रायपुर, 01 सितम्बर 2026: वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने नवा रायपुर के छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में एक विस्तृत प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में “हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के तहत वन विभाग की पिछले ढाई वर्षों की व्यापक उपलब्धियां गिनाईं।
मंत्री श्री कश्यप ने स्पष्ट किया कि सरकार के लिए वन संरक्षण का अर्थ केवल वनों की सुरक्षा नहीं है, बल्कि वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय, महिला रोजगार, वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक तकनीक से बेहतर वन प्रबंधन भी इसकी प्राथमिकता है।
1. वनवासी परिवारों की समृद्धि और रोजगार
छत्तीसगढ़ में जंगल और समुदायों के बीच गहरा संबंध है। इसे देखते हुए वनोपज संग्राहकों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं:
- तेंदूपत्ता संग्रहण: दर ₹5,500 प्रति मानक बोरा (देश में सर्वाधिक)। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों द्वारा 13.85 लाख मानक बोरा संग्रहण, जिसके लिए ₹757 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान किया गया।
- प्रोत्साहन एवं सुविधाएं: 7.14 लाख संग्राहकों को ₹153 करोड़ का प्रोत्साहन पारिश्रमिक। 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित, वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को वितरण प्रस्तावित।
- लघु वनोपज खरीदी: समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज की खरीदी, 13 हजार परिवारों को ₹16.66 करोड़ का भुगतान।
- राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना: 1862 प्रकरणों में ₹26.08 करोड़ का भुगतान।
- छात्रवृत्ति व नए केंद्र: तेंदूपत्ता संग्राहकों के 8,533 बच्चों को ₹12.07 करोड़ की छात्रवृत्ति। वर्ष 2026 में अति-संवेदनशील अबूझमाड़ में 13 नए तेंदूपत्ता फड़ (केंद्र) शुरू किए गए।
2. महिला सशक्तिकरण और ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’
किसान वृक्ष मित्र योजना: किसानों की आय और हरियाली बढ़ाने के लिए 5 एकड़ तक 100% और उससे अधिक पर 50% वित्तीय अनुदान। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ भूमि पर 3.675 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए।
वन धन केंद्र और आजीविका:
- पीएम जनजाति विकास मिशन एवं पीएम जनमन के तहत 6,000+ स्व-सहायता समूहों की 70,000+ महिलाएं लाभान्वित। महिला समूहों को ₹5 करोड़ से अधिक कमीशन।
- वन धन केंद्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पादों का निर्माण (मूल्य: ₹4.42 करोड़)।
- धमतरी में महानदी तट की 120 एकड़ भूमि पर खस का रोपण।
- गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, बिलासपुर, कांकेर, धमतरी और कोरबा की 1,854 महिलाओं द्वारा बाड़ियों में 64,798 सिंदूरी और 7,48,092 सतावर के पौधे लगाए गए।
3. वन्यजीव संरक्षण: बाघों की संख्या में 94% की ऐतिहासिक वृद्धि
मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि 2022 में प्रदेश में बाघों की संख्या 18 थी, जो 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। 2,829.387 वर्ग किमी में फैला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व (2024 में अधिसूचित) बन गया है। बांधवगढ़ से 3 बाघिनों को ट्रांसलोकेट करने की NTCA से अनुमति मिल चुकी है।
| वन्यजीव / पक्षी | संरक्षण पहल एवं वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| कृष्ण मृग (Blackbuck) | बारनवापारा में संख्या 77 से 200 पार। (PM मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में 26 अप्रैल 2026 को सराहना) |
| वन भैंसा (Wild Buffalo) | इन्द्रावती में 14-17 प्राकृतिक रूप से मौजूद। असम से लाए गए भैंसों की संख्या 6 से 11 हुई। |
| पहाड़ी मैना (Hill Myna) | राजकीय पक्षी की संख्या 800-900 दर्ज। ‘मैना मित्र’ योजना के तहत 250 घोंसलों की पहचान। |
| गिद्ध (Vulture) | अचानकमार के औरापानी में वल्चर सेफ जोन। इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में 3 प्रजातियों के 150 गिद्ध संरक्षित। |
| हाथी (Elephant) | ‘गज संकेत’ ऐप (सुशासन पुरस्कार)। 90 हाथी मित्र दलों के 545 सदस्य सक्रिय। |
4. पहला रामसर साइट और वैज्ञानिक वन प्रबंधन
कोपरा जलाशय (बिलासपुर) को राज्य का पहला ‘रामसर साइट’ (Ramsar Site) घोषित किया गया है। विजन 2047 के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में 20 रामसर साइट का लक्ष्य है। 11,096 आर्द्रभूमियों की बाउंड्री डिमार्केशन पूरी हुई है और 500 से अधिक ‘वेटलैंड मित्र’ कार्यरत हैं। 105 युवाओं को पैराटेक्सोनॉमी प्रशिक्षण दिया गया।
अनुसंधान और संरक्षण (Scientific Management):
- 17 वनमंडलों में 911 ‘सरना’ (पवित्र उपवन) का चिन्हांकन (2,928.16 हेक्टेयर)।
- 240 प्रवासी पक्षी प्रजातियों का डेटाबेस तैयार।
- 1 हेक्टेयर में 13 विभिन्न बांस प्रजातियों के 120 पौधों का बैम्बू सेटम स्थापित।
- चंदन के 14 वर्ष पुराने प्रायोगिक रोपण में 33% हार्डवुड कंटेंट पाया गया।
- 24 जिलों के 6,140 पारंपरिक वैद्यों को प्रशिक्षण। जामगांव (दुर्ग) में ₹94.75 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेदिक औषधि निर्माण केन्द्र की स्थापना।
- 72 जैविक प्रमाण-पत्र जारी, जिससे 4,057 संग्राहक और 21,471 किसान लाभान्वित।
5. दूरस्थ वनांचलों में बुनियादी सुविधाएं और ईको-टूरिज्म
बुनियादी विकास: पीएम जनमन योजना के तहत 20 प्रकरणों में 58 हेक्टेयर वनभूमि और 99.99 किमी मार्ग की अनुमति दी गई। वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में 1300-1400 किमी मार्ग को मंजूरी मिली। रिकार्ड 70 दिनों में 62 में से 59 BSNL टावरों को अनुमति दी गई। पिछले 2.5 वर्षों में 1168 प्रकरणों में स्कूल, अस्पताल, बिजली आदि के लिए वनभूमि का विपथन किया गया।
ईको-टूरिज्म (प्रकृति भी, प्रगति भी):
- प्रदेश में 240 प्राकृतिक पर्यटन केन्द्र, 50+ पूर्णतः स्वावलंबी।
- कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (200 वर्ग किमी) को वर्ष 2025 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यहाँ 35 जिप्सी वाहनों से 200 युवाओं को रोजगार मिला।
- बस्तर के धुड़मारास में ‘धुर्वाडेरा’ होमस्टे (5 कमरे), 60 लोगों को रोजगार।
- महासमुंद का शिशुपाल इको ट्रेल ₹45 लाख से विकसित। कवर्धा में 35 किमी नया सफारी मार्ग।
6. बस्तर में रोजगार, जनजातीय संस्कृति और संयुक्त वन प्रबंधन
बस्तर में शांति और रोजगार: सुरक्षा सुदृढ़ होने से दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर आदि अति-संवेदनशील क्षेत्रों में इमारती लकड़ी एवं बांस विदोहन कार्य पुनः प्रारंभ। इससे 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन का अनुमान है। संस्कृति संरक्षण के तहत 572 देव गुड़ियों का निर्माण/जीर्णोद्धार किया गया। गढ़बेंगाल (नारायणपुर) में घोटुल का संरक्षण किया जा रहा है।
संयुक्त वन प्रबंधन समितियां: लाभांश राशि से मधुमक्खी, मुर्गी, बकरी व मत्स्य पालन। 78 तालाबों में 3,200 क्विंटल मछली उत्पादन। चक्रीय निधि से ₹2,170.15 लाख का ऋण 700 परिवारों को दिया गया।
7. आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित वन प्रशासन
वन विभाग में एंड-टू-एंड डिजिटाइजेशन कर इसे RBI के ई-कुबेर और ई-कोष से एकीकृत किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1,520 करोड़ और 2026-27 (अगस्त 2026 तक) में ₹209 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान हुआ।
- SPARROW: 8,975 अधिकारी-कर्मचारी ऑनबोर्ड, 9,464 PAR जनरेट।
- eHRMS: 32,869 अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनबोर्ड।
- iGOT कर्मयोगी: 9,230 कर्मचारी ऑनबोर्ड।
- मुख्यालय से वनमंडल स्तर तक शत-प्रतिशत ई-ऑफिस लागू।
- फारेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम: रियल टाइम अलर्ट से रिस्पांस टाइम 1-2 घंटे से घटकर मात्र 5-10 मिनट रह गया है।
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विश्लेषण: वन विभाग की ये उपलब्धियां क्यों मायने रखती हैं?
(विश्लेषण)
पहला, सूक्ष्म से वृहद (Micro to Macro) प्रबंधन। केवल बड़े जानवरों (बाघ) पर फोकस नहीं है, बल्कि ‘बैम्बू सेटम’, चंदन की खेती, और 911 ‘सरना’ (पवित्र उपवन) के संरक्षण जैसे सूक्ष्म वैज्ञानिक कार्य भी हो रहे हैं। यह वन विभाग के वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) को दर्शाता है।
दूसरा, पीएम जनमन और वनाधिकार (FRA) का बेहतर उपयोग। 1168 से अधिक मामलों में वनभूमि का डाइवर्जन कर स्कूल, अस्पताल और 59 BSNL टावर लगाना यह साबित करता है कि वन कानून अब विकास के रास्ते का रोड़ा नहीं, बल्कि सुदूर क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं।
तीसरा, डिजिटल गवर्नेंस में क्रांति। ई-कुबेर से करोड़ों का भुगतान, SPARROW, eHRMS, और iGOT कर्मयोगी पर हजारों कर्मचारियों का ऑनबोर्ड होना वन विभाग में अभूतपूर्व पारदर्शिता लाया है। 5-10 मिनट का ‘फायर रिस्पांस टाइम’ तकनीकी सक्षमता का बेहतरीन उदाहरण है।
चौथा, जनजातीय आस्था का सम्मान। 572 देव गुड़ियों का जीर्णोद्धार और नारायणपुर में घोटुल संरक्षण केवल सांस्कृतिक कदम नहीं हैं, बल्कि यह आदिवासी समुदायों का सरकार और वन विभाग पर विश्वास (Trust Deficit कम करना) जीतने की प्रभावी रणनीति है।
CGPSC/UPSC परीक्षा दृष्टि से प्रासंगिक बिंदु
- CGPSC Pre/Vyapam: तथ्य — कोपरा जलाशय (रामसर), गुरुघासीदास (3rd टाइगर रिजर्व), बाघ (35), राजमोहिनी देवी योजना, तेंदूपत्ता (₹5500), जामगांव दुर्ग (आयुर्वेदिक केंद्र)।
- CGPSC Paper-5 (Part-3): छत्तीसगढ़ का भूगोल — वन संसाधन (बांस, चंदन), वन्यजीव संरक्षण (कृष्ण मृग, पहाड़ी मैना, वन भैंसा)।
- CGPSC Paper-7 (Part-2): पर्यावरण एवं जैव विविधता — रामसर साइट्स (कोपरा), हाथी-मानव द्वंद (‘गज संकेत’), वेटलैंड संरक्षण, सरना संरक्षण।
- UPSC GS-2 / GS-3: Governance (e-Office, e-Kuber integration in Forest Dept), PM JANMAN implementation in LWE areas.
तीन प्रमुख बातें
- वन्यजीव एवं पर्यावरण: बाघों की संख्या 35 हुई, गुरुघासीदास देश का तीसरा बड़ा टाइगर रिजर्व। कोपरा राज्य का पहला रामसर साइट। कांगेर घाटी यूनेस्को अस्थायी सूची में शामिल। 911 ‘सरना’ संरक्षित।
- आर्थिक एवं बुनियादी विकास: तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5500 रु/बोरा (757 करोड़ रु का भुगतान)। ‘किसान वृक्ष मित्र’ से 3.6 करोड़ पौधे रोपे गए। दुर्ग के जामगांव में राष्ट्रीय आयुर्वेदिक केंद्र। FRA के तहत 59 BSNL टावर और सड़कें मंजूर।
- डिजिटल एवं वैज्ञानिक प्रशासन: SPARROW, eHRMS और ई-कुबेर से 100% ऑनलाइन भुगतान एवं प्रशासन। ‘फायर अलर्ट सिस्टम’ से रिस्पांस टाइम 5-10 मिनट हुआ। ‘गज संकेत’ ऐप को सुशासन पुरस्कार।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. वन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट (Ramsar Site) किसे घोषित किया गया है?
बिलासपुर जिले के ‘कोपरा जलाशय’ को छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। विजन 2047 के तहत 2030 तक 20 रामसर साइट बनाने का लक्ष्य है।
Q2. राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेदिक औषधि निर्माण केन्द्र की स्थापना कहाँ की गई है?
दुर्ग जिले के जामगांव में ₹94.75 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेदिक औषधि निर्माण केन्द्र की स्थापना की गई है।
Q3. छत्तीसगढ़ वन विभाग में डिजिटल प्रशासन के लिए कौन-कौन से पोर्टल लागू किए गए हैं?
वन विभाग ने 100% ऑनलाइन भुगतान के लिए RBI के ई-कुबेर को अपनाया है। इसके अलावा अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए SPARROW, eHRMS, iGOT कर्मयोगी और वनमंडल स्तर तक शत-प्रतिशत ई-ऑफिस लागू किया गया है।
स्रोत
छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), प्रेस वार्ता (श्री केदार कश्यप, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री), 01 सितम्बर 2026, रायपुर।
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