Bastar Forest Division Thermal Drone 2026: बस्तर के जंगलों में थर्मल इमेजिंग ड्रोन से शुरू हुई रात्रिकालीन निगरानी, वन्यजीव तस्करी और शिकार पर लगेगी कड़ी लगाम

Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 Bastar Forest Division Thermal Drone 2026

Published on July 30, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और सघन जैव विविधता से परिपूर्ण बस्तर के जंगलों की सुरक्षा के लिए Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 कूटनीति के तहत एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की गई है। बस्तर वन मंडल ने कांकेर वन मंडल के विशेष तकनीकी सहयोग से घने और दुर्गम जंगलों में ‘थर्मल इमेजिंग ड्रोन कैमरों’ (Thermal Imaging Drone) के माध्यम से रात्रिकालीन गश्त और हाई-टेक निगरानी का सफल ट्रायल शुरू किया है।

यह आधुनिक तकनीक रात के घने अंधेरे में भी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ लकड़ी तस्करों, शिकारियों और अतिक्रमणकारियों की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह नकेल कसेगी। वनमंडलाधिकारी (DFO) बस्तर श्री उत्तम गुप्ता के नेतृत्व में शुरू की गई इस तकनीक से वन विभाग की गश्ती प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और संवेदनशील सुशासन के सिद्धांतों के अनुरूप काम कर रही है।

महत्वपूर्ण संकेतकBastar Forest Division Thermal Drone 2026 के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
अभियान का नामरात्रिकालीन थर्मल ड्रोन निगरानी (Bastar Forest Division Thermal Drone 2026)
मुख्य तकनीकी यंत्रथर्मल इमेजिंग ड्रोन कैमरा (हीट सिग्नेचर आधारित ट्रैकिंग)
मार्गदर्शक अधिकारीश्री उत्तम गुप्ता (DFO, बस्तर वन मंडल)
वर्तमान सहयोगी संस्थाकांकेर वन मंडल (शीघ्र ही बस्तर को अपनी स्वतंत्र प्रणाली मिलेगी)
लक्षित सुरक्षा आयामभालू, तेंदुआ, एशियाई हाथी, लकड़ी तस्करी, वनाग्नि और अवैध शिकार पर रोक
त्वरित रिस्पांस दलड्रोन फुटेज के आधार पर ‘क्विक रिस्पांस टीम’ (QRT) करेगी तत्काल कार्रवाई

यह महत्वपूर्ण और कड़ा तकनीकी समावेशन सीजीपीएससी (CGPSC) और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए छत्तीसगढ़ के वन संसाधनों (GS Paper V) और पर्यावरण व आंतरिक सुरक्षा में तकनीक के व्यावहारिक अनुप्रयोगों (GS Paper III – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस थर्मल इमेजिंग तकनीक की कार्यप्रणाली, बस्तर की वन सुरक्षा चुनौतियों और परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Bastar Forest Division Thermal Drone 2026: थर्मल इमेजिंग तकनीक से जंगलों की रात में गश्त

बस्तर संभाग के घने जंगलों में रात के समय गश्त करना और तस्करों की पहचान करना वन रक्षकों के लिए हमेशा से एक अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा कार्य रहा है। इसी सुरक्षा अंतराल को समाप्त करने के लिए Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 परियोजना को धरातल पर उतारा गया है।

यह प्रणाली पूरी तरह से ‘हीट सिग्नेचर’ (Heat Signature) तकनीक पर काम करती है। थर्मल कैमरे किसी भी जीवित प्राणी (मनुष्य या वन्यजीव) के शरीर से उत्सर्जित होने वाली प्राकृतिक ऊष्मा (गर्मी) को पहचानकर स्क्रीन पर उनकी स्पष्ट छवि (Thermal Image) प्रदर्शित कर देते हैं।


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मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का सफल शमन

बस्तर वन मंडल में इस तकनीक का उपयोग केवल अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है:

  • हाथियों और भालुओं की लाइव ट्रैकिंग: बस्तर और कांकेर की सीमाओं पर हाथियों या भालुओं की मौजूदगी दर्ज होने पर थर्मल ड्रोन तुरंत उनकी सही भौगोलिक स्थिति (Location) का पता लगा लेते हैं।
  • ग्रामीणों को त्वरित अलर्ट: प्राप्त फुटेज के आधार पर वन विभाग बस्तियों से लगे ग्रामीणों को समय रहते सचेत (Alert) कर देता है, जिससे जन-धन की हानि पूरी तरह टाली जा सकती है।
  • वनकर्मियों की सुरक्षा: रात के अंधेरे में जंगली हिंसक जानवरों के बीच गश्त करने वाले वनकर्मियों को पहले ही संभावित खतरों की जानकारी मिल जाती है, जिससे उनकी सुरक्षा मजबूत हुई है।

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अवैध लकड़ी तस्करी और वन्यजीव शिकार पर कड़ा प्रहार

बस्तर के सघन जंगलों में सागौन और अन्य बेशकीमती लकड़ियों की तस्करी करने वाले गिरोह अक्सर रात के अंधेरे का लाभ उठाते हैं। Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 प्रणाली इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

जैसे ही ड्रोन के थर्मल सेंसर सुदूर जंगलों में किसी मानवीय हलचल या अवैध कटाई को ट्रैक करते हैं, वे तुरंत इसकी लाइव स्ट्रीमिंग हेडक्वार्टर को भेजते हैं। इसके तुरंत बाद, वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) मौके पर जाकर तस्करों और शिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लेती है।

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  • थर्मल इमेजिंग (Thermal Imaging): यह अवरक्त विकिरण (Infrared Radiation) का उपयोग कर वस्तुओं और जीवों के तापमान के अंतर के आधार पर तस्वीरें बनाने वाली एक आधुनिक तकनीक है।
  • बस्तर वन मंडल: दंडकारण्य पठार का एक प्रमुख वन प्रभाग, जो अपनी जैव विविधता और साल-सागौन वनों के लिए प्रसिद्ध है। इसके प्रमुख डीएफओ श्री उत्तम गुप्ता हैं।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: भारत का सर्वोच्च कानून जिसके तहत बाघ, तेंदुए और भालू जैसे वन्यजीवों के शिकार और उनके अंगों के अवैध व्यापार को रोकने के कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं।

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वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में वन सुरक्षा को अभेद्य बनाना केवल गश्त का कार्य नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में कूटनीतिक सुशासन (Good Governance) स्थापित करने का एक बड़ा माध्यम है।

Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 जैसी परियोजनाएं यह सिद्ध करती हैं कि सीमित मानव संसाधन (Staff Shortage) की चुनौती के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता और थर्मल जैसी तकनीकें एक मजबूत ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ (Force Multiplier) के रूप में कार्य कर सकती हैं।

यह तकनीक-संचालित वन सुरक्षा न केवल बस्तर के दुर्लभ वन्यजीवों को सुरक्षित रखेगी, बल्कि यह स्थानीय वनोपजों पर निर्भर आदिवासियों के अधिकारों और राज्य की अमूल्य प्राकृतिक संपदा का कड़ाई से संरक्षण सुनिश्चित करेगी, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को समयबद्ध तरीके से धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत और अजेय रीढ़ साबित होगी।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और पर्यावरण विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में चर्चा में रहा ‘बस्तर वन मंडल’ (Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 Sighting) रात के समय जंगलों की हाई-टेक निगरानी के लिए किस वन मंडल के साथ विशेष सहयोग कर रहा है?

(A) सरगुजा वन मंडल
(B) कांकेर वन मंडल (Kanker Forest Division)
(C) रायपुर वन मंडल
(D) बिलासपुर वन मंडल

उत्तर: (B) कांकेर वन मंडल (Kanker Forest Division)
व्याख्या: बस्तर वन मंडल वर्तमान में कांकेर वन मंडल के विशेष तकनीकी सहयोग से थर्मल इमेजिंग ड्रोन द्वारा रात्रिकालीन गश्त संचालित कर रहा है, और जल्द ही इसे अपना स्वतंत्र ड्रोन प्रदान किया जाएगा।

प्रश्न 2: वनों की रात्रिकालीन गश्त में प्रयुक्त होने वाली ‘थर्मल इमेजिंग’ (Thermal Imaging) तकनीक मुख्य रूप से जीवों और वस्तुओं के किस भौतिक गुण का पता लगाने में सक्षम है?

(A) केवल उनकी ध्वनि तरंगों का
(B) उनके शरीर की उत्सर्जित प्राकृतिक ऊष्मा या हीट सिग्नेचर (Heat Signature) का
(C) केवल उनके पैरों के निशानों का
(D) उनकी डिजिटल ऊंचाई और चौड़ाई का

उत्तर: (B) उनके शरीर की उत्सर्जित प्राकृतिक ऊष्मा या हीट सिग्नेचर (Heat Signature) का
व्याख्या: थर्मल इमेजिंग तकनीक जीवों के शरीर से उत्सर्जित होने वाली गर्मी (Infrared Radiation/Heat Signature) को पकड़कर रात के घने अंधेरे में भी उनकी सटीक तस्वीरें बनाने में सक्षम होती है।

प्रश्न 3: बस्तर वन मंडल के वर्तमान वनमंडलाधिकारी (DFO) कौन हैं, जिनके कुशल मार्गदर्शन में इस आधुनिक थर्मल ड्रोन तकनीक को बस्तर की सुरक्षा में शामिल किया गया है?

(A) श्री अभिषेक जोगावत
(B) श्री उत्तम गुप्ता (Uttam Gupta)
(C) श्री रमेश शर्मा
(D) श्री मयंक अग्रवाल

उत्तर: (B) श्री उत्तम गुप्ता (Uttam Gupta)
व्याख्या: बस्तर वन मंडल के वर्तमान डीएफओ (DFO) श्री उत्तम गुप्ता हैं, जिनके नेतृत्व में इस आधुनिक थर्मल ड्रोन तकनीक को बस्तर के जंगलों की सुरक्षा के लिए अपनाया गया है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 परियोजना क्या है?

Bastar Forest Division Thermal Drone 2026 छत्तीसगढ़ के बस्तर वन मंडल में शुरू की गई एक अत्याधुनिक वन सुरक्षा पहल है। इसके तहत कांकेर वन मंडल के सहयोग से रात के समय थर्मल इमेजिंग ड्रोन के जरिए जंगलों की निगरानी की जा रही है ताकि तस्करों, शिकारियों और अतिक्रमणकारियों पर रोक लगाई जा सके।

Q2. थर्मल इमेजिंग ड्रोन सामान्य कैमरों से किस प्रकार भिन्न और बेहतर हैं?

सामान्य कैमरे रात के अंधेरे या घने पत्तों के आवरण (Canopy Cover) के पीछे छिपे जीवों को नहीं देख सकते। इसके विपरीत, थर्मल कैमरे जीवों के शरीर की प्राकृतिक ऊष्मा (हीट सिग्नेचर) को पहचानकर घने जंगलों और रात के सन्नाटे में भी उनकी स्पष्ट तस्वीरें प्रदर्शित करने में सक्षम होते हैं।

Q3. इस तकनीक से मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कैसे रोका जा रहा है?

वन क्षेत्रों से लगे ग्रामीण इलाकों में हाथियों, तेंदुओं या भालू जैसे जंगली जानवरों के मूवमेंट की सूचना मिलने पर ड्रोन के जरिए उनकी सटीक लोकेशन ट्रैक की जाती है। इसके आधार पर वन विभाग ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट कर देता है, जिससे जन-धन की हानि पूरी तरह टल जाती है।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • हाई-टेक रात्रिकालीन गश्त: बस्तर वन मंडल ने कांकेर वन मंडल के सहयोग से रात के समय सघन वनों की थर्मल ड्रोन से निगरानी शुरू की है, जिससे वनकर्मियों की सुरक्षा भी बढ़ी है।
  • अवैध तस्करी और शिकार पर प्रहार: हीट सिग्नेचर तकनीक के बल पर रात में सक्रिय रहने वाले लकड़ी तस्करों और शिकारियों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग कर क्विक रिस्पांस टीम (QRT) द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
  • जैव विविधता का डिजिटल रक्षक: बस्तर के सघन साल-सागौन वनों और दुर्लभ वन्यजीवों (भालू, तेंदुआ) के वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सामान्य अध्ययन पेपर-3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी – आईटी और रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोग; पर्यावरण – जैव विविधता का संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और वनावरण सुरक्षा) तथा सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सरकारी हस्तक्षेप, स्थानीय सुशासन) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और बस्तर वन मंडल कार्यालय द्वारा 28 जुलाई 2026 को जारी की गई आधिकारिक परियोजना विज्ञप्ति पर आधारित है।

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