रायपुर, 15 अक्टूबर: बस्तर में पांच दशकों तक निर्दोष आदिवासियों और जवानों को गहरे जख्म देने वाले नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब पीड़ितों के पुनर्वास, सम्मान और स्वावलंबन के एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत हो गई है। दंतेवाड़ा में आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ऐतिहासिक घोषणा की कि बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक कैंपों को Shaheed Veer Gundadhur Seva Dera (शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा) के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवाकाल के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर) के सहयोग से शुरू हुए इस शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और उपकरण बांटे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि नक्सलमुक्त बस्तर को अब देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाना सरकार का सर्वोच्च संकल्प है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Shaheed Veer Gundadhur Seva Dera’: बस्तर के 200 से अधिक खाली हो रहे सुरक्षा कैंप बनेंगे कौशल विकास, आजीविका और नागरिक सेवा केंद्र।
- दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगों को अंग प्रत्यारोपण: 15 से 17 अक्टूबर तक शिविर; दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल।
- 8,526 आत्मसमर्पित नक्सलियों का संपूर्ण पुनर्वास: 7,328 बैंक खाते खुले, 455 को सरकारी नौकरी, 129 को भूमि, 4,014 को पीएम आवास और 2,308 को स्किल ट्रेनिंग।
- अमित शाह का कड़ा संदेश: ‘आईईडी विस्फोटों से निर्दोषों को दिव्यांग बनाना सबसे बड़ा मानवाधिकार हनन था; अब हर घाव पर मरहम लगाना हमारा धर्म है।’
- बस्तर में विकास की नई सुबह: 500+ गांवों में बिजली-सड़क, नक्सल हिंसा से बंद पड़े 431 स्कूल दोबारा खुले; इंद्रावती नदी पर ₹2,000 करोड़ की सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत।
- पहला सेवा डेरा नेतानार में शुरू: अमर शहीद वीर गुंडाधुर के गांव में सिलाई-कढ़ाई, इमली पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी चावल प्रसंस्करण की शुरुआत।
Shaheed Veer Gundadhur Seva Dera: सुरक्षा के गढ़ अब बनेंगे जनसेवा और आजीविका के केंद्र
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर के रणनीतिक बदलाव की सबसे बड़ी योजना साझा करते हुए बताया कि शांति स्थापना के बाद सुरक्षा बलों के कैंपों का स्वरूप पूरी तरह बदला जा रहा है।
Shaheed Veer Gundadhur Seva Dera के तहत 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को जन-सुविधा केंद्रों में रूपांतरित किया जा रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि जिन शिविरों में कभी सुरक्षा बलों के जवान बैठकर बंदूक के साए में सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, अब उन्हीं कैंपों में केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार के प्रशासनिक अधिकारी बैठकर आदिवासियों को प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य सेवाएं और राशन बांटेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जानकारी दी कि महान जनजातीय जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के पैतृक गांव नेतानार में पहला ‘सेवा डेरा’ शुरू कर दिया गया है, जहाँ स्थानीय महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई की ट्रेनिंग दी जा रही है और बस्तर की प्राकृतिक इमली व ढेंकी चावल के मूल्य संवर्धन का काम हो रहा है।
दंतेवाड़ा शिविर में 768 दिव्यांगों को सहारा: आईईडी पीड़ितों की भावुक दास्तान
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस शिविर में दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजनों सहित कुल 768 लोगों को आधुनिक कृत्रिम पैर (जयपुर फुट), हाथ, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और स्मार्ट वॉकिंग स्टिक दिए जा रहे हैं। इससे पूर्व 5 से 7 अक्टूबर को जगदलपुर शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांग लाभान्वित हुए थे (जिसमें 1,570 केवल बस्तर के थे)।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने लाभार्थियों से सीधा संवाद किया, जहाँ आईईडी के शिकार आदिवासियों की आंखें छलक पड़ीं:
- मड़काम मुन्ना (सुकमा): पुलिस जवान मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी ब्लास्ट में उनका बायां पैर उड़ गया था। आज कृत्रिम पैर पाकर वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं और देश सेवा के लिए तैयार हैं।
- चंद्रैया सपका (बीजापुर): धर्मारम निवासी चंद्रैया ने गोंडी बोली में बताया कि 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी पर पैर पड़ने से उन्होंने दायां पैर खो दिया था। 14 साल बाद कृत्रिम अंग मिलने से वे दोबारा चलने लगे हैं।
- अजय सोरी व कोसी पोडियाम (दंतेवाड़ा): जावंगा और मेटापाल के जन्मजात अस्थिबाधित दिव्यांगों को नई ट्राइसाइकिल मिली, जिससे उनका दैनिक आवागमन सुगम हुआ।
8,526 आत्मसमर्पित नक्सलियों का पुनर्वास: गृह मंत्री ने पेश किया पूरा लेखा-जोखा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर में हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे 8,526 नक्सलियों और हिंसा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का विस्तृत राष्ट्रीय आंकड़ा प्रस्तुत किया:
- वित्तीय समावेशन: बैंकिंग व्यवस्था से वंचित 7,328 पूर्व नक्सलियों के नए बैंक खाते खोले गए।
- इनामी व प्रोत्साहन राशि: 1,620 लोगों को शासन द्वारा घोषित इनामी राशि और 7,882 लोगों को पुनर्वास प्रोत्साहन राशि का सीधा भुगतान किया गया।
- रोजगार व आजीविका: 455 आत्मसमर्पितों को योग्यता के अनुसार सरकारी/नियमित नौकरियां दी गईं, 129 लोगों को कृषि भूमि आवंटित की गई और 2,308 आदिवासियों को विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास (Skill Training) दिया गया।
- आवास व नागरिक सुविधाएं: प्रधानमंत्री आवास योजना से 4,014 पक्के घर बनाकर दिए गए। 6,763 नए राशन कार्ड, 2,808 परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन और 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए। उत्कृष्ट पुनर्वास कार्यों के लिए 44 पंचायतों को ‘इलवाद पंचायत पुरस्कार’ मिला।
- बुनियादी ढांचा: वनांचल में 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू हुईं और 670 पुल-पुलियों का निर्माण पूर्णता की ओर है।
‘कंधे पर गन नहीं, कंधे पर हल’: सीएम विष्णु देव साय ने बताया बदलते बस्तर का सच
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मोदी-शाह के नेतृत्व में सुरक्षा बलों के पराक्रम से 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने का संकल्प पूरा हो चुका है। अब बस्तर में गोलियों की तड़तड़ाहट नहीं, विकास के गीत गूंज रहे हैं:
- 431 बंद स्कूल दोबारा शुरू: हिंसा के चलते दशकों से वीरान पड़े 431 स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्रों में हाई-टेक ‘एजुकेशन सिटी’ बनाई जा रही है।
- नियद नेल्लानार से 500+ गांवों में रोशनी: सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी और घर-घर नल से जल पहुंचाया जा रहा है। राशन के लिए मीलों भटकने वाले आदिवासियों को अब गांव के भीतर ही राशन दुकानें मिल रही हैं।
- इंद्रावती पर ₹2,000 करोड़ की सिंचाई परियोजना: बस्तर के देउरगांव और मटनार में इंद्रावती नदी पर 2 हजार करोड़ की वृहद सिंचाई परियोजनाएं मंजूर की गई हैं, जिससे 80,000 एकड़ कृषि भूमि सिंचित होगी।
- पशुपालन व श्वेत क्रांति: ग्रामीण परिवारों को आजीविका के लिए दो-दो गायें दी जा रही हैं और बड़े पैमाने पर डेयरी समझौते किए गए हैं।
- नक्सल पीड़ितों को 15,000 आवास: आत्मसमर्पित कैडरों और पीड़ितों के लिए 15,000 पीएम आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 5,671 मकानों का निर्माण तेजी से जारी है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा: ‘खेत की मेड़ पर चलने वाले निर्दोषों को मिला न्याय’
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों के आईईडी बमों ने सबसे ज्यादा नुकसान बस्तर के निर्दोष ग्रामीणों को पहुंचाया—कोई बच्चा खेलते हुए पैर गंवा बैठा, तो कोई किसान खेत की मेड़ पर चलते हुए शिकार हो गया। उन्होंने संकल्प दोहराया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार बस्तर के हर एक पीड़ित व्यक्ति तक पहुंचेगी और पुनर्वास का यह महाभियान बिना रुके निरंतर जारी रहेगा।
“पांच दशकों तक बस्तर के गरीब आदिवासियों ने जो संत्रास झेला है, वह केवल नक्सलवाद खत्म होने से पूरा नहीं होगा। हमें उनके हर घाव पर प्यार और सेवा का मरहम लगाना होगा। नक्सलियों के आईईडी विस्फोटों ने लोगों के हाथ-पैर छीने, लेकिन अब हमारी सरकार उन्हें कृत्रिम अंग और सम्मान देकर अपने पैरों पर खड़ा कर रही है। जिन 200 सुरक्षा कैंपों से कभी बंदूकें चलती थीं, वे अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ बनकर आदिवासियों की समृद्धि का केंद्र बनेंगे। मोदी सरकार छत्तीसगढ़ के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।”— अमित शाह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, भारत सरकार
समारोह में उपस्थित नेतृत्व और सहयोगी संस्थाएं
इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर), भारतीय जैन संघ के पदाधिकारी, स्थानीय पारंपरिक मांझी-मुखिया और हजारों ग्रामीण उपस्थित रहे।
दंतेवाड़ा दिव्यांग शिविर एवं बस्तर पुनर्वास: एक नजर में
- परियोजना/घोषणा: शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा (Shaheed Veer Gundadhur Seva Dera)
- रूपांतरित होने वाले कैंप: बस्तर के 200 से अधिक पूर्व सुरक्षा शिविर
- पहला सेवा डेरा: ग्राम नेतानार (शहीद वीर गुंडाधुर का पैतृक गांव – सिलाई व इमली प्रसंस्करण)
- दंतेवाड़ा शिविर लाभार्थी (768): दंतेवाड़ा (509), बीजापुर (197), सुकमा (62)
- सहयोगी संस्था: भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (BMVSS), जयपुर
- आत्मसमर्पित नक्सली पुनर्वास: 8,526 आत्मसमर्पण | 7,328 बैंक खाते | 4,014 आवास | 455 नौकरियां
- बस्तर शिक्षा पुनरुद्धार: हिंसा से बंद 431 स्कूल दोबारा खुले; ओरछा-जगरगुंडा एजुकेशन सिटी
- बस्तर कृषि विस्तार: इंद्रावती नदी पर देउरगांव-मटनार परियोजना (₹2,000 करोड़, 80,000 एकड़ सिंचाई)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Shaheed Veer Gundadhur Seva Dera क्या है और इसका क्या उद्देश्य है?
Shaheed Veer Gundadhur Seva Dera के तहत बस्तर के 200 से अधिक खाली हो रहे सुरक्षा शिविरों को नागरिक सेवा, कौशल विकास, सिलाई-कढ़ाई और वनोपज प्रसंस्करण के स्थायी आजीविका केंद्रों में बदला जा रहा है।
दंतेवाड़ा के तीन दिवसीय शिविर में कितने दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया जा रहा है?
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में कुल 768 दिव्यांगजनों (दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62) को निःशुल्क कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के क्या आंकड़े साझा किए?
गृह मंत्री के अनुसार 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें से 7,328 के बैंक खाते खोले गए, 455 को सरकारी नौकरी, 129 को भूमि, 4,014 को पीएम आवास और 2,308 को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है।
बस्तर में कृषि और सिंचाई के लिए मुख्यमंत्री ने किस बड़ी परियोजना की जानकारी दी?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में लगभग ₹2,000 करोड़ की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं की जानकारी दी, जिससे बस्तर की 80,000 एकड़ भूमि सिंचित होगी।
आधिकारिक स्रोत: गृह मंत्रालय, भारत सरकार / मुख्यमंत्री सचिवालय / जिला जनसंपर्क कार्यालय (DPR), दंतेवाड़ा-रायपुर (छत्तीसगढ़ शासन)