Published on 18 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
देश की रक्षा प्राथमिकताओं में महिला सशक्तिकरण और ‘नारी शक्ति’ के अदम्य साहस को रेखांकित करते हुए, एनसीसी के ऐतिहासिक अभियान अपराजिता परांग ला 2026 (Aparajita – Parang La 2026) को आज हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। आज 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस अखिल भारतीय गर्ल्स हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग ट्रेक का शुभारंभ किया।
यह दुर्गम ट्रेकिंग अभियान भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय मार्गों में से एक, परांग ला दर्रे (समुद्र तल से 5,578 मीटर या 18,300 फीट की ऊंचाई) को पार करेगा। यह मार्ग हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध स्पीति घाटी को केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के चांगथांग पठार से जोड़ता है। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि अपराजिता परांग ला 2026 अभियान में भाग ले रही युवा लड़कियों का यह साहस राष्ट्र की आधी आबादी के बढ़ते आत्मविश्वास और असाधारण शारीरिक व मानसिक क्षमताओं का जीवंत प्रमाण है।
| महत्वपूर्ण संकेतक | अपराजिता परांग ला 2026 अभियान के मुख्य तथ्य और भौगोलिक विवरण |
|---|---|
| अभियान का नाम | अपराजिता परांग ला 2026 ट्रेकिंग अभियान |
| प्रारंभ तिथि और स्थान | 18 अगस्त 2026, नई दिल्ली (रक्षा मंत्री द्वारा हरी झंडी) |
| कुल दूरी और अवधि | लगभग 250 किलोमीटर (कुल 30 दिवसीय अभियान) |
| दर्रे की कुल ऊंचाई | 5,578 मीटर (18,300 फीट) – परांग ला दर्रा (Parang La Pass) |
| कुल महिला कैडेट्स संख्या | 28 एनसीसी गर्ल कैडेट्स (औसत आयु: 19 वर्ष, न्यूनतम आयु: 16.5 वर्ष) |
| नेतृत्वकर्ता अधिकारी | थल सेना, नौसेना और वायु सेना (तीनों सेनाओं) की महिला अधिकारी |
| अभियान की मुख्य थीम | नारी शक्ति, राष्ट्रीय एकता, नेतृत्व क्षमता और शून्य-अपशिष्ट पर्यावरण नीति |
अपराजिता परांग ला 2026: नारी शक्ति और साहसिक पर्वतारोहण की एक नई मिसाल
यह पहला अवसर है जब इतनी कम उम्र की लड़कियों का एक बड़ा समूह हिमालय के सबसे दुर्गम ग्लैशियरों और शून्य से नीचे के तापमान वाले क्षेत्रों में कदम रख रहा है:
- तीनों सेनाओं का संयुक्त नेतृत्व: सैन्य इतिहास में समन्वय की मिसाल पेश करते हुए, तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) की महिला अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित अपराजिता परांग ला 2026 अभियान में कुल 28 महिला कैडेट्स हिस्सा ले रही हैं। इसमें शामिल सबसे युवा कैडेट की आयु मात्र साढ़े सोलह (16.5) वर्ष है।
- नेतृत्व और मानसिक सुदृढ़ता का विकास: रक्षा मंत्री ने कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के साहसिक अभियान युवाओं में विपरीत परिस्थितियों से लड़ने, नेतृत्व क्षमता (Leadership) का विकास करने, कड़े अनुशासन और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
बंजर मरुस्थल से ग्लेशियर तक: अपराजिता परांग ला 2026 का दुर्गम मार्ग और तैयारी
हिमालय के इस ऐतिहासिक मार्ग पर बढ़ना किसी भी पेशेवर पर्वतारोही के लिए भी एक परीक्षा के समान होता है, जिसके लिए कैडेटों को कठोर प्रशिक्षण दिया गया है:
- दुर्गम भौगोलिक मार्ग: स्पीति घाटी के किब्बर (Kibber) से शुरू होकर यह दल दुमला, थलताक, बोंगराजेन होते हुए परांग ला दर्रे को पार करेगा। इसके बाद दक कारजोंग, नोर्बु सुम्डो, कियांगडोम और कोरजोक होते हुए यह दल लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र तक लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय करेगा, जिससे अपराजिता परांग ला 2026 देश का सबसे कठिन हाई एल्टीट्यूड ट्रेक बन जाता है। इस यात्रा में उन्हें ठंडे मरुस्थल, विशाल ग्लेशियर, गहरी बर्फीली नदियां और बर्फीले तूफानों का सामना करना होगा।
- कठोर चयन और अनुकूलन प्रक्रिया (Acclimatisation): महानिदेशक एनसीसी लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स के अनुसार, इस अंतिम अभियान से पहले कैडेटों का कड़ा शारीरिक और चिकित्सा परीक्षण किया गया था। तैयारी के पहले चरण के तहत हिमाचल के ‘भाभा-पिन वैली सेक्टर’ (Bhaba-Pin Valley) में एक कठिन अनुकूलन ट्रेक आयोजित किया गया था, जिसके बाद ही योग्यता के आधार पर इन 28 कैडेट्स का अंतिम चयन किया गया है।
- पर्यावरण और पारिस्थितिकी का संरक्षण: रक्षा मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि हिमालयी पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए दल को ‘शून्य-अपशिष्ट’ (Zero-waste approach) नीति का कड़ाई से पालन करना होगा और स्थानीय पहाड़ी समुदायों की संस्कृति व परंपराओं का सम्मान करना होगा।
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- परांग ला दर्रा (Parang La Pass): यह प्राचीन व्यापारिक मार्ग का हिस्सा है जो स्पीति घाटी (लाहौल-स्पीति जिला, हिमाचल प्रदेश) को लद्दाख के लेह जिले से जोड़ता है। यह प्रसिद्ध त्सो मोरीरी झील (Tso Moriri Lake) के समीप कोरजोक गाँव (Korzok) में जाकर समाप्त होता है। यह दर्रा लगभग पूरे वर्ष बर्फ से ढका रहता है।
- त्सो मोरीरी और कोरजोक: कोरजोक गाँव भारत के सबसे ऊंचे स्थायी बस्तियों में से एक है, जो रामसर कन्वेंशन (Ramsar Wetland Site) के तहत संरक्षित त्सो मोरीरी झील के तट पर स्थित है। यहाँ ‘नोमड’ चांगपा जनजाति का निवास है।
- राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC): इसकी स्थापना वर्ष 1948 में हृदयनाथ कुंजरू समिति (Kunzru Committee) की सिफारिशों पर की गई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वैच्छिक युवा संगठन है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसका आदर्श वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ (Unity and Discipline) है।
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मुख्य परीक्षा के सामाजिक न्याय, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण (Nation Building) के दृष्टिकोण से अपराजिता परांग ला 2026 अभियान भारत की रक्षा प्राथमिकताओं और सामाजिक एकीकरण का एक उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व करता है। पारंपरिक रूप से सैन्य और साहसिक पर्वतारोहण क्षेत्रों को पुरुषों के वर्चस्व वाला माना जाता था। परंतु भारतीय सशस्त्र बलों और एनसीसी में महिलाओं की क्रमिक और सक्रिय भागीदारी इस धारणा को बदल रही है।
इस अभियान का तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों द्वारा नेतृत्व किया जाना थल, नभ और जल तीनों मोर्चों पर महिलाओं की कमान सौंपने की भारत सरकार की नीति के अनुकूल है। इसके अतिरिक्त, इस अभियान में देश के विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों से आई कैडेट्स शामिल हैं, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के माध्यम से राष्ट्रीय भावनात्मक एकीकरण को बढ़ावा देती हैं। पर्यावरण संरक्षण (शून्य-अपशिष्ट दृष्टिकोण) पर जोर देना पारिस्थितिकीय सुशासन (Ecological Governance) और सतत साहसिक पर्यटन (Sustainable Adventure Tourism) के प्रति प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो अंततः देश की युवा पीढ़ी को अधिक संवेदनशील, अनुशासित और भविष्य की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से सुदृढ़ नागरिक बनाने की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण साहसिक अभियान और पर्वतीय भूगोल पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा हरी झंडी दिखाए गए एनसीसी गर्ल्स हाई एल्टीट्यूड ट्रेकिंग अभियान अपराजिता परांग ला 2026 के तहत किस दर्रे को पार किया जाएगा, जो स्पीति घाटी (हिमाचल) को चांगथांग (लद्दाख) से जोड़ता है?
(A) रोहतांग दर्रा
(B) परांग ला दर्रा (Parang La Pass)
(C) शिपकी ला दर्रा
(D) जोजी ला दर्रा
उत्तर: (B) परांग ला दर्रा (Parang La Pass)
व्याख्या: यह ट्रेकिंग दल 5,578 मीटर ऊंचे ‘परांग ला दर्रे’ को पार करेगा, जो स्पीति (हिमाचल प्रदेश) को चांगथांग लद्दाख से जोड़ने वाला एक अत्यंत दुर्गम मार्ग है।
प्रश्न 2: ‘अपराजिता’ पर्वतारोहण अभियान के अंतिम पड़ाव के रूप में चर्चित ‘कोरजोक गाँव’ (Korzok) लद्दाख की किस प्रसिद्ध रामसर आर्द्रभूमि (Ramsar Wetland Site) और झील के तट पर स्थित है?
(A) पैंगोंग त्सो झील
(B) त्सो मोरीरी झील (Tso Moriri Lake)
(C) त्सो कार झील
(D) चंद्रताल झील
उत्तर: (B) त्सो मोरीरी झील (Tso Moriri Lake)
व्याख्या: कोरजोक गाँव लद्दाख की प्रसिद्ध मीठे/खारे पानी की ‘त्सो मोरीरी’ (Tso Moriri) झील के किनारे स्थित है, जो इस 250 किलोमीटर लंबे ट्रेक का अंतिम पड़ाव है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. अपराजिता परांग ला 2026 अभियान क्या है और इसे किसने शुरू किया है?
अपराजिता परांग ला 2026 राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) का एक प्रतिष्ठित अखिल भारतीय महिला पर्वतारोहण और ट्रेकिंग अभियान है। इसे भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
Q2. इस दुर्गम पर्वतारोहण अभियान की दूरी और समय सीमा क्या है?
यह दल तीनों सेनाओं (थल, नौसेना, वायुसेना) की महिला अधिकारियों के नेतृत्व में कुल 30 दिनों में लगभग 250 किलोमीटर का सफर तय करेगा। इस यात्रा में वे हिमाचल प्रदेश के किब्बर से लद्दाख के कोरजोक तक की दूरी तय करेंगे।
Q3. इस अभियान की चयन प्रक्रिया के तहत कैडेटों का अनुकूलन (Acclimatisation) कहाँ किया गया था?
अत्यधिक ऊंचाई पर सांस लेने और चलने के अनुकूल शरीर को ढालने के लिए एनसीसी कैडेटों का प्रारंभिक प्रशिक्षण और चयन अभियान हिमाचल प्रदेश के ‘भाभा-पिन वैली सेक्टर’ (Bhaba-Pin Valley) में आयोजित किया गया था।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- महिला सशक्तिकरण का शिखर: अपराजिता परांग ला 2026 अभियान देश के विभिन्न एनसीसी निदेशालयों के कैडेटों को एक साझा मंच प्रदान करके ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करता है।
- ग्लेशियर और ठंडे मरुस्थल की चुनौती: 28 महिला कैडेट्स का यह दल 5,578 मीटर ऊंचे परांग ला दर्रे को पार करके लद्दाख के चांगथांग तक 250 किमी लंबा साहसिक मार्ग तय करेगा।
- शून्य-अपशिष्ट पर्यावरण नीति: हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी को बचाने के लिए रक्षा मंत्री ने दल को शून्य-अपशिष्ट (Zero-waste) जीवन शैली अपनाने और स्थानीय पहाड़ी जनजातियों की संस्कृति का आदर करने की सलाह दी है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (भारत का भौतिक भूगोल, दर्रे), पेपर-6 (महिला सशक्तिकरण नीतियां, सामाजिक एकीकरण), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारत का भौतिक भूगोल – हिमालयी दर्रे), सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सरकारी नीतियां और महिला सुरक्षा/सशक्तिकरण), तथा सामान्य अध्ययन पेपर-3 (आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक रक्षा विषय है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय (MoD), राष्ट्रीय कैडेट कोर महानिदेशालय (DG NCC), और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘अपराजिता’ फ्लैग-ऑफ समारोह की आधिकारिक प्रेस रिपोर्ट और विवरणों पर आधारित है।
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