Vasundhara Project Chhattisgarh: राजस्व रिकॉर्ड रूम होंगे हाई-टेक, पुरानी मिसल और खसरे का होगा डिजिटलीकरण, AI और OCR से लैस होगा सेवा सेतु

Vasundhara Project Chhattisgarh Vasundhara Project Chhattisgarh

रायपुर, 17 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों और किसानों के लिए भूमि एवं राजस्व सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, त्वरित और सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी तकनीकी पहल शुरू की है। राज्य के सभी जिला एवं तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम के आधुनिकीकरण और ऐतिहासिक राजस्व अभिलेखों के पूर्ण डिजिटलीकरण के लिए Vasundhara Project Chhattisgarh (वसुंधरा परियोजना) के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्य प्रारंभ हो गया है। इस संबंध में मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव श्री विकासशील ने नामांतरण (Mutation), सीमांकन और अन्य दैनिक राजस्व प्रक्रियाओं में पूर्ण स्पष्टता और एकरूपता लाने तथा पुराने अभिलेखों के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित संधारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के कुछ चयनित जिलों के राजस्व अभिलेखों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिसके सफल परीक्षण के उपरांत इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों में पूरी तरह विस्तारित किया जाएगा।

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने डिजिटलीकरण की संपूर्ण तकनीकी कार्ययोजना प्रस्तुत की। Vasundhara Project Chhattisgarh के अंतर्गत तैयार किए जाने वाले इस विशाल डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को राज्य के ‘सेवा सेतु’ (Seva Setu) पोर्टल से एकीकृत किया जाएगा। इससे नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन आवेदन करने, ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करने, प्रमाणित डिजिटल प्रतियां (Certified Digital Copies) प्राप्त करने और अपने आवेदनों की रियल-टाइम स्थिति ट्रैक करने की अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी।

वसुंधरा परियोजना: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
परियोजना का नामVasundhara Project Chhattisgarh (वसुंधरा परियोजना)
मुख्य उद्देश्यजिला व तहसील राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण एवं डिजिटलीकरण
समीक्षा बैठक अध्यक्षश्री विकासशील (मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन)
विभागीय नेतृत्वश्रीमती शम्मी आबिदी (सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग)
भौगोलिक विस्तारप्रथम चरण में चयनित जिले, तदुपरांत छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिले
एकीकृत नागरिक पोर्टलसेवा सेतु (Seva Setu Portal)
उपयुक्त आधुनिक तकनीकबारकोड क्लासिफिकेशन, डिजिटल लोकेशन, ओसीआर (OCR) एवं एआई (AI)

डिजिटलीकरण के तहत सुरक्षित किए जाने वाले प्रमुख 9 दस्तावेज

राजस्व सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने स्पष्ट किया कि Vasundhara Project Chhattisgarh के अंतर्गत सदियों पुराने और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड्स को नष्ट होने से बचाने के लिए उनकी हाई-रिजॉल्यूशन स्कैनिंग और डेटा एंट्री कर उन्हें क्लाउड पर सुरक्षित किया जाएगा। इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख दस्तावेजों का डिजिटलीकरण होगा:

  1. अधिकार अभिलेख पंजी (Record of Rights Register)
  2. बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल (Settlement & Consolidation Missal)
  3. निस्तार पत्रक (Nistar Patrak)
  4. खसरा अभिलेख (Khasra Records)
  5. राजस्व न्यायालय के पारित आदेश (Revenue Court Orders)
  6. मूल ग्राम नक्शे (Original Village Cadastral Maps)
  7. संशोधन पंजी (Mutation / Correction Register)
  8. वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख
  9. किश्तबंदी खतौनी (Kishtbandi Khatauni)

आधुनिक तकनीक (AI और OCR) और बारकोड व्यवस्था का उपयोग

भौतिक रिकॉर्ड रूम और डिजिटल प्लेटफॉर्म को जोड़ने के लिए अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का सहारा लिया जा रहा है:

  • बारकोड आधारित वर्गीकरण: रिकॉर्ड रूम में रखी जाने वाली प्रत्येक भौतिक फाइल और बस्ते को बारकोड आधारित वर्गीकरण और डिजिटल लोकेशन मैपिंग दी जाएगी, जिससे दशकों पुराने रिकॉर्ड्स को अलमारियों में सेकंडों में खोजा जा सके।
  • ओसीआर (OCR) और एआई (AI) आधारित सर्च: पुरानी, उर्दू, मोडी लिपि या हस्तलिखित जर्जर दस्तावेजों के अक्षरों को पहचानने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सर्च इंजन विकसित किया जा रहा है। इससे किसी भी किसान या नागरिक के नाम, खसरा नंबर या वर्ष टाइप करते ही हस्तलिखित पुराना मिसल रिकॉर्ड स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगा।

सेवा सेतु पोर्टल से एकीकरण: घर बैठे मिलेंगी प्रमाणित प्रतियां

परियोजना का सबसे बड़ा नागरिक-केंद्रित लाभ यह होगा कि आम जनता को तहसील या कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे:

  • पारदर्शी डिजिटल सेवाएं: ‘सेवा सेतु’ पोर्टल से जुड़ने के बाद नागरिक कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और डिजिटल पेमेंट गेटवे से निर्धारित सरकारी शुल्क चुका सकेंगे।
  • डिजिटली हस्ताक्षरित प्रतियां: राजस्व अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त (Digitally Signed) प्रमाणित मिसल और नक्शा प्रतियां सीधे पोर्टल से डाउनलोड की जा सकेंगी, जो सभी कानूनी और अदालती कार्यों में पूरी तरह मान्य होंगी।

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CGPSC Static Facts: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 एवं DILRMP (100% प्रामाणिक तथ्य)

प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-5 भारत एवं छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था तथा Paper-2 लोक प्रशासन/राजस्व विधि) के लिए मानक तथ्य:

  • डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP):
    • पृष्ठभूमि: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा वर्ष 2008 में राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (NLRMP) के रूप में शुरू किया गया, जिसे बाद में DILRMP नाम दिया गया।
    • लक्ष्य: देश में भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण, जीआईएस (GIS) मैपिंग, उप-पंजीयक कार्यालयों का डिजिटलीकरण और भू-स्वामित्व की गारंटी स्थापित करना।
  • छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 (CGLRC 1959) की प्रमुख धाराएं:
    • धारा 108 (अधिकार अभिलेख – Record of Rights): प्रत्येक ग्राम के लिए तैयार किया जाने वाला भू-अभिलेख जिसमें खातेदारों के अधिकार, भूमि का क्षेत्रफल और भू-राजस्व दर्ज होता है।
    • धारा 109 एवं 110 (नामांतरण – Mutation): भूमि अधिकारों के अंतरण (Transfer) की सूचना पटवारी/तहसीलदार को देना और अधिकार अभिलेख में नाम परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया।
    • धारा 234 (निस्तार पत्रक): ग्राम में सार्वजनिक उपयोग (चारागाह, श्मशान, तालाब, रास्ता) की भूमियों का प्रबंधन और ग्रामवासियों के अधिकार।
    • धारा 235 (वाजिब-उल-अर्ज): निजी भूमियों में ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों (जैसे पानी का उपयोग, आने-जाने का रास्ता) का अभिलेख।
  • ‘भूइयां’ (Bhuiyan) एवं ‘भू-नक्शा’ (Bhu-Naksha):
    • राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) छत्तीसगढ़ द्वारा विकसित राज्य का आधिकारिक लैंड रिकॉर्ड पोर्टल, जिसे ई-गवर्नेंस और भू-अभिलेखों के ऑनलाइन संधारण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

विश्लेषण: राजस्व प्रशासन में बिचौलियों का अंत और भूमि विवादों में कमी

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Land Reforms, Governance & Technology in Administration)

1. ‘पटवारी एकाधिकार’ की समाप्ति और विवाद-मुक्त भूमि अधिकार: भारत में दीवानी मुकदमों (Civil Litigations) का लगभग 60% से अधिक हिस्सा भूमि और संपत्ति विवादों से जुड़ा होता है। इसका मुख्य कारण पुराने बंदोबस्त और मिसल अभिलेखों में हेरफेर या उनका जर्जर होकर नष्ट हो जाना है। Vasundhara Project Chhattisgarh के तहत मिसल, खसरा और नक्शों को AI और OCR के जरिए बारकोड युक्त डिजिटल रिपोजिटरी में बदलना फाइलों की भौतिक छेड़छाड़ (Tampering) को असंभव बना देता है। इससे न्यायालयों में लंबित सीमांकन और नामांतरण के मुकदमों का त्वरित और साक्ष्य-आधारित निपटारा संभव होगा।

2. किसान सशक्तिकरण और संस्थागत साख (Credit Access): जब किसानों और भूमिस्वामियों को ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से डिजिटली हस्ताक्षरित प्रमाणित खतौनी और नक्शा बिना किसी कार्यालय के चक्कर काटे तुरंत उपलब्ध होगा, तो बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल बीमा और कृषि ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया घर्षण-मुक्त (Frictionless) हो जाएगी। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह को गति देगा और सुशासन (Good Governance) को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Vasundhara Project Chhattisgarh का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के जिला और तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण करना और पुरानी मिसल, खसरा व नक्शों का डिजिटलीकरण कर नागरिक सेवाओं को पारदर्शी व सुलभ बनाना है।

Q2. वसुंधरा परियोजना के तहत पुराने और हस्तलिखित रिकॉर्ड खोजने के लिए किन तकनीकों का उपयोग होगा?

दस्तावेजों के त्वरित वर्गीकरण के लिए बारकोड प्रणाली तथा पुरानी एवं हस्तलिखित फाइलों के सटीक संधान के लिए OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन) और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित सर्च तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

Q3. इस परियोजना के तहत तैयार डिजिटल रिकॉर्ड्स को किस नागरिक पोर्टल से जोड़ा जाएगा?

डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को छत्तीसगढ़ के ‘सेवा सेतु’ (Seva Setu) पोर्टल से एकीकृत किया जाएगा, जिससे नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन और प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त कर सकेंगे।

स्रोत (Source)

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 17 सितंबर 2026.

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