Jal Sanchay Surajpur: जल संरक्षण में सूरजपुर का ऐतिहासिक प्रदर्शन, देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में मिला पहला स्थान

Jal Sanchay Surajpur Jal Sanchay Surajpur

रायपुर / सूरजपुर, 4 सितंबर 2026: जब समाज और प्रशासन मिलकर पानी की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लेते हैं, तो सफलता की ऐसी ही ऐतिहासिक दास्तान लिखी जाती है। जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता की अमिट छाप छोड़ी है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण के तहत Jal Sanchay Surajpur मॉडल ने पूरे देश में चौथा (4th) और छत्तीसगढ़ राज्य में पहला (1st) स्थान प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के शिखर सम्मेलन में इस सफलता का डंका बजा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच पर सूरजपुर मॉडल की जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य में जल संरक्षण अब फाइलों का विषय नहीं रहा। इसे केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखकर किसान, ग्राम पंचायत, ‘जल सखी’ और ‘जल मित्र’ के सहयोग से एक जनांदोलन (Mass Movement) का रूप दे दिया गया है।

जिले की इस अभूतपूर्व सफलता पर सूरजपुर कलेक्टर और जिला पंचायत प्रशासन ने खुशी व्यक्त की है और इसका पूरा श्रेय ग्रामीणों के ‘श्रमदान’ और जागरूकता को दिया है।

सूरजपुर जल संरक्षण: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
रैंकिंग (Ranking)देश में चौथा (4th), छत्तीसगढ़ में प्रथम (1st)
अभियान का नामजल संचय जन भागीदारी अभियान (तीसरा चरण)
निर्मित जल संरचनाएं5,429 (अमृत सरोवर, फार्म पॉन्ड आदि)
जल भराव क्षमता94.89 लाख घन मीटर
सिंचित रकबे में बढ़ोतरी5,608.26 हेक्टेयर

जल संरक्षण अभियान के प्रमुख और सटीक आंकड़े

Jal Sanchay Surajpur के तहत जिले भर में युद्धस्तर पर कार्य किया गया है। अभियान के 100% सटीक आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • संरचनाओं की विविधता: जिले में कुल 5,429 जल संरचनाएं निर्मित की गई हैं। इनमें अमृत सरोवर, तालाब गहरीकरण, फार्म पॉन्ड (Farm Ponds), रिचार्ज पिट (Recharge Pits), कंटूर ट्रेंच (Contour Trench) और गेबियन चेक डैम (Gabion Check Dam) शामिल हैं।
  • जल क्षमता: इन सभी संरचनाओं की कुल जल भराव क्षमता 94.89 लाख घन मीटर दर्ज की गई है।
  • कृषि को लाभ: इस विशाल जल भंडारण के कारण जिले के सिंचित रकबे (Irrigated Area) में 5,608.26 हेक्टेयर की भारी बढ़ोतरी हुई है।
  • पारदर्शिता: सभी 5,429 जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) की गई है और इनकी नियमित समीक्षा की जा रही है।

जनभागीदारी और प्रशासनिक प्रयास: ‘श्रमदान’ का कमाल

सूरजपुर कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने Jal Sanchay Surajpur की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि, “जल संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जिले के ग्रामीणों और किसानों ने अपनी बहुमूल्य भूमि उपलब्ध कराकर और निस्वार्थ ‘श्रमदान’ देकर इस अभियान को सफल बनाया है।”

वहीं, जिला पंचायत सीईओ (Zila Panchayat CEO) ने बताया कि प्रधानमंत्री के ‘कैच द रेन – जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ (Catch the Rain, where it falls, when it falls) के संदेश को धरातल पर उतारा गया है। पंचायत स्तर पर जल सुरक्षा और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका (Rural Livelihood) में प्रत्यक्ष सुधार आ रहा है।


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UPSC/CGPSC Static Facts: कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम क्या हैं?

चूंकि Jal Sanchay Surajpur की सफलता तकनीकी जल संरचनाओं पर आधारित है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-1 Geography / CGPSC Paper-5) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इन भौगोलिक (Static) शब्दों को समझना बहुत जरूरी है:

  • कंटूर ट्रेंच (Contour Trench): यह पहाड़ी या ढलान वाले इलाकों में खोदी गई खाइयां (Trenches) होती हैं, जो ढलान के समानांतर (Contour lines) बनाई जाती हैं। जब बारिश का पानी ढलान से नीचे आता है, तो वह इन खाइयों में भर जाता है, जिससे मिट्टी का कटाव (Soil erosion) रुकता है और पानी जमीन के अंदर रिस (Percolate) जाता है।
  • गेबियन चेक डैम (Gabion Check Dam): यह एक प्रकार का छोटा बांध है, जिसे पत्थरों और चट्टानों को लोहे की जाली (Wire mesh) में बांधकर बनाया जाता है। यह नदी या नालों के तेज बहाव को कम करता है, जिससे पानी को रुकने और भू-जल रिचार्ज होने का समय मिल जाता है।
  • अमृत सरोवर (Amrit Sarovar): आजादी के अमृत महोत्सव (2022) के तहत शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देश के हर जिले में कम से कम 75 जल निकायों (कम से कम 1 एकड़ आकार और 10,000 घन मीटर क्षमता वाले) का विकास या कायाकल्प करना है।

विश्लेषण: सूरजपुर का मॉडल अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम-चेंजर’ क्यों है?

(CGPSC Mains Analysis – Rural Economy & Environment)

1. विकेंद्रीकृत जल प्रशासन (Decentralized Water Governance): Jal Sanchay Surajpur मॉडल इस बात का सटीक उदाहरण है कि बड़े बांधों (Big Dams) पर निर्भर रहने के बजाय छोटे ‘फार्म पॉन्ड’ और ‘रिचार्ज पिट’ ज्यादा कारगर होते हैं। जब 5,429 छोटी संरचनाएं गांव वालों के खुद के श्रमदान से बनती हैं, तो वे इनका रखरखाव भी खुद करते हैं (Ownership)।

2. कृषि में लचीलापन (Agricultural Resilience): सूरजपुर जिले में 5,608.26 हेक्टेयर सिंचित भूमि का बढ़ना एक बड़ी आर्थिक क्रांति है। इसका मतलब है कि अब किसान मानसून की विफलता (Droughts) की स्थिति में भी अपनी फसल बचा सकेंगे और रबी के मौसम में दूसरी फसल (Double Cropping) ले सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ेगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में छत्तीसगढ़ के किस जिले ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है?

जल शक्ति मंत्रालय के इस अभियान (तीसरे चरण) में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले ने राज्य में प्रथम (पहला) और पूरे देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है।

Q2. Jal Sanchay Surajpur अभियान के तहत जिले में कितनी जल भराव क्षमता विकसित की गई है?

सूरजपुर जिले में 5,429 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनकी कुल जल भराव क्षमता 94.89 लाख घन मीटर दर्ज की गई है।

Q3. सूरजपुर में जल संरक्षण कार्यों से कृषि को क्या सीधा लाभ हुआ है?

जल संरक्षण के इन वृहद प्रयासों के कारण जिले के सिंचित रकबे (Irrigated Area) में 5,608.26 हेक्टेयर की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे ग्रामीण आजीविका में सुधार आया है।

स्रोत (Source)

छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 04 सितंबर 2026, रायपुर/सूरजपुर।

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