छत्तीसगढ़ समान नागरिक संहिता 2026: UCC समिति ने रायपुर में धार्मिक-सामाजिक संगठनों और आयोगों से लिए सुझाव; अनुच्छेद 44 के तहत कार्यवाही

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रायपुर, 27 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code — UCC) के लिए गठित समिति ने आज रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित विभिन्न आयोग, निगम और मंडल के पदाधिकारियों से सुझाव लिए। संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित इस समिति के समक्ष विभिन्न वर्गों की सहभागिता लगातार देखने को मिल रही है।

विषयविवरण
विषयसमान नागरिक संहिता (UCC) पर सुझाव बैठक
स्थलन्यू सर्किट हाउस, रायपुर
संवैधानिक आधारअनुच्छेद 44 — नीति-निर्देशक तत्व
समिति सदस्यसेवानिवृत्त IAS शत्रुघ्न सिंह, सेवानिवृत्त IAS एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह, सदस्य सचिव श्याम धावड़े
सुझाव देने वालेधार्मिक-सामाजिक संगठन, आयोग-निगम-मंडल के पदाधिकारी, समाज प्रमुख, प्रबुद्धजन
प्रस्तावित दायराविवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, भरण-पोषण, लिव-इन संबंध

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समिति के समक्ष किसने दिए सुझाव?

बैठक में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संगठनों और आयोगों के पदाधिकारियों ने सुझाव दिए। प्रमुख सहभागी:

  • मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण: उपाध्यक्ष श्री प्रणव कुमार मरपच्ची
  • विश्व हिंदू परिषद: अध्यक्ष श्री ललित माखीजा
  • क्रिश्चियन समाज: श्री जान राजेश पॉल
  • मुस्लिम समाज: अध्यक्ष श्री सलाम रिजवी
  • गुरुद्वारा कमेटी: अध्यक्ष श्री इंद्रजीत छाबड़ा
  • अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण: उपाध्यक्ष श्री ललित चंद्राकर
  • राज्य नीति आयोग: अध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा
  • राज्य खाद्य आयोग: अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा
  • महिला आयोग: अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया और श्रीमती दीपिका सोरी
  • गौ सेवा आयोग: अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल
  • राज्य अल्पसंख्यक आयोग: अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा
  • राज्य नागरिक आपूर्ति निगम: अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव
  • अनुसूचित जनजाति आयोग: अध्यक्ष श्री रूप सिंह मंडावी
  • मछुआ कल्याण बोर्ड: उपाध्यक्ष श्री लखन लाल धीवर
  • जैतू साव मठ: महंत श्री राम सुंदर दास
  • अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित अन्य सामाजिक संगठन

प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के मुख्य आयाम

समिति के समक्ष जिन विषयों पर चर्चा और सुझाव लिए गए, वे हैं:

  • विवाह और तलाक: सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम; मौखिक तलाक और कुछ धार्मिक कुप्रथाओं पर रोक
  • उत्तराधिकार: पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति में समान अधिकार
  • गोद लेना: सभी नागरिकों के लिए समान नियम
  • भरण-पोषण: व्यक्तिगत मामलों में न्यायसंगत अधिकार
  • लिव-इन संबंध: विधिक मान्यता और अधिकार
  • महिला समानता: उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार
  • जनजातीय परंपराओं का संरक्षण: राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन

समिति की कार्यप्रणाली

समिति राज्य के सभी जिलों में निम्न माध्यमों से नागरिकों की राय जुटा रही है:

  • फील्ड स्टडी: जिला स्तर पर प्रत्यक्ष अध्ययन
  • ऑनलाइन पोर्टल: डिजिटल माध्यम से सुझाव
  • जन-संवाद: धार्मिक-सामाजिक संगठनों, कानूनविदों और आम नागरिकों से प्रत्यक्ष चर्चा

महत्वपूर्ण परिभाषाएं

  • समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code — UCC): एक ऐसा कानून जो सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या पंथ से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान नियम लागू करे।
  • अनुच्छेद 44: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 (भाग IV — नीति-निर्देशक तत्व) जो कहता है कि “राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान संहिता प्राप्त करने का प्रयत्न करेगा।”
  • नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy): संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित सिद्धांत, जो सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं लेकिन न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (enforceable) नहीं हैं।
  • व्यक्तिगत कानून (Personal Laws): धर्म आधारित कानून जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मामलों में विभिन्न धार्मिक समुदायों पर अलग-अलग लागू होते हैं (जैसे हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिम पर्सनल लॉ, ईसाई विवाह अधिनियम आदि)।

समान नागरिक संहिता: व्यापक संदर्भ

(विश्लेषण)

समान नागरिक संहिता (UCC) भारत में एक लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक और सामाजिक चर्चा का विषय है। इसे समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण संदर्भ:

  • संवैधानिक स्थिति: अनुच्छेद 44 नीति-निर्देशक तत्व है, जो सरकार के लिए मार्गदर्शक है लेकिन न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है। अर्थात सरकार UCC बनाने के लिए बाध्य नहीं है, लेकिन यह संविधान निर्माताओं की आकांक्षा थी।
  • गोवा मॉडल: गोवा भारत का एकमात्र राज्य है जहां पुर्तगाली शासन काल से एक समान नागरिक संहिता लागू है।
  • उत्तराखंड: उत्तराखंड 2024 में UCC लागू करने वाला पहला भारतीय राज्य बना।
  • विभिन्न दृष्टिकोण: UCC पर विभिन्न समुदायों और विचारधाराओं के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। कुछ इसे लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक मानते हैं, जबकि अन्य इसे धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और सांस्कृतिक विविधता पर अतिक्रमण मानते हैं।
  • जनजातीय संवेदनशीलता: छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां बड़ी जनजातीय आबादी है, उनकी विशिष्ट परंपराओं और रीति-रिवाजों का संरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। समिति ने इसे स्वीकार किया है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा UCC के लिए समिति गठित करना और व्यापक जन-संवाद करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कदम है। विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संगठनों और आयोगों से सुझाव लेना समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है। हालांकि, UCC का अंतिम स्वरूप क्या होगा, यह सुझावों के संकलन, विश्लेषण और विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

UPSC/CGPSC के लिए प्रासंगिक बिंदु

यह विषय CGPSC पेपर-2 (संविधान, शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय) और UPSC सामान्य अध्ययन पेपर-2 (संविधान, सामाजिक न्याय) के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। परीक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:

  • अनुच्छेद 44 — नीति-निर्देशक तत्व और UCC
  • व्यक्तिगत कानून बनाम समान नागरिक संहिता
  • अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 44 (UCC) के बीच संतुलन
  • लैंगिक समानता और महिला अधिकार
  • जनजातीय परंपराओं का संरक्षण
  • गोवा मॉडल और उत्तराखंड UCC
  • सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय — शाह बानो (1985), सरला मुद्गल (1995), शायरा बानो (2017)

तीन प्रमुख बातें

  • UCC समिति ने लिए व्यापक सुझाव: अनुच्छेद 44 के तहत गठित समिति ने रायपुर में धार्मिक-सामाजिक संगठनों (विश्व हिंदू परिषद, मुस्लिम समाज, क्रिश्चियन समाज, गुरुद्वारा कमेटी) और विभिन्न आयोगों (नीति आयोग, महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग) से सुझाव लिए।
  • प्रस्तावित दायरा: विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, भरण-पोषण, लिव-इन संबंध — सभी नागरिकों के लिए एक समान विधिक ढांचा। पुत्र-पुत्री को समान उत्तराधिकार; मौखिक तलाक पर रोक।
  • जनजातीय संवेदनशीलता: समिति ने राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन करने की बात कही है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: समान नागरिक संहिता (UCC) किस अनुच्छेद में वर्णित है?

(A) अनुच्छेद 14
(B) अनुच्छेद 25
(C) अनुच्छेद 44
(D) अनुच्छेद 51A

उत्तर: (C) अनुच्छेद 44
व्याख्या: अनुच्छेद 44 (भाग IV — नीति-निर्देशक तत्व) कहता है कि “राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान संहिता प्राप्त करने का प्रयत्न करेगा।”

प्रश्न 2: भारत में UCC लागू करने वाला पहला राज्य कौन-सा है?

(A) गोवा
(B) उत्तराखंड
(C) छत्तीसगढ़
(D) गुजरात

उत्तर: (B) उत्तराखंड
व्याख्या: उत्तराखंड 2024 में UCC लागू करने वाला पहला भारतीय राज्य बना। गोवा में पुर्तगाली शासन काल से एक समान नागरिक संहिता लागू है, लेकिन यह स्वतंत्र भारत में विधायी प्रक्रिया से नहीं बनी।

प्रश्न 3: UCC किस प्रकार का संवैधानिक प्रावधान है?

(A) मौलिक अधिकार
(B) नीति-निर्देशक तत्व
(C) मूल कर्तव्य
(D) अनुसूचित प्रावधान

उत्तर: (B) नीति-निर्देशक तत्व
व्याख्या: UCC अनुच्छेद 44 में वर्णित नीति-निर्देशक तत्व है, जो सरकार के लिए मार्गदर्शक है लेकिन न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) समिति क्या है?

छत्तीसगढ़ सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से एक समिति गठित की है। यह समिति राज्य के सभी जिलों में फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और जन-संवाद के माध्यम से नागरिकों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और कानूनविदों की राय जुटा रही है।

Q2. प्रस्तावित UCC के मुख्य आयाम क्या हैं?

प्रस्तावित UCC के मुख्य आयाम हैं: विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों में सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम। पुत्र-पुत्री को समान उत्तराधिकार, मौखिक तलाक पर रोक, और जनजातीय परंपराओं का संरक्षण।

Q3. अनुच्छेद 44 और अनुच्छेद 25 में क्या संबंध है?

अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 44 (नीति-निर्देशक तत्व) सभी नागरिकों के लिए एक समान संहिता की बात करता है। UCC पर चर्चा में इन दोनों प्रावधानों के बीच संतुलन एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा है।

Q4. छत्तीसगढ़ में जनजातीय परंपराओं के संरक्षण पर क्या विचार है?

समिति ने कहा है कि राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन किया जाएगा। अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने भी बैठक में सुझाव दिए हैं।

स्रोत

छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 27 अगस्त 2026, रायपुर।

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