कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ: प्राकृतिक खेती और सहकारी विपणन मॉडल से महक उठी छत्तीसगढ़ के सुगंधित जीराफूल धान की खुशबू; 832 किसानों को मिला संगठित बाजार

कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ

Published on 18 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र कोरिया जिले की कृषि विरासत अब वैश्विक और राष्ट्रीय फलक पर अपनी एक नई पहचान स्थापित कर रही है। राज्य के पारंपरिक और सुगंधित जीराफूल धान की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को संगठित बाजार उपलब्ध कराने के लिए कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ मॉडल एक बड़ी सफलता बनकर उभरा है। आज 18 अगस्त 2026 को जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा जारी प्रगति विवरण के अनुसार, एफपीओ और प्राकृतिक खेती के इस अभिनव समन्वय ने स्थानीय किसानों की आजीविका को एक नया और सुरक्षित आधार प्रदान किया है।

कोरिया जिला कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के कुशल मार्गदर्शन में संचालित इस परियोजना ने न केवल खेती की लागत को कम किया है, बल्कि किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराकर सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा है। इस कड़े और संवेदनशील प्रयास की सराहना स्वयं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की है। उन्होंने कहा है कि स्थानीय पारंपरिक कृषि उत्पादों को मूल्य संवर्धन (Value Addition) से जोड़ने का यह कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ मॉडल राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

महत्वपूर्ण संकेतककोरिया जीराफूल चावल एफपीओ एवं प्राकृतिक खेती परियोजना के मुख्य आंकड़े
सफलता का मुख्य आधारकोरिया जीराफूल चावल एफपीओ एवं प्राकृतिक खेती पद्धति
कुल लाभांवित कृषक संख्या832 सक्रिय किसान (प्राकृतिक खेती में संलग्न)
नोडल सहकारी संस्था (FPO)सोनहत गौरव एग्रोफेड कृषक उत्पादक बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित, सोनहत
प्रयुक्त जैव-इनपुट (Natural Inputs)जीवामृत, बीजामृत और स्थानीय स्तर पर निर्मित जैविक खाद
प्रमाणन प्रणाली (Certification)पीजीएस-प्राकृतिक खेती प्रमाणन (Participatory Guarantee System – PGS)
राष्ट्रीय स्तर पर सराहनाकेंद्रीय कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘X’ (ट्विटर) पर सराहना
धान की भौगोलिक विशिष्टताजीआई टैग (Geographical Indication – GI Tag) प्राप्त पारंपरिक सुगंधित धान

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कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ: खेत से बाजार तक मूल्य संवर्धन की मजबूत कड़ी

पारंपरिक रूप से किसान जीराफूल धान का केवल उत्पादन करते थे, परंतु उन्हें उसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग का ज्ञान न होने के कारण उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। इस अंतर को पाटने के लिए एफपीओ ने एक मजबूत रीढ़ की तरह काम किया है:

  • संगठित विपणन की सामूहिक शक्ति: सोनहत गौरव एग्रोफेड कृषक उत्पादक बहुउद्देशीय सहकारी समिति के माध्यम से संचालित कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ किसानों को पैकेजिंग और ब्रांडिंग की सामूहिक शक्ति प्रदान कर रहा है। यह समिति धान के एकत्रीकरण, मिलिंग, आकर्षक पैकेजिंग और सीधे शहरी बाजारों में वितरण का कार्य संभालती है।
  • बिचौलियों का अंत और सीधा लाभ: इस सहकारी मॉडल ने ‘खेत से थाली तक’ की पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को एकीकृत कर दिया है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और मूल्य संवर्धन का पूरा वित्तीय लाभ सीधे आदिवासी और स्थानीय किसानों के बैंक खातों में पहुंच रहा है।

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जीवामृत, बीजामृत और पीजीएस सर्टिफिकेशन के साथ कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ का प्राकृतिक ढांचा

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का उपयोग वर्जित रखा गया है, जो भूमि और स्वास्थ्य दोनों का संरक्षण करता है:

  • जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग (ZBNF): कृषि विभाग के उप संचालक श्री राजेश भारती के अनुसार, कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ से जुड़े किसान पूर्णतः प्राकृतिक खेती पद्धति का पालन कर रहे हैं। वे खेतों में गोबर, गोमूत्र और स्थानीय वनस्पतियों से निर्मित जीवामृत तथा बीजामृत का उपयोग कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत लगभग शून्य हो गई है।
  • पीजीएस-प्राकृतिक खेती प्रमाणन: इस चावल की विश्वसनीयता और शुद्धता को वैश्विक बाजार में स्थापित करने के लिए इसे ‘सहभागी प्रत्याभूति प्रणाली’ (PGS-India Natural Farming Certification) के तहत प्रमाणित किया जा रहा है। यह प्रमाणन उपभोक्ताओं को यह आश्वासन देता है कि वे शत-प्रतिशत कीटनाशक-मुक्त और पौष्टिक भोजन का उपभोग कर रहे हैं।
  • राष्ट्रीय स्तर पर गूंज: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) के माध्यम से कोरिया जिले की इस अनूठी कृषि कूटनीति की सराहना की है, जिससे इस चावल को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत जैविक ब्रांड के रूप में स्थापित होने में मदद मिली है।

UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: Jeerafool Rice GI Tag & Farmer Producer Organizations

  • जीराफूल चावल जीआई टैग (GI Tag): वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक सुगंधित ‘जीराफूल चावल’ को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) प्रदान किया गया था। यह राज्य का पहला कृषि उत्पाद था जिसे जीआई टैग मिला। यह अपनी कोमलता, अत्यधिक सुगंध और छोटे दाने (जीरे के समान) के लिए जाना जाता है।
  • पीजीएस-इंडिया (Participatory Guarantee System): यह जैविक उत्पादों को प्रमाणित करने की एक स्थानीय स्तर पर केंद्रित प्रणाली है, जो सहभागिता के सिद्धांतों पर आधारित है। इसे मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए डिजाइन किया गया है।
  • कृषक उत्पादक संगठन (FPO): यह लघु और सीमांत किसानों का एक कानूनी समूह होता है (जो सहकारी समिति या उत्पादक कंपनी के रूप में पंजीकृत हो सकता है)। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को इनपुट की खरीद और उपज के विपणन में ‘इकोनॉमी ऑफ स्केल’ का लाभ दिलाना है।

UPSC & State PCS Mains Analysis: कृषि सुधार और ग्रामीण विकास के दृष्टिकोण से कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ मॉडल

मुख्य परीक्षा के प्रशासनिक और आर्थिक नियोजन (Economic Planning) के दृष्टिकोण से कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ मॉडल सतत कृषि (Sustainable Agriculture) और सहकारिता आधारित विपणन की दिशा में एक क्रांतिकारी उदाहरण है। भारतीय कृषि में सबसे बड़ी संरचनात्मक समस्या ‘जोत का छोटा आकार’ (Fragmentation of Landholdings) है, जिसके कारण छोटे किसान न तो आधुनिक तकनीक अपना पाते हैं और न ही विपणन में उनकी मोलतोल की शक्ति (Bargaining Power) होती है।

इस समस्या के समाधान के रूप में, सोनहत गौरव एग्रोफेड जैसे सहकारी एफपीओ ‘सामूहिकता के सिद्धांत’ को लागू करते हैं। जब 832 आदिवासी किसान एक साथ आकर ब्रांडिंग करते हैं, तो वे सीधे वैश्विक बाजार का सामना करने में सक्षम हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण की दृष्टि से, रासायनिक खेती से बंजर होती भूमि के विकल्प के रूप में जीवामृत और बीजामृत आधारित प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य को बहाल करती है। यह सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-12: जिम्मेदारीपूर्ण उपभोग और उत्पादन तथा SDG-2: शून्य भुखमरी और सतत कृषि) के अनुकूल है। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में ऐसे मॉडल्स का विस्तार न केवल ग्रामीण ऋणग्रस्तता को कम करेगा, बल्कि कृषि से होने वाले पलायन को भी रोकने में एक अत्यंत मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण कृषि सुशासन और जीआई टैग विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में चर्चा में रहे कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ के तहत किस जिले के सोनहत विकासखंड में जीराफूल धान के प्रसंस्करण और ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है?

(A) सरगुजा जिला
(B) कोरिया जिला (Korea District)
(C) बिलासपुर जिला
(D) जशपुर जिला

उत्तर: (B) कोरिया जिला (Korea District)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड में ‘सोनहत गौरव एग्रोफेड’ सहकारी समिति के माध्यम से जीराफूल चावल की ब्रांडिंग और विपणन किया जा रहा है।

प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ के किस पहले कृषि उत्पाद को वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI Tag) प्रदान किया गया था, जिसे वर्तमान में कोरिया जिले में प्राकृतिक रूप से उगाया जा रहा है?

(A) नगरी दुबराज चावल
(B) जीराफूल चावल (Jeerafool Rice)
(C) चिन्नौर धान
(D) सरगुजा महुआ

उत्तर: (B) जीराफूल चावल (Jeerafool Rice)
व्याख्या: जीराफूल चावल छत्तीसगढ़ का पहला कृषि उत्पाद था जिसे वर्ष 2019 में जीआई टैग (GI Tag) मिला था। यह अत्यंत सुगंधित और स्वादिष्ट चावल है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ क्या है और यह क्यों चर्चा में है?

कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ (सोनहत गौरव एग्रोफेड) छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के किसानों का एक संगठित समूह है जो प्राकृतिक खेती से उत्पादित जीराफूल चावल की ब्रांडिंग और विपणन करता है। हाल ही में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा इस मॉडल की सराहना की गई है।

Q2. जीराफूल धान की खेती में किस प्रकार के प्राकृतिक इनपुट का उपयोग किया जा रहा है?

इसकी खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद का उपयोग नहीं होता है। किसान खेतों में पूर्णतः जैविक और जैव-आधारित तत्वों जैसे ‘जीवामृत’ और ‘बीजामृत’ का उपयोग कर रहे हैं।

Q3. इस चावल की गुणवत्ता और शुद्धता के प्रमाणन के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई गई है?

जीराफूल चावल की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इसे भारत सरकार के मानकों के अनुसार ‘पीजीएस-प्राकृतिक खेती प्रमाणन’ (PGS-India Natural Farming Certification) के तहत बाजार तक पहुंचाया जा रहा है।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • किसानों की आय में सुधार: कोरिया जीराफूल चावल एफपीओ की सफलता ने साबित किया है कि पारंपरिक कृषि उत्पादों को यदि वैज्ञानिक मूल्य संवर्धन और संगठित विपणन से जोड़ा जाए, तो छोटे किसानों की मोलतोल की शक्ति को दोगुना किया जा सकता है।
  • कीटनाशक-मुक्त कृषि का विस्तार: जीवामृत और बीजामृत के प्रयोग से बंजर होती भूमि की उर्वरता को बचाया जा रहा है और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक पीजीएस-प्रमाणित जीराफूल चावल मिल रहा है।
  • राष्ट्रीय मंच पर पहचान: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के प्रोत्साहन से छत्तीसगढ़ का यह जीआई-टैग प्राप्त पारंपरिक चावल अब राष्ट्रीय स्तर पर एक विश्वसनीय जैविक ब्रांड बन चुका है।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का कृषि और आर्थिक विकास, जीआई टैग उत्पाद), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, जनजातीय कल्याण योजनाएं), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (सतत कृषि, कृषक उत्पादक संगठन – FPOs, जैविक खेती, मूल्य संवर्धन, और कृषि विपणन सुधार) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG), कोरिया जिला कलेक्टरेट प्रशासन, छत्तीसगढ़ कृषि एवं कल्याण विभाग, तथा सोनहत गौरव एग्रोफेड सहकारी समिति द्वारा 18 अगस्त 2026 को कोरिया में जारी की गई आधिकारिक प्रगति और कृषि विपणन समीक्षा रिपोर्ट पर आधारित है।

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