Buxa Tiger Reintroduction: बुक्सा टाइगर रिजर्व में दशकों बाद लौटी दहाड़, बिहार के वाल्मीकि से लाई गई पहली बाघिन जंगल में छोड़ी गई

Buxa Tiger Reintroduction Buxa Tiger Reintroduction

कोलकाता/नई दिल्ली, 02 अक्टूबर: भारत में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के इतिहास में शुक्रवार को एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। देश के राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह 2026 (Wildlife Week) के शुभारंभ अवसर पर Buxa Tiger Reintroduction कार्यक्रम के तहत पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक बुक्सा टाइगर रिजर्व में पहली बाघिन को प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक रिलीज किया गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की गरिमामयी मौजूदगी में यह ऐतिहासिक रिलीज संपन्न हुई। इस बाघिन को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से सभी आवश्यक पारिस्थितिक, पशु-चिकित्सा और प्रबंधन मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित रूप से ट्रांसलोकेट किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • ‘Buxa Tiger Reintroduction’ के पहले चरण में बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन को बुक्सा के जंगल में छोड़ा गया।
  • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पश्चिम बंगाल और बिहार के मुख्यमंत्रियों का जताया आभार; वन्यजीव सप्ताह 2026 का हुआ आगाज।
  • वर्ष 2018 से चल रहा था वैज्ञानिक रेस्टोरेशन: 380 हेक्टेयर घास के मैदान (ग्रासलैंड) विकसित, शिकार के लिए छोड़े गए 800 से अधिक चीतल।
  • रेडियो टेलीमेट्री और कैमरा ट्रैप से होगी 24 घंटे सघन निगरानी; असम के मानस और भूटान से सीधे जुड़ा है बुक्सा का कॉरिडोर।

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बुक्सा तक का सफर: वैज्ञानिक ट्रांसलोकेशन

बुक्सा में छोड़ी गई यह बाघिन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के कड़े तकनीकी दिशा-निर्देशों के तहत बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई है। ट्रांसलोकेशन से पूर्व बाघिन के स्वास्थ्य, उम्र, शिकार करने की क्षमता और आनुवंशिक अनुकूलता का गहन परीक्षण किया गया।

जंगल में छोड़े जाने के बाद अब इस बाघिन की सेटेलाइट रेडियो टेलीमेट्री कॉलर, स्वचालित कैमरा ट्रैप्स और मैदानी वनकर्मियों की गश्ती टीमों द्वारा 24 घंटे निगरानी की जाएगी, जिससे नए इलाके में उसके व्यवहार, मूवमेंट, स्वास्थ्य और ढलने की प्रक्रिया का सटीक वैज्ञानिक डेटा दर्ज किया जा सके।

1983 में बना था टाइगर रिजर्व: क्यों गायब हो गई थी बाघों की स्थायी आबादी?

उत्तरी बंगाल के तराई और भाबर क्षेत्र में स्थित बुक्सा को वर्ष 1983 में देश का 15वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह ऐतिहासिक रूप से बाघों का एक समृद्ध प्राकृतिक आवास रहा है।

बीते दशकों में मानवीय हस्तक्षेप, जंगलों के विखंडन, खनन, भूमि उपयोग में बदलाव और सबसे बढ़कर शाकाहारी वन्यजीवों (Prey Base) की भारी कमी के कारण यहां बाघों की स्थायी रिहायशी आबादी समाप्त हो गई थी और लंबे समय तक यह रिजर्व बाघों की स्थायी दहाड़ से महरूम रहा।


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2018 से शुरू हुआ जमीन तैयार करने का महाअभियान: 800 चीतल और 380 हेक्टेयर ग्रासलैंड

बुक्सा में बाघों को सीधे लाकर छोड़ना संभव नहीं था; इसके लिए पहले उनके भोजन और सुरक्षित घर का पुनर्निर्माण किया गया। पश्चिम बंगाल सरकार, एनटीसीए और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने मिलकर वर्ष 2018 में ‘टाइगर ऑगमेंटेशन एंड रिकवरी प्रोजेक्ट’ प्रारंभ किया।

पिछले 8 वर्षों के निरंतर वैज्ञानिक प्रयासों के तहत जंगल में शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ाने के लिए 800 से अधिक चीतल (Spotted Deer) छोड़े गए। वहीं शाकाहारी जीवों के चारे के लिए करीब 380 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन घास के मैदान (Grasslands) तैयार किए गए।

इस पारिस्थितिक सुधार का असर यह हुआ कि वर्ष 2021, 2023 और 2026 में कैमरा ट्रैप्स में बाघों की प्राकृतिक आवाजाही दर्ज हुई। वर्ष 2023 में कैमरे में कैद हुए एक नर बाघ की धारियों का मिलान असम के मानस टाइगर रिजर्व के बाघ से हुआ, जिससे यह सिद्ध हो गया कि यह प्राकृतिक वन्यजीव गलियारा आज भी पूरी तरह जीवित है।

असम-भूटान-उत्तर बंगाल का साझा लैंडस्केप: जैव विविधता को मिलेगा जीवन

बुक्सा टाइगर रिजर्व केवल एक राज्य का जंगल नहीं है, बल्कि यह एक विशाल अंतरराष्ट्रीय पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा है। इसकी सीमाएं पूर्व में असम के जंगलों और उत्तर में भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क से सीधे जुड़ी हुई हैं।

बुक्सा में बाघों की पुनर्स्थापना से इस पूरे ट्रान्स-बाउंड्री लैंडस्केप में वन्यजीवों का निर्बाध आवागमन संभव होगा। इससे न केवल बाघ, बल्कि एशियाई हाथी, एक सींग वाले गैंडे, गौर (बायसन) और हिमालयी वनस्पतियों का संपूर्ण संरक्षण सुदृढ़ होगा।

64 वन प्रबंधन समितियों की भागीदारी: सह-अस्तित्व और मानव-वन्यजीव संघर्ष नियंत्रण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता में स्थानीय जनजातीय और ग्रामीण समुदाय को केंद्र में रखा गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत 64 ईको-डेवलपमेंट कमेटियों (EDC) और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMC) को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के साथ निरंतर संवाद, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के आधुनिक उपाय, जंगल पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक आजीविका और ईको-टूरिज्म से होने वाली आय में ग्रामीणों की सीधी हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि ग्रामीण बाघों के संरक्षण में सहयोगी बनें।

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लैंडस्केप संरक्षण विजन से प्रेरित होकर आज बुक्सा में बाघों को पुनः बसाने का महत्वपूर्ण संकल्प पूरा हुआ है। यह रीइंट्रोडक्शन केवल एक बाघिन को छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां एक स्वस्थ, स्वच्छंद और आत्म-निर्भर बाघ आबादी स्थापित करने का दीर्घकालिक वैज्ञानिक मिशन है। इस ऐतिहासिक कार्य में पश्चिम बंगाल और बिहार सरकार का सहयोग सराहनीय रहा है।”— भूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री

पर्यावरण प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय समुदायों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • इको-टूरिज्म और स्थानीय आजीविका का विस्तार: बुक्सा में बाघों की मौजूदगी से उत्तर बंगाल में वन्यजीव पर्यटन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय होमस्टे, जिप्सी चालकों, गाइडों और हस्तशिल्प व्यापारियों को रोजगार मिलेगा।
  • वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा: भूटान और असम सीमा से जुड़े इस कॉरिडोर पर अवैध शिकार और लकड़ी कटाई पर पूरी तरह रोक लगेगी क्योंकि यहां सुरक्षा चौकियों और पेट्रोलिंग को हाई-टेक किया गया है।
  • वैज्ञानिक सफलता का राष्ट्रीय मॉडल: पन्ना और सरिस्का के बाद बुक्सा का यह सफल ट्रांसलोकेशन साबित करता है कि घने जंगलों में वैज्ञानिक पद्धतियों से उजड़े हुए वन्यजीव आवासों को दोबारा आबाद किया जा सकता है।

बुक्सा टाइगर रीइंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट: मुख्य आंकड़े एक नजर में

  • बाघिन का मूल स्रोत: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (पश्चिम चंपारण, बिहार)
  • रिलीज स्थल: बुक्सा टाइगर रिजर्व (अलीपुरद्वार जिला, पश्चिम बंगाल)
  • टाइगर रिजर्व घोषित होने का वर्ष: 1983
  • घास के मैदानों का पुनरुद्धार: लगभग 380 हेक्टेयर (विगत 8 वर्षों में)
  • प्रे-बेस संवर्धन: 800 से अधिक चीतल छोड़े गए
  • संबद्ध संस्थाएं: NTCA, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और पश्चिम बंगाल वन विभाग
  • सहभागी ग्रामीण समितियां: 64 ईको-डेवलपमेंट समितियां (EDC/JFMC)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Buxa Tiger Reintroduction के तहत बाघिन को किस नेशनल पार्क से लाया गया है?

बाघिन को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) से सुरक्षित ट्रांसलोकेट करके बुक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है।

बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी के लिए क्या तैयारियां की गई थीं?

वर्ष 2018 से यहां 380 हेक्टेयर नए घास के मैदान तैयार किए गए और बाघों के भोजन (प्रे-बेस) के लिए 800 से अधिक चीतल छोड़े गए हैं।

बुक्सा टाइगर रिजर्व किन राज्यों और देशों की सीमाओं से जुड़ा हुआ है?

बुक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित है और इसका प्राकृतिक वन गलियारा असम (मानस टाइगर रिजर्व) और भूटान के जंगलों से सीधे जुड़ा हुआ है।

जंगल में छोड़े जाने के बाद बाघिन की निगरानी कैसे की जाएगी?

बाघिन की सेटेलाइट रेडियो टेलीमेट्री कॉलर, स्वचालित कैमरा ट्रैप नेटवर्क और वन विभाग की विशेष ट्रैकिंग टीमों द्वारा 24 घंटे निरंतर निगरानी की जाएगी।

स्रोत (Source): प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB Delhi) / पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार

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