23 August 2026, Raipur | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
भारत के किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाने, बाजार में संकटकालीन बिक्री (Distress Sales) को समाप्त करने और कृषि विपणन में पूर्ण पारदर्शिता लाने की दिशा में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत एक व्यापक ढांचागत बदलाव लाया गया है। 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से जारी आधिकारिक बजटीय प्रगति प्रतिवेदन के अनुसार, केंद्र सरकार ने देश के छोटे, सीमांत और वनांचल अंचलों के कृषकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की विनियामक सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
कृषि क्षेत्र में मूल्य स्थिरता और किसानों की आय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित यह योजना अब अधिक पारदर्शी और डिजिटल प्रणालियों (e-Governance) से लैस हो चुकी है। इस प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी नोडल सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दलहन, तिलहन और कोपरा की समयबद्ध और कड़ाई से खरीद सुनिश्चित की जा रही है, जो ग्रामीण कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है।
| महत्वपूर्ण संकेतक | प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के मुख्य बजटीय आंकड़े व घटक |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA – बजट 2026-27) |
| प्रारंभिक लॉन्च वर्ष | सितंबर 2018 (किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने हेतु) |
| बजटीय आवंटन (2026-27) | ₹7,200.00 करोड़ की ऐतिहासिक राशि स्वीकृत (2025-26 में ₹6,941.36 करोड़ थी) |
| प्रमुख विनियामक घटक | मूल्य समर्थन योजना (PSS), मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF), मूल्य न्यूनता भुगतान (PDPS), और MIS |
| दलहन खरीद विशेष छूट | घरेलू आत्मनिर्भरता हेतु अरहर, उड़द और मसूर की 100% तक सरकारी खरीद मंजूर |
| डिजिटल सुधार प्रणालियां | आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, ई-नाम (e-NAM), ई-समृद्धि, ई-संयुक्त |
| प्रमुख विनिर्माण भागीदार | नाफेड (NAFED) एवं एनसीसीएफ (NCCF) सहकारी विपणन संगठन |
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान: चार प्रमुख नीतिगत घटक और संस्थागत ढांचा
कृषि बाजार में अस्थिरता और फसलों की कटाई के समय कीमतों में होने वाली गिरावट को रोकने के लिए यह अभियान एक एकीकृत और बहु-आयामी विनियामक ढांचा प्रदान करता है। वर्ष 2018 में शुरू किया गया प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) आज भारतीय किसानों की आय को स्थिर बनाने का सबसे बड़ा आधार बन चुका है, जिसके चार मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
- 1. मूल्य समर्थन योजना (PSS – Price Support Scheme): जब फसलों की कटाई के समय बाजार कीमतें एमएसपी (MSP) से नीचे गिर जाती हैं, तो राज्य सरकारों के अनुरोध पर नाफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियां सीधे किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न (विशेष रूप से दलहन, तिलहन और कोपरा) खरीदती हैं। इस वर्ष से दलहन आत्मनिर्भरता को गति देने के लिए अरहर, उड़द और मसूर की 100% तक सरकारी खरीद की मंजूरी दी गई है।
- 2. मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF): यह कोष आलू, प्याज और दालों जैसी आवश्यक कृषि-बागवानी वस्तुओं का बफर स्टॉक (Buffer Stock) बनाकर उपभोक्ताओं को महंगाई की मार से बचाता है। इसका प्रबंधन उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा किया जाता है।
- 3. मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS): इस नवीन योजना के तहत सरकार स्वयं अनाज नहीं खरीदती, बल्कि मंडी में बेची गई फसल की बाजार कीमत और घोषित एमएसपी के अंतर को सीधे किसानों के बैंक खातों में (डीबीटी के माध्यम से) ट्रांसफर करती है, जो मुख्य रूप से तिलहन फसलों के लिए प्रयुक्त होता है।
- 4. बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS): यह गैर-एमएसपी और जल्दी खराब होने वाले बागवानी उत्पादों (जैसे टमाटर, प्याज, आलू) के लिए संचालित की जाती है। जब बाजार में कीमतों में 10% से अधिक की गिरावट आती है, तो केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर लागत साझा करके बाजार से फसल खरीदती हैं।
बजट में ₹7,200 करोड़ का वित्तीय संबल और फसलों के आकर्षक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
इस वर्ष किसानों को लागत के ऊपर एक मजबूत और लाभकारी रिटर्न सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत बजटीय आवंटन को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में बढ़ाकर सीधे ₹7,200 करोड़ कर दिया गया है, जो इस प्रकार है:
- Remunerative Returns (2026-27):
- गेहूं: उत्पादन लागत ₹1,239 प्रति क्विंटल, जबकि एमएसपी ₹2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित है (किसानों को शुद्ध ₹1,346 का मुनाफा)।
- जूट: उत्पादन लागत ₹3,662 प्रति क्विंटल, जबकि एमएसपी ₹5,925 प्रति क्विंटल है (सबसे अधिक ₹2,293 का मार्जिन)।
- सोयाबीन (पीला): उत्पादन लागत ₹3,805 प्रति क्विंटल, एमएसपी ₹5,708 प्रति क्विंटल (मार्जिन ₹1,903)।
- धान (सामान्य): उत्पादन लागत ₹1,627 प्रति क्विंटल, एमएसपी ₹2,441 प्रति क्विंटल (मार्जिन ₹814)।
- कृषि विपणन अवसंरचना का विस्तार: कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत अब तक ₹96,426 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। साथ ही, राष्ट्रीय डिजिटल कृषि मंच ‘ई-नाम’ (e-NAM) के साथ 23 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों की 1,656 मंडियों को जोड़ा जा चुका है, जहाँ ₹4,94,847 करोड़ का व्यापार दर्ज किया गया है।
बिहार और छत्तीसगढ़ में पीएम-आशा योजना का सफल और प्रभावी क्रियान्वयन
भारतीय कृषि विकास प्रणालियों के तहत विभिन्न राज्यों ने इस मिशन का व्यावहारिक और स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में सहकारिता और पैक्स (PACS) प्रणालियों के मजबूत नेटवर्क के कारण प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के क्रियान्वयन को अत्यधिक बढ़ावा मिला है:
- छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक कोसा व दलहन खरीद: 10 अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 200 सक्रिय प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) और 12 FPOs के मजबूत नेटवर्क के माध्यम से एनसीसीएफ ने 18,392.228 मीट्रिक टन चना, 22.231 मीट्रिक टन मसूर और 1035.0205 मीट्रिक टन सरसों का रिकॉर्ड उपार्जन किया है। नाफेड ने भी राज्य में 17,020.65 मीट्रिक टन चना और 355.05 मीट्रिक टन मसूर का उपार्जन कर कुल 27 हजार से अधिक किसानों को सीधे लाभान्वित किया है।
- बिहार में मसूर का पहली बार संगठित उपार्जन: बिहार में भी पहली बार एनसीसीएफ और नाफेड के माध्यम से प्राथमिक समितियों (PACS) के जरिए बड़े पैमाने पर मसूर (Lentils) की संगठित खरीद शुरू की गई है, जिससे राज्य में दलहन आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है।
UPSC & CGPSC Agriculture Policy Fact Box: NAFED, NCCF & Market Intervention
- नाफेड (NAFED – National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India): इसकी स्थापना 2 अक्टूबर 1958 को (गांधी जयंती पर) की गई थी। यह बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत देश की सर्वोच्च कृषि सहकारी विपणन संस्था है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन और तिलहन की नोडल खरीद करती है।
- एनसीसीएफ (NCCF – National Cooperative Consumers’ Federation of India): इसकी स्थापना 16 अक्टूबर 1965 को की गई थी। यह उपभोक्ता सहकारी समितियों की शीर्ष राष्ट्रीय संस्था है, जो आवश्यक खाद्य वस्तुओं के बफर स्टॉक प्रबंधन और एमएसपी खरीद में सह-नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है।
- e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार): यह 14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है, जो कृषि जिंसों के लिए ‘एक राष्ट्र, एक बाजार’ सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा एपीएमसी (APMC) मंडियों को एकीकृत करता है।
UPSC & State PCS Mains Analysis: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की विनियामक प्रभावशीलता, बाजार की विफलताएं और राजकोषीय नीति
मुख्य परीक्षा के कृषि अर्थशास्त्र (Agricultural Economics), खाद्य सुरक्षा और सहकारी सुशासन के दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान का यह व्यवस्थित और वैज्ञानिक ढांचा भारत के कृषि सुधारों की दिशा में मील का पत्थर है। भारतीय कृषि में सबसे बड़ी संरचनात्मक कमजोरी ‘बाजार की विफलता’ (Market Failure) है, जिसके कारण कटाई के समय अधिक आवक (Glut situation) होने पर फसल की कीमतें औंधे मुंह गिर जाती हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसान कर्ज के दुष्चक्र (Debt Trap) में फंस जाते हैं।
इस गंभीर आर्थिक विसंगति से निपटने के लिए, केवल पारंपरिक चावल-गेहूं खरीद तक सीमित न रहकर दलहन और तिलहन को मूल्य समर्थन योजना (PSS) के दायरे में लाना तथा खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना (AIF) का विकास करना ‘फसल विविधीकरण’ (Crop Diversification) को बढ़ावा देता है। इसके अतिरिक्त, पीडीपीएस (PDPS) जैसी गैर-खरीद मूल्य न्यूनता भुगतान प्रणालियाँ सरकार के विशाल भंडारण खर्च (Fiscal Carrying Costs) को कम करती हैं और सीधे किसानों के खातों में सब्सिडी का पारदर्शी हस्तांतरण (DBT) सुनिश्चित करती हैं। यह एकीकृत नीतिगत ढांचा सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-1: शून्य गरीबी, SDG-2: शून्य भुखमरी और सतत कृषि, तथा SDG-12: जिम्मेदारीपूर्ण उपभोग और उत्पादन) के समयबद्ध लक्ष्यों को पूरा करने में देश की ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था के विकास की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण कृषि नीति और संबंधित कूटनीतिक संस्थाओं पर अपनी समझ का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल कितने करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन स्वीकृत किया गया है?
(A) ₹5,437.99 करोड़
(B) ₹7,200.00 करोड़ (Total ₹7,200 Crore Allocated)
(C) ₹6,941.36 करोड़
(D) ₹10,000.00 करोड़
उत्तर: (B) ₹7,200.00 करोड़ (Total ₹7,200 Crore Allocated)
व्याख्या: किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए पीएम-आशा योजना के तहत इस वित्तीय वर्ष में बजट को बढ़ाकर ₹7,200 करोड़ कर दिया गया है, जो 2025-26 में ₹6,941.36 करोड़ था।
प्रश्न 2: प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण योजना (PM-AASHA) के उस विशिष्ट नीतिगत घटक को क्या नाम दिया गया है, जिसके तहत सरकार भौतिक रूप से खाद्यान्न की खरीद नहीं करती, बल्कि केवल एमएसपी (MSP) और मंडी के बाजार मूल्य के अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित करती है?
(A) मूल्य समर्थन योजना (PSS)
(B) मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS – Price Deficiency Payment Scheme)
(C) बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS)
(D) मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF)
उत्तर: (B) मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS)
व्याख्या: मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) के तहत भौतिक खरीद के बिना किसानों को एमएसपी और वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर का (अधिकतम 15% एमएसपी मूल्य तक) सीधा बैंक भुगतान किया जाता है, जो मुख्य रूप से तिलहनों के लिए प्रयुक्त होता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान क्या है और इसे किस मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा है?
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसकी शुरुआत सितंबर 2018 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
Q2. इस अभियान के तहत ‘बाजार हस्तक्षेप योजना’ (MIS) किन फसलों के लिए और किस परिस्थिति में सक्रिय की जाती है?
यह योजना उन शीघ्र खराब होने वाले बागवानी और कृषि उत्पादों (जैसे टमाटर, प्याज, आलू) के लिए लागू की जाती है जिनके लिए एमएसपी निर्धारित नहीं होता है। जब इन फसलों की कीमतें पिछले सामान्य सीजन की तुलना में कम से कम 10% से अधिक गिर जाती हैं, तब केंद्र और राज्य मिलकर नाफेड/एनसीसीएफ के माध्यम से बाजार हस्तक्षेप कर खरीद शुरू करते हैं।
Q3. इस योजना के तहत दलहन आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में क्या बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया है?
वर्ष 2024-25 के सुधारों के तहत, नियमित फसलों की 25% सीमा के विपरीत, अरहर (Tur), उड़द (Urad) और मसूर (Masur) जैसी प्रमुख दलहनी फसलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए राज्यों में इनकी कुल उत्पादन का शत-प्रतिशत (100%) तक एमएसपी पर उपार्जन मंजूर किया गया है।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- किसानों को सशक्त वित्तीय संबल: प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के प्रभावी निष्पादन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में ₹7,200 करोड़ की बड़ी राशि आबंटित की गई है, जो किसानों को संकटकालीन बिक्री (Distress Sales) से बचाएगी।
- डिजिटल और पारदर्शी सुधार: आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, ई-नाम (e-NAM) और केंद्रीकृत ई-समृद्धि प्रणालियों के कुशल उपयोग ने खरीद प्रणालियों में बिचौलियों के हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
- छत्तीसगढ़ और बिहार में सफल क्रियान्वयन: छत्तीसगढ़ में 200 पीएसीएस (PACS) और 12 एफपीओ के मजबूत नेटवर्क तथा बिहार में पहली बार मसूर की संगठित खरीद के जरिए दालों की राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा रहा है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ और भारत का कृषि नियोजन, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कृषि बजट और विपणन सुधार) तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सरकारी नीतियां और उनका क्रियान्वयन, महत्वपूर्ण वैधानिक सहकारी संस्थाएं – नाफेड, एनसीसीएफ) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था – न्यूनतम समर्थन मूल्य – MSP की प्रासंगिकता, कृषि अवसंरचना कोष – AIF, और समावेशी विकास) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक आर्थिक विषय है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi), उपभोक्ता मामले विभाग, नाफेड (NAFED), और छत्तीसगढ़ राज्य विपणन संघ द्वारा 21 अगस्त 2026 को जारी किए गए आधिकारिक वार्षिक बजटीय आवंटन प्रतिवेदनों और राज्यों की एमएसपी खरीद सांख्यिकी रिपोर्टों पर आधारित है।