Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan: राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी, राष्ट्रपति ने परोसा भोजन और भेंट की गई 300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की दुर्लभ कलाकृति

Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan Delegation Meet Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan Delegation Meet

Published on July 30, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय लोक-संस्कृति, कला विरासत और बस्तर के पारंपरिक स्वशासन ढांचे को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर एक ऐतिहासिक सम्मान प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर संभाग के 209 सदस्यीय एक बड़े जनजातीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन (New Delhi) में आत्मीय स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक पहल को Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है, जो बस्तर में लौट रही शांति और समृद्धि का बड़ा राष्ट्रीय उत्सव है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेता लोक कलाकारों, पारंपरिक ‘मांझी-चालकी’ (Manjhi-Chalki) व्यवस्था के प्रतिनिधियों और पद्मश्री से सम्मानित राज्य की विभूतियों के सम्मान में एक विशेष भोज (State Feast) का आयोजन किया। इस दौरान भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ और भावुक कर देने वाला पल तब देखने को मिला जब राष्ट्रपति ने स्वयं अपने हाथों से सभी जनजातीय अतिथियों को भोजन परोसकर उनका आत्मीय सम्मान किया।

यह महत्वपूर्ण Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan सम्मेलन न केवल सांस्कृतिक कूटनीति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है, बल्कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विशेष रूप से सीजीपीएससी (CGPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वशासन प्रणालियों (GS Paper VI – छत्तीसगढ़ की जनजातियां) और कला-संस्कृति (GS Paper I) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम बस्तर की मांझी-चालकी व्यवस्था, बस्तर पंडुम के सांस्कृतिक महत्व, 300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की लोकगाथा और परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन और बस्तर प्रतिनिधिमंडल के इस दौरे से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण आयामBastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
संबद्ध सांस्कृतिक महोत्सवबस्तर पंडुम-2026 (Bastar Pandum-2026) – छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक कला का उत्सव
प्रतिनिधिमंडल का आकार209 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल (मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में)
मुख्य जनजातीय प्रतिनिधिपरगना मांझी, मांझी, चालकी और बस्तर पंडुम के विजेता लोक कलाकार
विशिष्ट अतिथि उपस्थितिश्री विजय शर्मा (उप मुख्यमंत्री व गृहमंत्री) और श्री राजेश अग्रवाल (संस्कृति मंत्री)
ऐतिहासिक कूटनीतिक उपहारबस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा पर आधारित ‘झिटकू-मिटकी’ की ढोकरा/काष्ठ कलाकृति
राष्ट्रपति का पारिवारिक संबंधराष्ट्रपति के पिता स्वयं ओडिशा के संथाल समाज में ‘मांझी’ (Manjhi) पारंपरिक प्रमुख थे
भविष्य की कूटनीतिक इच्छाराष्ट्रपति ने भविष्य में ‘बस्तर दशहरा’ (Bastar Dussehra) में शामिल होने की इच्छा जताई

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Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan: बस्तर की संस्कृति का ऐतिहासिक सम्मान

बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपराएं, लोक कलाएं और सामाजिक नेतृत्व की कूटनीतिक विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में नया इतिहास रच दिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि उन्होंने कई बार राष्ट्रपति भवन का दौरा किया है, परंतु पहली बार उन्होंने यहाँ बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता का सबसे सुंदर प्रतीक है।

इस ऐतिहासिक Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तरवासियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बस्तर पंडुम-2026 की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की यह सांस्कृतिक पहचान भारत की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण करना पूरे देश का साझा दायित्व है।

मांझी-चालकी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और राष्ट्रपति का जुड़ाव

बस्तर के जनजातीय समाज में पीढ़ियों से ‘मांझी-चालकी’ (Manjhi-Chalki System) की एक मजबूत पारंपरिक लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था काम करती आ रही है:

  • प्रशासन और समाज के बीच का सेतु: परगना मांझी, मांझी और चालकी बस्तर के आदिवासी गांवों के पारंपरिक प्रमुख होते हैं। ये समाज में विवादों का निपटारा करने, सामाजिक समरसता बनाए रखने और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं।
  • राष्ट्रपति का गहरा जुड़ाव: इस आत्मीय चर्चा के दौरान राष्ट्रपति ने भावुक होकर बताया कि मांझी उनके ही परिवार का हिस्सा रहे हैं क्योंकि उनके पिता भी ‘मांझी’ (पारंपरिक प्रमुख) थे। उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक व्यवस्था सामाजिक एकता और सामुदायिक सहभागिता की सबसे मजबूत नींव है।
  • बस्तर दशहरा में आमंत्रण: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विशेष आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में विश्व प्रसिद्ध 75 दिनों के ‘बस्तर दशहरा’ और बस्तर पंडुम में शामिल होने की कूटनीतिक इच्छा जताई।

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300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की अनुपम कलाकृति भेंट

इस ऐतिहासिक मुलाकात के सबसे कूटनीतिक और सांस्कृतिक पल में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा पर आधारित ‘झिटकू-मिटकी’ (Jhitku-Mitki) की एक अत्यंत सुंदर हस्तनिर्मित कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की:

  • झिटकू-मिटकी की लोकमान्यता: बस्तर की जनजातीय लोक-मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में कठिन अकाल और भुखमरी के समय ‘झिटकू’ और ‘मिटकी’ ने अपने प्रेम, त्याग और सामाजिक सौहार्द की ऐसी मिसाल पेश की थी कि उन्हें देवतुल्य आदर प्राप्त हुआ।
  • बस्तर में वर्तमान पूजा पद्धति: आज भी बस्तर अंचलों के आदिवासियों द्वारा झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ (Khodiya Raja) और मिटकी को ‘गप्पा देई’ (Gappa Dei) के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। यह कलाकृति बस्तर की उत्कृष्ट बेल-मेटल/ढोकरा आर्ट (Bell Metal/Dhokra Art) का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।

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UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: Bastar Pandum 2026

  • बस्तर पंडुम (Bastar Pandum): बस्तर के जनजातीय समाज का एक पारंपरिक मौसमी कृषि उत्सव और लोक कला महोत्सव, जिसे हाल ही में वर्ष 2026 में बड़े स्तर पर आयोजित किया गया।
  • मांझी व्यवस्था (Manjhi System): बस्तर रियासत कालीन पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था, जिसे काकतीय राजवंश (Kakatiya Dynasty) के राजा पुरुषोत्तम देव के समय से विशेष वैधानिक दर्जा प्राप्त था। बस्तर दशहरा के रथ संचालन में इनकी मुख्य भूमिका होती है।
  • झिटकू-मिटकी आर्ट: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में घड़वा शिल्प (Ghadwa Art) के अंतर्गत बनाई जाने वाली पीतल और कांसे की धातु की मूर्तियाँ।

UPSC & CGPSC Mains Analysis: जनजातीय कूटनीति और सामाजिक न्याय

भारत के सर्वोच्च संवैधानिक मंच, राष्ट्रपति भवन में बस्तर के पारंपरिक नेतृत्व (मांझी-चालकी) को आमंत्रित करना और स्वयं राष्ट्रपति द्वारा उन्हें भोजन परोसना भारत के लोकतांत्रिक और समावेशी मूल्यों का सर्वोच्च उदाहरण है।

यह Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan कूटनीति यह सिद्ध करती है कि बस्तर आज केवल नक्सलवाद और अशांति की खबरों से बाहर निकलकर अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान, शांति और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

पारंपरिक जनजातीय स्वशासन प्रणालियों को यह सम्मान देना ग्रामीण स्तर पर सुशासन (Good Governance) को मजबूत बनाता है और आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा करने के हमारे राष्ट्रीय संकल्पों को बल देता है, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को समयबद्ध तरीके से धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत सामाजिक और नैतिक पूंजी साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और सांस्कृतिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बस्तर के 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन (Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan) का ऐतिहासिक दौरा किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा पर आधारित कौन सी विशिष्ट कलाकृति भेंट की है?

(A) तीजन बाई पंडवानी काष्ठ कला
(B) झिटकू-मिटकी की अनुपम कलाकृति (Jhitku-Mitki Art)
(C) दंतेश्वरी माई की पीतल की मूर्ति
(D) बस्तर दशहरा रथ का लकड़ी का मॉडल

उत्तर: (B) झिटकू-मिटकी की अनुपम कलाकृति (Jhitku-Mitki Art)
व्याख्या: मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की ऐतिहासिक और पूजनीय लोकगाथा झिटकू-मिटकी पर आधारित एक हस्तनिर्मित उत्कृष्ट बेल-मेटल/घड़वा शिल्प की कलाकृति भेंट की है।

प्रश्न 2: बस्तर संभाग के आदिवासी समाज में पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक स्वशासन और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत ‘मांझी’ और ‘चालकी’ (Manjhi-Chalki) की मुख्य भूमिका क्या होती है?

(A) केवल जंगलों से लकड़ी काटने की निगरानी करना
(B) समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी कूटनीतिक सेतु का कार्य कर सामाजिक समरसता बनाए रखना
(C) केवल जनजातीय खेलों का आयोजन करना
(D) जिला कलेक्टर के अंगरक्षकों के रूप में कार्य करना

उत्तर: (B) समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी कूटनीतिक सेतु का कार्य कर सामाजिक समरसता बनाए रखना
व्याख्या: मांझी और चालकी बस्तर संभाग के गांवों के पारंपरिक और सर्वमान्य जनजातीय सामाजिक प्रमुख होते हैं, जो स्थानीय विवादों को सुलझाने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासन की मदद करते हैं।

प्रश्न 3: बस्तर की ऐतिहासिक लोकमान्यता के अनुसार, ‘झिटकू’ को ‘खोड़िया राजा’ के रूप में पूजा जाता है, जबकि ‘मिटकी’ को किस नाम से देवी के रूप में पूजा जाता है?

(A) गप्पा देई (Gappa Dei)
(B) नोनी माई
(C) बस्तर दंतेश्वरी
(D) कंकालिन देवी

उत्तर: (A) गप्पा देई (Gappa Dei)
व्याख्या: कठिन अकाल और त्याग की अमर कहानी होने के कारण बस्तर के आदिवासी आज भी झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ और मिटकी को ‘गप्पा देई’ (Gappa Dei) के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजते हैं।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan प्रतिनिधिमंडल का दौरा क्या है?

Bastar Pandum 2026 Rashtrapati Bhavan छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 209 सदस्यीय जनजातीय और सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन का ऐतिहासिक दौरा है। इसके तहत राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ‘बस्तर पंडुम’ के कलाकारों, लोक शिल्पियों और पारंपरिक मांझी-चालकी प्रमुखों को विशेष भोज पर आमंत्रित कर सम्मानित किया।

Q2. ‘झिटकू-मिटकी’ (Jhitku-Mitki) की कलाकृति का बस्तर में क्या महत्व है?

झिटकू-मिटकी बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी प्रेम, त्याग और सामाजिक समरसता की एक अमर लोकगाथा है। आज भी बस्तर के आदिवासियों द्वारा झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ और मिटकी को ‘गप्पा देई’ के रूप में पूजा जाता है। घड़वा कला की यह मूर्ति बस्तर की उत्कृष्ट हस्तशिल्प कला का प्रतीक है।

Q3. बस्तर की ‘मांझी-चालकी’ (Manjhi-Chalki) व्यवस्था क्या है?

यह बस्तर के आदिवासी समाज की पीढ़ियों पुरानी पारंपरिक स्वशासन प्रणाली है, जिसे काकतीय राजाओं के समय से विशेष वैधानिक महत्व प्राप्त है। परगना मांझी, मांझी और चालकी गाँव के सामाजिक विवादों को सुलझाने और त्योहारों (जैसे बस्तर दशहरा) के सफल आयोजन में मुख्य भूमिका निभाते हैं।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • सर्वोच्च संवैधानिक सम्मान: बस्तर के 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, बस्तर पंडुम के कलाकारों और पारंपरिक मांझी-चालकी प्रमुखों को राष्ट्रपति भवन में विशेष भोज पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया।
  • अमर लोकगाथा का कूटनीतिक उपहार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की 300 वर्ष पुरानी अमर प्रेम और आस्था की कहानी पर आधारित ‘झिटकू-मिटकी’ की सुंदर कलाकृति भेंट की।
  • बस्तर में शांति और विकास: राष्ट्रपति और गृहमंत्री ने यह रेखांकित किया कि बस्तर आज नक्सलवाद की काली छाया से निकलकर विकास, शांति, और अपनी प्राचीन सांस्कृतिक अस्मिता के साथ वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रहा है।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारतीय संस्कृति, जनजातीय लोक कलाएं, हस्तशिल्प और लोकगाथाएं) और सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सामाजिक न्याय – अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकार, पारंपरिक स्वशासन प्रणालियाँ और जनजातीय कूटनीति) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख भारत सरकार के गृह मंत्रालय, राष्ट्रपति सचिवालय नई दिल्ली, और जनसंपर्क विभाग छत्तीसगढ़ (DPRCG) द्वारा 30 जुलाई 2026 को जारी की गई आधिकारिक शिखर वार्ता विवरणी पर आधारित है।

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