‘पोषण पहल सखी’: कुपोषण मुक्ति और महिला स्वरोजगार का अनोखा मॉडल, IIT भिलाई और जिला प्रशासन में हुआ MoU

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मोहला-मानपुर/रायपुर, 29 सितंबर: मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण उन्मूलन को एक साथ साधने के लिए अभिनव ‘पोषण पहल सखी’ परियोजना की शुरुआत की गई है। ग्राम भर्रीटोला में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित होने वाले आधुनिक लेयर पोल्ट्री उद्यम के लिए जिला प्रशासन और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (IIT Bhilai) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस मॉडल के तहत स्थानीय महिलाओं को स्थायी आजीविका मिलेगी और आंगनबाड़ी के 50 बच्चों को सप्ताह में दो दिन निःशुल्क पौष्टिक अंडे दिए जाएंगे।

मुख्य बिंदु:

  • ‘पोषण पहल सखी’ परियोजना के लिए जिला प्रशासन, आईआईटी भिलाई और एबीस फूड्स (IB Group) के बीच त्रिपक्षीय साझेदारी।
  • ग्राम भर्रीटोला गौठान में तिरंगा संकुल संगठन की महिलाएं संभालेंगी लेयर पोल्ट्री (अंडा उत्पादन) उद्यम।
  • आंगनबाड़ी के 50 बच्चों को सप्ताह में दो दिन मिलेंगे निःशुल्क प्रोटीनयुक्त ताजे अंडे।
  • आईआईटी भिलाई देगा वैज्ञानिक मुर्गीपालन, जैव-सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और मार्केटिंग का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण।

त्रिपक्षीय मॉडल: प्रशासन, आईआईटी भिलाई और आईबी ग्रुप की साझा पहल

कलेक्टर तनुजा सलाम की मौजूदगी में हस्ताक्षरित यह परियोजना ग्रामीण विकास का एक अनूठा त्रिपक्षीय मॉडल है। इसमें जिला प्रशासन आवश्यक अधोसंरचना (शेड और जमीन) उपलब्ध करा रहा है।

आईआईटी भिलाई तकनीकी और वैज्ञानिक मार्गदर्शन देने वाली क्रियान्वयन एजेंसी है, जबकि देश की जानी-मानी पोल्ट्री कंपनी एबीस फूड्स एंड प्रोटीन्स प्राइवेट लिमिटेड (आईबी ग्रुप) अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से इसे वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

50 बच्चों को प्रोटीनयुक्त आहार, महिलाओं को स्थायी आजीविका

परियोजना के पहले चरण में ग्राम भर्रीटोला की तीन महिलाओं को पूर्णकालिक रोजगार से जोड़ते हुए पोल्ट्री फार्म संचालन की जिम्मेदारी दी जा रही है।

उत्पादित अंडों में से गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज 50 बच्चों को सप्ताह में दो बार निःशुल्क उबले अंडे दिए जाएंगे। इससे जनजातीय और ग्रामीण बच्चों में प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर होगी, जिससे कुपोषण और एनीमिया के मामलों में तेजी से गिरावट आएगी।


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आईआईटी भिलाई सिखाएगा वैज्ञानिक पोल्ट्री और बायो-सिक्योरिटी के गुर

आईआईटी भिलाई के एसोसिएट प्रोफेसर व प्रधान अन्वेषक डॉ. जोस इमैनुएल आर. और प्रोजेक्ट इंजीनियर जेनिशा बेनेटन ने बताया कि महिलाओं को सिर्फ पारंपरिक मुर्गीपालन नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि उन्हें व्यावसायिक बायो-सिक्योरिटी, तापमान नियंत्रण, संतुलित दाना प्रबंधन और बीमारी रोकथाम का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसके साथ ही डिजिटल लेन-देन, खाता संधारण और स्थानीय बाजारों में अंडों की थोक बिक्री के गुर भी सिखाए जाएंगे, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर उद्यमी बन सकें।

3 साल में आत्मनिर्भर बनेगा उद्यम, फिर महिलाओं को पूरी कमान

परियोजना की रूपरेखा के अनुसार अगले तीन वर्षों तक तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञों की निगरानी में इस फार्म का संचालन होगा।

तीन साल बाद जब यह उद्यम पूरी तरह स्वावलंबी और मुनाफे में आ जाएगा, तब इसका पूरा स्वामित्व और प्रबंधन प्रशिक्षित महिला स्व-सहायता समूह को सौंप दिया जाएगा।

“‘पोषण पहल सखी’ का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका देना और हमारे आंगनबाड़ी के बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराना है। जब माताएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी और बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलेगा, तभी एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है। यह मॉडल जिले के अन्य गौठानों के लिए भी नजीर बनेगा।”— तनुजा सलाम, कलेक्टर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी

ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • बच्चों के शारीरिक-मानसिक विकास में तेजी: नियमित आहार में अंडे शामिल होने से बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, कोलीन और विटामिन मिलेगा, जिससे कुपोषण और ठिगनेपन (स्टंटिंग) पर रोक लगेगी।
  • महिलाओं का आत्मनिर्भर उद्यमी बनना: पोल्ट्री फार्मिंग के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं मजदूरी पर निर्भर रहने के बजाय खुद के बिजनेस की मालिक बनेंगी।
  • गौठानों का बहुउद्देशीय उपयोग: ग्राम भर्रीटोला गौठान में इस नवाचार के सफल होने से प्रदेश भर के गौठानों में अंडा उत्पादन और आजीविका की नई राह खुलेगी।

‘पोषण पहल सखी’ परियोजना की मुख्य रूपरेखा

  • स्थान: ग्राम भर्रीटोला (गौठान परिसर), जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी
  • संचालन: तिरंगा संकुल स्तरीय संगठन (महिला स्व-सहायता समूह)
  • तकनीकी सहयोगी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई
  • सीएसआर सहयोगी: एबीस फूड्स एंड प्रोटीन्स प्राइवेट लिमिटेड (IB Group)
  • लाभार्थी: 50 आंगनबाड़ी बच्चे (सप्ताह में 2 दिन निःशुल्क अंडे) और स्थानीय महिला उद्यमी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

‘पोषण पहल सखी’ परियोजना किस जिले में शुरू की गई है?

‘पोषण पहल सखी’ परियोजना छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम भर्रीटोला में शुरू की गई है।

इस परियोजना में आईआईटी भिलाई और एबीस फूड्स की क्या भूमिका है?

आईआईटी भिलाई वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन देगा, जबकि एबीस फूड्स (आईबी ग्रुप) अपने सीएसआर फंड से वित्तीय सहयोग उपलब्ध करा रहा है।

आंगनबाड़ी बच्चों को इस पहल से क्या सीधा लाभ मिलेगा?

गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले 50 बच्चों को सप्ताह में दो दिन निःशुल्क पौष्टिक ताजे अंडे दिए जाएंगे ताकि उनका कुपोषण दूर हो सके।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी)

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