रायपुर, 09 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को डेटा और आधुनिक प्रबंधन से लैस करने के लिए तैयार किए जा रहे युवा नीति-विशेषज्ञों से मुख्यमंत्री ने सीधा संवाद किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने राजधानी स्थित निवास कार्यालय में Mukhyamantri Sushasan Fellowship (मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप) के द्वितीय बैच के 36 प्रतिभागियों से आत्मीय मुलाकात की। कैट (CAT) परीक्षा और भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM Raipur) की कठिन चयन प्रक्रिया से चुने गए इन युवाओं को संबोधित करते हुए सीएम साय ने अपने बचपन के संघर्ष, बगिया गांव में हल चलाने से लेकर सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के संस्मरण साझा किए। यह दो वर्षीय फेलोशिप सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के साथ मिलकर संचालित की जा रही है।
मुख्य बिंदु:
- ‘Mukhyamantri Sushasan Fellowship’: द्वितीय बैच के लिए प्रदेश के 14 जिलों से चुने गए 36 मेधावी युवा फेलो; आईआईएम रायपुर में होगी ट्रेनिंग।
- 2 साल का मॉडल: 3 महीने आईआईएम रायपुर में अकादमिक प्रशिक्षण और 19 महीने जिला प्रशासन के साथ रहकर योजनाओं की करेंगे निगरानी।
- सीएम साय का भावुक संस्मरण: 10 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद संभाली खेती; 6 किमी दूर जूट का बोरा लेकर दी थी 5वीं की बोर्ड परीक्षा।
- भविष्य का विजन: ₹500 करोड़ के एआई मिशन से 6 लाख छात्रों को ट्रेनिंग और नवा रायपुर में 100 एकड़ में प्रस्तावित 5,000 बेड की मेडिसिटी।
कैट (CAT) स्कोर और आईआईएम रायपुर से चयन: 14 जिलों के 36 युवा शामिल
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि दूसरे बैच का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) स्कोर और आईआईएम रायपुर के कड़े इंटरव्यू के आधार पर हुआ है।
चयनित 36 युवा इंजीनियरिंग, डेटा साइंस, प्रबंधन (MBA), अर्थशास्त्र और गणित जैसे विविध क्षेत्रों से आते हैं। इनमें कई प्रतिभागी अपने सफल स्टार्टअप भी चला रहे हैं। दल में बस्तर, दंतेवाड़ा और जशपुर जैसे दूरस्थ जनजातीय अंचलों के युवाओं को भी अपनी योग्यता के आधार पर स्थान मिला है।
2 साल का फेलोशिप मॉडल: 3 महीने क्लासरूम, 19 महीने जिलों में फील्डवर्क
आईआईएम रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर की देखरेख में इन फेलोज़ का दो वर्षीय कार्यक्रम इस प्रकार डिजाइन किया गया है:
- प्रारंभिक 3 महीने: आईआईएम रायपुर परिसर में पब्लिक पॉलिसी, डेटा एनालिटिक्स, गवर्नेंस और विभागीय अभिसरण का सघन प्रशिक्षण।
- 19 महीने का मैदानी अनुभव: सभी फेलो राज्य के विभिन्न जिलों में कलेक्टरों और जिला पंचायतों के साथ अटैच रहेंगे। वे सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, गैप एनालिसिस और ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ विजन के क्रियान्वयन में सीधे सहयोग देंगे।
- अंतिम 2 महीने: रिपोर्ट निर्माण, नीतिगत विश्लेषण और नवाचारों का राज्य स्तर पर प्रस्तुतीकरण।
’10 साल की उम्र में पिता को खोया, खुद चलाया हल’: सीएम साय ने सुनाई संघर्ष गाथा
संवाद के दौरान जब युवा फेलो नीलिमा भारद्वाज और अंशुल ने मुख्यमंत्री से उनकी जीवन प्रेरणा के बारे में पूछा, तो सीएम साय भावुक हो गए और उन्होंने अपनी सादगी भरी दास्तान साझा की:
“जब मैं मात्र 10 वर्ष का था, तब पूज्य पिताजी का अचानक निधन हो गया। चार भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण मां, दादी और भाइयों की परवरिश और खेती की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। मैंने खुद बैलों से हल चलाकर खेतों में पसीना बहाया। पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने के लिए बगिया से 6 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता था और स्कूल में टाट-पट्टी नहीं होने से घर से जूट का बोरा लेकर जाते थे।”
उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी राजनीति में आने की योजना नहीं बनाई थी, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक की यात्रा में उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के धैर्य और जनसेवा के संस्कारों को अपना मार्गदर्शक बनाया।
₹500 करोड़ का AI मिशन और नवा रायपुर मेडिसिटी: विजन पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने फेलोज़ को बताया कि सरकार आधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कर रही है:
- एआई मिशन (AI Mission): राज्य के बजट में ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत 6 लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ज्ञान दिया जाएगा और 1,500 सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
- नवा रायपुर मेडिसिटी: 100 एकड़ में 5,000 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और मेडिकल रिसर्च हब की स्थापना की जा रही है।
- रोजगार के अवसर: पिछले ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों से 24,000 युवाओं को नौकरियां दी गई हैं।
“युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप केवल सरकारी फाइलें देखने का जरिया नहीं है, बल्कि यह गांवों के अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने की प्रयोगशाला है। जब आप जिलों में जाएं, तो एसी कमरों से बाहर निकलकर आदिवासियों और किसानों की वास्तविक जरूरतों को समझें। जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी ईमानदारी से निभाएं। जब नीयत साफ और उद्देश्य जनकल्याण का होता है, तो बड़े बदलाव आते हैं।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
राज्य प्रशासन और नीति-निर्माण के लिए इस फेलोशिप के क्या मायने हैं?
- प्रशासन में कॉर्पोरेट और पेशेवर दक्षता: आईआईएम के प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स के जिला स्तर पर काम करने से सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग में डेटा साइंस और आधुनिक टूल्स का उपयोग होगा।
- योजनाओं का लीकेज रुकेगा: जमीनी स्तर पर स्वतंत्र फेलो तैनात होने से कल्याणकारी योजनाओं में होने वाली कमियों और लीकेज की सटीक रिपोर्ट सीधे शासन तक पहुंचेगी।
- युवाओं को पॉलिसी लीडरशिप: दो साल बाद ये 36 युवा देश और दुनिया के बड़े थिंक-टैंक, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और प्रशासनिक संस्थाओं में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगे।
मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप (द्वितीय बैच): एक नजर में
- कार्यक्रम का नाम: मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप (Mukhyamantri Sushasan Fellowship)
- बैच संख्या: द्वितीय बैच (Second Cohort – 2026)
- चयनित फेलो: 36 युवा (प्रदेश के 14 जिलों से, विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञ)
- चयन का आधार: कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) स्कोर एवं आईआईएम रायपुर साक्षात्कार
- नोडल विभाग: सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
- अकादमिक पार्टनर: भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM Raipur) एवं ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI)
- अवधि एवं संरचना: 2 वर्ष (3 माह IIM रायपुर प्रशिक्षण + 19 माह जिला प्रशासन फील्डवर्क)
- विजन दस्तावेज़: ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Mukhyamantri Sushasan Fellowship क्या है?
यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक प्रतिष्ठित 2-वर्षीय फेलोशिप है, जिसमें आईआईएम रायपुर और सुशासन विभाग द्वारा चयनित मेधावी युवा जिलों में रहकर योजनाओं की निगरानी और सुशासन में सहयोग करते हैं।
दूसरे बैच में कितने युवाओं का चयन हुआ है और चयन प्रक्रिया क्या थी?
द्वितीय बैच में 36 युवाओं का चयन हुआ है, जिनका चयन कैट (CAT) परीक्षा के स्कोर और आईआईएम रायपुर की कड़े साक्षात्कार प्रक्रिया के आधार पर किया गया है।
फेलोशिप की कुल अवधि और ट्रेनिंग का प्रारूप क्या है?
फेलोशिप 2 वर्ष की है, जिसमें 3 महीने आईआईएम रायपुर में अकादमिक प्रशिक्षण दिया जाता है और उसके बाद 19 महीने तक फेलोज़ को विभिन्न जिलों में मैदानी कार्यों के लिए तैनात किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को अपने जीवन के किस संघर्ष के बारे में बताया?
सीएम साय ने बताया कि 10 वर्ष की उम्र में पिता के देहांत के बाद उन्होंने खेती संभाली, खुद हल चलाया और 6 किमी दूर जूट का बोरा लेकर 5वीं की बोर्ड परीक्षा देने जाते थे।
स्रोत (Source): सुशासन एवं अभिसरण विभाग / मुख्यमंत्री सचिवालय (DPR Raipur)