Mukhyamantri Vishesh Swasthya Sahayata Yojana: 10 वर्षीय ऋतिक के इलाज के लिए ₹18 लाख स्वीकृत, बेंगलुरु में होगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट

Mukhyamantri Vishesh Swasthya Sahayata Yojana Mukhyamantri Vishesh Swasthya Sahayata Yojana

रायपुर, 09 अक्टूबर: आर्थिक अभाव में किसी भी मासूम की सांसें न टूटें, इस मानवीय संकल्प को सिद्ध करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक गरीब परिवार को जीवनदान दिया है। जशपुर जिले के 10 वर्षीय बालक ऋतिक यादव के जटिल और महंगे इलाज के लिए Mukhyamantri Vishesh Swasthya Sahayata Yojana (मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना) के तहत रिकॉर्ड ₹18 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। इस सहायता से ऋतिक का कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठित मजूमदार शॉ मेडिकल सेंटर (Mazumdar Shaw Medical Center) में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) कराया जाएगा। मुख्यमंत्री के गृह ग्राम स्थित ‘कैंप कार्यालय बगिया’ में परिजनों द्वारा लगाई गई गुहार पर त्वरित संज्ञान लेते हुए यह राशि मंजूर की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • ‘Mukhyamantri Vishesh Swasthya Sahayata Yojana’: जशपुर के 10 वर्षीय ऋतिक यादव के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए ₹18 लाख स्वीकृत।
  • बेंगलुरु में होगा उपचार: नारायण हेल्थ सिटी के मजूमदार शॉ मेडिकल सेंटर में एलोजीनिक व हैप्लो-आइडेंटिकल बीएमटी प्रक्रिया से होगा इलाज।
  • ‘कैंप कार्यालय बगिया’ बना सहारा: पीड़ित पिता मेघनाथ यादव ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंचकर लगाई थी आर्थिक सहायता की गुहार।
  • दुर्लभ बीमारियों में रक्षा-कवच: आयुष्मान भारत से इतर गंभीर बीमारियों के लिए राज्य सरकार देती है ₹25 लाख तक का निःशुल्क उपचार।

बेंगलुरु के मजूमदार शॉ मेडिकल सेंटर में होगा जटिल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

जशपुर जिले के ग्राम निवासी मेघनाथ यादव के 10 वर्षीय पुत्र ऋतिक यादव एक गंभीर और जानलेवा रक्त विकार (Blood Disorder/Aplastic Anemia) से पीड़ित हैं। देश के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद स्पष्ट किया था कि बच्चे की जान बचाने का एकमात्र उपाय तत्काल बोन मैरो ट्रांसप्लांट है।

स्वीकृत ₹18 लाख की राशि से ऋतिक का इलाज बेंगलुरु स्थित अत्याधुनिक मजूमदार शॉ मेडिकल सेंटर में किया जाएगा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के उपचार में OT-U100, एलोजीनिक बीएमटी (Allogenic BMT) तथा हैप्लो-आइडेंटिकल बीएमटी (BMT Haplo-identical) जैसी अत्यधिक जटिल और संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी, जिसमें डोनर सेल मैचिंग से लेकर महीनों तक स्टेराइल आईसीयू देखभाल शामिल होती है।

‘सीएम कैंप कार्यालय बगिया’ बना संकटमोचक: पिता की आंखों के आंसू पोंछे

ऋतिक के पिता मेघनाथ यादव एक सामान्य ग्रामीण परिवार से आते हैं। जब डॉक्टरों ने इलाज का खर्च 18 से 20 लाख रुपये बताया, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। महंगे इलाज का खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ पिता ने मुख्यमंत्री के गृह ग्राम स्थित ‘मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, बगिया’ का रुख किया।

कैंप कार्यालय में अधिकारियों ने परिजनों का आवेदन लेकर बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट्स जांची और प्रकरण को सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संज्ञान में लाया। मुख्यमंत्री ने बिना किसी प्रशासनिक देरी के स्वास्थ्य विभाग को तुरंत अधिकतम ₹18 लाख की स्वीकृति जारी करने के निर्देश दिए, जिससे निराश परिवार को नई जिंदगी की उम्मीद मिल गई।


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क्या है मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना? दुर्लभ रोगों में ₹25 लाख तक की मदद

छत्तीसगढ़ सरकार की ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ (MVSSY) देश की सबसे अनूठी और मानवीय स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है:

  • आयुष्मान भारत से भी आगे: आयुष्मान भारत योजना में प्रति परिवार सालाना ₹5 लाख तक का कवर मिलता है, लेकिन बोन मैरो, लिवर ट्रांसप्लांट और दुर्लभ कैंसर जैसी बीमारियों में खर्च 15 से 25 लाख तक पहुंच जाता है।
  • ₹25 लाख तक का विशेष अनुदान: इस योजना के अंतर्गत राज्य के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को ऐसी असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए सरकार सीधे उच्च स्तरीय अस्पतालों को ₹25 लाख तक की आर्थिक मदद स्वीकृत करती है।
  • देश के शीर्ष अस्पतालों में इलाज: इसके तहत मरीज का इलाज एम्स, सीएमसी वेल्लोर, मजूमदार शॉ बेंगलुरु और टाटा मेमोरियल मुंबई जैसे विश्वस्तरीय अस्पतालों में संभव हो पाता है।

“एक पिता के रूप में मैं समझ सकता हूँ कि जब अपनी ही संतान किसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हो और इलाज का खर्च सामर्थ्य से बाहर हो, तो उस परिवार पर क्या बीतती है। हमारी सरकार का संकल्प है कि पैसे के अभाव में छत्तीसगढ़ के किसी भी बच्चे का इलाज नहीं रुकेगा। ऋतिक हमारा बेटा है और उसके बेहतर से बेहतर इलाज की जिम्मेदारी हमारी है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वह शीघ्र स्वस्थ होकर अपने घर लौटे।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

गरीब परिवारों और गंभीर मरीजों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • जमीनी स्तर पर सुलभ न्याय: मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया के जरिए सुदूर वनांचल के लोगों को अपनी फरियाद लेकर 400 किमी दूर रायपुर आने की मजबूरी खत्म हुई है।
  • आर्थिक तबाही से बचाव: गंभीर बीमारियों में परिवारों को अपनी जमीन-मकान बेचने या कर्ज के जाल में फंसने से इस योजना ने पूरी तरह सुरक्षित किया है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सुविधा: बस्तर और जशपुर के अंतिम गांव का बच्चा भी देश के सबसे महंगे कॉर्पोरेट मेडिकल सेंटर में इलाज पाने का हकदार बन रहा है।

ऋतिक यादव स्वास्थ्य सहायता मामला: एक नजर में

  • मरीज का नाम: ऋतिक यादव (उम्र: 10 वर्ष)
  • पिता का नाम: श्री मेघनाथ यादव
  • गृह जिला: जशपुर, छत्तीसगढ़
  • बीमारी व उपचार: गंभीर रक्त विकार हेतु बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT)
  • स्वीकृत सहायता राशि: ₹18,00,000 (अठारह लाख रुपये)
  • योजना का नाम: मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना (MVSSY)
  • उपचार स्थल: मजूमदार शॉ मेडिकल सेंटर, बेंगलुरु (कर्नाटक)
  • मदद का माध्यम: मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, बगिया (जशपुर)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

ऋतिक यादव के इलाज के लिए मुख्यमंत्री ने कितनी राशि स्वीकृत की है?

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 10 वर्षीय ऋतिक यादव के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ से ₹18 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है।

ऋतिक का उपचार किस अस्पताल में किया जाएगा?

ऋतिक का उपचार कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित नारायण हेल्थ सिटी के मजूमदार शॉ मेडिकल सेंटर (Mazumdar Shaw Medical Center) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगा।

मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना (MVSSY) के तहत अधिकतम कितनी सहायता मिलती है?

इस योजना के तहत गंभीर, दुर्लभ और असाध्य बीमारियों (जैसे ट्रांसप्लांट, कैंसर, हार्ट सर्जरी) के इलाज के लिए पात्र मरीजों को अधिकतम ₹25 लाख तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।

परिजनों ने सहायता के लिए कहाँ आवेदन किया था?

परिजनों ने जशपुर जिले में स्थित ‘मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, बगिया’ पहुंचकर बच्चे के इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी, जहाँ से तत्काल त्वरित स्वीकृति मिली।

स्रोत (Source): मुख्यमंत्री सचिवालय / स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (DPR Raipur)

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