्व’ (Co-existence) को पुनर्परिभाषित करता है जो हमारी संवहनीय विकास (Sustainable Development) नीतियों का मूल आधार है। इस त्योहार में की जाने वाली कृषि उपकरणों की पूजा वास्तव में श्रम की गरिमा (Dignity of Labor) और उत्पादन के साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक अनूठा सांस्कृतिक माध्यम है।

इसके अतिरिक्त, मानसून की शुरुआत में गाय और बैलों को ‘गहूंता’ (आटा, नमक और औषधियों का मिश्रण) और अरंडी व खम्हार के पत्तों की गौठान औषधि खिलाना यह दर्शाता है कि हमारे पूर्वजों के पास पशु चिकित्सा विज्ञान (Veterinary Science) की कितनी गहरी स्वदेशी समझ थी। यह प्राकृतिक उपचार पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन की रक्षा होती है। सरकार द्वारा हरेली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर पारंपरिक खेलों (जैसे गेड़ी दौड़) को बढ़ावा देना ‘छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान’ को जगाने और युवा पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम है, जो अंततः राज्य की अनूठी सॉफ्ट पावर कूटनीति को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण समसामयिक और लोक-कला विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में संपन्न हुए हरेली तिहार 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

(A) यह छत्तीसगढ़ का अंतिम त्योहार माना जाता है, जो फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है।
(B) यह सावन माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला राज्य का पहला लोक-त्योहार है, जो कृषि और प्रकृति को समर्पित है।
(C) इस दिन केवल आधुनिक ट्रैक्टरों की पूजा की जाती है और पशुओं का प्रवेश वर्जित होता है।
(D) यह मुख्य रूप से बस्तर संभाग में मनाया जाने वाला एक विशेष सैन्य अभ्यास है।

उत्तर: (B) यह सावन माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला राज्य का पहला लोक-त्योहार है, जो कृषि और प्रकृति को समर्पित है।
व्याख्या: हरेली को छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार (तिहार) माना जाता है, जो सावन की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन किसान अपने कृषि औजारों और पशुधन की पूजा करते हैं।

प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ में हरेली त्योहार के दिन पशुधन (गाय और बैलों) की सुरक्षा और पोषण के लिए खिलाया जाने वाला पारंपरिक ‘गहूंता’ (Gahunta) मुख्य रूप से क्या है?

(A) अरंडी (Arand) और खम्हार (Khamhar) के औषधीय पत्तों का रस
(B) आटा, नमक और जड़ी-बूटियों से बना पौष्टिक मिश्रण
(C) चावल के गीले आटे से बनी चीला रोटी का प्रसाद
(D) महुए के फूलों और गुड़ से तैयार किया गया काढ़ा

उत्तर: (B) आटा, नमक और जड़ी-बूटियों से बना पौष्टिक मिश्रण
व्याख्या: हरेली के दिन बैलों को नहला-धुलाकर आटा, नमक और जड़ी-बूटियों से बना पौष्टिक मिश्रण ‘गहूंता’ खिलाया जाता है। इसके अतिरिक्त, वायुजनित रोगों के इलाज के लिए गौठान में अलग से अरंडी और खम्हार के पत्तों में नमक व चावल/गेहूं मिलाकर दवा दी जाती है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. हरेली तिहार 2026 क्या है और यह क्यों मनाया जाता है?

यह छत्तीसगढ़ का पहला और प्रमुख लोक-पर्व है, जो सावन माह की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से कृषि उपकरणों की पूजा, पशुधन के सम्मान, और अच्छी फसल की कामना के लिए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक पारंपरिक उत्सव है।

Q2. हरेली तिहार में ‘गेड़ी’ (Gedi) का क्या पारंपरिक और ऐतिहासिक महत्व है?

गेड़ी बांस के डंडों और लकड़ी के पहुओं से निर्मित पैर टिकाकर चलने की एक पारंपरिक संरचना है। पुराने समय में बारिश के मौसम में दलदली और कीचड़ भरे रास्तों पर चलने के लिए इसका आविष्कार किया गया था, जो आज गेड़ी दौड़ और अन्य खेलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की एक प्रसिद्ध साहसिक खेल परंपरा बन चुकी है।

Q3. इस लोक-पर्व के दौरान घरों को नकारात्मक ताकतों से बचाने के लिए क्या टोटका किया जाता है?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, हरेली के दिन गाँव को बुरी नजर और मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए घरों के मुख्य द्वारों पर नीम की पत्तियां बांधी जाती हैं। साथ ही, लोहारों द्वारा चौखट पर नीम की टहनियां और लोहे की कीलें लगाई जाती हैं, जो नीम के कीटनाशक और रोगाणुनाशक गुणों पर आधारित है।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • छत्तीसगढ़िया माटी का पहला पर्व: हरेली तिहार 2026 राज्य के लोक-त्योहारों की शृंखला का पहला त्योहार है, जो मानव और प्रकृति के बीच के अटूट संबंध को प्रदर्शित करता है।
  • पारंपरिक पशु चिकित्सा और गहूंता: बैलों को आटा, नमक व जड़ी-बूटियों का पौष्टिक ‘गहूंता’ खिलाना तथा गौठान में अरंडी और खम्हार के औषधीय पत्तों का प्राकृतिक टीका देना छत्तीसगढ़ के पूर्वजों के स्वदेशी पशु चिकित्सा ज्ञान को साबित करता है।
  • खेलों और व्यंजनों का उल्लास: गेड़ी दौड़, नारियल फेंक प्रतियोगिता, और चीला, बोबरा, ठेठरी-खुरमी जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुत्फ उठाना इस लोक-उत्सव की मुख्य पहचान है।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय संस्कृति, पारंपरिक लोक कलाएं और त्योहार, जनजातीय जीवनशैली), तथा सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, लोक-कला, संस्कृति और पारंपरिक छत्तीसगढ़िया खेल) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग, आदिम जाति विकास विभाग, और जनसंपर्क विभाग (DPRCG) के संयुक्त संचालक श्री धनंजय राठौर द्वारा 10 अगस्त 2026 को रायपुर में जारी किए गए आधिकारिक ‘हरेली तिहार’ विशेष आलेख विवरणी पर आधारित है।

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