CII एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0: छोटे उद्योगों को मिलेगा ‘प्लग-एंड-प्ले’ इंफ्रास्ट्रक्चर, बस्तर-सरगुजा में भी रायपुर जैसी सुविधाएं

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रायपुर, 29 सितंबर: राजधानी रायपुर में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) छत्तीसगढ़ राज्य परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0’ का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने किया। “नवाचार एवं सतत औद्योगिक विकास द्वारा एमएसएमई का सशक्तिकरण” थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में 250 से अधिक प्रमुख उद्योगपति, नीति-निर्माता और स्टार्टअप प्रतिनिधि जुटे। सरकार ने राज्य के छोटे उद्योगों को गति देने के लिए तैयार औद्योगिक भूमि, आसान वित्तपोषण और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की बड़ी घोषणा की।

मुख्य बिंदु:

  • रायपुर में दो दिवसीय सीआईआई एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0 का आगाज; 250 से अधिक उद्यमियों ने लिया हिस्सा।
  • उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कानून-व्यवस्था, सड़क संपर्क और सिंगल विंडो क्लीयरेंस को बताया उद्योगों की पहली जरूरत।
  • उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा- रायपुर की तरह बस्तर और सरगुजा में भी सुलभ होंगी औद्योगिक स्वीकृतियां।
  • सीएसआईडीसी (CSIDC) विकसित करेगा प्लग-एंड-प्ले शेड; देश में 7.3 करोड़ उद्यम पंजीयन का आंकड़ा पार।

प्लग-एंड-प्ले मॉडल: बिना देरी सीधे शुरू होगा उत्पादन

छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कॉन्क्लेव में बताया कि राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में अब छोटे उद्यमियों को जमीन तलाशने और निर्माण में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। सरकार ‘प्लग-एंड-प्ले’ शेड तैयार कर रही है, जहां पानी, बिजली और शेड पहले से तैयार मिलेंगे।

उद्यमी अपनी मशीनें लगाकर तुरंत उत्पादन शुरू कर सकेंगे। इससे नए स्टार्टअप्स और छोटे कारखानों की शुरुआती लागत में भारी कमी आएगी।

बस्तर और सरगुजा के उद्यमियों को भी सिंगल विंडो की सौगात

उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति के केंद्र में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) है। सरकार का प्रयास है कि जो औद्योगिक सुविधाएं रायपुर और दुर्ग-भिलाई के उद्यमियों को मिलती हैं, वे वनांचल के बस्तर और सरगुजा संभाग में भी उसी सहजता से उपलब्ध हों।

उद्योग संचालनालय के संचालक प्रभात मलिक ने बताया कि राज्य में सिंगल-विंडो प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है, ताकि फाइलें विभागों में न अटकें।


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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और 1 करोड़ क्रेडिट गारंटी का रिकॉर्ड

सम्मेलन में पहुंचे भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनम्र मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक देश भर में 7.3 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीयन पूरे हो चुके हैं।

क्रेडिट गारंटी योजना ने 1 करोड़ गारंटियों का मील का पत्थर पार कर लिया है, जिससे छोटे उद्योगों को बिना किसी कोलेटरल (बंधक संपत्ति) के बैंक ऋण मिलना आसान हुआ है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और काइजेन से बढ़ेगी कारखानों की उत्पादकता

सीआईआई कॉन्क्लेव में शॉप-फ्लोर पर उत्पादन लागत घटाने और गुणवत्ता सुधारने के लिए ‘एआई एडवांटेज’ और ‘काइजेन विद एआई’ जैसे आधुनिक सत्र आयोजित किए गए।

विशेषज्ञों ने उद्यमियों को समझाया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स और टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (TPM) अपनाकर कारखानों में मशीनों का डाउनटाइम घटाया जा सकता है और स्थानीय उत्पाद वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को टक्कर दे सकते हैं।

“छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास में छोटे कारखानों, कार्यशालाओं और उद्यमों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। एमएसएमई के निर्बाध संचालन के लिए शांतिपूर्ण कानून-व्यवस्था, सुगम सड़क संपर्क और भ्रष्टाचार मुक्त त्वरित स्वीकृतियां अनिवार्य हैं। राज्य सरकार इन तीनों मोर्चों पर उद्यमियों को सुरक्षित और सकारात्मक माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है।”— विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

स्थानीय उद्यमियों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • फैक्ट्री शुरू करना हुआ आसान: प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर मिलने से युवाओं को फैक्ट्री शेड बनाने के लिए बड़ा बैंक लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे बिजनेस शुरू करने का रिस्क घटेगा।
  • आदिवासी अंचलों में उद्योग विस्तार: बस्तर और सरगुजा में सिंगल विंडो प्रणाली सक्रिय होने से वनोपज, मिलेट्स और स्थानीय संसाधनों पर आधारित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन: जब छोटे और मध्यम उद्योग मजबूत होंगे, तो इंजीनियरिंग, आईटीआई और स्थानीय श्रमिकों को अपने गृह जिले में ही रोजगार मिल सकेगा।

कॉन्क्लेव के प्रमुख तकनीकी सत्र और विषय

  • एमएसएमई विकास का वित्त पोषण: आसान बैंक ऋण, मुद्रा योजना और क्रेडिट गारंटी पर केंद्र सरकार का मार्गदर्शन।
  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: सिंगल विंडो क्लियरेंस, ऑनलाइन निरीक्षण और समयबद्ध स्वीकृतियां।
  • एआई और काइजेन तकनीक: औद्योगिक उत्पादन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और मशीन दक्षता सुधार (TPM)।
  • एसएमई से कॉर्पोरेट का सफर: स्थानीय कंपनियों को नेशनल और मल्टीनेशनल ब्रांड बनाने की कार्ययोजना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सीआईआई एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0 का आयोजन कहां और क्यों किया गया?

यह कॉन्क्लेव रायपुर में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम उद्योगों को तकनीकी, वित्तीय और नीतिगत रूप से सशक्त बनाने के लिए आयोजित किया गया।

उद्योगों के लिए ‘प्लग-एंड-प्ले’ इंफ्रास्ट्रक्चर क्या होता है?

‘प्लग-एंड-प्ले’ में सरकार उद्यमियों को पहले से तैयार शेड, सड़क, पानी और बिजली की सुविधा देती है, जिससे उद्यमी बिना निर्माण के सीधे मशीन लगाकर उत्पादन शुरू कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने दूरदराज के क्षेत्रों में उद्योग लगाने के लिए क्या पहल की है?

राज्य सरकार रायपुर की तर्ज पर बस्तर और सरगुजा में भी सिंगल विंडो क्लीयरेंस और सुगम औद्योगिक अनुमतियां उपलब्ध करा रही है ताकि क्षेत्रीय असंतुलन दूर हो सके।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / उद्योग संचालनालय)

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