नई दिल्ली, 13 अक्टूबर: वैश्विक अनिश्चितताओं, टूटी हुई सप्लाई चेन और भू-राजनीतिक टकरावों के इस दौर में भारत ने दुनिया के सामने आर्थिक स्थिरता, नैतिक नेतृत्व और समावेशी विकास का एक नया वैश्विक मॉडल प्रस्तुत किया है। नई दिल्ली में पहली बार आयोजित Modi Bloomberg New Economy Forum (मोदी ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम) के ऐतिहासिक उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए आर्थिक सुधार कोई राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि एक दृढ़ वैचारिक संकल्प हैं। माइकल ब्लूमबर्ग और दुनिया भर के शीर्ष नीति-निर्माताओं व वैश्विक उद्योगपतियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने ‘पावर टू एम्पावर’ (Power to Empower) का दर्शन साझा करते हुए कहा कि 21वीं सदी में ताकत का पैमाना दूसरों पर नियंत्रण करना नहीं, बल्कि दूसरों को सक्षम बनाना है। भारत किसी की कीमत पर आगे नहीं बढ़ता, बल्कि पूरे विश्व के साथ और पूरे विश्व के लिए आगे बढ़ता है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Modi Bloomberg New Economy Forum’: भारत में पहली बार आयोजित प्रतिष्ठित वैश्विक आर्थिक फोरम में पीएम मोदी का संबोधन।
- पावर टू एम्पावर (Power to Empower): नियंत्रण की जगह सक्षमता, प्रतिस्पर्धा की जगह सहयोग और खुद जीतने से आगे दूसरों को जिताने का दिया विजन।
- रिफॉर्म्स पर दो टूक: ‘हमारे लिए सुधार मजबूरी नहीं, संकल्प हैं’; जीएसटी, 4 लेबर कोड्स, दिवालिया कानून और अपराधमुक्त प्रावधानों का दिया हवाला।
- सप्लाई चेन के हथियारीकरण पर प्रहार: वैश्वीकरण को रणनीतिक चोकपॉइंट बनाने की निंदा; भारत को बताया दुनिया का सबसे भरोसेमंद साझेदार।
- अभूतपूर्व आर्थिक आंकड़े: 7.8% जीडीपी विकास दर, $700 बिलियन से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटा (CAD) घटकर मात्र 0.61%।
- हरित ऊर्जा में छलांग: 2014 के 75 गीगावाट से बढ़कर रिन्यूएबल क्षमता हुई 300 गीगावाट; 2030 का पेरिस लक्ष्य 9 साल पहले नवंबर 2021 में ही किया हासिल।
Modi Bloomberg New Economy Forum: ताकत की असली कसौटी उसका नैतिक उद्देश्य है
फोरम की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग का स्वागत किया और कहा कि उन्होंने वैश्विक विचार-मंथन के लिए ‘सही समय पर सही स्थान’ चुना है। 21वीं सदी के तीसरे दशक में प्रौद्योगिकी, डेटा, ज्ञान और नवाचार को शक्ति का नया पैमाना बताते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक बिरादरी के सामने एक मौलिक प्रश्न रखा—क्या इस तकनीकी ताकत का उपयोग चंद लोगों के वर्चस्व के लिए होना चाहिए, या करोड़ों लोगों के जीवन को सशक्त बनाने के लिए?
Modi Bloomberg New Economy Forum में प्राचीन संस्कृत शास्त्रों का उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा कि विद्या, धन और शक्ति का वास्तविक मूल्य इस बात से तय होता है कि उनका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति में सत्ता का उपयोग दूसरों पर नियंत्रण करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को सक्षम बनाने के लिए किया जाता है। भारत ने इतिहास में मानवता को बिना किसी रॉयल्टी के ‘शून्य’ (Zero) का उपहार दिया था और आज भी देश उसी निस्वार्थ सेवाभाव से विश्व कल्याण के लिए काम कर रहा है।
सप्लाई चेन के ‘हथियारीकरण’ पर कड़ा प्रहार: भारत बना वैश्विक स्थिरता का स्तंभ
प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि दुनिया एक संकट से उबरने का रास्ता खोजती है, तब तक दूसरा संकट खड़ा हो जाता है। महामारी, क्षेत्रीय युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच दशकों से बने वैश्वीकरण (Globalization) के ताने-बाने को खतरनाक ‘चोकपॉइंट्स’ में बदल दिया गया है:
- संसाधनों का दोहन रोका जाए: आवश्यक खनिजों (Critical Minerals), ऊर्जा, अत्याधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को भू-राजनीतिक दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
- भारत एक अटूट भरोसे का विकल्प: जब दुनिया भरोसेमंद साझेदारों की तलाश कर रही है, तब भारत पूरी ईमानदारी के साथ दुनिया के सामने खड़ा है। भारत दुनिया की एक-पांचवीं जेनेरिक दवाएं आपूर्ति करता है, 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का संचालन करता है और संकट के समय वैश्विक आपूर्ति लाइनों को कभी बाधित नहीं करता।
- सहयोगात्मक विकास: “We do not grow at anyone’s cost; We grow with the world and for the world” (हम किसी की कीमत पर नहीं बढ़ते, हम दुनिया के साथ और दुनिया के लिए बढ़ते हैं)।
‘सुधार मजबूरी नहीं, संकल्प हैं’: 7.8% जीडीपी और $700 बिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार
वैश्विक निवेशकों को आश्वस्त करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत के मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स का विस्तृत ब्योरा पेश किया, जिसके चलते हाल ही में अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार किया है:
- मजबूत आर्थिक विकास: चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है।
- ऐतिहासिक विदेशी मुद्रा भंडार: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 700 बिलियन डॉलर ($700 Billion) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है।
- नियंत्रित चालू खाता घाटा: करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को घटाकर मात्र 0.61 प्रतिशत पर ला दिया गया है, और देश का बैंकिंग ढांचा पिछले कई दशकों में सबसे मजबूत स्थिति में है।
- ढांचागत सुधारों की श्रृंखला: एक देश-एक कर (GST) से एकीकृत बाजार, दिवालिया कानून (IBC), 29 जटिल श्रम कानूनों को समेटकर 4 सरल लेबर कोड्स में बदलना और सैकड़ों व्यापारिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना (Decriminalization) यह साबित करता है कि भारत में सुधार निरंतर जारी रहने वाली प्रक्रिया हैं।
डिजिटल लोकतंत्र और वित्तीय समावेशन: रेहड़ी-पटरी से लेकर 2.5 लाख स्टार्टअप्स तक
‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ के रूप में भारत की विविधता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में 80,000 से अधिक समाचार पत्र, 1,000 से अधिक टीवी चैनल्स और 50 करोड़ से अधिक यूट्यूब व इंस्टाग्राम यूजर्स जीवंत लोकतांत्रिक बहस में भाग लेते हैं:
- सस्ता डेटा और डिजिटल क्रांति: 2014 के बाद डेटा की कीमतों में भारी कटौती कर इंटरनेट को अमीरों के विशेषाधिकार से मुक्त कर गांव के अंतिम छात्र और दुकानदार तक पहुंचाया गया।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत का यूपीआई ऐसा समावेशी मॉडल है जिसका उपयोग सड़क किनारे का छोटा फल विक्रेता और करोड़ों की लग्जरी कार का शोरूम एक समान तकनीक से करते हैं। महामारी में कोविन (CoWIN) को ओपन-सोर्स कर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा किया गया।
- स्टार्टअप्स का लोकतांत्रिक विस्तार: देश में स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में कुछ सैकड़ा से बढ़कर आज 2.5 लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें से लगभग 50% स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं और 45% से अधिक का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
- 25 करोड़ गरीबी से बाहर: जैम (JAM – जनधन, आधार, मोबाइल) ट्रिनिटी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से बिचौलियों का खात्मा कर पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया।
हरित ऊर्जा क्रांति: 300 गीगावाट क्षमता और 9 साल पहले पेरिस लक्ष्य हासिल
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत कथनी और करनी में भेद नहीं करता:
- समय से 9 वर्ष पूर्व लक्ष्य हासिल: 2015 के पेरिस समझौते में भारत ने 2030 तक 40% बिजली गैर-जीवाश्म (Non-fossil) स्रोतों से बनाने का संकल्प लिया था। भारत ने यह लक्ष्य नवंबर 2021 में ही पूरा कर लिया—तय समय से पूरे 9 साल पहले, और ऐसा करने वाला भारत जी-20 का पहला देश बना।
- चार गुना रिन्यूएबल विस्तार: भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता 2014 के मात्र 75 गीगावाट से चार गुना बढ़कर आज लगभग 300 गीगावाट पहुंच चुकी है।
- पीएम सूर्यघर व पीएम-कुसुम: इन योजनाओं ने आम परिवारों और किसानों को ऊर्जा उत्पादक बना दिया है। इनसे 30 गीगावाट से अधिक नई क्षमता जुड़ी है और प्रतिवर्ष 30 मिलियन टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है।
वैश्विक कल्याणकारी पहल और वैदिक आह्वान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती क्षमताएं पूरी मानवता के लाभ के लिए हैं। कोरोना काल में भारत ने अपनी विनिर्माण क्षमता का उपयोग कर ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत 100 से अधिक देशों को जीवनरक्षक टीके भेजे। हाल ही में भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में न केवल इंसानों बल्कि पशु कल्याण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विमर्श हुआ।
भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI), ग्लोबल बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) और मिशन लाइफ (LiFE) जैसे वैश्विक मंच खड़े किए हैं, जो ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ और ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ के दर्शन पर आधारित हैं। संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने वैदिक मंत्र का आह्वान करते हुए कहा कि जब दुनिया साथ चलेगी, साथ बोलेगी और एक-दूसरे के विचारों को समझेगी, तभी सामूहिक शक्ति से वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान निकलेगा।
“आज की दुनिया में ताकत का अर्थ केवल आगे बढ़ना नहीं है, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाना है। भारत का मंत्र ‘पावर टू एम्पावर’ है। हम किसी की कीमत पर नहीं, बल्कि पूरे विश्व के साथ और पूरे विश्व के लिए आगे बढ़ते हैं। अनिश्चितताओं से घिरी इस दुनिया में भारत विश्वसनीयता, नीतिगत निरंतरता और आर्थिक स्थिरता की सबसे मजबूत गारंटी है। हमारे लिए सुधार कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक अटल वैचारिक संकल्प हैं।”— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत गणराज्य (ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम संबोधन)
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026: एक नजर में
- आयोजन: ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम (भारत में पहली बार आयोजित)
- स्थल व तिथि: नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026
- मुख्य संबोधन: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
- केंद्रीय दर्शन: ‘पावर टू एम्पावर’ (Power to Empower – नियंत्रण से परे सक्षमता)
- प्रमुख आर्थिक संकेतक: 7.8% जीडीपी विकास दर, $700B+ फॉरेक्स रिजर्व, 0.61% चालू खाता घाटा (CAD)
- हरित ऊर्जा आंकड़े: 300 GW रिन्यूएबल क्षमता (2014 में 75 GW), 2030 पेरिस लक्ष्य 2021 में पूर्ण
- स्टार्टअप व समावेशन: 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप्स (45% महिला नेतृत्व), 25 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त
- वैश्विक मंच: ISA, CDRI, ग्लोबल बिग कैट अलायंस, बायोफ्यूल अलायंस, IMEC, मिशन LiFE
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Modi Bloomberg New Economy Forum संबोधन का मुख्य विषय क्या था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पावर टू एम्पावर’ (Power to Empower) का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसमें ताकत को नियंत्रण या प्रतिस्पर्धा का साधन न मानकर दूसरों को सक्षम बनाने, सहयोग करने और वैश्विक समस्याओं के समाधान का जरिया बताया गया।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक सुधारों को लेकर क्या कड़ा संदेश दिया?
प्रधानमंत्री ने वैश्विक निवेशकों के सामने स्पष्ट किया कि “हमारे लिए सुधार मजबूरी नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प हैं” (Reforms are not a compulsion, they are a conviction), जो भारत की नीतिगत स्थिरता को दर्शाता है।
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को लेकर फोरम में क्या आंकड़े साझा किए गए?
भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता 2014 के 75 गीगावाट से बढ़कर लगभग 300 गीगावाट हो चुकी है। भारत ने 2030 तक 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा का पेरिस समझौता लक्ष्य नवंबर 2021 में यानी 9 साल पहले ही हासिल कर लिया था।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर क्या चेतावनी दी?
प्रधानमंत्री ने आवश्यक खनिजों, ऊर्जा, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों के ‘हथियारीकरण’ की निंदा की और कहा कि वैश्वीकरण को रणनीतिक चोकपॉइंट बनाने के बजाय भारत जैसे भरोसेमंद सहयोगियों के साथ लचीली सप्लाई चेन बनानी होगी।
आधिकारिक स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) / पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi)