GI Tags India Ecosystem 2026: भारत में पंजीकृत भौगोलिक संकेतकों (GI Tags) की संख्या 800 के पार; 2025 विनियामक संशोधन, निर्यात आंकड़े और प्रमुख योजनाओं का संपूर्ण विश्लेषण

GI Tags India Ecosystem 2026 Scale GI Tags India Ecosystem 2026 Scale

Published on 04 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय लोक-कलाओं और कृषि विविधताओं को वैश्विक व्यापारिक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति सामने आई है। भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा आज 4 अगस्त 2026 को जारी नवीनतम विवरण के अनुसार GI Tags India Ecosystem 2026 के माध्यम से देश के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में भारत 800 से अधिक पंजीकृत जीआई (Geographical Indication) उत्पादों का घर बन चुका है, जिनमें से 607 जीआई टैग अकेले वर्ष 2014 के बाद प्रदान किए गए हैं।

कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) के आंकड़ों के अनुसार, एक जीआई टैग न केवल उत्पाद की प्रामाणिकता की गारंटी देता है, बल्कि यह ग्रामीण कारीगरों और बुनकरों की आय में 20% से 30% तक की प्रत्यक्ष वृद्धि करने में भी सक्षम है। सरकार ने अब वर्ष 2030 तक देश में कुल जीआई पंजीकरणों की संख्या को 10,000 तक पहुँचाने का एक अत्यंत महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

महत्वपूर्ण संकेतकGI Tags India Ecosystem 2026 के प्रमुख तथ्य व कड़े आंकड़े
कुल पंजीकृत जीआई उत्पाद800 से अधिक (वर्ष 2014 के बाद से 607 जीआई प्रदान किए गए)
अधिकृत उपयोगकर्ताओं (Users) की संख्यापिछले 10 वर्षों में 365 से बढ़कर 29,000 से अधिक (जनवरी 2025 तक)
पंजीकरण लक्ष्य (वर्ष 2030 तक)10,000 जीआई उत्पाद पंजीकृत करने का लक्ष्य
अग्रणी राज्य (पंजीकृत उत्पादों में)उत्तर प्रदेश (81 उत्पाद) प्रथम, तमिलनाडु (76 उत्पाद) द्वितीय, महाराष्ट्र (55 उत्पाद) तृतीय
पहला पंजीकृत जीआई उत्पाद (भारत)दार्जिलिंग चाय (पश्चिम बंगाल) – उत्पाद और लोगो दोनों को एक साथ टैग
नियामक पंजीकरण रजिस्ट्री का मुख्यालयभौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई (अखिल भारतीय अधिकार क्षेत्र)
2025 विनियामक संशोधन शुल्कआवेदन शुल्क में 80% की कटौती; नवीनीकरण शुल्क ₹3,000 से घटाकर ₹500 किया गया
जीआई टैग की वैधता अवधि10 वर्ष (इसके बाद समय-समय पर नवीनीकरण आवश्यक)

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GI Tags India Ecosystem 2026: भारत में जीआई नेटवर्क के प्रमुख आंकड़े और वर्गीकरण

भारतीय जीआई उत्पादों को मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इस GI Tags India Ecosystem 2026 के विकास का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इसके तहत पारंपरिक और प्राकृतिक संपदा को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्राप्त हुई है:

  • 1. हस्तशिल्प उत्पाद (Handicrafts): इस श्रेणी में सर्वाधिक 445 हस्तशिल्प उत्पाद और 27 उत्पाद लोगो पंजीकृत हैं (दिसंबर 2025 तक)। प्रमुख उदाहरणों में जम्मू और कश्मीर का पश्मीना, पश्चिम बंगाल की बालूचरी साड़ी और उत्तर प्रदेश का बनारस गुलाबी मीनाकारी क्राफ्ट शामिल हैं।
  • 2. कृषि उत्पाद (Agricultural Products): इसके तहत 251 विशिष्ट क्षेत्रीय फसलों, अनाजों, फलों और मसालों को पंजीकृत किया गया है।
  • 3. निर्मित उत्पाद (Manufactured Products): कुल 64 निर्मित उत्पादों को जीआई टैग मिला है, जैसे नासिक वैली वाइन और कन्नौज का इत्र।
  • 4. खाद्य उत्पाद (Food Products): इसके तहत 66 व्यंजन और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ पंजीकृत हैं, जैसे पश्चिम बंगाल का बर्धमान मिहिदाना, ओडिशा का केंद्रपाड़ा रसबली और आंध्र प्रदेश का तिरुपति लड्डू।
  • 5. प्राकृतिक उत्पाद (Natural Products): वर्तमान में भारत में केवल 5 प्राकृतिक उत्पाद जीआई-टैग प्राप्त हैं—मकराना मार्बल (राजस्थान), चुनार बलुआ पत्थर (उत्तर प्रदेश), पुरुलिया का लाक (पश्चिम बंगाल), पन्ना हीरा (मध्य प्रदेश) और अंबाजी व्हाइट मार्बल (गुजरात)।

APEDA के विशेष निर्यात अभियान (वर्ष 2026 के नवीनतम आंकड़े)

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने वर्ष 2026 में भारतीय जीआई उत्पादों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुँचाने के लिए अपनी गतिविधियों को तेज किया है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को 10% से 50% तक अधिक मूल्य प्राप्त हो रहा है:

निर्यात बाजारजीआई उत्पाद (GI Product)वास्तविक आर्थिक प्रभाव
मालदीवकर्नाटक के जीआई फलकिसानों को 40% से 50% तक अधिक रिटर्न प्राप्त हुआ
कनाडासेलम सागो (साबूदाना)मांग का अंतर्राष्ट्रीय विस्तार, किसानों की आय में सुधार
यूके और इटलीजोहा राइस (असम का सुगंधित चावल)नए निर्यात बाजारों तक पहुंच और बेहतर मूल्य प्राप्ति
दुबईतेजपुर लीची (असम)उत्पादकों को लगभग 10% अधिक मूल्य प्राप्त हुआ
ओमानकर्नाटक का इंडी लाइम (नींबू)CEPA समझौते के तहत दिसंबर 2025 में 3 मीट्रिक टन का निर्यात

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GI Tags India Ecosystem 2026: विनियामक ढांचा, सुधार और 2025 का ऐतिहासिक संशोधन

बौद्धिक संपदा (IP) के एक रूप में, भौगोलिक संकेतकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘पेरिस कन्वेंशन’ और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ट्रिप्स (TRIPS) समझौते के तहत मान्यता प्राप्त है। भारत में इसका विनियामक ढांचा निम्नलिखित कड़े प्रावधानों पर आधारित है:

  • जीआई अधिनियम, 1999: भारत में इसका नियमन ‘वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ और वर्ष 2002 में अधिसूचित नियमों के तहत होता है, जिसे वर्ष 2003 में लागू किया गया था।
  • 2025 का ऐतिहासिक संशोधन (Rules Amendment 2025): वर्ष 2025 में नियमों में बड़ा संशोधन कर जीआई आवेदन और नवीनीकरण प्रक्रियाओं को बेहद सुलभ बनाया गया। इसके तहत आवेदन शुल्क में भारी 80% की कटौती की गई और नवीनीकरण (Renewal) शुल्क को ₹3,000 से सीधे घटाकर मात्र ₹500 कर दिया गया है।
  • जीआई अपवाद (Exclusions): कोई भी ऐसा उत्पाद जीआई टैग के लिए पात्र नहीं है जो जेनेरिक (सामान्य) नाम बन चुका हो, जो उपभोक्ताओं को भौगोलिक मूल के बारे में गुमराह करता हो, या जो किसी धार्मिक भावना को आहत करता हो अथवा अश्लील सामग्री से युक्त हो।

जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी योजनाएं

सरकार ने जीआई उत्पादों को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बनाने के लिए कई ढांचागत और विपणन पहलों को लागू किया है:

  • पीएम एकता मॉल (Unity Mall): सभी राज्यों में ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) और जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष एकता मॉलों की स्थापना हेतु वित्तीय वर्ष 2023-24 में ₹5,000 करोड़ का आवंटन किया गया था।
  • वन स्टेशन वन प्रोडक्ट (OSOP): भारतीय रेलवे द्वारा स्टेशनों पर विशेष जीआई बूथ स्थापित किए गए हैं, जो यात्रियों को सीधे स्थानीय हस्तशिल्प और खाद्य सामग्री खरीदने का अवसर देते हैं।
  • जीआई ट्रेल्स (Ecotourism Integration): भारत में अब फ्रांस के वाइन टूर की तर्ज पर ‘जीआई ट्रेल्स’ की शुरुआत की जा रही है, जो सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देगी। इसी कड़ी में, जून 2026 में असम में ‘मुगा सिल्क ट्रेल’ (Muga Silk Trail), सिल्क टूरिज्म पार्क और मुगा उत्सव की घोषणा की गई है।
  • MSME इनोवेटिव योजना: इसके तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को जीआई पंजीकरण की वास्तविक लागत की 100% प्रतिपूर्ति (Reimbursement) दी जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹2 लाख प्रति जीआई निर्धारित की गई है।

UPSC Prelims Fact Box: TRIPS Agreement & Indian GI Milestones

  • ट्रिप्स (TRIPS) समझौता: यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्यों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी समझौता है, जो बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेतकों) के न्यूनतम मानकों को निर्धारित करता है। यह वर्ष 1995 में लागू हुआ था।
  • दार्जिलिंग चाय (पश्चिम बंगाल): यह वर्ष 2004-05 में भारत का पहला उत्पाद बना जिसे जीआई टैग प्रदान किया गया। इसके साथ ही इसके विशिष्ट लोगो (एक महिला जो चाय की पत्ती चुन रही है) को भी बौद्धिक संपदा के तहत सुरक्षा दी गई।
  • अंतरराष्ट्रीय समझौते और व्यापार वार्ता: भारत वर्तमान में यूरोपीय संघ (EU) के साथ एक समर्पित जीआई समझौते पर बातचीत कर रहा है। इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने भी द्विपक्षीय वार्ताओं के तहत भारत के बासमती चावल, दार्जिलिंग चाय और पारंपरिक हस्तशिल्पों को सीधे अपने देश में जीआई के रूप में पंजीकृत करने पर सहमति व्यक्त की है।

UPSC & State PCS Mains Analysis: बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), ग्रामीण उद्यमिता और सॉफ्ट पावर कूटनीति

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से GI Tags India Ecosystem 2026 न केवल एक व्यापार संवर्धन उपकरण है, बल्कि यह भारत के ग्रामीण पुनरुद्धार (Rural Renaissance), सांस्कृतिक संरक्षण और सॉफ्ट पावर कूटनीति का एक प्रभावी एकीकृत माध्यम है।

आधुनिक वैश्विक बाजार में उपभोक्ता केवल उत्पाद नहीं खरीदते, बल्कि वे उत्पाद के पीछे की ‘कहानी’, प्रामाणिकता और परंपरा को भी खरीदते हैं। जीआई टैग चन्नापटना के लकड़ी के खिलौनों या बनारसी साड़ियों जैसे पारंपरिक शिल्पों को एक विशिष्ट ‘ब्रांड वैल्यू’ प्रदान करता है, जो उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मशीनी और सस्ते नकली उत्पादों (Counterfeiting) से बचाता है। इससे न केवल ग्रामीण कारीगरों के पलायन को रोका जा सकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार (Non-farm employment) के अवसरों का सृजन होता है, जो समावेशी विकास (Inclusive Growth) के लिए कड़ा विनियामक कदम है।

इसके अतिरिक्त, जीआई उत्पादों का निर्यात बढ़ाना भारत की ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ (Cultural Diplomacy) को वैश्विक व्यापार के साथ जोड़ने का एक अनूठा माध्यम है। जब असम का जोहा राइस ब्रिटेन की मेज पर और कर्नाटक के फल मालदीव के बाजारों में पहुँचते हैं, तो यह सीधे तौर पर वैश्विक स्तर पर भारत की ‘ब्रांड इंडिया’ छवि को सुदृढ़ करता है। सरकार द्वारा वर्ष 2025 में आवेदन शुल्कों में की गई 80% की कटौती और एमएसएमई योजनाओं के माध्यम से दी जा रही वित्तीय सहायता न्यूनतम नौकरशाही-अधिकतम सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अंततः वर्ष 2030 तक 10,000 जीआई पंजीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में घोषित आंकड़ों के अनुसार GI Tags India Ecosystem 2026 के तहत भारत का कौन-सा राज्य पंजीकृत भौगोलिक संकेतकों (GI Tags) की कुल संख्या के मामले में देश में पहले स्थान पर है?

(A) तमिलनाडु
(B) महाराष्ट्र
(C) उत्तर प्रदेश
(D) पश्चिम बंगाल

उत्तर: (C) उत्तर प्रदेश
व्याख्या: दिसंबर 2025 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश कुल 81 जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों के साथ देश का अग्रणी राज्य है। इसके बाद तमिलनाडु 76 उत्पादों के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 55 उत्पादों के साथ तीसरे स्थान पर है।

प्रश्न 2: भारत में भौगोलिक संकेतक (GI Tags) के पंजीकरण और संरक्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. भारत में जीआई का पंजीकरण ‘भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत किया जाता है, जो वर्ष 2003 में लागू हुआ था।
2. भौगोलिक संकेतकों की रजिस्ट्री का राष्ट्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
3. एक बार पंजीकृत होने के बाद, जीआई टैग की वैधता 10 वर्षों के लिए होती है, जिसे नवीनीकृत किया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सत्य हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 and 3
(D) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (C) केवल 1 and 3
व्याख्या: कथन 1 और 3 बिल्कुल सत्य हैं। भारत में जीआई का नियमन 1999 के अधिनियम के तहत होता है और इसकी वैधता 10 वर्ष की होती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि भौगोलिक संकेतकों की रजिस्ट्री का राष्ट्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में नहीं, बल्कि चेन्नई (तमिलनाडु) में स्थित है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. GI Tags India Ecosystem 2026 क्या है और देश में इसके पंजीकरण की वर्तमान स्थिति क्या है?

यह भारत सरकार द्वारा देश के विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़े अद्वितीय उत्पादों (हस्तशिल्प, कृषि, खाद्य, प्राकृतिक और निर्मित उत्पाद) को बौद्धिक संपदा अधिकार प्रदान करने वाला एक कड़ा विनियामक पारिस्थितिकी तंत्र है। वर्तमान में भारत में 800 से अधिक पंजीकृत जीआई उत्पाद हैं, और सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इस संख्या को 10,000 तक पहुँचाना है।

Q2. वर्ष 2025 में भौगोलिक संकेतकों (Registration Rules) में क्या प्रमुख बदलाव किए गए हैं?

वर्ष 2025 में विनियामक नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए जीआई आवेदन शुल्क में भारी 80% की कटौती की गई है, तथा नवीनीकरण (Renewal) शुल्क को ₹3,000 से सीधे घटाकर मात्र ₹500 कर दिया गया है। इससे छोटे कारीगरों और एमएसएमई के लिए पंजीकरण बेहद सुलभ हो गया है।

Q3. जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए रेलवे और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों में क्या पहलें की गई हैं?

रेलवे स्टेशनों पर ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) योजना के तहत विशेष जीआई बूथ स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए वाराणसी, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और दिल्ली मेट्रो के डिस्प्ले बोर्डों पर जीआई उत्पादों का व्यापक प्रदर्शन किया जा रहा है।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • 800+ उत्पादों का विशाल ग्रिड: GI Tags India Ecosystem 2026 के अंतर्गत ग्रामीण और अर्ध-शहरी अंचलों के 800 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग प्रदान किया जा चुका है, जो देश की पारंपरिक कला को अवैध नकल (Counterfeiting) से बचाता है।
  • विनियामक शुल्कों में 80% की कटौती: वर्ष 2025 में नियमों में किए गए ऐतिहासिक संशोधनों ने छोटे कारीगरों और एमएसएमई (MSMEs) के लिए जीआई टैग आवेदन और नवीनीकरण को बेहद सस्ता और सुलभ बना दिया है।
  • अंतरराष्ट्रीय निर्यात और व्यापार समझौते: एपीईडीए (APEDA) के नेतृत्व में असम के जोहा चावल और कर्नाटक के फलों जैसे जीआई उत्पादों को कनाडा, मालदीव और खाड़ी देशों में निर्यात किया जा रहा है, जिससे उत्पादक किसानों की आय में 20-30% की प्रत्यक्ष वृद्धि दर्ज की जा रही है।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (बौद्धिक संपदा अधिकार—IPR, भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि विपणन, बुनियादी ढांचा और निर्यात संवर्धन) तथा सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय संस्कृति, पारंपरिक हस्तशिल्प और लोक-कलाओं का संरक्षण) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT), और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 4 अगस्त 2026 को जारी की गई आधिकारिक जीआई पारिस्थितिकी तंत्र प्रगति रिपोर्ट पर आधारित है।

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