रायपुर, 21 अक्टूबर: ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ के शहरों को आर्थिक विकास, उद्योग, रोजगार और आधुनिक जीवनशैली का आत्मनिर्भर केंद्र बनाने के लिए राज्य शासन ने शहरी नियोजन की नई रूपरेखा तैयार की है। नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आयोजित Urban Challenge Fund Chhattisgarh (अर्बन चैलेंज फंड छत्तीसगढ़) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) विषयक प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहर केवल आवास की जगह नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के असली ग्रोथ इंजन हैं। केंद्र सरकार द्वारा देश भर के लिए घोषित ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौरों और अधिकारियों की मौजूदगी में दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। पहला एमओयू हुडको (HUDCO) और दूसरा देश के विख्यात शहरी नियोजन संस्थान सेप्ट विश्वविद्यालय (CEPT University, अहमदाबाद) के साथ संपन्न हुआ।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Urban Challenge Fund Chhattisgarh’: नवा रायपुर में यूसीएफ एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) की पहली क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ।
- ₹1 लाख करोड़ का राष्ट्रीय फंड: केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड से गुणवत्तापूर्ण व व्यवहार्य परियोजनाओं के लिए मिलेगा भारी बजट।
- दो ऐतिहासिक एमओयू संपन्न: वित्तीय प्रबंधन के लिए हुडको (HUDCO) और संस्थागत व तकनीकी क्षमता विकास के लिए सेप्ट यूनिवर्सिटी से करार।
- बिजली के तार होंगे अंडरग्राउंड: मुख्यमंत्री ने अव्यवस्थित लटकते तारों को भूमिगत करने और बारिश में जलभराव के स्थायी समाधान के दिए निर्देश।
- देश के सफल मॉडलों का अध्ययन: जबलपुर के कचरे से ऊर्जा उत्पादन और हैदराबाद के स्मार्ट जल प्रबंधन की तर्ज पर शहरों को संवारने पर जोर।
- प्रदेश के सभी 14 महापौर मौजूद: केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा रहे उपस्थित।
Urban Challenge Fund Chhattisgarh: 20-30 वर्षों की जरूरतों का बनेगा मास्टर प्लान
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहरों की विकास योजनाएं केवल तात्कालिक जरूरतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
Urban Challenge Fund Chhattisgarh के माध्यम से राज्य के नगरीय निकायों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पेयजल, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, चौड़ी सड़कें, सार्वजनिक परिवहन और हरित क्षेत्रों के लिए अगले तीन दशकों की आबादी का वैज्ञानिक आकलन किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि सुनियोजित और टिकाऊ शहरीकरण ही ‘अंजोर विजन 2047’ के तहत विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव बनेगा।
नगरीय विकास को मजबूती देने 2 बड़े एमओयू: हुडको और सेप्ट विश्वविद्यालय बने साझेदार
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और केंद्रीय राज्य मंत्री की मौजूदगी में दो रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए:
- 1. नगरीय प्रशासन विभाग एवं हुडको (HUDCO) एमओयू: हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन नगरीय निकायों को विकास परियोजनाओं की वित्तीय संरचना तैयार करने, कम ब्याज पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने और बैंक वित्तपोषण के लिए वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्य करेगा।
- 2. नगरीय प्रशासन विभाग एवं सेप्ट विश्वविद्यालय (CEPT) एमओयू: देश के शीर्ष अर्बन प्लानिंग संस्थान ‘सेप्ट यूनिवर्सिटी’ के विशेषज्ञ छत्तीसगढ़ के नगर निगमों के अधिकारियों-इंजीनियरों को आधुनिक अर्बन डिजाइन, लैंड-यूज प्लानिंग, क्लाइमेट-रेजिलेन्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का प्रशिक्षण देंगे।
बिजली के लटकते तार होंगे भूमिगत और जलभराव का निकलेगा स्थायी समाधान
मुख्यमंत्री ने शहरों की दो सबसे गंभीर व्यावहारिक समस्याओं पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्थानीय निकायों को स्पष्ट निर्देश दिए:
- अंडरग्राउंड केबलिंग (Underground Cabling): शहरों में बिजली, टेलीकॉम और केबल टीवी के बेतरतीब लटकते तारों पर चिंता जताते हुए सीएम ने कहा कि बड़े वाहनों या धार्मिक जुलूसों के दौरान तारों को डंडे से उठाना जानलेवा और असुरक्षित है। इसे समाप्त करने के लिए प्रमुख मार्गों पर तारों को भूमिगत (अंडरग्राउंड) करने की योजनाएं बनाई जाएं।
- वैज्ञानिक स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज: बरसात के दिनों में बस्तियों और मुख्य सड़कों पर होने वाले जलभराव (Waterlogging) को रोकने के लिए प्राकृतिक जल प्रवाह को बिना छेड़े स्थायी और चौड़े नालों का नेटवर्क तैयार किया जाए।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव: ‘₹1 लाख करोड़ के फंड से लाभ उठाने निकाय तैयार करें मजबूत प्रोजेक्ट्स’
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने जनप्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एक लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड का प्रावधान छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम अवसर है:
उन्होंने कहा कि केवल मांग करने से पैसा नहीं मिलेगा; निकायों को यह साबित करना होगा कि उनकी परियोजनाएं तकनीकी रूप से मजबूत, नागरिकों के लिए उपयोगी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य (Financially Viable) हैं। श्री साव ने कहा कि जिस शहर ने हमें पहचान और नेतृत्व दिया है, उस शहर को कुछ लौटाने का यही सही समय है। निकाय ऐसी परियोजनाएं बनाएं जो निर्माण के बाद रखरखाव और संचालन में भी आत्मनिर्भर रहें।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू: ‘जबलपुर के वेस्ट-टू-एनर्जी और हैदराबाद जल प्रबंधन से लें सीख’
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरों को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है:
- सफल राष्ट्रीय प्रयोग: उन्होंने मध्य प्रदेश के जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने के सफल संयंत्र (Waste-to-Energy Plant) और हैदराबाद में लागू आधुनिक जल प्रबंधन व स्मार्ट लीकेज मॉनिटरिंग सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के निकाय इन नवाचारों का अध्ययन कर अपने यहाँ लागू करें।
- पीपीपी मॉडल और बॉन्ड: सरकारी बजट के अलावा म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक फाइनेंसिंग और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) से शहरों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े किए जाने चाहिए।
“शहर केवल ईंट-कंक्रीट का जमावड़ा नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों के सपनों और राज्य के आर्थिक विकास का हृदय हैं। अर्बन चैलेंज फंड और हुडको-सेप्ट के साथ हुए ये दो एमओयू छत्तीसगढ़ के शहरों को आत्मनिर्भर बनाएंगे। जनप्रतिनिधि राजनीति से ऊपर उठकर अपने शहरों की 30 साल आगे की जरूरतों की योजना बनाएं। जहां संभव हो, बिजली के तारों को भूमिगत करें और जलभराव की समस्या को जड़ से मिटाएं।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन (कार्यशाला उद्घाटन संबोधन)
समारोह में उपस्थित शीर्ष राष्ट्रीय व राज्य नेतृत्व
नवा रायपुर के मेफेयर रिजॉर्ट में आयोजित इस राज्यस्तरीय सम्मेलन में देश और प्रदेश की शीर्ष हस्तियां उपस्थित रहीं:
- जनप्रतिनिधि: प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौर, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षगण।
- उच्च प्रशासनिक नेतृत्व: श्री सोनमणि बोरा (प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छ.ग.), श्री संजय कुलश्रेष्ठ (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक – CMD, HUDCO), डॉ. टी.के. श्री देवी (सचिव, नगरीय प्रशासन, तेलंगाना शासन)।
- संस्थागत विशेषज्ञ: श्री बरजोर मेहता (अध्यक्ष/प्रेसिडेंट, CEPT यूनिवर्सिटी), श्री नीलेश महादेव क्षीरसागर (संचालक, नगरीय प्रशासन), श्री सुमित अग्रवाल (सीईओ, सूडा) सहित टाउन प्लानर्स एवं वित्तीय विशेषज्ञ।
अर्बन चैलेंज फंड क्षेत्रीय कार्यशाला: एक नजर में
- कार्यशाला का नाम: अर्बन चैलेंज फंड (UCF) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) क्षेत्रीय कार्यशाला
- स्थल व तिथि: मेफेयर लेक रिजॉर्ट, नवा रायपुर (21 अक्टूबर 2026)
- मुख्य अतिथि: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय | विशिष्ट अतिथि: श्री तोखन साहू, श्री अरुण साव
- राष्ट्रीय फंड आकार: ₹1,00,000 करोड़ (भारत सरकार द्वारा प्रावधान)
- हस्ताक्षरित एमओयू 1: छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन विभाग एवं हुडको (HUDCO) – वित्तीय संसाधन जुटाना
- हस्ताक्षरित एमओयू 2: छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन विभाग एवं सेप्ट यूनिवर्सिटी (CEPT) – तकनीकी व क्षमता विकास
- प्रमुख नागरिक निर्देश: जलभराव की स्थायी निकासी, बिजली तारों की अंडरग्राउंड केबलिंग, पीपीपी मॉडल
- सहभागी निकाय: प्रदेश के सभी 14 नगर पालिक निगम एवं समस्त नगर पालिका परिषदें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Urban Challenge Fund Chhattisgarh कार्यशाला में किन दो प्रमुख संस्थाओं के साथ एमओयू हुए?
Urban Challenge Fund Chhattisgarh कार्यशाला में छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन विभाग ने वित्तीय प्रबंधन के लिए हुडको (HUDCO) और तकनीकी विशेषज्ञता व क्षमता विकास के लिए सेप्ट विश्वविद्यालय (CEPT University, अहमदाबाद) के साथ दो एमओयू किए।
केंद्र सरकार द्वारा अर्बन चैलेंज फंड के लिए कुल कितना बजट निर्धारित किया गया है?
उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुसार, भारत सरकार द्वारा शहरों के आधुनिक और सतत विकास के लिए अर्बन चैलेंज फंड (UCF) के तहत कुल ₹1 लाख करोड़ का राष्ट्रीय प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शहरों के बुनियादी ढांचे को लेकर क्या विशेष निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री ने शहरों में बारिश के जलभराव की समस्या का स्थायी ड्रेनेज समाधान निकालने और लटकते हुए बिजली के तारों को भूमिगत (Underground Cabling) करने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने देश के किन दो शहरों के नवाचारों का उदाहरण दिया?
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने के मॉडल (Waste-to-Energy) और हैदराबाद के तकनीक-आधारित आधुनिक जल प्रबंधन मॉडल का उल्लेख किया।
आधिकारिक स्रोत: नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग / राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) / हुडको (HUDCO) / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur)