Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026: लोकसभा द्वारा पारित हुआ ऐतिहासिक कर संशोधन विधेयक; विदेशी संस्थागत निवेशकों, हीरा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों को मिलेगी भारी टैक्स छूट

Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026

Published on 09 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


लोकसभा द्वारा हाल ही में पारित किया गया Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 देश के विदेशी निवेशकों, इलेक्ट्रॉनिक्स और हीरा खनन उद्योगों के लिए बड़े कर सुधारों की नींव रखता है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश किए जाने के बाद इस ऐतिहासिक विधेयक को 6 अगस्त 2026 को लोकसभा द्वारा सफलतापूर्वक पारित कर दिया गया। यह विधेयक मुख्य रूप से 5 जून 2026 को जारी किए गए ‘आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ (Ordinance 2 of 2026) को निरस्त और प्रतिस्थापित करता है।

यह कानून नए ‘आयकर अधिनियम, 2025’ (जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ है), वित्त अधिनियम 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन करता है। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने और प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए यह एक अत्यंत exigent प्रशासनिक सुधार है।

महत्वपूर्ण संकेतकTaxation and Other Laws Amendment Bill 2026 के प्रमुख प्रावधान व कड़े आंकड़े
विधेयक का नाम व संख्याकराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (विधेयक संख्या 150, 2026)
संसद में पेश करने की तिथि4 अगस्त 2026 (वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा)
लोकसभा द्वारा पारित होने की तिथि6 अगस्त 2026 (सफलतापूर्वक पारित)
अध्यादेश का स्थान लिया5 जून 2026 को जारी आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 का
FIIs और BIS को छूटसरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) पर ब्याज और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर 100% कर छूट
हीरा व इलेक्ट्रॉनिक्स छूट अवधि1 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 31 मार्च 2041 (15 वर्ष) तक प्रभावी रहेगी
विदेशी निवेश कोष (Offshore Funds)न्यूनतम 25 सदस्य, ₹100 करोड़ औसत कॉपर्स और 10% भागीदारी सीमा की शर्ते पूरी तरह समाप्त
बिजनेस ट्रस्ट (SPVs) अधिभारREITs और InvITs के विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) पर अधिभार (Surcharge) 10% से बढ़ाकर 25% किया गया
पेमेंट एक्ट 2007 में सुधारधारा 10A में संशोधन; अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगंतान मोड पर बैंकों द्वारा शुल्क का निषेध

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Table of Contents

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और BIS को सरकारी प्रतिभूतियों पर पूर्ण कर छूट

विधेयक के अध्याय III के तहत आयकर अधिनियम की अनुसूची IV में संशोधन कर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के लिए निम्नलिखित कड़े कर लाभ दिए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से ही लागू माने जाएंगे:

  • प्रतिभूतियों पर शून्य कर दर: पूर्व में सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) से होने वाली ब्याज आय पर 20%, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर 30% और लोकसभा से पूर्व लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% का टैक्स लिया जाता था। इस विधेयक के माध्यम से FIIs और BIS को सरकारी प्रतिभूतियों के ब्याज और उनके हस्तांतरण से होने वाले पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर शत-प्रतिशत कर छूट प्रदान की गई है।

हीरा खनन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक कर प्रोत्साहन

भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने और कच्चे हीरों के व्यापार का केंद्र स्थापित करने के लिए विधेयक में 15 वर्षों (1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2041 तक) के लिए विशेष कर रियायतें दी गई हैं:

  • रफ हीरों की बिक्री पर कर छूट (Sl. No. 13F): विशेष अधिसूचित क्षेत्रों (Notified Special Zones) में कच्चे हीरों (Rough Diamonds) की बिक्री करने वाली विदेशी खनन कंपनियों, ब्रोकरों, एग्रीगेटरों और नीलामी इकाइयों की आय को पूरी तरह टैक्स फ्री किया गया है। इसके लिए किम्बरली प्रोसेस सर्टिफिकेट (Kimberley Process Certificate) अनिवार्य होगा।
  • कस्टम बॉन्डेड एरिया में कंपोनेंट भंडारण (Sl. No. 13G): भारत में मोबाइल, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और वियरेबल्स के अनुबंध निर्माताओं (Contract Manufacturers) को कंपोनेंट की निर्बाध आपूर्ति करने वाली विदेशी कंपनियों को सीमा शुल्क बांडेड क्षेत्र (Custom Bonded Area) के गोदामों में सामान स्टोर करने से होने वाली आय पर कर छूट दी गई है।
  • कैपिटल गुड्स आपूर्ति की अवधि में विस्तार: पूर्व में विदेशी कंपनियों द्वारा घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को कैपिटल गुड्स, मशीनरी और टूलिंग की आपूर्ति से होने वाली आय पर कर छूट केवल वित्त वर्ष 2030-31 तक थी, जिसे अब बढ़ाकर वित्त वर्ष 2040-41 कर दिया गया है।

विदेशी निवेश कोष (Investment Funds) और डेटा सेंटर्स के नियमों में सरलीकरण

देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और विदेशी फंडों के प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए कड़े संरचनात्मक सुधार किए गए हैं:

  • ‘बिजनेस कनेक्शन’ की कठोर शर्तों की समाप्ति (Schedule I): भारत से प्रबंधित होने वाले विदेशी निवेश कोषों को देश में कर योग्य होने से बचाने के लिए पूर्व की कई कठोर शर्तों को हटा दिया गया है। अब न्यूनतम 25 सदस्य होने, किसी एक निवेशक की अधिकतम 10% भागीदारी होने, न्यूनतम ₹100 करोड़ के औसत कॉपर्स (Corpus) की अनिवार्यता और किसी एक इकाई में अधिकतम 25% निवेश की सीमा संबंधी शर्तों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
  • डेटा सेंटर्स (Note 3 / Schedule IV): भारतीय डेटा सेंटरों से सेवाएं प्राप्त करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अधिसूचना और डेटा सेंटर के स्वीकृत योजनाओं के तहत होने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। साथ ही, अब ‘स्वामित्व’ (Owned) वाले डेटा सेंटरों के साथ-साथ ‘लीज़’ (Leased) पर लिए गए भारतीय डेटा सेंटरों से सेवाएं लेने पर भी यह छूट मिलेगी।
  • बिजनेस ट्रस्ट (REITs और InvITs): रियायती कर दरों का विकल्प चुनने वाले रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) के विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) पर सरचार्ज (Surcharge) को 10% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया है। हालांकि, यूनिट होल्डर्स को इन SPVs से मिलने वाले लाभांश (Dividends) पर कर से पूरी छूट दी गई है।

पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 (Section 10A) में संशोधन

विधेयक के अध्याय II के तहत डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए पेमेंट एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया गया है। इसके तहत अब कोई भी बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता (System Provider) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी भी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम का उपयोग करने पर सीधे या परोक्ष रूप से ग्राहकों या प्राप्तकर्ताओं पर कोई शुल्क (MDR/Transaction Charges) नहीं लगा सकेगा।

UPSC Prelims Fact Box: BIS, Custom Bonded Warehouses & Surcharge Regimes

  • बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS): यह केंद्रीय बैंकों के स्वामित्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1930 में हेग सम्मेलन के तहत की गई थी। इसका मुख्यालय बेसेल (Switzerland) में स्थित है। इसे “केंद्रीय बैंकों का बैंक” भी कहा जाता है।
  • सीमा शुल्क बांडेड क्षेत्र (Custom Bonded Area): सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 65 के तहत अधिसूचित गोदाम/क्षेत्र, जहाँ आयातित माल को बिना आयात शुल्क (Import Duty) दिए तब तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जब तक कि उसका विनिर्माण या अंतिम निकासी न हो जाए।
  • किम्बरली प्रोसेस सर्टिफिकेट (Kimberley Process): यह संघर्ष-प्रभावित हीरों (Conflict Diamonds/Blood Diamonds) के अवैध व्यापार को रोकने के लिए वर्ष 2003 में शुरू की गई एक अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन प्रणाली है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कच्चे हीरे वैध स्रोतों से ही आए हैं।

UPSC & State PCS Mains Analysis: राजकोषीय नीति, विदेशी निवेश का आकर्षण और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) में भारत का एकीकरण

मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 के रणनीतिक विश्लेषण को देश के विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector), वित्तीय सेवाओं के उदारीकरण और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच राजकोषीय स्थिरता स्थापित करने के रूप में देखा जाना चाहिए।

विधेयक के ‘उद्देश्यों और कारणों के विवरण’ में स्पष्ट रूप से वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरताओं और आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधानों का उल्लेख किया गया है। ऐसे समय में, FIIs और BIS को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) के हस्तांतरण पर पूंजीगत लाभ कर से पूर्ण छूट देना भारत के संप्रभु ऋण बाजार (Sovereign Debt Market) में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है। यह छूट भारत को वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों (जैसे जेपी मॉर्गन बॉन्ड इंडेक्स) में शामिल होने के बाद विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में सक्षम बनाएगी।

इसके अतिरिक्त, सीमा शुल्क बांडेड क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के भंडारण पर कर छूट और मशीनरी आयात छूट को वर्ष 2041 तक बढ़ाना देश की ‘मेक इन इंडिया’ और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीतियों को कड़े और दीर्घकालिक स्तर पर स्थिरता प्रदान करता है। सेमीकंडक्टर्स, लैपटॉप और सर्वर जैसे उच्च-मूल्य वाले विनिर्माण क्षेत्रों में भारत तब तक एक वैश्विक हब नहीं बन सकता जब तक कि वैश्विक कंपोनेंट आपूर्तिकर्ताओं को दीर्घकालिक कर स्थिरता न मिले। भारत से प्रबंधित होने वाले विदेशी निवेश कोषों (Offshore Funds) के लिए न्यूनतम कॉपर्स और सदस्यों की कठोर शर्तों को समाप्त करना गिफ्ट सिटी (GIFT City – IFSC) जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को कई गुना बढ़ाएगा। यह सुदृढ़ विनियामक ढांचा अंततः भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) का एक अनिवार्य हिस्सा बनाकर वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की सबसे मजबूत राजकोषीय रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और राजकोषीय विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में पारित हुए Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. इस कर संशोधन विधेयक को 4 अगस्त 2026 को संसद में पेश किया गया और 6 अगस्त 2026 को लोकसभा द्वारा सफलतापूर्वक पारित कर दिया गया।
2. यह विधेयक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर पूर्ण आयकर छूट प्रदान करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
व्याख्या: दोनों कथन बिल्कुल सत्य हैं। इस विधेयक को 4 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया और 6 अगस्त 2026 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। यह विधेयक FIIs और BIS को सरकारी प्रतिभूतियों के ब्याज और उन पर होने वाले पूंजीगत लाभ (Capital Gains) करों से पूर्ण छूट देता है।

प्रश्न 2: भारत के “केंद्रीय बैंकों के बैंक” के रूप में जाने जाने वाले ‘बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स’ (BIS) का अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक मुख्यालय निम्नलिखित में से किस देश में स्थित है?

(A) जिनेवा, स्विट्जरलैंड
(B) बेसेल, स्विट्जरलैंड
(C) द हेग, नीदरलैंड
(D) पेरिस, फ्रांस

उत्तर: (B) बेसेल, स्विट्जरलैंड
व्याख्या: बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) की स्थापना वर्ष 1930 में हेग सम्मेलन के निर्णयों के तहत हुई थी, लेकिन इसका प्रशासनिक और परिचालन मुख्यालय बेसेल, स्विट्जरलैंड में स्थित है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 क्या है और इसे लोकसभा द्वारा कब पारित किया गया?

यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया गया एक विशेष वित्तीय संशोधन विधेयक है, जिसे लोकसभा द्वारा 6 अगस्त 2026 को सफलतापूर्वक पारित कर दिया गया। यह मुख्य रूप से आयकर अधिनियम, 2025, वित्त अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (धारा 10A) में संशोधन करता है।

Q2. इस संशोधन विधेयक के माध्यम से विदेशी निवेश कोषों (Offshore Funds) के लिए क्या बड़े सुधार किए गए हैं?

भारत से प्रबंधित होने वाले विदेशी निवेश कोषों को देश में कर योग्य ‘बिजनेस कनेक्शन’ माने जाने से बचाने के लिए पूर्व की कई कठोर शर्तों को हटा दिया गया है, जिसमें न्यूनतम 25 सदस्य होने, न्यूनतम ₹100 करोड़ के औसत कॉपर्स की अनिवार्यता और किसी एक निवेशक की अधिकतम 10% भागीदारी जैसी शर्तें शामिल हैं।

Q3. पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में किए गए संशोधन का उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस संशोधन के बाद, कोई भी बैंक या डिजिटल भुगतान प्रदाता कंपनी ग्राहकों या वेंडरों पर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी भी डिजिटल/इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड (जैसे यूपीआई या अन्य अधिसूचित मोड) का उपयोग करने पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई भी ट्रांजैक्शन चार्ज (MDR) नहीं लगा सकेगी।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • सॉवरेन बॉन्ड बाजार में विदेशी पूंजी का संवर्धन: Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 के तहत FIIs और BIS को सरकारी प्रतिभूतियों के पूंजीगत लाभ पर शत-प्रतिशत कर छूट प्रदान की गई है, जो भारत के सॉवरेन ऋण बाजार को सुदृढ़ करेगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और हीरा क्षेत्र को 15 वर्षीय बूस्ट: कच्चे हीरों के व्यापार और कस्टम बॉन्डेड क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के भंडारण पर दी गई विशेष कर छूट 31 मार्च 2041 तक वैध रहेगी, जो भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने में मदद करेगी।
  • डिजिटल भुगतानों पर ट्रांजैक्शन चार्ज की समाप्ति: पेमेंट एक्ट 2007 की धारा 10A में संशोधन कर यह सुनिश्चित किया गया है कि अधिसूचित डिजिटल भुगतानों पर बैंक कोई शुल्क नहीं वसूल सकेंगे, जो ‘लेस-कैश इकोनॉमी’ को बढ़ावा देगा।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था, वित्तीय और राजकोषीय नीतियां, पूंजी बाजार, औद्योगिक विनिर्माण नीतियां—मेक इन इंडिया) और सामान्य अध्ययन पेपर-2 (संसद की विधायी शक्तियां, सरकारी नीतियां और महत्वपूर्ण विनियामक संस्थाएं) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख भारत सरकार के वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड – CBDT), वित्तीय सेवाएं विभाग, और लोकसभा सचिवालय द्वारा 4 अगस्त 2026 को संसद में पेश किए जाने और 6 अगस्त 2026 को लोकसभा द्वारा सफलतापूर्वक पारित किए गए आधिकारिक ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026′ के मूल मसौदे और वित्तीय ज्ञापनों पर आधारित है।

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