Competere Foundation India Report 2026: भारत वैश्विक आर्थिक सुधारों और प्रतिस्पर्धात्मक रैंकिंग में 25 स्थान ऊपर चढ़ा, रिपोर्ट में जीएसटी और आईबीसी को बताया गेम-चेंजर

Competere Foundation India Report 2026 Key Findings Competere Foundation India Report 2026 Key Findings

Published on July 30, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत के आर्थिक सुधारों, कड़े नीतिगत बदलावों और व्यावसायिक सुगमता की प्रगति को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान प्रदान करते हुए हाल ही में Competere Foundation India Report 2026 जारी की गई है। प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय व्यापार और प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञ श्री शंकर ए. सिंघम के नेतृत्व वाले ‘कम्पिटीयर फाउंडेशन’ द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वैश्विक ‘बाजार विकृति सूचकांक’ (ACMD Index) में 25 स्थानों की ऐतिहासिक छलांग लगाई है।

इस नई वैश्विक रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2010 से 2023 के बीच किए गए संरचनात्मक सुधारों के कारण भारत की रैंकिंग 82वें स्थान से सुधरकर 57वें स्थान पर पहुँच गई है। इन सुधारों के कारण भारत ने अपनी प्रति व्यक्ति जीडीपी (GDP per capita) के संभावित नुकसान को 11 प्रतिशत तक कम कर लिया है, जो प्रतिवर्ष लगभग 1% अतिरिक्त जीडीपी वृद्धि के बराबर है। यह रिपोर्ट नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ’ (CTIL) और भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक विशेष चर्चा के दौरान जारी की गई।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Competere Foundation India Report 2026 के ये आर्थिक आंकड़े, व्यापार कूटनीति, औद्योगिक नीति (GS Paper III – भारतीय अर्थव्यवस्था) और आर्थिक विनियमन प्रणालियों के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस सूचकांक के तीन प्रमुख स्तंभों, जीएसटी व आईबीसी की भूमिका, बचे हुए आंतरिक व बाहरी आर्थिक गतिरोधों (Frictions) और परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Competere Foundation India Report 2026: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

कम्पिटीयर फाउंडेशन की इस वैश्विक रिपोर्ट और भारत की आर्थिक प्रगति से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण संकेतकCompetere Foundation India Report 2026 के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
रिपोर्ट का पूरा नामIndia’s Next Growth Frontier: Reducing Anti-Competitive Market Distortions
जारीकर्ता संस्थाकम्पिटीयर फाउंडेशन फॉर ट्रेड एंड कॉम्पिटिशन पॉलिसी (Competere Foundation)
मुख्य लेखक / विशेषज्ञश्री शंकर ए. सिंघम (अध्यक्ष, विकास आयोग एवं सीईओ, कम्पिटीयर ग्रुप)
भारत की नई रैंकिंग57वां स्थान (वर्ष 2010 में भारत 82वें स्थान पर था) – 25 अंकों का सुधार
मूल्यांकन अवधिवर्ष 2010 से वर्ष 2023 के बीच के नीतिगत सुधारों का विश्लेषण
मूल्यांकन के तीन स्तंभसंपत्ति के अधिकारों का संरक्षण (PR), घरेलू प्रतिस्पर्धा (DC), अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (IC)
शेष विकृतियों से आर्थिक नुकसानभारत को आगामी 5 वर्षों में लगभग $173.6 बिलियन (जीडीपी का 4.2%) का नुकसान होने का अनुमान
सहयोगी भारतीय संस्थासेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL), आईआईएफटी (IIFT), नई दिल्ली

एसीएमडी (ACMD) ढांचा और तीन प्रमुख स्तंभ (Three Pillars)

कम्पिटीयर फाउंडेशन की यह रिपोर्ट ‘प्रतिस्पर्धा विरोधी बाजार विकृतियों’ (Anti-Competitive Market Distortions – ACMDs) का मूल्यांकन करने के लिए एक विशिष्ट वैज्ञानिक ढांचे का उपयोग करती है। एसीएमडी (ACMD) सरकारी नीतियों या विसंगतियों के वे रूप होते हैं जो बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बाधित करते हैं:

यह ढांचा मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन आपस में जुड़े हुए स्तंभों पर आधारित है, जिनमें भारत के प्रदर्शन का कड़ाई से मूल्यांकन किया गया है:

  1. घरेलू प्रतिस्पर्धा (Domestic Competition – DC): यह मापता है कि देश के भीतर नए उद्योगों की स्थापना, लाइसेंसिंग, श्रम नियम और आंतरिक व्यापार प्रणालियां कितनी सुगम और पूर्वानुमेय (Predictable) हैं।
  2. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (International Competition – IC): यह देश की सीमाओं पर होने वाले व्यापारिक अवरोधों, सीमा शुल्क (Customs) की दक्षता, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों और विदेशी कंपनियों के लिए बाजार की सुगमता को मापता है।
  3. संपत्ति के अधिकारों का संरक्षण (Property Rights – PR): यह अनुबंधों के प्रवर्तन (Contract Enforcement), बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा और दिवाला समाधान प्रणालियों की कानूनी दृढ़ता को मापता है।

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घरेलू प्रतिस्पर्धा (Domestic Competition) में सबसे बड़ा सुधार

Competere Foundation India Report 2026 के अनुसार, भारत की रैंकिंग में हुए 25 स्थानों के इस बड़े सुधार का सबसे प्रमुख कारण घरेलू प्रतिस्पर्धा (DC) और संपत्ति के अधिकारों (PR) के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व सुधार हैं:

  • वस्तु एवं सेवा कर (GST – 2017): जीएसटी के लागू होने से भारत के भीतर लगने वाले अनेक प्रकार के अप्रत्यक्ष करों का विलोपन हुआ, जिससे देश की आंतरिक सीमाओं पर करों काCascading प्रभाव समाप्त हुआ और भारत एक एकीकृत एकल राष्ट्रीय बाजार (Unified National Market) बन सका।
  • दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC – 2016): आईबीसी ने देश में डूबे हुए कर्जों के निपटारे, बीमार कंपनियों के पुनर्गठन और फंसी हुई संपत्तियों के समयबद्ध पुनर आवंटन (Asset Reallocation) की एक पारदर्शी कानूनी व्यवस्था स्थापित की।
  • डुइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार: भारत ने विश्व बैंक की ‘डूइंग बिजनेस’ सूची में वर्ष 2015 की 142वीं रैंक से ऐतिहासिक सुधार करते हुए वर्ष 2020 में 63वां स्थान हासिल किया था, जो इन सुधारों की सफलता को दर्शाता है।
  • कस्टम और व्यापार सुगमता का आधुनिकीकरण: भारतीय रेलवे और सीमा शुल्क विभाग द्वारा लागू की गई डिजिटल प्रणालियों जैसे—ICEGATE, सिंगल विंडो इंटरफेस (SWIFT) और अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (AEO) कार्यक्रम ने माल की आवाजाही को कड़े लालफीताशाही से मुक्त किया है।

शेष घरेलू बाधाएं (Remaining Frictions) और आर्थिक नुकसान

यद्यपि भारत ने ऐतिहासिक सुधार किए हैं, परंतु Competere Foundation India Report 2026 देश के भीतर अभी भी मौजूद कुछ गंभीर व्यापारिक बाधाओं की पहचान करती है। इन शेष विकृतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को आगामी पांच वर्षों में कुल $173.6 बिलियन (लगभग ₹14.5 लाख करोड़) का संचयी आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है, जो देश की कुल जीडीपी के लगभग 4.2% के बराबर है:

1. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की कठोर शर्तें (नुकसान: $127.2 बिलियन)

भारत ने कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश खोला है, परंतु खुदरा (Retail) और ई-कॉमर्स (E-commerce) के क्षेत्र में अभी भी कई कड़े प्रतिबंध लागू हैं:

  • ई-कॉमर्स का इन्वेंट्री मॉडल प्रतिबंधित: भारत ई-कॉमर्स के फैसिलिटेटर यानी ‘मार्केटप्लेस मॉडल’ में तो 100% स्वचालित एफडीआई की अनुमति देता है, लेकिन खुद के माल के मालिकाना हक वाले ‘इन्वेंट्री मॉडल’ में विदेशी निवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है।
  • मल्टी-ब्रांड रिटेल में 51% की सीमा: मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश केवल 51% तक ही सीमित है, वह भी न्यूनतम $100 मिलियन के निवेश, 30% स्थानीय सोर्सिंग (Local Sourcing) की शर्तों और राज्यों की पूर्व अनुमति के कड़े नियमों के अधीन है।
  • अन्य क्षेत्रों में इक्विटी सीमाएं: निजी मीडिया और समाचारों में 26% की सीमा, घरेलू नागरिक उड्डयन में 49% की सीमा, और प्रतिभूति बाजार के बुनियादी ढांचे (जैसे स्टॉक एक्सचेंज) में 49% की सीमा जैसी नीतियां विदेशी पूंजी और आधुनिक लॉजिस्टिक्स तकनीकों के प्रवेश को बाधित करती हैं।

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2. डिजिटल बाजारों में ‘प्रतिस्पर्धा नीति’ का विचलन (नुकसान: $46.4 बिलियन)

कम्पिटीयर फाउंडेशन ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की हालिया प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त की है। सीसीआई द्वारा गूगल एंड्रॉइड और प्ले स्टोर मामलों में लगाए गए भारी जुर्माने, प्रस्तावित ‘डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक, 2024’ (Digital Competition Bill) के कड़े ex-ante (पूर्व-निवारक) नियम, और कंपनियों के वैश्विक टर्नओवर (Global Turnover) के आधार पर जुर्माना लगाने की नई नीतियां वैश्विक तकनीकी निवेशकों के बीच अविश्वास पैदा कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रभाव-आधारित (Effects-based) जांच के बजाय केवल बड़ी कंपनियों के एकाधिकार (Scale & Ecosystem) को संदिग्ध मानकर कड़े दंड लगाने से डिजिटल नवाचारों और निवेश सुरक्षा को नुकसान पहुँचता है।

3. भारतीय निर्यातकों के समक्ष विदेशी नियामक बाधाएं (SPS & TBT)

रिपोर्ट का दूसरा बड़ा हिस्सा भारतीय निर्यातकों को विदेशों में मिलने वाली कड़ी गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) का विश्लेषण करता है। यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लागू किए जा रहे स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (SPS) नियम, तकनीकी बाधाएं (TBT), और कड़े कीटनाशक अवशेष मानक (Pesticide MRLs) वास्तव में कूटनीतिक रूप से भारतीय कृषि और फार्मा उत्पादों के लिए एक अदृश्य अवरोध बन गए हैं।

यूके-ईयू ‘डायनामिक एलाइनमेंट’ (Dynamic Alignment) का खतरा: मई 2025 के कूटनीतिक समझौते के तहत यदि यूनाइटेड किंगडम (UK) खुद को यूरोपीय संघ के कड़े और संकट-आधारित (Hazard-based) खाद्य सुरक्षा नियमों के साथ पूरी तरह एकीकृत कर लेता है, तो हाल ही में हुए भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत भारतीय कृषि निर्यातकों (जैसे बासमती चावल, उष्णकटिबंधीय फलों) को मिलने वाली रियायतें बेअसर हो जाएंगी, क्योंकि उन्हें अब ब्रिटेन के सीमा शुल्क बंदरगाहों पर भी यूरोपीय संघ के कड़े विनियामक जांचों का सामना करना पड़ेगा।


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UPSC Prelims Fact Box: Competere Foundation India Report 2026

  • मार्केट डिस्टॉर्शन इंडेक्स (ACMD): कंपिटीयर फाउंडेशन द्वारा जारी किया जाने वाला सूचकांक जो सरकारी नीतियों, आयात शुल्क, बौद्धिक संपदा और आंतरिक नियमों के आधार पर बाजार की निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का आकलन करता है।
  • SPS और TBT समझौते: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तहत लागू बहुपक्षीय समझौते जो यह सुनिश्चित करते हैं कि देशों द्वारा लागू किए जाने वाले खाद्य सुरक्षा (SPS) और उत्पाद मानक (TBT) नियम व्यापार में अवांछित बाधा न बनें।
  • ईयू कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM): यूरोपीय संघ की वह विवादित कार्बन टैक्स नीति जिसके तहत स्टील और एल्युमीनियम जैसे अधिक कार्बन-उत्सर्जक उत्पादों के आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है। भारत इसके खिलाफ डब्लूटीओ में लगातार कड़ा विरोध दर्ज करा रहा है।

UPSC Mains Analysis (GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं व्यापार नीतियां)

प्रश्न: “घरेलू कर प्रणालियों और दिवाला कानूनों के सुधारों ने भारत को वैश्विक विनिर्माण के अनुकूल बनाया है, परंतु खुदरा निवेश की कड़ी शर्तें और डिजिटल प्रतिस्पर्धा नीतियों में विनियामक कठोरता भारत की पूर्ण आर्थिक क्षमता को प्राप्त करने में बाधक हैं।” हाल ही में जारी की गई Competere Foundation India Report 2026 के विशेष संदर्भ में इस कथन की तर्कपूर्ण समालोचना कीजिए।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: कम्पिटीयर फाउंडेशन द्वारा जारी ‘India’s Next Growth Frontier’ रिपोर्ट और भारत के 25 स्थानों की ऐतिहासिक छलांग से उत्तर की शुरुआत करें।
  • घरेलू सुधारों की सफलता (जीएसटी और आईबीसी): स्पष्ट करें कि कैसे इन सुधारों ने देश के आंतरिक व्यापारिक अवरोधों को समाप्त किया, और भारत की डूइंग बिजनेस रैंकिंग को सुधारा।
  • शेष आंतरिक विकृतियाँ (FDI Caps & Competition Policy):
    • खुदरा और ई-कॉमर्स प्रतिबंध: बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51% की सीमा और ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री मॉडल पर प्रतिबंध के कारण आधुनिक वैश्विक लॉजिस्टिक्स प्रणालियों का भारत में प्रवेश न हो पाना।
    • सीसीआई की कठोरता (Digital Regulation): डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक, 2024 के ex-ante नियमों और वैश्विक टर्नओवर आधारित जुर्माने के कारण निवेशकों के बीच सुरक्षा और पूर्वानुमेयता (Predictability) का संकट पैदा होना।
  • बाहरी नियामक चुनौतियां (SPS & UK Alignment): यूरोपीय संघ के स्वच्छता मानकों और ब्रिटेन के साथ होने वाले डायनामिक एलाइनमेंट के कारण भारतीय कृषि निर्यात पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की व्याख्या करें।
  • निष्कर्ष: यह सुझाव प्रस्तुत करें कि भारत को अपने ‘विकसित भारत @ 2047’ के विज़न को पूरा करने के लिए घरेलू सुधारों की गति को खुदरा और डिजिटल नीतियों के उदारीकरण तक बढ़ाना होगा, ताकि $173.6 बिलियन के इस भारी आर्थिक नुकसान को बचाया जा सके।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

व्यापार सुधारों, राष्ट्रीय संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संधियों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

  1. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI): इसकी स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत वर्ष 2003 में एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी। इसका मुख्य कार्य बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों (Abuse of Dominant Position) को रोकना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। इसके फैसलों के खिलाफ अपील ‘राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण’ (NCLAT) में की जा सकती है।
  2. जीएसटी परिषद (GST Council): यह संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों को प्रतिनिधित्व प्राप्त है, जो देश की सहकारी कर संघीय व्यवस्था (Cooperative Federalism) का सर्वोच्च उदाहरण है।
  3. विश्व व्यापार संगठन (WTO) और गैर-टैरिफ बाधाएं: डब्लूटीओ की स्थापना 1 जनवरी 1995 को मारकेश समझौते के तहत की गई थी। इसके नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि सदस्य देश व्यापार बढ़ाने के लिए आयात शुल्क (Tariffs) तो कम करें ही, साथ ही वे कड़े तकनीकी या स्वच्छता नियमों (SPS/TBT) का उपयोग कर ‘छिपे हुए संरक्षणवाद’ (Disguised Protectionism) को बढ़ावा न दें।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Competere Foundation India Report 2026 के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Rank Jump: भारत वैश्विक ‘मार्केट डिस्टॉर्शन इंडेक्स’ (ACMD Index) में 25 स्थान ऊपर चढ़कर 57वें स्थान पर पहुँचा (2010 में भारत 82वें पर था)।
  • Domestic Catalyst: रैंकिंग में इस बड़े सुधार का मुख्य श्रेय जीएसटी (GST-2017) और आईबीसी (IBC-2016) जैसे कड़े घरेलू सुधारात्मक कानूनों को दिया गया है।
  • Economic Cost: रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शेष बची व्यापारिक विकृतियां आगामी पांच वर्षों में देश को लगभग $173.6 बिलियन का भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाएंगी।
  • FDI Gaps: मल्टी-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51% की सीमा, ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री मॉडल पर प्रतिबंध, और मीडिया-सिविल एविएशन में इक्विटी कैप्स प्रमुख आंतरिक विकृतियां हैं।
  • Digital Risk: डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक, 2024 के कड़े पूर्व-निवारक (ex-ante) नियम और वैश्विक टर्नओवर आधारित भारी जुर्माने डिजिटल निवेश को बाधित कर सकते हैं।
  • External Barriers: यूरोपीय संघ के कड़े स्वच्छता नियम (SPS/TBT) और यूके का ईयू के साथ होने वाला डायनामिक एलाइनमेंट भारतीय कृषि निर्यात को प्रभावित करेगा।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और आर्थिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जारी की गई ‘Competere Foundation India Report 2026’ के अनुसार, भारत ने वैश्विक ‘बाजार विकृति सूचकांक’ (ACMD Index) में कितने स्थानों का ऐतिहासिक सुधार करते हुए 57वां स्थान प्राप्त किया है?

(A) 10 स्थानों का सुधार
(B) 15 स्थानों का सुधार
(C) 25 स्थानों का सुधार
(D) 40 स्थानों का सुधार

उत्तर: (C) 25 स्थानों का सुधार
व्याख्या: कंपिटीयर फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2010 के 82वें स्थान से 25 स्थानों की ऐतिहासिक छलांग लगाकर वर्ष 2023 में 57वें स्थान पर पहुँच गया है।

प्रश्न 2: ‘Competere Foundation India Report 2026’ के अनुसार, भारत में शेष बची हुई विनियामक और निवेश विकृतियों के कारण आगामी पांच वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को कुल कितने अरब डॉलर का संचयी आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है?

(A) $50.5 बिलियन
(B) $100.2 बिलियन
(C) $173.6 बिलियन (जीडीपी का लगभग 4.2%)
(D) $250.0 बिलियन

उत्तर: (C) $173.6 बिलियन (जीडीपी का लगभग 4.2%)
व्याख्या: रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा निवेश प्रतिबंधों ($127.2 बिलियन नुकसान) और डिजिटल प्रतिस्पर्धा नियमों के विचलन ($46.4 बिलियन नुकसान) के कारण भारत को आगामी पांच वर्षों में कुल $173.6 बिलियन का नुकसान हो सकता है।

प्रश्न 3: कंपिटीयर फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला कौन सा कूटनीतिक समझौता भारतीय कृषि निर्यातकों को मिलने वाली रियायतों को प्रभावित कर सकता है?

(A) सीमा शुल्क मुक्त व्यापार कूटनीति
(B) डायनामिक एलाइनमेंट या कॉमन एसपीएस एरिया समझौता (Dynamic Alignment)
(C) हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा कॉरिडोर
(D) द्विपक्षीय कार्बन कर संधि

उत्तर: (B) डायनामिक एलाइनमेंट या कॉमन एसपीएस एरिया समझौता (Dynamic Alignment)
व्याख्या: मई 2025 के ‘कॉमन अंडरस्टैंडिंग’ के तहत यदि यूके खुद को यूरोपीय संघ के कड़े स्वच्छता नियमों (SPS) के साथ संरेखित (Align) कर लेता है, तो भारतीय कृषि उत्पादकों को ब्रिटेन के बंदरगाहों पर भी यूरोपीय संघ के कड़े और जटिल प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

प्रश्न 4: भारत सरकार ने देश के भीतर ई-कॉमर्स (E-commerce) के किस विशिष्ट विनिर्माण मॉडल के तहत 100% स्वचालित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी दी हुई है, जबकि दूसरे मॉडल पर पूर्ण प्रतिबंध है?

(A) इन्वेंट्री आधारित मॉडल (Inventory-based Model)
(B) मार्केटप्लेस आधारित मॉडल (Marketplace Model)
(C) एकीकृत हाइब्रिड मॉडल
(D) थोक प्रत्यक्ष खुदरा मॉडल

उत्तर: (B) मार्केटप्लेस आधारित मॉडल (Marketplace Model)
व्याख्या: भारत सरकार ई-कॉमर्स के मार्केटप्लेस मॉडल (जहां प्लेटफार्म केवल खरीदार और विक्रेता को मिलाता है) में तो 100% स्वचालित एफडीआई देता है, लेकिन खुद के माल के मालिकाना हक वाले ‘इन्वेंट्री मॉडल’ में विदेशी निवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है।

प्रश्न 5: भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित की गई ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ (CCI) के फैसलों के खिलाफ अपील निम्नलिखित में से किस सर्वोच्च न्यायाधिकरण में की जा सकती है?

(A) राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT)
(B) राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT)
(C) छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल बिलासपुर
(D) केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT)

उत्तर: (B) राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT)
व्याख्या: सीसीआई (CCI) के फैसलों के खिलाफ द्वितीय अपील ‘राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण’ (NCLAT) के समक्ष की जाती है, जो इन मामलों का निपटारा करने वाला सर्वोच्च अपीलीय निकाय है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Competere Foundation India Report 2026 क्या है?

Competere Foundation India Report 2026 अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संस्था ‘कम्पिटीयर फाउंडेशन’ द्वारा जारी की गई एक विशेष आर्थिक रिपोर्ट है। इसके तहत वर्ष 2010 से 2023 के बीच भारत द्वारा किए गए आर्थिक और विनियामक सुधारों का मूल्यांकन कर वैश्विक रैंकिंग जारी की गई है, जिसमें भारत ने 25 स्थानों का ऐतिहासिक सुधार दर्ज करते हुए 57वां स्थान प्राप्त किया है।

Q2. भारत की वैश्विक रैंकिंग में हुए इस बड़े सुधार के मुख्य कारण क्या हैं?

रैंकिंग में इस बड़े सुधार का मुख्य श्रेय भारत सरकार द्वारा लागू किए गए कड़े और ऐतिहासिक घरेलू सुधारों को दिया गया है। इनमें वर्ष 2017 में लागू किया गया माल एवं सेवा कर (GST), वर्ष 2016 का दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार और डिजिटल सीमा शुल्क निकासी (SWIFT और ICEGATE) प्रमुख रूप से शामिल हैं।

Q3. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शेष बची हुई नीतियां देश को क्या नुकसान पहुँचा रही हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा और ई-कॉमर्स निवेश पर कड़े प्रतिबंधों और डिजिटल बाजार में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की पूर्व-निवारक विनियामक कठोरता के कारण भारत को आगामी पांच वर्षों में लगभग $173.6 बिलियन (जीडीपी का लगभग 4.2%) का भारी संचयी आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है।

Q4. यूके-ईयू ‘डायनामिक एलाइनमेंट’ (Dynamic Alignment) भारतीय कृषि निर्यात को कैसे प्रभावित कर सकता है?

यदि ब्रिटेन मई 2025 के कूटनीतिक समझौते के तहत यूरोपीय संघ के कड़े स्वच्छता नियमों (SPS) को पूरी तरह अपना लेता है, तो भारतीय कृषि निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजारों में भी यूरोपीय संघ के कड़े और जटिल परीक्षणों का सामना करना पड़ेगा। इससे भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली कर और बाजार पहुंच संबंधी रियायतें व्यावहारिक रूप से बेअसर हो जाएंगी।

Q5. इस रिपोर्ट में भारत सरकार को क्या प्रमुख सिफारिशें दी गई हैं?

रिपोर्ट में मुख्य रूप से सिफारिश की गई है कि भारत को खुदरा और ई-कॉमर्स क्षेत्र में विदेशी निवेश की शर्तों को उदार बनाना चाहिए; डिजिटल प्रतिस्पर्धा आयोग के पूर्व-निवारक नियमों के बजाय प्रभाव-आधारित जांच को अपनाना चाहिए; और वैश्विक मंचों पर अमेरिका व कनाडा जैसे समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर यूरोपीय संघ की गैर-टैरिफ व्यापारिक बाधाओं (SPS/TBT) का कड़ाई से विरोध करना चाहिए।


निष्कर्ष (Conclusion)

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL) और आईआईएफटी के सहयोग से जारी की गई यह वैश्विक रिपोर्ट Competere Foundation India Report 2026 भारतीय आर्थिक इतिहास के एक गौरवशाली और प्रगतिशील अध्याय को दर्शाती है। वर्ष 2010 के 82वें स्थान से छलांग लगाकर वर्ष 2023 में 57वें स्थान पर पहुँचना यह प्रमाणित करता है कि भारत सरकार द्वारा लागू किए गए कड़े कानून—जीएसटी और दिवाला संहिता (IBC)—व्यावसायिक सुगमता और आंतरिक बाजार के एकीकरण में कितने सफल रहे हैं।

यद्यपि भारत ने ऐतिहासिक सुधार किए हैं, परंतु खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश पर लगे कड़े प्रतिबंध, डिजिटल प्रतिस्पर्धा नीतियों में बढ़ती विनियामक कठोरता और वैश्विक स्तर पर यूरोपीय संघ द्वारा लगाई जा रही गैर-टैरिफ बाधाएं (SPS/TBT) भारत के विकास की पूर्ण कूटनीतिक क्षमता को प्राप्त करने में बड़ी बाधाएं हैं। $173.6 बिलियन के इस भारी संभावित आर्थिक नुकसान को बचाने के लिए भारत को अपने ‘विकसित भारत @ 2047’ के विज़न के अनुकूल अपनी घरेलू विनियामक प्रणालियों को और अधिक उदार, पूर्वानुमेय और बाजार-अनुकूल बनाना होगा। यह सुधार नीति न केवल भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक लचीला और नियम-आधारित भागीदार बनाएगी बल्कि यह ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांतों को धरातल पर साबित कर संपूर्ण विश्व को आर्थिक विकास, कूटनीति और प्रतिस्पर्धात्मकता का एक नया और स्वर्णिम पथ प्रदर्शित करेगी।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)
https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/jul/doc2026730938201.pdf

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