रायपुर, 29 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — भारत की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना — ने अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। खरीफ 2016 में शुरू होने के बाद से रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन बीमित किए जा चुके हैं और 26.33 करोड़ से अधिक आवेदनों पर ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक के दावों का भुगतान किया गया है। वर्ष 2026-27 के लिए ₹12,200 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। YES-TECH, WINDS, CROPIC और डिजिक्लेम जैसी डिजिटल पहलों ने दावा निपटान को तेज़, न्यायसंगत और पारदर्शी बनाया है। पश्चिम बंगाल (खरीफ 2026) और बिहार (रबी 2026-27) की वापसी योजना में राज्यों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
| मानदंड | विवरण |
|---|---|
| लॉन्च तिथि | 18 फरवरी 2016 |
| कुल बीमित आवेदन (10 वर्ष) | 92.46 करोड़+ |
| कुल दावा भुगतान | ₹2.06 लाख करोड़+ (26.33 करोड़+ आवेदन) |
| बजट 2026-27 | ₹12,200 करोड़ |
| खरीफ 2025 | 229.77 लाख किसान, 269.38 लाख हेक्टेयर |
| खरीफ 2026 (27 अगस्त तक) | 241.38 लाख किसान, 278.12 लाख हेक्टेयर |
| खरीफ 2025 दावा भुगतान | ₹9,837.61 करोड़ (60.89 लाख किसानों को) |
| सर्वकालिक उच्च (2024-25) | 15.23 करोड़ आवेदन, 4 करोड़+ किसान, 623 लाख हेक्टेयर |
| किरायेदार/बटाईदार किसान (2018 से) | 1.44 करोड़+ नामांकित |
| गैर-ऋणी किसान (स्वैच्छिक) | औसतन 50% |
| लागू करने वाले राज्य/केंद्रशासित | 25 (खरीफ 2026) |
किसान कहानी: ₹100 प्रीमियम पर ₹50,600 का मुआवज़ा
असम के नगांव जिले के चनखला गांव के अनवर हुसैन एक छोटे किसान हैं जो पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं। जब भारी बारिश ने उनकी फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया, तो वे कर्ज चुकाने और अगली बुवाई के लिए अनिश्चितता में डूब गए।
सौभाग्य से, अनवर ने मात्र ₹100 का प्रीमियम देकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नामांकन कराया था। फसल हानि का आकलन होने के बाद, उन्हें योजना के तहत ₹50,600 का मुआवज़ा मिला। इस समय पर मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें नुकसान से उबरने, कर्ज का हिस्सा चुकाने और अगली फसल के लिए निवेश करने में मदद की। आज अनवर अपने गांव के अन्य किसानों को भी फसल बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
प्रीमियम दर और सब्सिडी संरचना
PMFBY की सबसे बड़ी विशेषता इसकी किसान-हितैषी प्रीमियम संरचना है। किसानों को अधिकतम प्रीमियम दर का ही भुगतान करना होता है, शेष राशि केंद्र और राज्य सरकारें सब्सिडी के रूप में वहन करती हैं:
| फसल श्रेणी | किसान अधिकतम प्रीमियम |
|---|---|
| खरीफ (अनाज और तिलहन) | 2% |
| रबी (अनाज और तिलहन) | 1.5% |
| व्यावसायिक और बागवानी फसलें | 5% |
सब्सिडी अनुपात:
- सामान्य राज्य: शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 50:50 अनुपात में
- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य/केंद्रशासित: शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 90:10 अनुपात में
यह सस्ती प्रीमियम संरचना देश भर के किसानों को फसल बीमा सुलभ बनाने में सहायक रही है।
कवर किए गए जोखिम
PMFBY कृषि और कटाई के विभिन्न चरणों में फसल हानि के विरुद्ध व्यापक कवरेज प्रदान करती है:
| जोखिम श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| उपज हानि (खड़ी फसल) | सूखा, बाढ़, जलजमाव, चक्रवात, ओलावृष्टि, बिजली, कीट और रोग — क्षेत्र-आधारित कवरेज |
| बुवाई में बाधा | प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई न हो पाने पर बीमित राशि का अधिकतम 25% दावा |
| कटाई बाद हानि | खेत में सुखाने के लिए रखी फसल — कटाई के 14 दिन बाद तक चक्रवाती/बेमौसम बारिश के विरुद्ध कवर |
| स्थानीय आपदाएं | व्यक्तिगत खेत स्तर पर ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलजमाव, बादल फटना, प्राकृतिक आग से नुकसान |
अपवाद: युद्ध, नाभिकीय जोखिम, दंगा, चोरी, लापरवाही या मानव-निर्मित/रोके जा सकने वाले जोखिमों से हुई हानि कवर नहीं है। अगर बुवाई से पहले या फसल को खेत से हटाने के बाद नुकसान होता है, तो वह भी कवर नहीं है।
समावेशी कवरेज: ऋणी और गैर-ऋणी दोनों किसान
PMFBY किरायेदार और बटाईदार किसानों सहित सभी किसानों को समावेशी फसल बीमा कवरेज प्रदान करती है। इसमें दो श्रेणियां हैं:
- गैर-ऋणी किसान: जिनके पास फसल ऋण नहीं है या जिनके KCC-लिंक्ड ऋण मानक नहीं हैं। वे स्वैच्छिक रूप से PMFBY में नामांकन करा सकते हैं। पिछले 10 वर्षों में, औसतन 50% किसानों ने स्वैच्छिक रूप से गैर-ऋणी किसान के रूप में नामांकन कराया है — यह योजना में किसानों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
- ऋणी किसान: जिन्होंने बैंकों या वित्तीय संस्थानों से मौसमी फसल ऋण लिया है और उनके ऋण या KCC सक्रिय और मानक हैं। उनका प्रीमियम संबंधित बैंकों द्वारा ऋण राशि से स्वतः काटा जाता है।
2018 से अब तक 1.44 करोड़ से अधिक किरायेदार/बटाईदार किसान विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नामांकित हो चुके हैं।
राज्यों का PMFBY में पुनर्शामिल होना: बढ़ता विश्वास
प्रमुख कृषि राज्यों का व्यवस्थित रूप से PMFBY में लौटना योजना की दक्षता और वित्तीय सुरक्षा जाल के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है:
| राज्य | पुनर्शामिल होने का समय |
|---|---|
| आंध्र प्रदेश | खरीफ 2022 से |
| झारखंड | खरीफ 2024 से |
| पश्चिम बंगाल | खरीफ 2026 से |
| बिहार | रबी 2026-27 से (निर्णय लिया गया) |
यह वापसी की लहर क्षेत्रीय गैर-बीमा राहत मॉडलों की तुलना में केंद्रीकृत योजना की बेजोड़ दक्षता को उजागर करती है।
महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश: सार्वभौमिकरण प्रभाव
महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में 2025-26 में राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन में मामूली गिरावट का कारण कार्यान्वयन पद्धति में बदलाव है, किसानों के विश्वास में कमी नहीं:
- दोनों राज्यों ने 2023-24 में “सार्वभौमिकरण दृष्टिकोण” अपनाया था — राज्य सरकार ने सभी किसानों की ओर से 100% प्रीमियम वहन किया।
- 2025 में दोनों राज्यों ने यह 100% प्रीमियम सब्सिडी बंद कर दी।
- आंध्र प्रदेश: खरीफ 2024 में 31.92 लाख → खरीफ 2025 में 7.43 लाख (77% गिरावट)। लेकिन खरीफ 2026 में 16.22 लाख (28 अगस्त तक) — खरीफ 2025 की तुलना में 108% वृद्धि।
- महाराष्ट्र: खरीफ 2024 में 76.59 लाख → खरीफ 2025 में 45.99 लाख (40% गिरावट)। खरीफ 2026 में 42.55 लाख (28 अगस्त तक) — खरीफ 2025 के 92% पर पहुंचा।
प्रमुख राज्यों में मज़बूत वृद्धि
राज्य-विशिष्ट नीतिगत समायोजनों के विपरीत, अन्य प्रमुख कृषि राज्यों ने खरीफ 2025 में मज़बूत दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की:
| राज्य | खरीफ 2024 | खरीफ 2025 | वृद्धि |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 15.48 लाख | 20.84 लाख | 35% |
| हरियाणा | 3.75 लाख | 4.49 लाख | 20% (2023-24 में 82% वृद्धि के बाद) |
| राजस्थान | 30.59 लाख | 36.45 लाख | 19% |
| मध्य प्रदेश | — | 26.80 लाख | 12% |
| छत्तीसगढ़ | — | 15.75 लाख | 9% |
| ओडिशा | — | 24.92 लाख | 5% |
ये लगातार सकारात्मक प्रवृत्तियां भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में कृषि जोखिम कवरेज की मज़बूत, स्व-प्रेरित मांग को दर्शाती हैं।
डिजिटल पहल: तेज़, पारदर्शी और कुशल दावा निपटान
PMFBY का डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों, बीमा कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को एक IT पारिस्थितिकी तंत्र पर एकीकृत करता है। प्रमुख डिजिटल पहल इस प्रकार हैं:
| डिजिटल पहल | विवरण |
|---|---|
| राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) | डिजिटल किसान नामांकन, सब्सिडी प्रशासन, दावा गणना, और दावों का सीधा बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण (PFMS के माध्यम से) |
| भूमि अभिलेख एकीकरण | 10 राज्यों में भूमि अभिलेखों का डिजिटल सत्यापन — बीमित क्षेत्र का ~85% अब एकीकृत भूमि अभिलेखों से सत्यापित |
| डिजिक्लेम मॉड्यूल (खरीफ 2022 से) | NCIP पर पारदर्शी दावा गणना और निपटान। अब तक ₹55,000 करोड़+ दावे डिजिटल प्लेटफॉर्म से गणना और भुगतान |
| CCE-एग्री ऐप | फसल कटाई प्रयोग (CCE) उपज डेटा का डिजिटल कैप्चर और अपलोड — वास्तविक उपज गणना और दावा निर्धारण में सहायक |
| YES-TECH (खरीफ 2023 से) | रिमोट सेंसिंग आधारित उपज अनुमान प्रणाली — धान और गेहूं (2023), सोयाबीन (2024)। अब कुछ राज्यों में 50% तक वेटेज |
| WINDS | स्वचालित मौसम स्टेशन और स्वचालित वर्षा मापक — ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर हाइपरलोकल मौसम डेटा |
| CROPIC | जियो-टैग फोटोग्राफ से फसल स्वास्थ्य की आवधिक सत्यापन — चित्रमय विश्लेषण से फसल हानि आकलन की योजना |
| कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन (KRPH) | टोल-फ्री नंबर 14447 — जनवरी 2024 से अब तक 26.12 लाख शिकायतों का निवारण (99.66% समाधान दर) |
| LMS (लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम) | डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से फसल बीमा ज्ञान का प्रसार |
| AIDE (ऐप फॉर इंटरमीडिएटरी एनरोलमेंट) | गैर-ऋणी किसानों का द्वार-द्वार नामांकन |
| CLAP (क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप) | स्थानीय आपदाओं में व्यक्तिगत खेत स्तर पर फसल हानि का डिजिटल दस्तावेज़ीकरण |
महत्वपूर्ण जानकारी
- NCIP: राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल — डिजिटल नामांकन, दावा गणना, भुगतान
- डिजिक्लेम: ₹55,000 करोड़+ दावे डिजिटल माध्यम से भुगतान
- YES-TECH: रिमोट सेंसिंग आधारित उपज अनुमान — 30-50% वेटेज
- WINDS: हाइपरलोकल मौसम डेटा (ब्लॉक/ग्राम पंचायत स्तर)
- CROPIC: जियो-टैग फोटो से फसल स्वास्थ्य सत्यापन
- KRPH: टोल-फ्री 14447 — 26.12 लाख शिकायतें, 99.66% समाधान दर
- भूमि एकीकरण: 10 राज्यों में ~85% बीमित क्षेत्र सत्यापित
- AIDE: द्वार-द्वार गैर-ऋणी किसान नामांकन
- CLAP: व्यक्तिगत खेत स्तर पर फसल हानि डिजिटल दस्तावेज़ीकरण
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS)
PMFBY के पूरक के रूप में, सरकार पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) लागू करती है। यह मौसम सूचकांक-आधारित योजना है जिसमें वास्तविक फसल-उपज हानि के बजाय निर्धारित मौसम मानकों को फसल नुकसान के “प्रॉक्सी” के रूप में उपयोग किया जाता है।
इसमें फसल के जीवन चक्र को अलग-अलग वृद्धि चरणों में विभाजित किया जाता है। भुगतान तब शुरू होता है जब स्थानीय मौसम स्टेशनों पर मापे गए मौसम चर — कम या अधिक वर्षा, सूखा, अत्यधिक तापमान, आर्द्रता, हवा की गति — पूर्व-निर्धारित सीमाओं से भटकते हैं। खरीफ 2026 में RWBCIS के तहत 25.95 लाख किसान आवेदन और 12.31 लाख हेक्टेयर कवर हैं।
PMFBY का परिवर्तनकारी प्रभाव
पिछले एक दशक में PMFBY भारत के कृषि जोखिम प्रबंधन ढांचे का आधारशिला बन गई है। यह करोड़ों किसानों को जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक मौसम घटनाओं और जैविक जोखिमों के विरुद्ध वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। सस्ते प्रीमियम और व्यापक फसल-चक्र कवरेज के संयोजन से योजना ने किसानों की आय के झटकों के प्रति संवेदनशीलता कम की है। डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे NCIP, डिजिक्लेम, CCE-एग्री, CLAP, YES-TECH और WINDS ने पारदर्शिता, सटीकता और दावा निपटान की गति में सुधार किया है।
विश्लेषण: PMFBY की उपलब्धियां और चुनौतियां
(विश्लेषण)
उपलब्धियां:
पहला, विशाल कवरेज। 10 वर्षों में 92.46 करोड़ आवेदन बीमित, ₹2.06 लाख करोड़ दावा भुगतान — यह भारत को विश्व के सबसे बड़े फसल बीमा कार्यक्रमों में शामिल करता है। 2024-25 में 15.23 करोड़ आवेदनों का सर्वकालिक उच्च स्तर किसानों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
दूसरा, सस्ता प्रीमियम। 1.5% से 5% तक का किसान प्रीमियम और शेष सब्सिडी — यह छोटे और सीमांत किसानों को बीमा सुलभ बनाता है। गैर-ऋणी किसानों का 50% स्वैच्छिक नामांकन योजना की विश्वसनीयता का प्रमाण है।
तीसरा, डिजिटल परिवर्तन। NCIP, डिजिक्लेम, YES-TECH, WINDS, CROPIC, KRPH — ये सभी मिलकर एक ऐसा डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं जो नामांकन से दावा भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और कुशल बनाता है। 14447 हेल्पलाइन पर 99.66% समाधान दर प्रभावशाली है।
चौथा, राज्यों का विश्वास। आंध्र प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार का पुनर्शामिल होना दर्शाता है कि राज्य सरकारें क्षेत्रीय गैर-बीमा राहत मॉडलों की तुलना में केंद्रीकृत PMFBY को अधिक प्रभावी मानती हैं।
चुनौतियां:
पहला, दावा निपटान में देरी। डिजिटल पहलों के बावजूद, कुछ राज्यों में दावा निपटान अभी भी धीमा है। CCE आयोजित करने और उपज डेटा संकलित करने में प्रशासनिक देरी किसानों को समय पर मुआवज़े से वंचित कर सकती है।
दूसरा, किरायेदार/बटाईदार किसानों का सीमित कवरेज। 1.44 करोड़ नामांकन एक बड़ी संख्या है, लेकिन देश में किरायेदार/बटाईदार किसानों की कुल संख्या को देखते हुए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। भूमि दस्तावेज़ों की अनुपलब्धता एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
तीसरा, राज्य-विशिष्ट असमानताएं। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में सार्वभौमिकरण बंद होने पर भारी गिरावट दिखती है — यह दर्शाता है कि जब तक 100% सब्सिडी थी, किसानों ने भाग लिया, लेकिन स्व-भुगतान प्रीमियम पर गिरावट आई।
चौथा, फसल विविधता का कवरेज। RWBCIS ने फल, सब्ज़ी और बागवानी फसलों को कवर करना शुरू किया है, लेकिन अभी भी कई विशेष फसलें पारंपरिक PMFBY के दायरे से बाहर हैं।
UPSC/CGPSC परीक्षा दृष्टि से प्रासंगिक बिंदु
- UPSC GS-3: कृषि — फसल बीमा, कृषि जोखिम प्रबंधन, किसान आय स्थिरीकरण
- UPSC GS-3: जलवायु परिवर्तन अनुकूलन — फसल बीमा जलवायु-लचीली कृषि का उपकरण
- UPSC GS-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — YES-TECH, WINDS, CROPIC, डिजिटल कृषि
- CGPSC Paper-2: कृषि और ग्रामीण विकास — फसल बीमा योजनाएं, किसान कल्याण
- CGPSC Paper-2: सामाजिक न्याय — किसान आय सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन
मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन हेतु विश्लेषणात्मक ढांचा
आयाम 1 — वित्तीय सुरक्षा जाल: PMFBY किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम, कीटों और रोगों से होने वाली फसल हानि से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। ₹100 प्रीमियम पर ₹50,600 मुआवज़ा (अनवर हुसैन का उदाहरण) योजना के प्रभाव को दर्शाता है। ₹2.06 लाख करोड़ दावा भुगतान किसानों की आय स्थिरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आयाम 2 — डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र: NCIP, डिजिक्लेम, YES-TECH, WINDS, CROPIC, CLAP, KRPH — ये सभी मिलकर नामांकन से दावा भुगतान तक की पूरी श्रृंखला को डिजिटाइज़ करते हैं। भूमि अभिलेख एकीकरण (10 राज्यों में ~85% सत्यापित) धोखाधड़ी रोकता है। 14447 हेल्पलाइन पर 99.66% समाधान दर जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
आयाम 3 — समावेशिता: गैर-ऋणी किसानों का 50% स्वैच्छिक नामांकन, किरायेदार/बटाईदार किसानों का कवरेज (1.44 करोड़+), और पूर्वोत्तर राज्यों में 90:10 सब्सिडी अनुपात — ये सभी योजना की समावेशी प्रकृति को दर्शाते हैं। हालांकि, भूमिहीन और किरायेदार किसानों का वास्तविक कवरेज अभी भी अपर्याप्त है।
आयाम 4 — जलवायु अनुकूलन: जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों के संदर्भ में, PMFBY और RWBCIS किसानों को अनिश्चित मौसम परिस्थितियों से उबरने में सहायक हैं। YES-TECH और WINDS जैसी तकनीकें जलवायु-स्मार्ट कृषि का आधार बन रही हैं।
आयाम 5 — सुधार की आवश्यकता: राज्यों के पुनर्शामिल होने से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, लेकिन महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश का अनुभव दर्शाता है कि सब्सिडी हटने पर नामांकन गिरता है — यह दीर्घकालिक स्थायित्व पर प्रश्न उठाता है।
तीन प्रमुख बातें
- ₹2.06 लाख करोड़ दावा, 92.46 करोड़ आवेदन: PMFBY ने 10 वर्षों में 92.46 करोड़ किसान आवेदन बीमित किए और ₹2.06 लाख करोड़+ दावा भुगतान किया। खरीफ 2026 में 241.38 लाख किसान (278.12 लाख हेक्टेयर) बीमित — खरीफ 2025 से अधिक। ₹12,200 करोड़ बजट 2026-27।
- डिजिटल क्रांति: YES-TECH, WINDS, डिजिक्लेम: NCIP पर ₹55,000 करोड़+ दावे डिजिटल भुगतान। YES-TECH (रिमोट सेंसिंग, 30-50% वेटेज), WINDS (हाइपरलोकल मौसम डेटा), CROPIC (जियो-टैग फसल सत्यापन), KRPH (14447 हेल्पलाइन, 99.66% समाधान दर)।
- राज्य पुनर्शामिल और विश्वास: आंध्र प्रदेश (2022), झारखंड (2024), पश्चिम बंगाल (2026), बिहार (रबी 2026-27) — 4 राज्यों की वापसी। UP में 35%, हरियाणा में 20%, राजस्थान में 19% वृद्धि। आंध्र प्रदेश में 108% पुनर्वृद्धि।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों द्वारा देय अधिकतम प्रीमियम दर क्या है?
(A) खरीफ: 1.5%, रबी: 2%, व्यावसायिक: 3%
(B) खरीफ: 2%, रबी: 1.5%, व्यावसायिक: 5%
(C) खरीफ: 3%, रबी: 2%, व्यावसायिक: 5%
(D) खरीफ: 2%, रबी: 2%, व्यावसायिक: 5%
उत्तर: (B) खरीफ: 2%, रबी: 1.5%, व्यावसायिक: 5%
व्याख्या: PMFBY में किसान अधिकतम प्रीमियम: खरीफ (अनाज/तिलहन) — 2%, रबी (अनाज/तिलहन) — 1.5%, व्यावसायिक/बागवानी — 5%। शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 50:50 (सामान्य राज्य) या 90:10 (पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्य) में सब्सिडी।
प्रश्न 2: PMFBY के तहत “बुवाई में बाधा” (Prevented Sowing) पर अधिकतम कितने प्रतिशत दावा मिलता है?
(A) बीमित राशि का 10%
(B) बीमित राशि का 15%
(C) बीमित राशि का 25%
(D) बीमित राशि का 50%
उत्तर: (C) बीमित राशि का 25%
व्याख्या: जहां बीमित किसान ने व्यय किया है लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई नहीं कर पाया, वे बीमित राशि के अधिकतम 25% तक दावे के पात्र हैं।
प्रश्न 3: PMFBY में किस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से ₹55,000 करोड़ से अधिक दावों का गणना और भुगतान किया गया है?
(A) YES-TECH
(B) WINDS
(C) NCIP और डिजिक्लेम
(D) CROPIC
उत्तर: (C) NCIP और डिजिक्लेम
व्याख्या: डिजिक्लेम मॉड्यूल (खरीफ 2022 से) NCIP पर पारदर्शी दावा गणना और निपटान सक्षम करता है। अब तक ₹55,000 करोड़+ दावे इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से गणना और भुगतान किए गए हैं।
प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन सा राज्य PMFBY में पुनर्शामिल नहीं हुआ है?
(A) आंध्र प्रदेश (खरीफ 2022)
(B) तमिलनाडु (खरीफ 2024)
(C) पश्चिम बंगाल (खरीफ 2026)
(D) बिहार (रबी 2026-27)
उत्तर: (B) तमिलनाडु (खरीफ 2024)
व्याख्या: उल्लिखित राज्यों में आंध्र प्रदेश (2022), झारखंड (2024), पश्चिम बंगाल (2026) और बिहार (रबी 2026-27) ने PMFBY में पुनर्शामिल होने का निर्णय लिया। तमिलनाडु का इस संदर्भ में उल्लेख नहीं है।
प्रश्न 5: कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन (KRPH) का टोल-फ्री नंबर क्या है?
(A) 1800-180-1551
(B) 14447
(C) 1800-11-0031
(D) 1967
उत्तर: (B) 14447
व्याख्या: कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन (KRPH) का टोल-फ्री नंबर 14447 है। जनवरी 2024 में राष्ट्रव्यापी लॉन्च के बाद से 26.12 लाख शिकायतों का निवारण किया गया है — 99.66% समाधान दर।
प्रश्न 6: RWBCIS और PMFBY में मुख्य अंतर क्या है?
(A) RWBCIS केवल रबी फसलों के लिए है
(B) RWBCIS में वास्तविक उपज हानि के बजाय मौसम मानकों को “प्रॉक्सी” के रूप में उपयोग किया जाता है
(C) RWBCIS में प्रीमियम अधिक है
(D) RWBCIS केवल ऋणी किसानों के लिए है
उत्तर: (B) RWBCIS में वास्तविक उपज हानि के बजाय मौसम मानकों को “प्रॉक्सी” के रूप में उपयोग किया जाता है
व्याख्या: RWBCIS एक मौसम सूचकांक-आधारित योजना है जिसमें निर्धारित मौसम मानक (वर्षा, तापमान, आर्द्रता, हवा) वास्तविक फसल नुकसान के “प्रॉक्सी” के रूप में काम करते हैं। प्रीमियम PMFBY जैसा ही है (1.5%-5%)। खरीफ 2026 में 25.95 लाख किसान आवेदन और 12.31 लाख हेक्टेयर कवर।
प्रश्न 7: YES-TECH में उपज अनुमान के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जाता है?
(A) ड्रोन सर्वेक्षण
(B) रिमोट सेंसिंग और प्रौद्योगिकी-आधारित विधियां
(C) उपग्रह इमेजरी केवल
(D) मैनुअल सर्वेक्षण
उत्तर: (B) रिमोट सेंसिंग और प्रौद्योगिकी-आधारित विधियां
व्याख्या: YES-TECH (Yield Estimation System based on Technology) रिमोट सेंसिंग और प्रौद्योगिकी-आधारित विधियों का उपयोग करके न्यायसंगत और सटीक फसल उपज अनुमान प्रदान करता है। खरीफ 2023 में धान और गेहूं के लिए, खरीफ 2024 में सोयाबीन के लिए शुरू। अब कुछ राज्यों में 50% तक वेटेज।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. PMFBY क्या है और कब शुरू हुई?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) 18 फरवरी 2016 को शुरू की गई भारत की प्रमुख फसल बीमा योजना है। यह सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, कीट, रोग, बुवाई में बाधा, स्थानीय आपदाओं, जलजमाव, बेमौसम बारिश और निर्धारित कटाई बाद हानि के विरुद्ध व्यापक कवरेज प्रदान करती है। वर्तमान में 25 राज्य/केंद्रशासित इसे लागू कर रहे हैं।
Q2. PMFBY में गैर-ऋणी किसान कैसे नामांकन करा सकते हैं?
गैर-ऋणी किसान (जिनके पास फसल ऋण नहीं है) स्वैच्छिक रूप से PMFBY में नामांकन करा सकते हैं। उन्हें वैध भूमि दस्तावेज़/काश्तकारी अनुबंध/बुवाई प्रमाणपत्र और निर्धारित समय सीमा में आवेदन करना होगा। AIDE ऐप के माध्यम से बीमा मध्यस्थ द्वारा द्वार-द्वार नामांकन भी संभव है। पिछले 10 वर्षों में औसतन 50% किसानों ने स्वैच्छिक रूप से गैर-ऋणी किसान के रूप में नामांकन कराया है।
Q3. YES-TECH और WINDS में क्या अंतर है?
YES-TECH (Yield Estimation System based on Technology) रिमोट सेंसिंग आधारित उपज अनुमान प्रणाली है जो फसल उपज का न्यायसंगत और सटीक अनुमान देती है। WINDS (Weather Information Network and Data System) स्वचालित मौसम स्टेशनों और वर्षा मापकों से ब्लॉक/ग्राम पंचायत स्तर पर हाइपरलोकल मौसम डेटा एकत्र करता है। WINDS का डेटा YES-TECH उपज अनुमान, मौसम-आधारित बीमा (RWBCIS), और आपदा प्रबंधन में उपयोग होता है।
Q4. PMFBY में कटाई बाद हानि (Post-Harvest Loss) कितने दिन तक कवर है?
PMFBY में खेत में सुखाने के लिए “कट-एंड-स्प्रेड” स्थिति में रखी फसल कटाई के 14 दिन बाद तक निर्धारित चक्रवाती और बेमौसम बारिश की घटनाओं के विरुद्ध कवर है।
Q5. पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में सब्सिडी अनुपात क्या है?
पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी का अनुपात 90:10 है (केंद्र 90%, राज्य 10%)। अन्य राज्यों के लिए यह अनुपात 50:50 है।
Q6. PMFBY में कौन से जोखिम कवर नहीं हैं?
PMFBY में युद्ध, नाभिकीय जोखिम, दंगा, चोरी, लापरवाही, मानव-निर्मित/रोके जा सकने वाले जोखिमों से हुई हानि कवर नहीं है। अगर बुवाई से पहले या फसल को खेत से हटाने के बाद नुकसान होता है, तो वह भी कवर नहीं है। गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में फसल हानि भी कवर नहीं है।
Q7. WINDS का डेटा किन-किन कार्यों में उपयोग होता है?
WINDS का हाइपरलोकल मौसम डेटा (ब्लॉक/ग्राम पंचायत स्तर) निम्न कार्यों में उपयोग होता है: (1) फल, सब्ज़ी और बागवानी फसलों के लिए मौसम-आधारित फसल बीमा (RWBCIS), (2) YES-TECH आधारित फसल उपज अनुमान, (3) आपदा प्रबंधन, (4) मौसम पूर्वानुमान, और (5) अन्य पैरामेट्रिक बीमा उत्पाद।
स्रोत
PIB दिल्ली — “Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: Affordable Crop Insurance for Every Farmer” (29 अगस्त 2026)।
2 thoughts on “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026: 10 वर्षों में 92.46 करोड़ आवेदन बीमित, ₹2.06 लाख करोड़ दावा भुगतान, ₹12,200 करोड़ बजट — YES-TECH, WINDS और डिजिक्लेम से किसानों को तेज़ और पारदर्शी फसल बीमा”