शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़: 18 अगस्त से शुरू हुआ कुपोषण और एनीमिया मुक्ति का महाभियान; 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को मिलेगा स्वास्थ्य और सुरक्षा कवच

शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़

रायपुर | 20 अगस्त 2026


छत्तीसगढ़ के नौनिहालों को कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न घातक संक्रामक बीमारियों से बचाने तथा बाल मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ (Shishu Sanrakshan Mah) का नया चरण प्रारंभ कर दिया गया है। 20 अगस्त 2026 को रायपुर से जारी जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक श्री धनंजय राठौर के विशेष आलेख के अनुसार, राज्य में यह विशेष स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान 18 अगस्त 2026 से सक्रिय हो चुका है। इसके तहत राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 9 माह से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों की पोषण व स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विकासशील क्षेत्रों में शिशुओं के जीवन का शुरुआती चरण उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ अभियान बच्चों के उज्जवल और कुपोषण-मुक्त भविष्य के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह महत्वाकांक्षी अभियान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा महिला-बाल विकास विभाग के कड़े और संयुक्त समन्वय से मैदानी स्तर पर मितानिनों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से चलाया जा रहा है।

महत्वपूर्ण संकेतकशिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ अभियान के मुख्य सेवागत तथ्य एवं विवरण
अभियान का नामशिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ (विशेष स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान)
अभियान के नए चरण की शुरुआत18 अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में सक्रिय
मुख्य लक्षित आयु वर्ग9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे (कुछ सेवाओं में 0 से 5 वर्ष)
सहयोगी सरकारी विभागस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD)
प्रमुख पूरक खुराक वितरणविटामिन ‘ए’ (रतौंधी से बचाव) और आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप
गंभीर कुपोषित बच्चों हेतु केंद्रपोषण पुनर्वास केंद्र (NRCs – Nutritional Rehabilitation Centres)
लेखक व संपादन स्रोतश्री धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक, जनसंपर्क, छत्तीसगढ़ शासन)

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Table of Contents

शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़: कुपोषण मुक्ति और बाल स्वास्थ्य सेवाओं का कड़ा संजाल

इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को कम करना और उनके विकास की प्रारंभिक कमियों को दूर करना है। स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संचालित शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ के दौरान प्रत्येक ग्राम पंचायत और शहरी आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को निशुल्क दवाएं और परामर्श प्रदान किया जा रहा है:

  • कुपोषण की त्वरित पहचान: आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और लंबाई (ऊंचाई) नापकर गंभीर तीव्र कुपोषित (SAM) और मध्यम तीव्र कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान की जा रही है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को निःशुल्क चिकित्सकीय इलाज के लिए जिला अस्पतालों में संचालित ‘पोषण पुनर्वास केंद्रों’ (NRCs) में भेजा जा रहा है।
  • दस्त नियंत्रण और डिहाइड्रेशन से बचाव: मौसमी दस्त और संक्रमण से शिशुओं को बचाने के लिए माताओं को ओआरएस (ORS) पैकेट और जिंक की गोलियों का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है।

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विटामिन ‘ए’ अनुपूरण, आईएफए सिरप और संपूर्ण टीकाकरण की प्रणालियाँ

शिशु के शारीरिक अंगों और उनकी दृष्टि के विकास के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) अत्यंत आवश्यक होते हैं। इसके अतिरिक्त, शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ के तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी से बचाने के लिए विटामिन ‘ए’ की खुराक और एनीमिया नियंत्रण के लिए आईएफए सिरप का नियमित वितरण किया जा रहा है:

  • विटामिन ‘ए’ का अनुपूरण (Supplementation): 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी दृष्टि संबंधी बीमारियों से बचाने और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए वर्ष में दो बार विटामिन ‘ए’ की उच्च खुराक दी जाती है।
  • एनीमिया मुक्त भारत के तहत आईएफए (IFA) सिरप: बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) को रोकने के लिए 6 माह से 5 वर्ष तक के शिशुओं के लिए आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जा रहा है।
  • छूटे हुए नियमित टीकों का कवरेज: जिन बच्चों के नियमित टीके किसी कारणवश छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रूबेला, पोलियो, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए विशेष रूप से टीकाकृत किया जा रहा है।

स्तनपान, दिमागी विकास और बाल अनुकूलन व्यवहार पर व्यावहारिक परामर्श

यह अभियान केवल दवाओं के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह माता-पिता की आदतों और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव (Behavioural Change) लाने का एक सुव्यवस्थित मंच है। माता-पिता को जागरूक करने और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ के अंतर्गत विशेष परामर्श सत्र आयोजित किए जा रहे हैं:

  • स्तनपान और सही ऊपरी आहार: जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के भीतर माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) पिलाने तथा शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) कराने की सलाह दी जाती है। 6 माह के बाद बच्चों को दलिया, खिचड़ी जैसे पौष्टिक ठोस ऊपरी आहार (Complementary Feeding) धैर्यपूर्वक चखाने की तकनीक सिखाई जा रही है।
  • संज्ञानात्मक (दिमागी) विकास और खेल: शिशुओं के दिमागी विकास को गति देने के लिए माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे बच्चों से बात करें, उनके लिए गाएं और उन्हें पढ़कर सुनाएं। इसके अलावा, बच्चों को स्ट्रोलर या झूले में लंबे समय तक बांधकर रखने के बजाय जमीन पर स्वतंत्र रूप से खेलने-कूदने की अनुमति दें, जिससे उनकी मोटर स्किल्स (Motor Skills) मजबूत हों।
  • नींद की आवश्यकता: 4 से 12 महीने के शिशुओं के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए प्रतिदिन 12 से 16 घंटे की पर्याप्त नींद (झपकी सहित) सुनिश्चित करने के लाभ समझाए जा रहे हैं।

UPSC & CGPSC Social Sector Fact Box: NRCs, AMB & Micronutrient Deficiencies

  • पोषण पुनर्वास केंद्र (Nutritional Rehabilitation Centres – NRCs): ये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत सरकारी अस्पतालों में स्थापित विशेष वार्ड हैं, जहाँ गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से पीड़ित बच्चों को भर्ती कर 14 दिनों तक चिकित्सकीय भोजन और गहन देखभाल प्रदान की जाती है।
  • एनीमिया मुक्त भारत (AMB): यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई एक राष्ट्रीय रणनीति है, जिसके तहत 6-59 महीने के बच्चों को साप्ताहिक रूप से आयरन और फॉलिक एसिड (IFA) सिरप प्रदान किया जाता है।
  • कोलस्ट्रम (Colostrum): प्रसव के तुरंत बाद माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध, जो शिशु के लिए ‘प्राकृतिक टीका’ का काम करता है क्योंकि यह इम्यूनोग्लोबुलिन (Immunoglobulins) से समृद्ध होता है।

UPSC & State PCS Mains Analysis: मानव विकास सूचकांक, छिपी हुई भूख (Hidden Hunger) और सामाजिक सुरक्षा नीतियां

मुख्य परीक्षा के समाजशास्त्र, लोक स्वास्थ्य प्रशासन, बाल विकास सूचकांकों (Child Development Indices) और पोषण कूटनीति के दृष्टिकोण से शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ का यह सुव्यवस्थित क्रियान्वयन देश के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-2: शून्य भुखमरी और सतत कृषि, तथा SDG-3: उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली) को पूरा करने वाला एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करता है। किसी भी विकासशील राज्य में बच्चों का कुपोषण केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह भविष्य की मानव संसाधन पूंजी (Human Capital) को कमजोर करने वाली ‘छिपी हुई भूख’ (Hidden Hunger) का संकेत है।

कुपोषण के कारण होने वाला मानसिक और शारीरिक बौनापन (Stunting and Wasting) अंततः वयस्कों की कार्यक्षमता और राज्य की जीडीपी को प्रभावित करता है। इसके समाधान के रूप में, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘मितानिन’ (ASHAs) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (AWWs) के माध्यम से घर-घर जाकर आईएफए और विटामिन ‘ए’ का वितरण करना ‘विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य सेवा’ (Decentralised Healthcare) का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। यह व्यावहारिक नीति न केवल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि गरीब परिवारों को पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRCs) के माध्यम से निःशुल्क चिकित्सा सुरक्षा प्रदान करती है। यह समग्र दृष्टिकोण अंततः बाल मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम करने और एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त पीढ़ी का निर्माण करने की दिशा में छत्तीसगढ़ के सामाजिक-आर्थिक नियोजन की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण बाल स्वास्थ्य योजना और संबंधित पोषण मानकों पर अपनी समझ का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में 18 अगस्त 2026 से शुरू हुए शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ अभियान के तहत मुख्य रूप से किस आयु वर्ग के बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की दर को कम करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें विटामिन ‘ए’ और आईएफए सिरप का वितरण किया जा रहा है?

(A) 0 से 5 वर्ष तक के बच्चे (Under-5 Children)
(B) 5 से 10 वर्ष तक के बच्चे
(C) केवल नवजात शिशु
(D) किशोर किशोरियां

उत्तर: (A) 0 से 5 वर्ष तक के बच्चे (Under-5 Children)
व्याख्या: शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ मुख्य रूप से 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों (और विटामिन ए के लिए विशेष रूप से 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों) को लक्षित करता है, ताकि बाल मृत्यु दर और कुपोषण को रोका जा सके।

प्रश्न 2: कुपोषण से पीड़ित गंभीर तीव्र कुपोषित (SAM) बच्चों के उपचार और उनके स्वास्थ्य पुनर्वास के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत छत्तीसगढ़ में किन विशेष केंद्रों का संचालन जिला अस्पतालों में किया जाता है?

(A) बाल सुरक्षा गृह
(B) पोषण पुनर्वास केंद्र (Nutritional Rehabilitation Centres – NRCs)
(C) संजीवनी क्लीनिक
(D) सुगम्य देखभाल केंद्र

उत्तर: (B) पोषण पुनर्वास केंद्र (Nutritional Rehabilitation Centres – NRCs)
व्याख्या: गंभीर कुपोषित बच्चों के वैज्ञानिक पोषण और उपचार के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला चिकित्सालयों में ‘पोषण पुनर्वास केंद्र’ (NRC) संचालित हैं, जहाँ निःशुल्क भोजन और चिकित्सा प्रदान की जाती है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ क्या है और यह कब से शुरू हुआ है?

शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ राज्य के स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान है, जिसके नए चरण का शुभारंभ 18 अगस्त 2026 को किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और संक्रामक बीमारियों की दर को न्यूनतम करना है।

Q2. इस अभियान के दौरान बच्चों को कौन-सी प्रमुख दवाएं और खुराकें निःशुल्क दी जा रही हैं?

अभियान के तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी से बचाने के लिए विटामिन ‘ए’ की खुराक, खून की कमी को दूर करने के लिए आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप, दस्त नियंत्रण के लिए ओआरएस और जिंक की गोलियाँ तथा नियमित रूप से छूटे हुए टीके लगाए जा रहे हैं।

Q3. इस विशेष माह के अंतर्गत माताओं को शिशु के मस्तिष्क विकास और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए क्या व्यावहारिक परामर्श दिए जा रहे हैं?

माताओं को 6 माह तक केवल स्तनपान कराने, 6 माह के बाद सही ऊपरी आहार देने, बच्चों को झूले या स्ट्रोलर में बांधकर रखने के बजाय जमीन पर स्वतंत्र शारीरिक गतिविधि करने, तथा शिशुओं के दिमागी विकास के लिए उनके सामने गाने और पढ़ने की सलाह दी जा रही है।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • शिशुओं को पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा: शिशु संरक्षण माह छत्तीसगढ़ के अंतर्गत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी से बचाने के लिए विटामिन ‘ए’ की खुराक दी जा रही है, तथा 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एनीमिया-मुक्त करने के लिए आईएफए (IFA) सिरप प्रदान की जा रही है।
  • कुपोषण की वैज्ञानिक पहचान: आंगनवाड़ी और मितानिन स्तर पर कुपोषित बच्चों की पहचान कर गंभीर रूप से बीमार बच्चों को शासकीय ‘पोषण पुनर्वास केंद्रों’ (NRCs) में निःशुल्क चिकित्सकीय इलाज के लिए भेजा जा रहा है।
  • संज्ञानात्मक विकास पर विशेष बल: इस वर्ष दवाओं के साथ-साथ शिशुओं के संज्ञानात्मक (दिमागी) विकास के लिए माताओं को बच्चों से बात करने, गाने, तथा उन्हें चलने-हिलने के लिए पर्याप्त अवसर देने का व्यावहारिक परामर्श दिया जा रहा है।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, महिला एवं बाल कल्याण योजनाएं, कुपोषण निवारण कार्यक्रम), पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का मानव भूगोल), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सरकारी नीतियां और उनका क्रियान्वयन, कमजोर वर्गों विशेषकर बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक क्षेत्र/स्वास्थ्य का विकास और प्रबंधन) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (राष्ट्रीय पोषण नीति, एनीमिया मुक्त भारत, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य तकनीकी मिशन) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक स्वास्थ्य विषय है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह विशेष आलेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) छत्तीसगढ़, और जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक श्री धनंजय राठौर द्वारा 20 अगस्त 2026 को रायपुर में जारी की गई आधिकारिक शिशु संरक्षण माह समीक्षा रिपोर्ट के आंकड़ों पर आधारित है।

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