Published on July 23, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ के ऊर्जा और औद्योगिक हब कोरबा जिले ने शहरी जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और जल निकायों के कायाकल्प की दिशा में देश भर में एक नया इतिहास रचा है। केंद्र सरकार के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की प्रमुख पहल “कैच द रेन – वेयर इट फॉल्स, व्हेन इट फॉल्स” के अंतर्गत संचालित Amrut 2.0 Catch the Rain Korba कार्यक्रम शहरी जल सुरक्षा का एक उत्कृष्ट राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है।
हसदेव नदी के तट पर स्थित होने और अपने कोयला खनन व बड़े थर्मल पावर प्लांटों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध होने के बावजूद, कोरबा ऐतिहासिक रूप से शुष्क मौसम के दौरान गंभीर जल संकट से जूझता रहा है। इसी भौगोलिक और औद्योगिक चुनौती को स्वीकार करते हुए, जिला प्रशासन और नगर निगम कोरबा ने अंतरिक्ष तकनीक और स्थानीय उद्योगों के साथ मिलकर एक अत्यंत आधुनिक और वैज्ञानिक जल संवर्धन मॉडल तैयार किया है।
इस अनूठी परियोजना के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की मदद से जल-संकट वाले क्षेत्रों की सैटेलाइट मैपिंग कराई गई है। इसके साथ ही, एनटीपीसी (NTPC) के साथ मिलकर ₹111 करोड़ की ऐतिहासिक अपशिष्ट जल (Wastewater) पुनर्चक्रण साझेदारी की शुरुआत की गई है। यह पहल न केवल भू-जल स्तर को ऐतिहासिक रूप से ऊपर उठा रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भी Amrut 2.0 Catch the Rain Korba परियोजना, जल संसाधन भूगोल (GS Paper I) और विज्ञान व पर्यावरण कूटनीति (GS Paper III) के तहत एक अनिवार्य समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस वैज्ञानिक जल प्रबंधन मॉडल, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) तकनीक, एनटीपीसी साझेदारी और परीक्षा उपयोगी विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।
Amrut 2.0 Catch the Rain Korba: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
इस राष्ट्रीय मॉडल जल संवर्धन परियोजना और इसके तकनीकी-आर्थिक लक्ष्यों से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:
| महत्वपूर्ण संकेतक | Amrut 2.0 Catch the Rain Korba के प्रमुख तथ्य व आंकड़े |
|---|---|
| संबद्ध केंद्रीय मंत्रालय | आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), भारत सरकार |
| मुख्य अभियान | अमृत 2.0 – कैच द रेन अभियान (Amrut 2.0 Catch the Rain Korba) |
| मुख्य तकनीकी सहयोगी | इसरो (ISRO) का राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), हैदराबाद |
| प्रमुख भू-जल तकनीक | शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) और डायरेक्ट इंजेक्शन रीचार्ज वेल्स |
| भूजल स्तर में क्रांतिकारी सुधार | शहरी क्षेत्रों में भूजल गहराई 600 मीटर से सुधरकर केवल 150 मीटर के स्तर पर पहुँची |
| जल संचय वार्षिक लक्ष्य | 20,000 जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण (मनरेगा एवं स्वच्छ भारत मिशन के अभिसरण से) |
| एनटीपीसी (NTPC) जल साझेदारी | ₹111 करोड़ की लागत से द्वितीयक और तृतीयक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों का निर्माण (पूर्णता: 2027) |
| सर्कुलर इकोनॉमी दर | उपचारित पुनर्चक्रित जल को ₹7.5 प्रति लीटर की दर से औद्योगिक कूलिंग हेतु एनटीपीसी को बेचना |
Amrut 2.0 Catch the Rain Korba: जल संकट का अत्याधुनिक वैज्ञानिक समाधान
कोयला खदानों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण कोरबा के शहरी क्षेत्रों में कंक्रीटीकरण बढ़ा था, जिससे वर्षा का पानी जमीन के भीतर रिसने के बजाय सीधे नालों से बहकर हसदेव नदी में चला जाता था। इस समस्या को हल करने के लिए लागू किया गया यह Amrut 2.0 Catch the Rain Korba मॉडल पूरी तरह से भू-स्थानिक विज्ञान (Geospatial Science) और पर्यावरण इंजीनियरिंग के समन्वय पर आधारित है।
इसरो (ISRO) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने कोरबा के उन 10 सबसे संवेदनशील शहरी क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सैटेलाइट मैपिंग की जहाँ भूजल स्तर अत्यधिक नीचे चला गया था। इसके बाद इन 10 स्थानों को विशेष रूप से डिजाइन की गई ‘शैलो एक्विफर मैनेजमेंट’ (Shallow Aquifer Management – SAM) प्रणालियों से लैस किया गया।
1. मल्टी-स्टेज डिसिल्टेशन यूनिट्स (Multi-stage Desiltation Units)
इसमें लगे विशेष बजरी और रेत के क्षैतिज फिल्टर बहते हुए वर्षा जल को रोककर उसमें मौजूद भारी गाद, मलबे और शहरी प्रदूषकों को भूजल में प्रवेश करने से पहले ही पूरी तरह छान लेते हैं। यह प्रणाली जल प्रदूषण को रोकने में सहायक है।
2. डायरेक्ट इंजेक्शन रीचार्ज वेल्स (Direct Injection Recharge Wells)
इन उच्च क्षमता वाले रीचार्ज शाफ्टों के माध्यम से साफ और छने हुए शुद्ध वर्षा जल को सीधे भूमिगत जलभृतों (Aquifers) तक पहुँचाया जाता है। यह तकनीक न केवल भू-जल स्तर को तुरंत बढ़ाती है बल्कि भारी बारिश के समय घने शहरी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) को भी प्रभावी ढंग से रोकती है।
“Amrut 2.0 Catch the Rain Korba के तहत सैम (SAM) प्रणालियों की स्थापना से कोरबा के भू-जल स्तर पर क्रांतिकारी प्रभाव पड़ा है। जहाँ पहले नलकूपों के लिए 600 मीटर की गहराई तक खुदाई करनी पड़ती थी, वहीं अब प्रमुख क्षेत्रों में पानी केवल 150 मीटर की गहराई पर सुलभ है, जो हमारी बड़ी सुशासनात्मक विजय है।”— श्री आशुतोष पांडेय, आयुक्त, नगर निगम कोरबा
एनटीपीसी (NTPC) के साथ ₹111 करोड़ की ऐतिहासिक अपशिष्ट जल साझेदारी
इस परियोजना का सबसे अनूठा और व्यावसायिक रूप से सतत पहलू कोरबा नगर निगम और एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation) के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता है, जो पर्यावरण संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का देश का सबसे बड़ा मॉडल बन गया है:
- ₹111 करोड़ की वित्तीय कूटनीति: एनटीपीसी द्वारा प्रदत्त ₹111 करोड़ की फंडिंग से नगर निगम कोरबा शहर से गुजरने वाले 11 अत्यधिक प्रदूषित नालों के पानी को साफ करने के लिए द्वितीयक (Secondary) और तृतीयक (Tertiary) अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र स्थापित कर रहा है, जो वर्ष 2027 तक पूर्ण हो जाएंगे।
- ताजे पानी की खपत में कमी: एक बार चालू होने के बाद, इन संयंत्रों से निकलने वाले उच्च गुणवत्ता वाले उपचारित जल को एनटीपीसी को उसके थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के कूलिंग और औद्योगिक प्रसंस्करण के लिए ₹7.5 प्रति लीटर की दर से वापस बेचा जाएगा।
- हसदेव नदी का संरक्षण: इस व्यवस्था से एनटीपीसी को हसदेव नदी (Hasdeo River) से ताजे पानी का दोहन करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह बहाल हो जाएगा और नगर निगम को एक स्थायी राजस्व (Sustainable Revenue) प्राप्त होगा।
जनभागीदारी और 20,000 जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य
Amrut 2.0 Catch the Rain Korba को एक वास्तविक जन आंदोलन (Jan Andolan) का रूप देने के लिए जिला कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने ‘जल संचय – जन भागीदारी’ अभियान के तहत व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- मनरेगा और स्वच्छ भारत मिशन का अभिसरण: इन राष्ट्रीय योजनाओं के फंडों को मिलाकर पूरे जिले में इस वर्ष 20,000 जल संवर्धन संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर युद्ध स्तर पर कार्य जारी है।
- अनिवार्य रेन वॉटर हार्वेस्टिंग: जिले के सभी सरकारी, सामुदायिक और निजी परिसरों में वर्षा जल संचयन प्रणालियों को अनिवार्य कर दिया गया है, और वर्तमान में 109 बड़े रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
- बंद पड़े नलकूपों का जीर्णोद्धार: नगर निगम शहर के 95 सूखे और बंद पड़े पुराने नलकूपों को इसी SAM तकनीक के माध्यम से सक्रिय रीचार्ज शाफ्टों में बदल रहा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)
सीजीपीएससी (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-3 (जल सुरक्षा, चक्रीय अर्थव्यवस्था, रिमोट सेंसिंग कूटनीति) और पेपर-V (छत्तीसगढ़ के जल संसाधन एवं हसदेव नदी अपवाह तंत्र) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
CGPSC & UPSC Prelims Fact Box: Amrut 2.0 Catch the Rain Korba
- अमृत 2.0 (AMRUT 2.0): ‘Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation’ का दूसरा चरण, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी शहरों में 100% परिवारों को सुरक्षित पेयजल और नल कनेक्शन प्रदान करना तथा जल निकायों का पुनरुद्धार करना है।
- हसदेव नदी (Hasdeo River): यह महानदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, जिसका उद्गम छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की सोनहत पहाड़ियों से होता है। इसी नदी पर छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना ‘मिनीमाता बांगो बांध’ (धमतरी) स्थित है। कोरबा शहर इसी नदी के तट पर बसा है।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy): एक ऐसी आर्थिक प्रणाली जिसका उद्देश्य कचरे को न्यूनतम करना और संसाधनों के पुनर्चक्रण व पुन: उपयोग (Reduce, Reuse, Recycle) को बढ़ावा देना है। कोरबा का एनटीपीसी के साथ अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण समझौता इसका आदर्श उदाहरण है।
UPSC & CGPSC Mains Analysis (GS Paper III: पर्यावरण एवं जल कूटनीति)
प्रश्न: “शहरी क्षेत्रों में कंक्रीटीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण भू-जल का अत्यधिक दोहन जल सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। छत्तीसगढ़ के कोरबा द्वारा अपनाए गए ‘इसरो मैपिंग’ और ‘एनटीपीसी अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण’ समझौतों के आलोक में चर्चा कीजिए कि किस प्रकार तकनीक और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के माध्यम से औद्योगिक नगरों में जल सुरक्षा बहाल की जा सकती है।”
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की पहल के तहत स्वीकृत की गई ऐतिहासिक Amrut 2.0 Catch the Rain Korba परियोजना और इसके राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभरने का संक्षेप में परिचय देते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
- औद्योगिक नगरों की जल सुरक्षा चुनौतियां: कोयला खनन के कारण भू-जल स्तर का नीचे जाना, शहरी अपवाह (Runoff) का नालों के जरिए प्रदूषित होकर नदियों में व्यर्थ बह जाना, और बड़े उद्योगों द्वारा ताजे नदी जल का अत्यधिक दोहन।
- तकनीक आधारित समाधान (इसरो मैपिंग और सैम प्रणालियाँ): इसरो के सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) द्वारा सैटेलाइट डेटा के माध्यम से अति-संवेदनशील रिचार्ज क्षेत्रों की पहचान करना, तथा सैम (SAM) प्रणालियों और डायरेक्ट इंजेक्शन रीचार्ज वेल्स के जरिए स्वच्छ पानी को सीधे भूमिगत एक्विफर्स तक पहुँचाना।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक सहयोग (एनटीपीसी डील): ₹111 करोड़ की अपशिष्ट जल उपचार सुविधा, जिसके तहत प्रदूषित नालों के पानी को साफ कर ₹7.5 प्रति लीटर की दर से थर्मल पावर प्लांट के कूलिंग के लिए बेचना। यह हसदेव नदी के ताजे पानी को सुरक्षित रखेगा और नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाएगा।
- निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि तकनीक, कूटनीति और जनभागीदारी का यह एकीकृत मॉडल देश के अन्य औद्योगिक शहरों (जैसे बोकारो, धनबाद, सिंगरौली) के लिए जल सुरक्षा का एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल मार्ग प्रस्तुत करता है, जो ‘विकसित भारत @ 2047’ के सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6) को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
जल संवर्धन, नदियों और छत्तीसगढ़ के प्रमुख भौगोलिक संरचनाओं से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
- मिनीमाता बांगो बांध (Minimata Bango Dam): यह हसदेव नदी पर कोरबा जिले के माचाडोली नामक स्थान पर स्थित छत्तीसगढ़ का पहला और सबसे ऊंचा (120 मीटर) बहुउद्देशीय बांध है। इसकी स्थापना वर्ष 1967 में शुरू हुई थी और इसका नामकरण छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद ‘मिनीमाता’ के सम्मान में किया गया है। इसके तहत 120 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना भी संचालित है।
- इसरो का राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC): यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक प्रमुख केंद्र है जो हैदराबाद, तेलंगाना में स्थित है। यह उपग्रहों से प्राप्त होने वाले डेटा (रिमोट सेंसिंग) के संकलन, विश्लेषण और प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग के लिए देश की सर्वोच्च संस्था है।
- उर्वरक और ताजे पानी का कूटनीतिक दोहन: कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों को भाप बनाने और टर्बाइनों की कूलिंग के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। राष्ट्रीय जल नीति के तहत अब नए विद्युत संयंत्रों के लिए उपचारित शहरी अपशिष्ट जल (Treated Wastewater) का उपयोग करना नीतिगत रूप से अनिवार्य किया जा रहा है, जिसे कोरबा ने समय से पहले सफलतापूर्वक लागू किया है।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Amrut 2.0 Catch the Rain Korba के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- National Model: छत्तीसगढ़ का औद्योगिक जिला कोरबा आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ‘कैच द रेन’ (अमृत 2.0) पहल के तहत जल संवर्धन का राष्ट्रीय मॉडल बना।
- ISRO Mapping: इसरो के सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने सैटेलाइट मैपिंग के जरिए अति-संवेदनशील भूजल क्षेत्रों की पहचान कर 10 रीचार्ज वेल स्थापित किए।
- Groundwater Rise: सैम (SAM) प्रणालियों के कारण शहरी कोरबा में जल स्तर 600 मीटर से सुधरकर केवल 150 मीटर की गहराई पर पहुँच गया।
- NTPC Wastewater Partnership: एनटीपीसी द्वारा प्रदत्त ₹111 करोड़ की लागत से नालों के पानी का रीसाइक्लिंग कर ₹7.5 प्रति लीटर की दर से पावर प्लांट को कूलिंग के लिए बेचा जाएगा।
- Hasdeo Protection: इस चक्रिय अर्थव्यवस्था मॉडल से हसदेव नदी के ताजे पानी का दोहन पूरी तरह समाप्त होगा और नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बहाल होगा।
- Jan Bhagidari: कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में इस वर्ष 20,000 जल संरचनाएं बनाने और 109 रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट स्थापित करने का काम जारी है।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और पर्यावरण विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ का कौन सा औद्योगिक जिला आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ‘कैच द रेन’ (Amrut 2.0 Catch the Rain Korba) पहल के तहत जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बना है?
(A) बिलासपुर जिला
(B) कोरबा जिला
(C) रायपुर जिला
(D) दुर्ग जिला
उत्तर: (B) कोरबा जिला
व्याख्या: छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और कोयला खनन हब कोरबा जिले ने उत्कृष्ट तकनीक (इसरो मैपिंग और सैम प्रणालियों) का उपयोग कर अमृत 2.0 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
प्रश्न 2: ‘Amrut 2.0 Catch the Rain Korba’ परियोजना के तहत भू-जल पुनर्भरण के लिए किस उन्नत पर्यावरण इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है जो पानी को सीधे एक्विफर्स तक पहुँचाती है?
(A) कंटूर ट्रेंचिंग तकनीक
(B) शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) और डायरेक्ट रीचार्ज वेल तकनीक
(C) केवल सतही ड्रिप रिसाव तकनीक
(D) ग्रे-वॉटर सोख गड्ढा प्रणाली
उत्तर: (B) शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) और डायरेक्ट रीचार्ज वेल तकनीक
व्याख्या: सैम (SAM) प्रणाली के तहत लगे बजरी और रेत के फिल्टर बहते वर्षा जल को छानते हैं और डायरेक्ट इंजेक्शन रीचार्ज वेल्स उस शुद्ध पानी को सीधे जमीन के नीचे जलभृतों (Aquifers) तक पहुँचाते हैं।
प्रश्न 3: कोरबा नगर निगम ने हसदेव नदी के संरक्षण और अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए किस नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी के साथ ₹111 करोड़ की ऐतिहासिक जल साझेदारी की है?
(A) सेल (SAIL)
(B) गेल (GAIL)
(C) एनटीपीसी (NTPC)
(D) ओएनजीसी (ONGC)
उत्तर: (C) एनटीपीसी (NTPC)
व्याख्या: नगर निगम कोरबा ने एनटीपीसी के साथ मिलकर ₹111 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों के निर्माण पर सहमति जताई है, जिसके पानी का उपयोग थर्मल पावर प्लांट के कूलिंग के लिए किया जाएगा।
प्रश्न 4: कोरबा शहर मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ की किस प्रसिद्ध नदी के तट पर बसा हुआ है, जिस पर राज्य का सबसे ऊंचा ‘मिनीमाता बांगो बांध’ भी निर्मित किया गया है?
(A) खारून नदी
(B) महानदी
(C) हसदेव नदी
(D) शिवनाथ नदी
उत्तर: (C) हसदेव नदी
व्याख्या: हसदेव नदी का उद्गम कोरिया जिले से होता है और यह कोरबा शहर के मध्य से गुजरती है। इसी नदी पर छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना ‘मिनीमाता बांगो बांध’ स्थित है।
प्रश्न 5: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का वह कौन सा प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र है जो हैदराबाद में स्थित है और जिसने इस परियोजना के लिए उच्च-सटीकता वाली सैटेलाइट मैपिंग की है?
(A) विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC)
(B) राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC)
(C) यू आर राव उपग्रह केंद्र (URSC)
(D) सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC)
उत्तर: (B) राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC)
व्याख्या: हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) इसरो का नोडल केंद्र है जो रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों और जल स्तर की सटीक मैपिंग करता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Amrut 2.0 Catch the Rain Korba परियोजना क्या है?
Amrut 2.0 Catch the Rain Korba भारत सरकार के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की कैच द रेन (अमृत 2.0) पहल के तहत छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में संचालित एक अत्यंत सफल जल संवर्धन अभियान है। इसके तहत इसरो मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) और एनटीपीसी के साथ मिलकर शहरी जल सुरक्षा और औद्योगिक अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण का एक बेहतरीन राष्ट्रीय मॉडल तैयार किया गया है।
Q2. ‘सैम’ (Shallow Aquifer Management – SAM) तकनीक क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
सैम (SAM) तकनीक के तहत लगे विशेष बजरी और रेत के फिल्टर बहते वर्षा जल के कचरे और प्रदूषकों को छान लेते हैं और डायरेक्ट इंजेक्शन रीचार्ज वेल्स उस शुद्ध पानी को सीधे जमीन के नीचे जलभृतों (Aquifers) तक पहुँचाते हैं। इसके कारण कोरबा के शहरी क्षेत्रों में भू-जल स्तर 600 मीटर की गहराई से सुधरकर केवल 150 मीटर के स्तर पर पहुँच गया है।
Q3. एनटीपीसी (NTPC) के साथ हुई ₹111 करोड़ की ऐतिहासिक जल साझेदारी क्या है?
इस साझेदारी के तहत एनटीपीसी द्वारा प्रदत्त ₹111 करोड़ की फंडिंग से नगर निगम कोरबा 11 प्रदूषित नालों के पानी को साफ करने के लिए अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र स्थापित कर रहा है। इस उपचारित जल को एनटीपीसी को उसके पावर प्लांट के कूलिंग के लिए ₹7.5 प्रति लीटर की दर से बेचा जाएगा, जिससे हसदेव नदी के ताजे पानी का दोहन समाप्त होगा।
Q4. इस जल संवर्धन अभियान में जिला प्रशासन का वार्षिक लक्ष्य क्या रखा गया है?
जिला कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के कुशल नेतृत्व में ‘जल संचय – जन भागीदारी’ मिशन के तहत इस वर्ष कुल 20,000 जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, सरकारी और सामुदायिक भवनों में 109 रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट बनाने और 95 बंद पड़े नलकूपों को रीचार्ज शाफ्ट में बदलने का कार्य किया जा रहा है।
Q5. यह योजना पर्यावरण संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को कैसे बढ़ावा देती है?
यह योजना नालों के गंदे पानी का पुनर्चक्रण कर उसे औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पुनः उपयोग में लाती है, जो कि चक्रीय अर्थव्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे स्थानीय हसदेव नदी का प्रदूषण समाप्त होगा, ताजे पानी का दोहन थमेगा, और नगर निगम को अपशिष्ट जल बेचकर एक स्थायी मासिक राजस्व (Revenue) भी प्राप्त होगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ‘कैच द रेन’ (अमृत 2.0) पहल के तहत कोरबा जिले द्वारा प्रदर्शित की गई यह ऐतिहासिक प्रगति Amrut 2.0 Catch the Rain Korba भारत के शुष्क और खनिज बहुल औद्योगिक नगरों में जल सुरक्षा स्थापित करने का एक कड़ा और अभूतपूर्व उदाहरण है। भारी कोयला खनन और थर्मल पावर प्लांटों के कारण जल संकट से जूझने वाले इस शहर को इसरो की सैटेलाइट मैपिंग और सैम (SAM) प्रणालियों के जरिए पुनः जल-समृद्ध बनाना सुशासन (Good Governance) का एक उत्कृष्ट व्यावहारिक प्रमाण है।
एनटीपीसी के साथ ₹111 करोड़ की ऐतिहासिक अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण डील और शुद्ध पानी को ₹7.5 प्रति लीटर की दर से बेचना न केवल हसदेव नदी के अमूल्य ताजे जल का दोहन पूरी तरह समाप्त करेगा बल्कि यह नगर निगम को वित्तीय रूप से भी आत्मनिर्भर बनाएगा, जो कि चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की दिशा में देश का सबसे बड़ा कूटनीतिक प्रयास है। जिला प्रशासन द्वारा कड़े स्तर पर 20,000 जल संवर्धन संरचनाओं के निर्माण का वार्षिक लक्ष्य तय करना और रूफटॉप हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाना छत्तीसगढ़ को जल संचयन के क्षेत्र में देश का एक अग्रणी राज्य बनाता है। यह समेकित और तकनीक-संचालित वैज्ञानिक प्रयास अंततः कोरबा को देश का सबसे पर्यावरण-अनुकूल और जल-सुरक्षित औद्योगिक नगर बनाएगा, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ और ‘विकसित भारत @ 2047’ के हमारे बड़े राष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6) को समयबद्ध तरीके से धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत और अजेय रीढ़ साबित होगा।
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