Published on 04 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
भारतीय न्यायपालिका में लंबित मामलों (Pendency of Cases) के बोझ को कम करने और संवैधानिक पीठों (Constitutional Benches) के नियमित गठन को सुनिश्चित करने की दिशा में संसद ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किया गया Supreme Court Number of Judges Bill 2026 कल 3 अगस्त 2026 को लोकसभा द्वारा सफलतापूर्वक पारित कर दिया गया है। यह विधेयक इससे पूर्व लोकसभा में 20 जुलाई 2026 को पेश किया गया था।
यह महत्वपूर्ण विधेयक मुख्य रूप से 16 मई 2026 को जारी किए गए ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ (Ordinance 1 of 2026) को प्रतिस्थापित करने के लिए लाया गया है। इसके माध्यम से मूल अधिनियम, ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956’ (Act 55 of 1956) में संशोधन किया जाएगा। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान है।
| महत्वपूर्ण संकेतक | Supreme Court Number of Judges Bill 2026 के प्रमुख तथ्य व कड़े आंकड़े |
|---|---|
| विधेयक का नाम (Bill Name) | उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 (विधेयक संख्या 128, 2026) |
| संबद्ध मंत्रालय (Ministry) | कानून और न्याय मंत्रालय (Shri Arjun Ram Meghwal, MoS I/C) |
| लोकसभा में पेश करने की तिथि | 20 जुलाई 2026 |
| लोकसभा द्वारा पारित तिथि | 3 अगस्त 2026 |
| अध्यादेश का स्थान लिया | 16 मई 2026 को जारी अध्यादेश संख्या 1 (Ordinance 1 of 2026) का |
| न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि | 33 से बढ़ाकर 37 की गई (भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI को छोड़कर) |
| कुल स्वीकृत संख्या (CJI सहित) | अब कुल स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 (37 + CJI) हो जाएगी |
| सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले | 1 जनवरी 2026 तक कुल 92,101 मामले लंबित थे |
| कुल अनुमानित बजटीय व्यय | ₹14,04,17,648 (वार्षिक आवर्ती व्यय: ₹10,56,81,648) |
यह भी पढ़ें: Glaw Lake Ramsar Site 101 India: अरुणाचल प्रदेश की ‘ग्लाव झील’ बनी भारत का 101वां रामसर स्थल
Supreme Court Number of Judges Bill 2026: मुख्य विशेषताएं और न्यायिक संरचना में बदलाव
न्यायालय की कार्यकुशलता और समय पर न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से संसद द्वारा पारित इस विधेयक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विनियामक और ढांचागत परिवर्तनों को रेखांकित किया गया है:
- न्यायाधीशों की संख्या में संशोधन: इस संशोधन के बाद Supreme Court Number of Judges Bill 2026 के माध्यम से न्यायाधीशों की कुल संख्या 33 से बढ़कर 37 हो जाएगी। इसका अर्थ है कि अब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 38 हो सकती है।
- संवैधानिक पीठों का नियमित गठन: जजों की संख्या में वृद्धि होने से भारत के मुख्य न्यायाधीश के लिए यह संभव हो पाएगा कि वे देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी प्रश्नों (Substantial Questions of Law) की सुनवाई के लिए नियमित रूप से और अधिक समय के लिए संवैधानिक पीठों (Constitutional Benches) का गठन कर सकें।
- अध्यादेश का निरसन (Repeal): यह विधेयक अधिनियमित होने के बाद ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ को निरस्त कर देगा। अध्यादेश के तहत किए गए सभी कार्य इस नए कानून के तहत वैध माने जाएंगे।
यह भी पढ़ें: Gyaneshwari Yadav CWG Silver 2026: रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का स्वागत, ₹30 लाख और DSP पद की घोषणा
Supreme Court Number of Judges Bill 2026: न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
विधेयक के ‘उद्देश्यों और कारणों के विवरण’ (Statement of Objects and Reasons) में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के बढ़ते दबाव और न्यायाधीशों की कमी के कड़े आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं:
- लंबित मामलों का विशाल बोझ (92,101 मामले): देश की सर्वोच्च अदालत में नए मुकदमों के दायर होने और उनके निपटारे के बीच लगातार एक बड़ा अंतर बना हुआ है। 1 जनवरी 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में कुल 92,101 मामले लंबित थे।
- पूर्ण क्षमता के बाद भी बढ़ता अंतर (वर्ष 2025 के आंकड़े): वर्ष 2019 से सुप्रीम कोर्ट अपनी लगभग पूरी क्षमता (34 जजों) के साथ कार्य कर रहा था, इसके बावजूद वर्ष 2025 में न्यायालय में कुल 75,410 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि केवल 65,615 मामलों का ही निपटारा हो सका। यह अंतर न्यायपालिका की वर्तमान कार्यप्रणाली के समक्ष एक गंभीर चुनौती है।
- बड़ी पीठों की अनिवार्यता: कई पुराने मामले और गंभीर नीतिगत मुद्दे ऐसे हैं जिन पर निर्णय लेने के लिए बड़ी संवैधानिक पीठों (5 या अधिक जजों की पीठ) की आवश्यकता होती है। न्यायाधीशों की संख्या सीमित होने के कारण नियमित पीठों के संचालन में बाधा आती थी।
विधेयक के वित्तीय प्रावधान (Financial Memorandum)
चार नए न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनके सहायक स्टाफ के सृजन से राज्य के खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय भार का ब्योरा भी विधेयक में स्पष्ट किया गया है:
- कुल वार्षिक खर्च: सुप्रीम कोर्ट के 4 नए न्यायाधीशों और उनके निजी स्टाफ के वेतन, भत्ते, सुरक्षा, वाहन और आधिकारिक आवास के रख-रखाव के लिए कुल ₹14,04,17,648 का अनुमानित बजटीय आवंटन किया गया है।
- आवर्ती और गैर-आवर्ती व्यय: प्रति वर्ष आने वाला आवर्ती व्यय (Recurring Expenditure) ₹10,56,81,648 होगा। इसके अतिरिक्त, सरकारी कारों की खरीद और आधिकारिक आवासों को सुसज्जित करने के लिए लगभग ₹3,47,36,000 का एकमुश्त गैर-आवर्ती व्यय (Non-recurring Expenditure) निर्धारित किया गया है।
UPSC Prelims Fact Box: Constitutional Provisions on Supreme Court Judges
- संविधान का अनुच्छेद 124(1): भारत के संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जब तक संसद कानून बनाकर न्यायाधीशों की संख्या में बदलाव नहीं करती, तब तक सुप्रीम कोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीश होंगे। इसका अर्थ है कि जजों की संख्या बढ़ाने का अनन्य अधिकार केवल देश की संसद (Parliament) के पास है।
- न्यायाधीशों की संख्या का ऐतिहासिक विकास: मूल संविधान (1950) में जजों की संख्या 8 थी। समय के साथ संसद ने संशोधन अधिनियमों के माध्यम से इसे बढ़ाकर 1956 में 11, 1960 में 14, 1977 में 18, 1986 में 26, 2008 में 31, 2019 में 34 (33 + CJI) और अब 2026 में 38 (37 + CJI) करने का निर्णय लिया है।
- अध्यादेश शक्ति (अनुच्छेद 123): संसद के सत्र में न होने पर यदि कोई तत्काल आवश्यकता हो, तो राष्ट्रपति कैबिनेट की सिफारिश पर अध्यादेश जारी कर सकते हैं। संसद सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर इस अध्यादेश को विधेयक द्वारा प्रतिस्थापित करना अनिवार्य होता है।
UPSC & State PCS Mains Analysis: न्यायिक सुधार, लंबित मामले और संवैधानिक स्थिरता
भारतीय राजव्यवस्था और न्यायपालिका के दृष्टिकोण से Supreme Court Number of Judges Bill 2026 केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और विधि के शासन (Rule of Law) को सुदृढ़ करने के लिए एक आवश्यक नीतिगत कदम है।
सर्वोच्च न्यायालय केवल एक अपीलीय अदालत नहीं है, बल्कि यह भारत के संविधान का रक्षक (Custodian of the Constitution) भी है। संविधान के अनुच्छेद 145(3) के अनुसार, जिस मामले में कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हों, उसकी सुनवाई के लिए कम से कम 5 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ की आवश्यकता होती है। न्यायाधीशों की कमी के कारण अक्सर संवैधानिक पीठों के गठन में देरी होती थी, जिससे कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीतिगत मुद्दे (जैसे नागरिकता, वित्तीय नियम, और संघवाद से जुड़े मामले) लंबे समय तक लंबित रह जाते थे।
हालांकि, जजों की संख्या बढ़ाना लंबित मामलों का एकमात्र समाधान नहीं है। न्यायपालिका के कुशल संचालन के लिए तकनीकी सुधारों (जैसे ई-कोर्ट मिशन), अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (AIJS) के गठन, जिला स्तर पर बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और न्यायाधीशों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली में और अधिक पारदर्शिता लाने की आवश्यकता है। यह संशोधन विधेयक न्यायपालिका को सक्षम बनाने की दिशा में एक सकारात्मक ‘शुरुआत’ है, जो अंततः समयबद्ध न्याय वितरण प्रणाली को सुदृढ़ कर लोकतांत्रिक विश्वसनीयता को बनाए रखने की प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और संवैधानिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में पारित हुए Supreme Court Number of Judges Bill 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान करता है।
2. भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(1) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में बदलाव करने का अधिकार केवल देश के राष्ट्रपति के पास है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (A) केवल 1
व्याख्या: कथन 1 सत्य है क्योंकि यह विधेयक जजों की संख्या (CJI को छोड़कर) 33 से बढ़ाकर 37 करता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 124(1) के तहत जजों की संख्या बढ़ाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि देश की संसद (Parliament) के पास है।
प्रश्न 2: भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत ‘संवैधानिक पीठ’ (Constitutional Bench) के गठन के लिए न्यूनतम 5 न्यायाधीशों की अनिवार्यता निर्धारित की गई है?
(A) अनुच्छेद 131
(B) अनुच्छेद 143
(C) अनुच्छेद 145(3)
(D) अनुच्छेद 124(4)
उत्तर: (C) अनुच्छेद 145(3)
व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 145(3) में प्रावधान है कि संविधान की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए गठित होने वाली पीठ में न्यूनतम 5 न्यायाधीशों का होना अनिवार्य है, जिसे हम ‘संवैधानिक पीठ’ कहते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Supreme Court Number of Judges Bill 2026 क्या है और यह किस कानून में संशोधन करता है?
यह संसद द्वारा पारित एक नया संशोधन विधेयक है जो ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956’ में संशोधन करता है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या में बढ़ोतरी करने का कानूनी प्रावधान किया गया है।
Q2. इस संशोधन विधेयक के बाद सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित जजों की कुल संख्या कितनी हो जाएगी?
इस संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट के स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या (CJI को छोड़कर) 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। इस प्रकार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित अब सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत क्षमता 38 (37 + 1) हो जाएगी।
Q3. सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता क्यों महसूस की गई?
सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमों के लगातार बढ़ते दबाव और लंबित मामलों (1 जनवरी 2026 तक कुल 92,101 मामले लंबित) को देखते हुए यह कदम उठाया गया। न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से संवैधानिक पीठों का गठन नियमित रूप से हो सकेगा और मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- स्वीकृत क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि: Supreme Court Number of Judges Bill 2026 के तहत उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (CJI को छोड़कर) 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है, जिससे कुल क्षमता 38 (CJI सहित) हो जाएगी।
- लंबित मामलों पर प्रहार: सुप्रीम कोर्ट में लंबित 92,101 मुकदमों और नए दर्ज होने वाले मामलों (वर्ष 2025 में 75,410 मामले) के समयबद्ध निपटारे के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना एक आवश्यक कदम था।
- संवैधानिक पीठों का नियमित सुदृढ़ीकरण: न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से अब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों की त्वरित सुनवाई के लिए नियमित रूप से विशेष पीठों का गठन कर सकेंगे।
UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (भारतीय राजव्यवस्था और संविधान, न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली, न्यायिक सुधार और संबंधित मुद्दे) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख भारत सरकार के कानून और न्याय मंत्रालय, लोक सभा सचिवालय, और संसद द्वारा 3 अगस्त 2026 को पारित आधिकारिक ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ की विवरणी और बजटीय ब्योरों पर आधारित है।
One thought on “Supreme Court Number of Judges Bill 2026: लोकसभा ने पारित किया ऐतिहासिक न्यायपालिका संशोधन विधेयक; सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर होगी 38, लंबित मामलों को निपटाने में मिलेगी गति”