नारायणपुर टसर रेशम योजना: वनांचल में बिखरी कोसा की चमक; नारायणपुर के 24 आदिवासियों ने उगाया 4.71 लाख कोसाफल, सीधे बैंक खातों में पहुँचे ₹17.56 लाख

नारायणपुर टसर रेशम योजना नारायणपुर टसर रेशम योजना

रायपुर | 20 अगस्त 2026


छत्तीसगढ़ के संवेदनशील वनांचल और अबूझमाड़ क्षेत्र के जनजातीय परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में नारायणपुर टसर रेशम योजना (Tassar Silk Scheme) एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित हो रही है। आज 20 अगस्त 2026 को जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विशेष आलेख के अनुसार, राज्य शासन के रेशम विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से नारायणपुर जिले के सुदूर अंचलों में निवासरत ग्रामीण अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ कोसा उत्पादन को आजीविका का नया और मजबूत आधार बना रहे हैं।

नारायणपुर जैसे दुर्गम और वामपंथ प्रभावित क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण पलायन को रोकने के लिए ‘सहकारी रेशम उत्पादन’ का यह एकीकृत मॉडल काफी सफल रहा है। रेशम विभाग द्वारा प्रदान किए जा रहे उन्नत तकनीकी और वित्तीय सहयोग से वनांचल के आदिवासी संग्राहक अब सीधे ‘रेशम उद्यमी’ (Sericulture Entrepreneurs) के रूप में स्थापित हो रहे हैं। इस योजना के कड़े क्रियान्वयन ने साबित किया है कि वनों के स्थायी संसाधनों का दोहन करके स्थानीय स्तर पर ही स्वावलंबन का एक नया ढांचा खड़ा किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण संकेतकनारायणपुर टसर रेशम योजना (सत्र 2025-26) के मुख्य सांख्यिकीय आंकड़े
योजना का नामनारायणपुर टसर रेशम योजना (रेशम विभाग छत्तीसगढ़ की पहल)
संबद्ध कुल पौधारोपण क्षेत्र41 हेक्टेयर क्षेत्र में टसर अर्जुना (Arjuna) पौधारोपण
सामग्री वितरण दर (DFLS)मात्र ₹2 प्रति DFLS (रोगमुक्त कृमि अंडे) की रियायती सरकारी दर
सक्रिय हितग्राही संख्या24 स्थानीय आदिवासी परिवार (सामूहिक कृमिपालन में संलग्न)
कुल उत्पादित कोसाफल (Cocoons)4,71,593 नग कोसाफल का रिकॉर्ड उत्पादन (3 फसल चक्रों में)
कुल अर्जित आय (DBT)₹17,56,516 (17 लाख 56 हजार 516 रुपये) का प्रत्यक्ष भुगतान
मुख्य सामाजिक प्रभावग्रामीण पलायन पर पूर्ण अंकुश और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार

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नारायणपुर टसर रेशम योजना: 41 हेक्टेयर में हरियाली और कोसाफल उत्पादन के शानदार आंकड़े

नारायणपुर अंचल में रेशम विभाग द्वारा क्रियान्वित की जा रही नारायणपुर टसर रेशम योजना के माध्यम से वनांचल के दुर्गम क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा का एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार हुआ है। इस परियोजना के तहत 41 हेक्टेयर में फैला टसर अर्जुना पौधारोपण क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को वर्ष भर चलने वाला रोजगार प्रदान कर रहा है:

  • तीन फसलों का सफल चक्र: वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 10,400 रोगमुक्त कृमि अंडों (DFLS) का सफलतापूर्वक कृमिपालन किया गया। इसके तहत 24 हितग्राहियों ने मिलकर 4,71,593 नग कोसाफल का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया।
  • पलायन पर प्रभावी नियंत्रण: कोसा कृमिपालन (Rearing) की पूरी प्रक्रिया में घर के पास ही रोजगार मिल जाने से आदिवासी परिवारों को काम की तलाश में अंतर-राज्यीय पलायन नहीं करना पड़ता। इससे वनांचल की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता मजबूत हुई है।

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रोगमुक्त कृमि अंडे (DFLS) का रियायती वितरण और वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग

रेशम विभाग द्वारा कड़े विनियामक मानकों के तहत ग्रामीणों को उच्च खेल विधाओं और आधुनिक रेशम तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा, नारायणपुर टसर रेशम योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को मात्र ₹2 प्रति DFLS (कृमि अंडे) की अत्यधिक रियायती दर पर सामग्री दी जाती है, जिससे लागत न्यूनतम और लाभ अधिकतम होता है:

  • वैज्ञानिक और तकनीकी मार्गदर्शन: विभाग के तकनीकी अधिकारी अर्जुन के पेड़ों की देखरेख, कीटों से कृमियों की सुरक्षा और कोसाफल संग्रहण के वैज्ञानिक तौर-तरीकों का प्रशिक्षण सीधे खेतों में जाकर देते हैं।
  • लागत और मुनाफे का उत्कृष्ट संतुलन: नाममात्र की इनपुट लागत (₹2 प्रति कृमि अंडा) के कारण आदिवासी संग्राहकों का जोखिम लगभग समाप्त हो जाता है, जिससे वे पूरे उत्साह के साथ कोसा उत्पादन से जुड़ रहे हैं।

बिचौलियों का अंत और सीधे बैंक खातों में डीबीटी (DBT) भुगतान का सुदृढ़ ढांचा

इस योजना की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसने पारदर्शी वित्तीय प्रणाली के माध्यम से सुदूर अबूझमाड़ के अंतिम व्यक्ति तक सीधे लाभ पहुँचाया है। सत्र 2025-26 के कड़े आंकड़ों के अनुसार, नारायणपुर टसर रेशम योजना से होने वाली संपूर्ण आय सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की गई है, जिससे बिचौलियों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो गया है:

  • डीबीटी (Direct Benefit Transfer) की पारदर्शिता: कोसाफल की बिक्री से अर्जित कुल ₹17.56 लाख की संपूर्ण राशि को बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे 24 हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। औसतन प्रत्येक हितग्राही को लगभग ₹73,000 की शुद्ध आय प्राप्त हुई है, जो वनांचल के संदर्भ में एक बड़ी वित्तीय सुरक्षा है।
  • महिला सशक्तिकरण की धुरी: कोसा संग्रहण और धागाकरण (Reeling) के कार्यों में महिलाओं की 70% से अधिक भागीदारी होने के कारण यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और स्वावलंबी बना रही है।

UPSC & CGPSC Sericulture Fact Box: Types of Silk & Host Trees

  • भारत में रेशम के प्रकार: भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो व्यावसायिक महत्व के सभी पांच प्रकार के रेशम—शहतूती (Mulberry), टसर (Tasar), ओक टसर (Oak Tasar), एरी (Eri) और मूगा (Muga) का उत्पादन करता है। भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेशम उत्पादक है।
  • टसर रेशम और अर्जुना वृक्ष: टसर रेशम मुख्य रूप से ‘एन्थिरिया माइलिट्टा’ (Antheraea mylitta) नामक रेशम कीट द्वारा उत्पादित किया जाता है। यह कीट मुख्य रूप से अर्जुन (Terminalia arjuna) और आसन (Terminalia tomentosa) के पेड़ों की पत्तियों को खाकर बढ़ता है।
  • अबूझमाड़ क्षेत्र: नारायणपुर जिला छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध अबूझमाड़ (Abujhmad) के वनों से घिरा हुआ है, जो अपनी सघन जैव विविधता और प्राचीन जनजातीय (जैसे माड़िया और मुड़िया गोंड) जीवन शैली के लिए विख्यात है।

UPSC & State PCS Mains Analysis: विकासोन्मुख सुरक्षा रणनीति (Development-led Security), जनजातीय अर्थशास्त्र और पलायन निवारण

मुख्य परीक्षा के समाजशास्त्र, जनजातीय अर्थशास्त्र (Tribal Economics) और आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) के दृष्टिकोण से नारायणपुर टसर रेशम योजना का यह सघन क्रियान्वयन ‘आंतरिक सुरक्षा और विकास’ के समन्वय का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है। ऐतिहासिक रूप से, नारायणपुर और बस्तर संभाग के दुर्गम क्षेत्र वामपंथी उग्रवाद (LWE) और भौगोलिक अलगाव से ग्रसित रहे हैं।

इस सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए, केवल सैन्य बल का उपयोग पर्याप्त नहीं है; इसके समानांतर ‘विकासोन्मुख सुरक्षा’ (Development-led Security) की स्थापना आवश्यक है। जब रेशम विभाग 41 हेक्टेयर के अर्जुना वनों में स्थानीय स्तर पर ही ₹17.56 लाख का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करता है, तो यह सीधे तौर पर उग्रवादी विचारधाराओं के प्रभाव को समाप्त करता है। यह मॉडल ग्रामीण परिवारों को साहूकारों के कर्ज के जाल (Debt Trap) से बचाकर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) प्रदान करता है। यह कड़ा ढांचा सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-1: शून्य गरीबी, SDG-8: सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास, तथा SDG-15: भूमि पर जीवन) के अनुकूल छत्तीसगढ़ के समग्र और संवेदनशील नियोजन की एक मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण रेशम योजना और छत्तीसगढ़ के खनिज व जनजातीय भूगोल पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में चर्चा में रहे नारायणपुर टसर रेशम योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 24 हितग्राहियों ने कुल कितने लाख से अधिक कोसाफल (Cocoons) का रिकॉर्ड उत्पादन किया है?

(A) 2.50 लाख कोसाफल
(B) 4.71 लाख कोसाफल (4.71 Lakh Cocoons Produced)
(C) 1.20 लाख कोसाफल
(D) 10.40 लाख कोसाफल

उत्तर: (B) 4.71 लाख कोसाफल (4.71 Lakh Cocoons Produced)
व्याख्या: नारायणपुर जिले में संचालित इस योजना के अंतर्गत 24 आदिवासी हितग्राहियों ने अपनी लगन से तीन फसलों के दौरान कुल 4,71,593 नग (लगभग 4.71 लाख) कोसाफल का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है।

प्रश्न 2: टसर रेशम कीट (Antheraea mylitta) मुख्य रूप से अपनी खाद्य आवश्यकताओं के लिए निम्नलिखित में से किस वनस्पति या वृक्ष के पत्तों पर निर्भर रहता है, जिसका पौधारोपण नारायणपुर में 41 हेक्टेयर में किया गया है?

(A) शहतूत का पेड़ (Mulberry)
(B) अर्जुन का पेड़ (Terminalia arjuna)
(C) साल का पेड़
(D) सागौन का पेड़

उत्तर: (B) अर्जुन का पेड़ (Terminalia arjuna)
व्याख्या: टसर रेशम का कीड़ा मुख्य रूप से अर्जुन (Arjuna) और आसन के पेड़ों पर पाला जाता है। शहतूती रेशम के कीट शहतूत (Mulberry) की पत्तियों पर पाले जाते हैं।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. नारायणपुर टसर रेशम योजना क्या है और इसे किस नोडल विभाग द्वारा चलाया जा रहा है?

नारायणपुर टसर रेशम योजना (Tassar Silk Scheme) छत्तीसगढ़ शासन के रेशम विभाग द्वारा नारायणपुर जिले में संचालित एक प्रमुख आजीविका संवर्धन योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य वनांचल के ग्रामीणों को अर्जुन पौधारोपण के माध्यम से कोसा उत्पादन से जोड़कर स्वरोजगार प्रदान करना है।

Q2. इस योजना के तहत रेशम कीट अंडे (DFLS) किस दर पर प्रदान किए जाते हैं?

योजना के तहत लागत को न्यूनतम करने के लिए आदिवासी हितग्राहियों को मात्र ₹2 प्रति DFLS (रोगमुक्त कृमि अंडे – Disease Free Layings) की अत्यधिक रियायती दर पर सामग्री और आवश्यक वैज्ञानिक उपकरण प्रदान किए जाते हैं।

Q3. सत्र 2025-26 के दौरान नारायणपुर जिले के कोसा उत्पादकों को कुल कितनी आय हुई है?

इस सत्र के दौरान 24 हितग्राहियों ने सामूहिक रूप से 4,71,593 नग कोसाफल का उत्पादन किया, जिससे उन्हें कुल ₹17,56,516 (17.56 लाख रुपये) की प्रत्यक्ष आय प्राप्त हुई। यह पूरी राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में ट्रांसफर की गई।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • वनांचल में कोसा की स्वर्णिम चमक: नारायणपुर टसर रेशम योजना के माध्यम से 41 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले टसर अर्जुना पौधारोपण के जरिए जनजातीय परिवारों को साल भर रोजगार मिल रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
  • रिकॉर्ड उत्पादन और सीधी आय: सत्र 2025-26 के दौरान 24 आदिवासी हितग्राहियों ने रिकॉर्ड 4.71 लाख से अधिक कोसाफल का उत्पादन कर ₹17.56 लाख की शुद्ध आय सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से प्राप्त की है।
  • सुरक्षा और विकास का अद्भुत मॉडल: नक्सल प्रभावित और सुदूर अबूझमाड़ के सीमावर्ती जिलों में रेशम उत्पादन जैसी विकेंद्रीकृत योजनाएं पलायन को रोकने और युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का भूगोल, कृषि, वन संपदा एवं कुटीर उद्योग योजनाएं), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, जनजातीय कल्याण योजनाएं, और वनांचल आजीविका सुधार), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (सरकारी नीतियां और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, सुशासन सुधार) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (भारतीय कृषि, रेशम उत्पादन/सेरीकल्चर, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां, वामपंथी उग्रवाद से निपटने में विकासोन्मुखी कूटनीति) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक समसामयिक नीति व सामाजिक-आर्थिक विषय है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह विशेष आलेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG), रेशम प्रभाग छत्तीसगढ़, नारायणपुर जिला कलेक्टरेट प्रशासन, और राज्य कोसा विकास बोर्ड द्वारा 20 अगस्त 2026 को जारी किए गए आधिकारिक टसर योजना प्रगति प्रतिवेदनों और सांख्यिकीय आंकड़ों पर आधारित है।

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