छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026: खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल और विभागीय सचिव ने पेश की ऐतिहासिक रिपोर्ट; राशन कार्ड संख्या में भारी वृद्धि, ग्रेन एटीएम और सिटी गैस जैसी बड़ी योजनाएं क्रियान्वित

छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026

Published on 18 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), खाद्य सुरक्षा और पारदर्शी डिजिटल सुशासन को एक नई दिशा देते हुए राज्य सरकार द्वारा खाद्य विभाग की ऐतिहासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। आज 18 अगस्त 2026 को रायपुर के छत्तीसगढ़ संवाद सभागार (अटल नगर, नवा रायपुर) में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयाल दास बघेल और विभागीय सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने राज्य की लोक-कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का व्यापक खाका प्रस्तुत किया।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य के निवासियों को पर्याप्त मात्रा में पोषक आहार सुनिश्चित कराने, धान खरीदी के पारदर्शी प्रबंधन और उपभोक्ता हितों के संरक्षण की दिशा में किए गए ढांचागत सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई। विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए ये आंकड़े दर्शाते हैं कि छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 की रिपोर्ट वास्तव में राज्य के गरीब और किसान परिवारों के आर्थिक सशक्तीकरण की एक नई इबारत लिख रही है। इसके तहत ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम’ और ‘सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन’ जैसी दूरगामी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा गया है।

महत्वपूर्ण संकेतकछत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 के मुख्य प्रशासनिक तथ्य एवं आंकड़े
संबद्ध सरकारी विभागखाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
वर्तमान राशन कार्ड संख्या (2026)83.36 लाख राशन कार्ड (कुल 2.73 करोड़ सदस्य पंजीकृत)
खाद्य सुरक्षा जनसंख्या कवरेजराज्य की 87% जनसंख्या (2026 की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर)
अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम (Grain ATM)रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में 08 अगस्त 2026 से संचालित (देश का 5वां राज्य)
सिटी गैस वितरण (CGD) नीति प्रभावी05 मई 2026 से प्रभावशील (वर्ष 2030 तक 42 लाख घरों का लक्ष्य)
धान उपार्जन दर व सीमा₹3100 प्रति क्विंटल भुगतान (कृषक उन्नति योजना सहित) | 21 क्विंटल प्रति एकड़ सीमा
खरीफ 2024-25 धान खरीदी रिकॉर्ड149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी (राज्य गठन के बाद से सर्वाधिक)
डिजिटल सुधारों से कुल बचतफर्जी पंजीयन और बिचौलियों पर अंकुश से शासन को लगभग ₹4000 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत

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Table of Contents

सार्वजनिक वितरण प्रणाली और छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 के कड़े आंकड़े

राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और पीडीएस प्रणाली के सुदृढ़ीकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 के तहत राशन कार्डों की संख्या और खाद्यान्न वितरण में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में खाद्य सुरक्षा का दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हुआ है:

  • राशन कार्डों और सदस्यों में वृद्धि: जनवरी 2024 में राज्य में 77 लाख राशन कार्ड प्रचलित थे, जिनसे 2.69 करोड़ हितग्राही लाभान्वित हो रहे थे। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 83.36 लाख राशन कार्ड हो गई है, जिसमें कुल 2.73 करोड़ सदस्य पंजीकृत हैं। इस प्रकार विगत 3 वर्षों के भीतर राज्य में 10.44 लाख नए राशन कार्ड जारी किए गए तथा 16.93 लाख नए सदस्यों को डेटाबेस में जोड़ा गया।
  • शासकीय उचित मूल्य दुकानों का विस्तार: पीडीएस के सुचारू संचालन के लिए राज्य में कुल 14,182 उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं। हितग्राहियों को राशन प्राप्त करने में आसानी हो, इसके लिए विगत 3 वर्षों में 445 नवीन दुकानों का आवंटन किया गया है। इसके अलावा, जनवरी 2024 में प्रचलित 77.10 लाख राशन कार्डों में से 73.94 लाख कार्डों का नवीनीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर डेटाबेस को त्रुटिरहित बनाया गया है।
  • नियमित खाद्यान्न वितरण की स्थिति (जनवरी 2024 से जुलाई 2026):
    • चावल वितरण: अंत्योदय, प्राथमिकता, निराश्रित एवं दिव्यांग परिवारों को मासिक पात्रता अनुसार निःशुल्क तथा सामान्य श्रेणी के परिवारों को ₹10 प्रति किलो की रियायती दर पर कुल 74.89 लाख टन चावल वितरित किया गया।
    • बस्तर संभाग में विशेष गुड़ वितरण: बस्तर क्षेत्र के निवासियों में आयरन की कमी को दूर करने के लिए जनवरी 2020 से रियायती दर पर (₹17/किलो) 2 किलो गुड़ प्रतिमाह दिया जा रहा है। इस अवधि में 7.97 लाख परिवारों को कुल 26,723 टन गुड़ वितरित किया गया।
    • चना वितरण: अनुसूचित एवं माडा क्षेत्रों के 31.64 लाख अंत्योदय व प्राथमिकता परिवारों को ₹5/किलो की दर से प्रतिमाह 2 किलो चना दिया जा रहा है। इस अवधि में 1.43 लाख टन चना वितरित हुआ।
    • नमक व शक्कर वितरण: अनुसूचित क्षेत्रों में 2 किलो और गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में 1 किलो रिफाइंड आयोडाइज्ड नमक निःशुल्क दिया जा रहा है। इस अवधि में 2.69 लाख टन नमक तथा ₹17/किलो की दर पर 1.95 लाख टन शक्कर का वितरण किया गया।
  • चावल उत्सव की नियमितता: खाद्यान्न वितरण की नियमित निगरानी के लिए वर्ष 2008 से लागू ‘चावल उत्सव’ को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। हर गाँव की शासकीय उचित मूल्य दुकान में प्रत्येक माह की 6 और 7 तारीख को नोडल अधिकारियों की देखरेख में चावल उत्सव आयोजित किया जाता है।

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अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन और छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026

तकनीकी नवाचारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जोड़कर उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान करने के मामले में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। देश में पांचवें राज्य के रूप में स्थापित होकर छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 की सूची में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर जोड़ा गया है:

  • अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम (Grain ATM): छत्तीसगढ़ के पहले 03 ‘अन्नपूनतव ग्रेन एटीएम’ का संचालन 08 अगस्त 2026 से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर शहरों में प्रारंभ किया गया है। उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और मेघालय के बाद छत्तीसगढ़ देश का पांचवा ऐसा राज्य बन गया है जहाँ यह सुविधा उपलब्ध है। इस मशीन में हितग्राही अपना राशन कार्ड या आधार नंबर दर्ज कर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए 24×7 कभी भी कतारों में लगे बिना अपनी सुविधानुसार चावल प्राप्त कर सकते हैं।
  • शहरी गैस वितरण (City Gas Distribution) व्यवस्था: राज्य में एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर घरों तक सीधी पाइपलाइन से रसोई गैस (PNG) पहुँचाने के लिए ‘CGD पॉलिसी’ 05 मई 2026 से प्रभावी की गई है। वर्तमान में रायपुर और मनेंद्रगढ़ के चुनिंदा वार्डों में पीएनजी की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। आगामी 6 महीनों में 7 अन्य शहरों में इसका विस्तार किया जाएगा। वर्ष 2030 तक राज्य के 42 लाख घरों को इस पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, वाहनों के लिए सस्ते और पर्यावरण-अनुकूल सीएनजी (CNG) स्टेशनों का भी विस्तार किया जा रहा है।

नियत नेल्लानार 2.0, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और धान उपार्जन की ऐतिहासिक प्रगति

राज्य के सबसे संवेदनशील और वामपंथ प्रभावित क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए विभाग ने क्रांतिकारी कदम उठाए हैं:

  • नियत नेल्लानार योजना 2.0 (Niyad Nellanar Yojna 2.0): इस योजना के तहत राज्य के 10 संवेदनशील जिलों—बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, मोहला-मानपुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, खैरागढ़-छुईखदान और गरियाबंद के ग्रामीण अंचलों में 11.41 लाख राशन कार्डधारी परिवारों को मासिक पात्रता अनुसार खाद्यान्न, चना, शक्कर, नमक और गुड़ का सुचारू वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: महिलाओं को प्रदूषण रहित ईंधन उपलब्ध कराने के लिए राज्य में अब तक 39 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 3.0 के तहत गैस कनेक्शन वितरण में छत्तीसगढ़ देश में चौथे स्थान पर है।
  • समर्थन मूल्य पर धान का ऐतिहासिक उपार्जन: राज्य सरकार ने किसानों के हित में धान उपार्जन की सीमा को 15 क्विंटल से बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ कर दिया है। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त कृषक उन्नति योजना के तहत इनपुट सब्सिडी मिलाकर कुल भुगतान ₹3100 प्रति क्विंटल किया जा रहा है, जो देश में सर्वाधिक है:
    • खरीफ विपणन वर्ष 2024-25: राज्य गठन के बाद से धान खरीदी का एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ। 2739 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.49 लाख किसानों से रिकॉर्ड **149.25 लाख मीट्रिक टन** धान का उपार्जन किया गया। इसके तहत किसानों के बैंक खातों में ₹46,289 करोड़ की राशि सीधे हस्तांतरित की गई।
    • खरीफ विपणन वर्ष 2025-26: 2740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.24 लाख किसानों से कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया, जिसके एवज में ₹43,723 करोड़ की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की गई।
    • भुगतान और वित्तीय गारंटी: धान खरीदी के लिए सरकार ने मार्कफेड को ₹15,000 करोड़ की बैंक गारंटी प्रदान की थी। किसानों को धान बेचने के महज 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया गया। इसके अलावा, राइस मिलरों को विगत 2.5 वर्षों में ₹4,400 करोड़ के प्रोत्साहन व मिलिंग शुल्क का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन किया गया।
  • स्मार्ट डिजिटल नियंत्रण और धान तस्करी पर रोक: धान खरीदी के क्षेत्र में किए गए व्यापक डिजिटल सुधारों ने छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 की रिपोर्ट को सबसे विश्वसनीय बनाया है। उपार्जन केंद्रों पर बायोमेट्रिक डिवाइस के जरिए वास्तविक किसानों का आधार सत्यापन कर फर्जी धान खरीदी को रोका गया। विपणन संघ मुख्यालय में स्थापित ‘इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर’ के माध्यम से वास्तविक समय में अनियमितताओं पर नजर रखी गई। खरीफ 2025-26 के दौरान अवैध धान का परिवहन करते हुए 9.73 लाख क्विंटल धान जब्त किया गया, जिससे राज्य शासन को ₹301.89 करोड़ की सीधी बचत हुई। इन डिजिटल नवाचारों और बिचौलियों पर प्रभावी नियंत्रण से सरकार को कुल ₹4,000 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत हुई है।
  • खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए अग्रिम तैयारी: नए सीजन के लिए किसानों का पंजीयन 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। इस वर्ष सरकार ने बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए एग्रिस्टैक आईडी (Agristack ID) युक्त पूर्व वर्ष के सभी पंजीकृत किसानों को स्वतः मान्य किया है, जिससे उन्हें दोबारा कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल नई भूमि क्रय-विक्रय या बंटवारे की स्थिति में ही मैपिंग की आवश्यकता होगी। साथ ही, वन अधिकार पट्टाधारियों (FRA) और शासकीय पट्टेदारों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर एग्रिस्टैक आईडी दी जा रही है। उपग्रह जनित डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से प्रत्येक खसरा नंबर पर बोई गई वास्तविक फसल का ऑनलाइन सत्यापन किया जा रहा है।

UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: Key Constitutional & Technological Milestones

  • छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012: छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य था जिसने खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार प्रदान करने के लिए अपना स्वयं का खाद्य सुरक्षा कानून पारित किया था। यह अधिनियम अंत्योदय और प्राथमिकता वाले परिवारों को खाद्यान्न का अधिकार सुनिश्चित करता है।
  • एग्रिस्टैक (Agristack ID): यह भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा विकसित एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र है, जो किसानों को एक अद्वितीय डिजिटल पहचान (Digital ID) प्रदान करता है। इसे भूमि अभिलेखों (Land Records) और बोई गई फसलों के डेटाबेस से एकीकृत किया जाता है, जिससे कृषि योजनाओं और ऋणों का पारदर्शी लाभ मिल सके।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व एवं सुगम्य पीडीएस: उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और पीडीएस की पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का राष्ट्रव्यापी एकीकरण।

UPSC & State PCS Mains Analysis: लोक वितरण प्रणाली में तकनीकी सुधार, पारदर्शिता और सुशासन की चुनौतियां

मुख्य परीक्षा के लोक प्रशासन, समाजशास्त्र और विकासात्मक अर्थशास्त्र (Development Economics) के दृष्टिकोण से, प्रशासनिक सुशासन और नीतिगत नियोजन के संदर्भ में छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 का यह विस्तृत खाका कूटनीतिक सुधारों का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। लोक वितरण प्रणाली (PDS) में सबसे बड़ी चुनौती रिसाव (Leakage) और फर्जी लाभार्थियों (Ghost Beneficiaries) की पहचान करना रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, एग्रिस्टैक आईडी का एकीकरण और ‘इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर’ जैसी तकनीकों का उपयोग करना यह साबित करता है कि ई-गवर्नेंस (e-Governance) के माध्यम से भ्रष्टाचार को न्यूनतम किया जा सकता है। इसके अलावा, किसानों को धान बेचने के 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना और अवैध धान के परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऋणग्रस्तता (Rural Indebtedness) को समाप्त करने में मदद करता है। जब किसानों को ₹3100 प्रति क्विंटल का देश में सर्वाधिक मूल्य मिलता है, तो यह सीधे तौर पर उनकी क्रय शक्ति को बढ़ाता है। यह डिजिटल समावेशन अंततः संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-2: भुखमरी की समाप्ति, SDG-10: असमानताओं में कमी, और SDG-12: जिम्मेदारीपूर्ण उपभोग और उत्पादन) के समयबद्ध लक्ष्यों को पूरा करने में राज्य की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण विकासात्मक और प्रशासनिक रिपोर्ट पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जारी की गई छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ताओं के लिए ‘ई-हीयरिंग’ (e-Hearing) सेवा शुरू करने वाला देश का कौन-सा राज्य बन गया है?

(A) पहला राज्य (First State in India)
(B) दूसरा राज्य
(C) तीसरा राज्य
(D) पांचवा राज्य

उत्तर: (A) पहला राज्य (First State in India)
व्याख्या: उपभोक्ता विवादों के त्वरित और प्रभावी निवारण को डिजिटल बनाने के लिए ई-हीयरिंग सेवा शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। वर्तमान में यह सेवा चरणबद्ध रूप से 18 जिला उपभोक्ता आयोगों में लागू है।

प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ के पहले ‘अन्नपूनतव ग्रेन एटीएम’ (Grain ATM) का सफल संचालन 08 अगस्त 2026 से राज्य के किन तीन शहरों में प्रारंभ किया गया है?

(A) रायपुर, बिलासपुर, और जगदलपुर
(B) रायपुर, दुर्ग, और बिलासपुर (Raipur, Durg, and Bilaspur)
(C) दुर्ग, भिलाई, और राजनांदगांव
(D) बिलासपुर, कोरबा, और सरगुजा

उत्तर: (B) रायपुर, दुर्ग, और बिलासपुर (Raipur, Durg, and Bilaspur)
व्याख्या: राज्य के पहले तीन ग्रेन एटीएम रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिलों में स्थापित किए गए हैं, जिसके बाद छत्तीसगढ़ देश का पांचवा ऐसा राज्य बन गया है जहाँ यह डिजिटल प्रणाली लागू है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 के तहत ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम’ की शुरुआत किन शहरों में की गई है?

छत्तीसगढ़ के पहले तीन ‘अन्नपूनतव ग्रेन एटीएम’ की शुरुआत 08 अगस्त 2026 से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिलों में की गई है। इस प्रणाली के तहत हितग्राही 24×7 कभी भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से निःशुल्क खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।

Q2. खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी हेतु किसान पंजीयन की समयसीमा क्या निर्धारित की गई है?

खरीफ वर्ष 2026-27 में धान खरीदी हेतु किसानों के पंजीयन की अवधि 1 जुलाई 2026 से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इस वर्ष पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को एग्रिस्टैक आईडी के माध्यम से स्वतः नवीनीकृत कर दिया गया है।

Q3. राज्य के शहरी गैस वितरण (CGD) नीति के तहत पीएनजी का क्या लक्ष्य रखा गया है?

राज्य में 05 मई 2026 से प्रभावी CGD नीति के तहत रायपुर और मनेंद्रगढ़ में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश के 42 लाख घरों को इस पर्यावरण-अनुकूल रसोई गैस नेटवर्क से जोड़ना है।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली का डिजिटल आधुनिकीकरण: छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग उपलब्धियां 2026 रिपोर्ट दर्शाती है कि राज्य में राशन कार्डों का दायरा बढ़कर 87% जनसंख्या तक पहुँच गया है और रायपुर, दुर्ग व बिलासपुर में ग्रेन एटीएम तथा उपभोक्ता अदालतों में ई-हीयरिंग सेवा लागू कर सुधारों की नई इबारत लिखी गई है।
  • धान उपार्जन और किसानों को रिकॉर्ड भुगतान: खरीफ 2024-25 में राज्य गठन के बाद सर्वाधिक 149.25 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन कर किसानों को ₹46,289 करोड़ का सीधा डीबीटी भुगतान किया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई है।
  • पारदर्शिता से ₹4,000 करोड़ की बचत: एग्रिस्टैक आईडी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और उपग्रह जनित डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से फर्जी पंजीयन और अवैध धान के परिवहन पर कड़ा अंकुश लगाकर राज्य शासन के ₹4,000 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत सुनिश्चित की गई है।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का आर्थिक विकास, कृषि विपणन, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और बजट), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, लोक-कल्याणकारी योजनाएं), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (लोक वितरण प्रणाली (PDS) के अनुप्रयोग, सीमाएं, खाद्य सुरक्षा अधिनियम, ई-गवर्नेंस और सुशासन) और सामान्य अध्ययन पेपर-3 (कृषि सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, और डिजिटल तकनीकी समावेशन) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, मार्कफेड छत्तीसगढ़, उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, और विभागीय सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले द्वारा 18 अगस्त 2026 को रायपुर में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जारी की गई आधिकारिक उपलब्धियों और सांख्यिकीय प्रगति विवरणों की मूल रिपोर्ट पर आधारित है।

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