रायपुर, 23 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय ऐतिहासिक प्रवास के दूसरे दिन देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की पावन धरा पर पहुंचकर सनातन आस्था और जनजातीय संस्कृति के सर्वोच्च केंद्र में शीश नवाया। अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार Droupadi Murmu Danteshwari Mandir (द्रौपदी मुर्मु दंतेश्वरी मंदिर) जगदलपुर पहुंचीं, जहाँ उन्होंने बस्तर अंचल की अधिष्ठात्री एवं आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के मंदिर में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने गर्भगृह में माँ दंतेश्वरी के पावन स्वरूप के दर्शन किए और समस्त देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य तथा मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का बस्तर की समृद्ध परंपरा के अनुसार तिलक, आरती और पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों से भव्य स्वागत किया गया।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Droupadi Murmu Danteshwari Mandir’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर में की विशेष पूजा-अर्चना।
- देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना: मंदिर के गर्भगृह में वैदिक और जनजातीय परंपरा से किया गया विशेष अनुष्ठान।
- राज्यपाल और मुख्यमंत्री रहे मौजूद: राज्यपाल रमेन डेका और सीएम विष्णु देव साय ने भी किए देवी दर्शन, मांगी प्रदेश की तरक्की की दुआ।
- बस्तर की अटूट आस्था का केंद्र: माँ दंतेश्वरी बस्तर के लोकजीवन, जनजातीय परंपराओं और 75 दिवसीय बस्तर दशहरा की प्रमुख आधारशिला हैं।
- सीएम साय का वक्तव्य: ‘राष्ट्रपति का बस्तर आगमन हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय व वैश्विक पटल पर सर्वोच्च सम्मान दिलाएगा।’
Droupadi Murmu Danteshwari Mandir: बस्तर की आराध्य देवी के चरणों में नतमस्तक हुईं राष्ट्रपति
बस्तर संभाग का मुख्यालय जगदलपुर आज एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वयं माँ दंतेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचीं।
Droupadi Murmu Danteshwari Mandir आगमन पर मंदिर के पुजारियों, सेवादारों और स्थानीय जनजातीय प्रमुखों ने उनका पारंपरिक गाजे-बाजे और पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया। राष्ट्रपति ने मंदिर के भीतर प्रवेश कर माँ दंतेश्वरी की छह भुजाओं वाली महिषासुरमर्दिनी स्वरूप की प्रतिमा पर पुष्प, चुनरी और पूजा सामग्री अर्पित की। उन्होंने कुछ पल ध्यान लगाकर मौन प्रार्थना की और देश की एकता, अखंडता तथा प्रगति का आशीर्वाद मांगा।
राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी की पूजा-अर्चना
राष्ट्रपति के साथ छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी माँ दंतेश्वरी के चरणों में शीश झुकाया:
- प्रदेश की खुशहाली की प्रार्थना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूजा के बाद कहा कि बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के प्रति इस पूरे अंचल के लाखों वनवासियों और प्रदेशवासियों की अटूट और अगाध श्रद्धा है। माँ दंतेश्वरी बस्तर के लोकजीवन, सांस्कृतिक ताने-बाने और दैनिक जीवन का अभिन्न अंग हैं।
- बस्तर के लिए गौरव का क्षण: मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति महोदया का बस्तर आकर माँ दंतेश्वरी के दर्शन करना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के आदिवासी समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है।
प्रकृति, आस्था और जनजातीय संस्कृति का पावन संगम है माँ दंतेश्वरी धाम
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए बस्तर की विशिष्टता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अपनी अनुपम जनजातीय संस्कृति, सदियों पुरानी परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है:
- प्रकृति और आस्था का अटूट संबंध: बस्तर की देव आराधना में प्रकृति, वन, जल और समाज के बीच का गहरा तालमेल दिखाई देता है। यहाँ के आदिवासी सदियों से देवी की पूजा अपनी परंपराओं और मर्यादाओं के साथ करते आ रहे हैं।
- राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान: राष्ट्रपति के इस प्रवास से बस्तर के धार्मिक पर्यटन, शक्तिपीठ परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा और सम्मान मिलेगा।
माँ दंतेश्वरी और बस्तर दशहरा: सदियों पुरानी लोक-आस्था
उल्लेखनीय है कि माँ दंतेश्वरी पूरे बस्तर अंचल की कुलदेवी और रक्षक मानी जाती हैं। विश्वप्रसिद्ध 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के दौरान इस मंदिर और दंतेवाड़ा स्थित मूल शक्तिपीठ का महत्व अपने चरम पर होता है।
उत्सव के दौरान माता के छत्र और डोली की अगवानी के लिए लाखों श्रद्धालु और पारंपरिक मांझी-चालकी एकत्र होते हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का माँ दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन बस्तर दशहरा के समापन के पावन अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक ‘मुरिया दरबार’ में उनकी सहभागिता से पहले हुआ, जिसने इस पूरे दौरे को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत भव्य बना दिया।
“माँ दंतेश्वरी बस्तर की आत्मा और लोक-आस्था का परम आधार हैं। देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा माँ दंतेश्वरी के दरबार में मत्था टेककर देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना करना हमारे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अविस्मरणीय और गौरवशाली क्षण है। देवी माँ का आशीर्वाद सदैव हमारे प्रदेश पर बना रहे और बस्तर शांति, समृद्धि तथा विकास के नए सोपान गढ़े।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन (दंतेश्वरी मंदिर दर्शन उपरांत)
राष्ट्रपति का माँ दंतेश्वरी मंदिर दर्शन: एक नजर में
- दर्शनार्थी: महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु (President of India)
- स्थल: माँ दंतेश्वरी मंदिर, जगदलपुर, जिला बस्तर (छत्तीसगढ़)
- तिथि: 23 अक्टूबर 2026 (बस्तर प्रवास का मुख्य दिन)
- सह-उपस्थिति: राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
- पूजा का उद्देश्य: देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना
- स्वागत परंपरा: बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा, मंगल तिलक और वैदिक-जनजातीय मंत्रोच्चार
- धार्मिक महत्व: बस्तर अंचल की आराध्य देवी, 75 दिवसीय बस्तर दशहरा की प्रमुख अधिष्ठात्री
- संबद्ध आगामी कार्यक्रम: जगदलपुर में ऐतिहासिक ‘मुरिया दरबार’ में राष्ट्रपति की सहभागिता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Droupadi Murmu Danteshwari Mandir दर्शन के दौरान राष्ट्रपति के साथ कौन-कौन उपस्थित थे?
Droupadi Murmu Danteshwari Mandir दर्शन के दौरान राष्ट्रपति के साथ छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय उपस्थित थे और उन्होंने भी पूजा-अर्चना की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने माँ दंतेश्वरी मंदिर में किस बात के लिए प्रार्थना की?
राष्ट्रपति ने विधि-विधान से पूजा कर माँ दंतेश्वरी से समस्त देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की।
बस्तर संस्कृति में माँ दंतेश्वरी का क्या धार्मिक महत्व है?
माँ दंतेश्वरी बस्तर अंचल की कुलदेवी और आराध्य देवी हैं। बस्तर के सामाजिक, सांस्कृतिक लोकजीवन और विश्वविख्यात 75 दिवसीय बस्तर दशहरा में उनकी उपासना का सर्वोच्च स्थान है।
दंतेश्वरी मंदिर दर्शन के बाद राष्ट्रपति का अगला मुख्य कार्यक्रम क्या था?
मंदिर दर्शन के पश्चात राष्ट्रपति जगदलपुर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जनजातीय सम्मेलन ‘मुरिया दरबार’ (Muria Darbar) में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचीं।
आधिकारिक स्रोत: राष्ट्रपति सचिवालय / मुख्यमंत्री सचिवालय / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन