रायपुर | 20 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के वनांचल अंचलों में निवासरत आदिवासियों और वन-आश्रित परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण, स्थानीय लघु वनोपज (MFP) के मूल्य संवर्धन और महिला स्वावलंबन को गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र (Herbal Processing Centre) एक नई संजीवनी बनकर उभरा है। आज 20 अगस्त 2026 को कोरबा जिला प्रवास के दौरान राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन स्थानीय आर्थिक आजीविका सुधारों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुदूर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और गरीबी उन्मूलन के लिए वनों को स्थानीय रोजगार से जोड़ना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने कोरबा प्रवास के दौरान पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला स्थित छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ‘हरि बोल स्व-सहायता समूह’ की जनजातीय महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और उनके द्वारा वनौषधियों के वैज्ञानिक संग्रहण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की प्रक्रियाओं को समझा। उन्होंने महिलाओं के इस कड़े पुरुषार्थ की सराहना की और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जड़ी-बूटियों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए हरसंभव तकनीकी सहायता देने का आश्वासन दिया।
| महत्वपूर्ण संकेतक | छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र एवं वन्यजीव सुरक्षा के मुख्य तथ्य व आंकड़े |
|---|---|
| परियोजना का नाम | छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र (डोंगानाला, कोरबा) |
| संबद्ध महिला स्व-सहायता समूह | हरि बोल स्व-सहायता समूह, ग्राम डोंगानाला |
| प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र | पाली एवं पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) |
| वन्यजीव शमन सुरक्षा केंद्र | हाथी नियंत्रण केंद्र, चोटिया (चोटिया हाथी मित्र दल) |
| वितरित की गई सुरक्षा सामग्रियां | सुरक्षा किट एवं गश्त हेतु मोटरसाइकिलें (हाथी मित्रों के लिए) |
| प्रमुख विनियामक भागीदार | संयुक्त वन प्रबंधन समितियां (JFMCs) एवं स्थानीय ग्रामीण समुदाय |
| संबद्ध विधायक/जनप्रतिनिधि | पोड़ी-उपरोड़ा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल |
छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र: डोंगानाला में ‘हरि बोल समूह’ का मूल्य संवर्धन और महिला सशक्तीकरण
छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला अपने सघन वनों और प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली दुर्लभ वनौषधियों के लिए प्रसिद्ध है। पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला में संचालित इस छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने गहन निरीक्षण किया। उन्होंने महिलाओं के इस सहकारी संगठन को ग्रामीण आत्मनिर्भरता का आदर्श मॉडल बताया:
- स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक प्रसंस्करण: इस केंद्र के माध्यम से महुआ, बहेड़ा, आंवला और दुर्लभ औषधीय पौधों को सीधे प्रसंस्कृत कर डिब्बाबंद उत्पादों में बदला जाता है। इससे उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है और महिलाओं की मासिक आय में स्थिर वृद्धि होती है।
- स्वावलंबन और आत्मसम्मान: जब वनांचल की महिलाएं स्वयं उत्पाद तैयार कर ब्रांडिंग करती हैं, तो वे केवल मजदूर नहीं रहतीं, बल्कि एक कुटीर उद्योग की उद्यमी बनती हैं। यह ग्रामीण समाज में महिलाओं के आत्मसम्मान और आर्थिक स्वायत्तता को कड़ाई से सुनिश्चित करता है।
चोटिया हाथी नियंत्रण केंद्र का कड़ा निरीक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व पर नियंत्रण की रणनीति
वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों का विस्तार करने के साथ-साथ वन्यजीवों और इंसानों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र के माध्यम से आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ ही वन्यजीवों के संरक्षण की योजनाओं को भी एकीकृत किया जा रहा है:
- हाथी मित्र दल को सुरक्षा किट वितरण: वन मंत्री ने पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के चोटिया स्थित ‘हाथी नियंत्रण केंद्र’ का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जंगलों में हाथियों की गतिविधियों की लाइव ट्रैकिंग करने वाले ‘हाथी मित्र दल’ के सदस्यों से चर्चा की और गश्त को अभेद्य बनाने के लिए उन्हें आधुनिक गश्ती मोटरसाइकिलें तथा उन्नत सुरक्षा किट वितरित कीं।
- समय पर सूचना और त्वरित सतर्कता: श्री कश्यप ने आम नागरिकों और वन प्रबंधन समितियों से अपील की कि हाथियों की आवाजाही की समय पर सूचना देना ही इस द्वंद्व को रोकने का सबसे प्रभावी कूटनीतिक उपाय है, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ हाथियों का संरक्षण भी संभव हो सकेगा।
वन प्रबंधन समितियों और हाथी मित्र दलों के बीच वास्तविक समय में कड़ा समन्वय
वन और वन्यजीवों की सुरक्षा का लक्ष्य केवल प्रशासनिक बल से प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए वन प्रबंधन समितियों और स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतना आवश्यक है। चोटिया हाथी नियंत्रण केंद्र और छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र डोंगानाला के एकीकृत विकास से वनांचल क्षेत्रों में सुरक्षा और समृद्धि का दोहरा मॉडल विकसित हो रहा है:
- त्रि-स्तरीय संरक्षण मॉडल: वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘वन संरक्षण’, ‘वन आधारित आजीविका’ और ‘वन्यजीव सुरक्षा’—इन तीनों क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही छत्तीसगढ़ के सतत विकास (Sustainable Development) का मूल आधार है।
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता: इस दौरान क्षेत्रीय विधायक श्री प्रेमचंद पटेल सहित स्थानीय वन प्रबंधन समितियों के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने वनों से जुड़ी आजीविका प्रणालियों को और अधिक विस्तारित करने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
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- संयुक्त वन प्रबंधन समितियां (JFMCs): राष्ट्रीय वन नीति, 1988 के तहत स्थापित ये समितियां स्थानीय समुदायों और वन विभाग के बीच वनों की सुरक्षा और आजीविका संवर्धन के लिए एक साझा विनियामक मंच प्रदान करती हैं। छत्तीसगढ़ में इनका एक अत्यंत व्यापक और सक्रिय नेटवर्क है।
- मानव-हाथी द्वंद्व (HEC) क्षेत्र छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ (रायगढ़), कोरबा, सरगुजा और जशपुर जिले हाथियों के प्रमुख कॉरिडोर और रहवास क्षेत्र हैं। यहाँ हाथियों की ट्रैकिंग के लिए ‘हाथी मित्र दल’ (Hathi Mitra Dal) का गठन किया गया है, जो ग्रामीणों को हाथियों की वास्तविक समय की लोकेशन प्रदान करता है।
- लघु वनोपज (MFP) मूल्य संवर्धन: छत्तीसगढ़ देश के कुल लघु वनोपज (Minor Forest Produce) का 70% से अधिक उत्पादन करता है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण केंद्रों का निर्माण वनों के दोहन को रोककर सतत आर्थिक प्रणालियों का विकास करता है।
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मुख्य परीक्षा के पर्यावरण भूगोल, लोक नीति और आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से, छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का यह सहकारी मॉडल जनजातीय विकास और पर्यावरण सुशासन का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। भारतीय वनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल वनों की अवैध कटाई रोकना नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों को साहूकारों के आर्थिक ऋण दुष्चक्र (Debt Trap) से बचाकर उनके वनाधिकारों को आजीविका से जोड़ना है।
इसके समाधान के रूप में, ‘हरि बोल समूह’ जैसी स्व-सहायता समूहों को प्रत्यक्ष विनिर्माण और मूल्य संवर्धन गतिविधियों से जोड़ना उनकी क्रय शक्ति को बढ़ाता है और वनों के प्रति उनके अपनत्व की भावना को सुदृढ़ करता है। इसके अतिरिक्त, मानव-हाथी द्वंद्व को रोकने के लिए ‘हाथी मित्र दलों’ को तकनीकी गश्ती उपकरणों से लैस करना ‘सहभागी संरक्षण’ (Participatory Conservation) की आधुनिक विधा है, जो इंसानों और हाथियों के सह-अस्तित्व को बढ़ावा देती है। यह कड़ा दृष्टिकोण सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-15: भूमि पर जीवन, SDG-8: सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास, तथा SDG-1: शून्य गरीबी) के अनुकूल विकसित छत्तीसगढ़ @ 2047 के राष्ट्रीय विजन को पूरा करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण आजीविका पहल और वन्यजीव सुरक्षा प्रणालियों पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा निरीक्षण किया गया छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र किस जिले के पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला में स्थित है, जहाँ हरि बोल महिला समूह कार्यरत है?
(A) सरगुजा जिला
(B) कोरबा जिला (Korba District)
(C) रायगढ़ जिला
(D) दंतेवाड़ा जिला
उत्तर: (B) कोरबा जिला (Korba District)
व्याख्या: यह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र छत्तीसगढ़ के कोयला व खनिज बाहुल्य कोरबा जिले के अंतर्गत पाली विकासखंड के डोंगानाला गाँव में सुचारू रूप से संचालित है।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ के सघन वनों में मानव-हाथी द्वंद्व (HEC) को नियंत्रित करने और ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों के प्रति सतर्क करने के लिए गठित किए गए दल को क्या नाम दिया गया है?
(A) वन सुरक्षा दल
(B) हाथी मित्र दल (Hathi Mitra Dal)
(C) वन्यजीव पहरी विंग
(D) गजराज सुरक्षा वाहिनी
उत्तर: (B) हाथी मित्र दल (Hathi Mitra Dal)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय ग्रामीणों को शामिल कर ‘हाथी मित्र दल’ का गठन किया गया है, जो हाथियों की आवाजाही की रियल-टाइम सूचनाएं ग्रामीणों और वन विभाग को प्रदान करते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र डोंगानाला का मुख्य कार्य क्या है?
छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र (डोंगानाला, कोरबा) का मुख्य कार्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपजों का प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और वैज्ञानिक विपणन करना है, जिसे स्थानीय ‘हरि बोल स्व-सहायता समूह’ की महिलाएं संचालित करती हैं।
Q2. हाथी नियंत्रण केंद्र ‘चोटिया’ छत्तीसगढ़ के किस विकासखंड और जिले में स्थित है?
हाथी नियंत्रण केंद्र ‘चोटिया’ छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के अंतर्गत पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड (Podi-Uproda) में स्थित है, जो हाथियों के आवागमन के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील क्षेत्र है।
Q3. वन मंत्री ने मानव-हाथी द्वंद्व को रोकने के लिए किस महत्वपूर्ण नीति पर जोर दिया है?
उन्होंने वन विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर हाथियों की गतिविधियों की ‘समय पर लाइव सूचना’ देने तथा गश्ती दल (हाथी मित्र दल) को आधुनिक सुरक्षा किट व मोटरसाइकिलों से लैस करने की कूटनीति पर बल दिया है।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- वनांचल महिलाओं की आजीविका सुदृढ़: छत्तीसगढ़ वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र के माध्यम से वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार के स्थायी अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे उनकी ग्रामीण आय और सामाजिक आत्मसम्मान में वृद्धि हुई है।
- मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व: चोटिया हाथी नियंत्रण केंद्र में ‘हाथी मित्र दल’ को सुरक्षा किट और गश्ती मोटरसाइकिलें वितरित कर हाथियों के संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के कड़े संयुक्त प्रयास किए गए हैं।
- सहभागी वन सुशासन: वन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वन प्रबंधन समितियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के बिना वनों और वन्यजीवों का वास्तविक और स्थायी संरक्षण नामुमकिन है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का वन भूगोल, लघु वनोपज, कृषि एवं जनजातीय आजीविका योजनाएं), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, वन प्रबंधन समितियां, वन्यजीव संरक्षण नीतियां), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं, लोक नीति, सहकारी सुशासन) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, वन्यजीव गलियारे, मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन नीतियां, और समावेशी विकास) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक पर्यावरण व नीति विषय है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG), वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग छत्तीसगढ़, कोरबा वन मंडल (DFO Office Korba), और पोड़ी-उपरोड़ा व पाली जनपद पंचायत प्रशासन द्वारा 20 अगस्त 2026 को कोरबा जिला प्रवास के उपरांत जारी की गई आधिकारिक उपलब्धियों और गश्ती आधुनिकीकरण रिपोर्ट के सांख्यिकीय आंकड़ों पर आधारित है।
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