नई दिल्ली/रायपुर, 05 अक्टूबर: विश्व पर्यावास दिवस (World Habitat Day) के अवसर पर देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित गरिमामय राष्ट्रीय समारोह में PMAY Urban Award Chhattisgarh (पीएमएवाई अर्बन राष्ट्रीय पुरस्कार) के तहत छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल को प्रदान किया। राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों के लिए निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण और एएचपी (Affordable Housing in Partnership) मॉडल के जरिए बिना किसी सरकारी खर्च के 25,413 आवासों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की अनूठी कार्यप्रणाली को केंद्र सरकार ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ (Best Practice) के रूप में राष्ट्रीय पहचान दी है।
मुख्य बिंदु:
- ‘PMAY Urban Award Chhattisgarh’: विश्व पर्यावास दिवस पर विज्ञान भवन नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ को मिला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान।
- केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और सूडा CEO सुमित अग्रवाल को प्रदान किया पुरस्कार।
- निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण के कड़े क्रियान्वयन से 25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के उपलब्ध हुई जमीन।
- PMAY (शहरी) 1.0 में 17,790 और PMAY (शहरी) 2.0 में 7,623 पक्के मकानों को नियोजित कॉलोनियों के भीतर मिली प्राइम लोकेशन।
विज्ञान भवन में गूंजा छत्तीसगढ़ का डंका: ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ को राष्ट्रीय पहचान
शहरी गरीबों और जरूरतमंदों को अपनी छत मुहैया कराने में सबसे बड़ी बाधा शहरों में जमीन की अनुपलब्धता और उसकी अत्यधिक कीमत रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस जटिल समस्या का ऐसा अभिनव और टिकाऊ समाधान निकाला, जिसे भारत सरकार ने पूरे देश के लिए अनुकरणीय मॉडल माना है।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय पर्यावास समारोह में देश भर के राज्यों की विभिन्न आवास योजनाओं का परीक्षण करने के उपरांत छत्तीसगढ़ के ईडब्ल्यूएस-एलआईजी भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को सर्वश्रेष्ठ नवाचार के रूप में चुना गया।
25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च मिली जमीन: क्या है यह क्रांतिकारी मॉडल?
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम और कॉलोनाइजर नियमों के तहत निजी आवासीय कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस (कमजोर वर्ग) और एलआईजी (निम्न आय वर्ग) के लिए निर्धारित भूमि आरक्षण के प्रावधान को धरातल पर कड़ाई से लागू कराया।
इस नीतिगत सुधार का परिणाम यह हुआ कि राज्य शासन को जमीन खरीदने के लिए अपने खजाने से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा और 25 हजार 413 आवासों के निर्माण के लिए सुरक्षित जमीन उपलब्ध हो गई। इनमें:
- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0: 17 हजार 790 आवासों के लिए भूमि।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0: 7 हजार 623 आवासों के लिए भूमि।
शहर के बाहर नहीं, विकसित कॉलोनियों का हिस्सा बने गरीब परिवार
इस मॉडल की सबसे बड़ी मानवीय और सामाजिक विशेषता यह है कि गरीब परिवारों को शहरों से 20-25 किलोमीटर दूर वीराने या बाहरी इलाकों में नहीं बसाया जा रहा है, जैसा कि अक्सर अन्य राज्यों में देखा जाता है।
निजी कॉलोनियों में जमीन मिलने से ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के आवास शहर के मुख्य और सुनियोजित रिहायशी क्षेत्रों का हिस्सा बन रहे हैं। इससे लाभार्थी परिवारों को पक्की सड़कें, 24 घंटे बिजली, शुद्ध पेयजल, सीवरेज, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक परिवहन की वही उच्चस्तरीय सुविधाएं मिल रही हैं, जो विकसित कॉलोनियों में उपलब्ध होती हैं।
एएचपी (AHP) मॉडल और कड़े मॉनिटरिंग सिस्टम से निर्माण में गति
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) ने मिलकर आवासीय परियोजनाओं की तकनीकी स्वीकृति, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता के लिए एक पारदर्शी तंत्र तैयार किया है।
नगरीय निकायों के साथ नियमित समन्वय कर आवासों की प्रगति की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी समाप्त हुई है और पात्र हितग्राहियों को तय समय पर उनके घर की चाबी सौंपी जा रही है।
‘पक्का घर सम्मान और बेहतर भविष्य की नींव’: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नगरीय प्रशासन विभाग, सूडा और सभी नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का घर केवल ईंट-सीमेंट की चार दीवारें और छत नहीं है, बल्कि वह एक गरीब परिवार के मान-सम्मान, सुरक्षा और बच्चों के सुनहरे भविष्य की सबसे मजबूत बुनियाद है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी पात्र नागरिक बेघर न रहे।
‘जमीन से लेकर किफायती घर तक खड़ी की ठोस व्यवस्था’: उप मुख्यमंत्री अरुण साव
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने आवास निर्माण को केवल कागजी फाइलों या घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती मकान के निर्माण तक एक ठोस और व्यावहारिक व्यवस्था खड़ी की है।
उन्होंने कहा कि निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को केंद्र सरकार से राष्ट्रीय सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि हमारी कार्यशैली परिणामोन्मुखी है। यह सम्मान पूरी टीम को और अधिक संवेदनशीलता तथा गति से काम करने के लिए प्रेरित करेगा।
“शहरी गरीबों को शहरों की मुख्यधारा से जोड़ना ही सुशासन का असली पैमाना है। हमने निजी कॉलोनाइजरों से जमीन आरक्षित करवाकर बिना किसी वित्तीय बोझ के 25,413 परिवारों के पक्के मकान की राह आसान की है। विश्व पर्यावास दिवस पर मिला यह राष्ट्रीय सम्मान छत्तीसगढ़ के हर जरूरतमंद नागरिक के हक की जीत है।”— अरुण साव, उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री, छत्तीसगढ़
शहरी गरीबों, ईडब्ल्यूएस परिवारों और राज्य के लिए इसके क्या मायने हैं?
- बिना सरकारी खर्च के राजस्व की बचत: 25 हजार से अधिक मकानों के लिए शहरी क्षेत्रों में करोड़ों रुपये मूल्य की प्राइम लोकेशन जमीन बिना सरकारी खजाने पर भार डाले उपलब्ध हुई।
- सामाजिक समानता को बढ़ावा: अमीर और गरीब परिवारों का एक ही नियोजित शहरी परिवेश में सह-अस्तित्व सामाजिक भेदभाव को मिटाएगा और बच्चों को बेहतर सामाजिक माहौल देगा।
- शहरी स्लम विस्तार पर रोक: कमजोर आय वर्ग को शहर के भीतर ही सर्वसुविधायुक्त पक्के फ्लैट मिलने से अनियोजित बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों के फैलाव पर स्वाभाविक नियंत्रण होगा।
छत्तीसगढ़ किफायती आवास मॉडल: मुख्य आंकड़े एक नजर में
- अवसर: विश्व पर्यावास दिवस (05 अक्टूबर 2026), विज्ञान भवन, नई दिल्ली
- पुरस्कार प्रदाता: केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू
- पुरस्कार प्राप्तकर्ता: प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा एवं सूडा सीईओ सुमित अग्रवाल
- कुल लाभान्वित आवास: 25,413 ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास
- PMAY 1.0 आवास: 17,790 आवास
- PMAY 2.0 आवास: 7,623 आवास
- मॉडल की प्रकृति: निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण + अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (AHP)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
PMAY Urban Award Chhattisgarh किस नवाचार के लिए प्रदान किया गया है?
यह पुरस्कार निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षित कर बिना सरकारी खर्च 25,413 आवासों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के लिए दिया गया है।
निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण से कितने आवासों को लाभ मिला है?
इसके तहत कुल 25,413 आवासों के लिए जमीन मिली है, जिसमें PMAY-U 1.0 के 17,790 और PMAY-U 2.0 के 7,623 आवास शामिल हैं।
विज्ञान भवन में यह राष्ट्रीय सम्मान किसने ग्रहण किया?
राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा सूडा (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल ने यह सम्मान ग्रहण किया।
इस आवास मॉडल का सबसे बड़ा सामाजिक लाभ क्या है?
गरीब और कमजोर परिवारों को शहरों के सुदूर बाहरी इलाकों में जाने के बजाय शहर के भीतर विकसित कॉलोनियों में सड़क, पानी, बिजली व स्कूल जैसी सुविधाओं के साथ पक्का घर मिलता है।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग)