Published on 17 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
रायपुर, 17 अगस्त 2026 : छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल, विशेष रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के पशुपालक परिवारों की आजीविका सुरक्षा और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित छत्तीसगढ़ डेयरी विकास योजना को गति देने के लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति की एक उच्च-स्तरीय बैठक मंत्रालय में संपन्न हुई है। आज 17 अगस्त 2026 को मंत्रालय, महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील (Vikas Sheel) की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (CGCDF) की इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।
इस संचालन बैठक का मुख्य फोकस प्रदेश में डेयरी क्षेत्र का समग्र ढांचागत विकास करना, दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाना, सहकारी समितियों में महिला दुग्ध उत्पादकों की भागीदारी को दोगुना करना और दुग्ध संग्रहण व विपणन अधोसंरचना (Cold Chain & Marketing Infrastructure) को मजबूत बनाना है। बैठक में पिछली बैठकों की कार्रवाई रिपोर्ट, मानव संसाधन चुनौतियों, और वित्तीय प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
| महत्वपूर्ण संकेतक | छत्तीसगढ़ डेयरी विकास योजना व संचालन बैठक के प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| योजना/फेडरेशन का नाम | छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (CGCDF – देवभोग ब्रांड) |
| बैठक की तिथि और स्थान | 17 अगस्त 2026, महानदी भवन, मंत्रालय (रायपुर) |
| बैठक की अध्यक्षता | मुख्य सचिव श्री विकासशील (Chief Secretary, Chhattisgarh) |
| विशेष लक्षित क्षेत्र | बस्तर (Bastar) और सरगुजा (Surguja) संभाग के जनजातीय क्षेत्र |
| बस्तर में पशुधन की स्थिति | लगभग 88% गायें स्थानीय देसी नस्ल की हैं (नस्ल सुधार पर विशेष बल) |
| सरगुजा चिलिंग सेंटर क्षमता | जशपुर (2,000 लीटर) और बलरामपुर (5,000 लीटर) चिलिंग सेंटर्स कार्यरत |
| सहयोगी राष्ट्रीय संस्था | राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board – NDDB) |
| वर्तमान दैनिक दूध संग्रहण | 45 मिल्क कलेक्शन सेंटर्स के माध्यम से रोजाना लगभग 3,500 लीटर दूध एकत्र |
| शामिल महिला उत्पादक | 1,500 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी तंत्र से सीधे जुड़ी हैं |
| वित्तीय भुगतान प्रणाली | दुग्ध उत्पादकों के बिल का शत-प्रतिशत भुगतान सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में |
यह भी पढ़ें: Krishak Unnati Yojana CG 2026: फसल विविधीकरण पर ₹15,000 प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी और सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
छत्तीसगढ़ डेयरी विकास योजना: बस्तर संभाग के आदिवासी पशुपालकों का आर्थिक उन्नयन
बस्तर संभाग के सात जिलों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति परिवार पारंपरिक पशुपालन से जुड़े हैं, जो उनके घरेलू आजीविका का मुख्य आधार है। इस योजना के तहत बस्तर में डेयरी क्षेत्र के वैज्ञानिक उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
- स्थानीय देसी नस्ल सुधार: बस्तर में पाले जाने वाले कुल गौवंश का लगभग 88% हिस्सा स्थानीय देसी नस्ल का है, जिनकी दूध देने की क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक नस्ल सुधार और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन पर ज़ोर दिया जा रहा है।
- विपणन नेटवर्क का विस्तार: सुदूर वनांचल अंचलों में ‘मिल्क कलेक्शन सेंटर’ (दुग्ध संग्रहण केंद्र) स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि आदिवासियों को उनके दूध का उचित और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल सके और बिचौलियों का एकाधिकार समाप्त हो।
यह भी पढ़ें: CG State Planning Commission UNICEF 2026: विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव के लिए राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ का मंथन
सरगुजा संभाग में एनडीडीबी (NDDB) के सहयोग से श्वेत क्रांति
सरगुजा संभाग के ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों (जशपुर-सरगुजा-बलरामपुर) में डेयरी उद्योग के तीव्र विकास के लिए राष्ट्रीय संस्थाओं की तकनीकी भागीदारी के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं:
- जून 2025 से चिलिंग सेंटर्स की शुरुआत: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से सरगुजा संभाग के जशपुर में 2,000 लीटर क्षमता और बलरामपुर में 5,000 लीटर क्षमता के आधुनिक चिलिंग सेंटर (Chilling Centers) शुरू किए गए हैं।
- 1,500 से अधिक महिला उत्पादक: वर्तमान में जशपुर और बलरामपुर क्षेत्रों के 45 मिल्क कलेक्शन सेंटर्स के माध्यम से रोजाना लगभग 3,500 लीटर दूध का सफल एकत्रीकरण किया जा रहा है। इस सहकारी तंत्र से सुदूर क्षेत्रों की 1,500 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादक सीधे जुड़ी हुई हैं।
- सीधा बैंक भुगतान (DBT): इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि महिलाओं द्वारा बेचे गए दूध की राशि का शत-प्रतिशत भुगतान सीधे उनके निजी बैंक खातों में किया जा रहा है। यह वित्तीय स्वावलंबन (Financial Autonomy) महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ कर रहा है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी
मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित इस संचालन समिति की उच्च-स्तरीय बैठक में राज्य की प्रशासनिक कमान के महत्वपूर्ण अधिकारी शामिल थे, जिनमें अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, सहकारिता आयुक्त श्री रमेश कुमार शर्मा, और राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के वरिष्ठ अधिकारी व फेडरेशन के सम्मानित सदस्य शामिल हुए।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: NDDB, CGCDF (Devbhog) & Operation Flood
- राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB): इसकी स्थापना वर्ष 1965 में लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में आनंद (गुजरात) में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में ‘श्वेत क्रांति’ (Operation Flood) का संचालन करना था। इसके पहले अध्यक्ष ‘फादर ऑफ व्हाइट रिवोल्यूशन’ डॉ. वर्गीज कुरियन थे। यह संसद के अधिनियम द्वारा घोषित राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है।
- CGCDF (छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन): छत्तीसगढ़ में सहकारी डेयरी और दुग्ध उत्पादन का नियमन करने वाली शीर्ष राज्य संस्था है, जिसके उत्पादों को राज्य में लोकप्रिय ब्रांड नाम ‘देवभोग’ (Devbhog) के तहत बेचा जाता है।
- डेयरी विकास कूटनीति (White Revolution): पशुपालन और डेयरी क्षेत्र भारतीय कृषि के सहायक क्षेत्र (Allied Sectors) के रूप में कार्य करते हैं, जो सूखे या मानसून की विफलता के समय किसानों के लिए ‘सुरक्षा जाल’ (Safety Net) प्रदान करते हैं।
UPSC & State PCS Mains Analysis: सहकारी संघवाद, पशुपालन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण
मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, छत्तीसगढ़ डेयरी विकास योजना के तहत बस्तर और सरगुजा जैसे जनजातीय संभागों में किया जा रहा सहकारी विस्तार राज्य के सहायक कृषि क्षेत्र के विकास (Allied Sector Growth), गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का एक अभिनव व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करता है।
बस्तर और सरगुजा संभाग में क्रमशः वामपंथी उग्रवाद (LWE) के खात्मे और भौगोलिक प्रतिकूलताओं के बाद, केवल पारंपरिक कृषि (धान की खेती) पर निर्भरता ग्रामीण आय के विविधीकरण (Income Diversification) को सीमित करती है। बस्तर के वनांचल अंचलों में 88% देसी कम-दूध देने वाले गौवंश की मौजूदगी एक चुनौती है, लेकिन नस्ल सुधार और वैज्ञानिक चारा प्रबंधन के माध्यम से इसे एक बड़े दुग्ध उत्पादक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, सरगुजा में 1,500 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों को सीधे बैंक खातों (DBT) के माध्यम से दूध का भुगतान करना महिला सशक्तिकरण (Gender Budgeting) का सबसे सुंदर चेहरा है। यह वित्तीय स्वायत्तता ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय बाजार के साहूकारी चक्र से मुक्त करती है और उन्हें सीधे संगठित सहकारी बैंकिंग प्रणाली से जोड़ती है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ छत्तीसगढ़ सरकार का यह सांगठनिक समन्वय सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करता है, जो अंततः सतत विकास लक्ष्य-1 (SDG-1: शून्य गरीबी), लक्ष्य-2 (SDG-2: जीरो हंगर/कुपोषण निवारण) और लक्ष्य-5 (SDG-5: लैंगिक समानता) के राष्ट्रीय विज़न को समयबद्ध धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण सहकारी और कृषि-आर्थिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में संपन्न हुई राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक के अनुसार, छत्तीसगढ़ डेयरी विकास योजना के तहत किस अंतरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय संस्था के सहयोग से सरगुजा संभाग के जशपुर और बलरामपुर में आधुनिक चिलिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं?
(A) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)
(B) राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board – NDDB)
(C) अमूल (AMUL) सहकारी डेयरी फेडरेशन
(D) भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)
उत्तर: (B) राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board – NDDB)
व्याख्या: सरगुजा संभाग के जशपुर और बलरामपुर में क्रमशः 2,000 लीटर और 5,000 लीटर क्षमता के आधुनिक चिलिंग सेंटर्स की स्थापना राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के तकनीकी और ढांचागत सहयोग से की गई है।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (CGCDF) द्वारा निर्मित और वितरित किए जाने वाले प्रसिद्ध दुग्ध उत्पादों का आधिकारिक राज्य ब्रांड नाम क्या है?
(A) अमूल (Amul)
(B) देवभोग (Devbhog)
(C) सांची (Sanchi)
(D) सुधा (Sudha)
उत्तर: (B) देवभोग (Devbhog)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (CGCDF) के सभी दुग्ध उत्पादों को छत्तीसगढ़ में लोकप्रिय और आधिकारिक ब्रांड नाम ‘देवभोग’ (Devbhog) के तहत बेचा और वितरित किया जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. छत्तीसगढ़ डेयरी विकास योजना के तहत हाल ही में संपन्न हुई बैठक के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
इस योजना के तहत मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में डेयरी विकास को गति देना, देसी गौवंश की नस्ल सुधार करना, महिला दुग्ध उत्पादकों की भागीदारी बढ़ाना, और दूध का सीधा भुगतान सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में करना है।
Q2. सरगुजा संभाग के किन जिलों में दुग्ध एकत्रीकरण के लिए चिलिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं और उनकी क्षमता क्या है?
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से सरगुजा संभाग के जशपुर जिले में 2,000 लीटर क्षमता और बलरामपुर जिले में 5,000 लीटर क्षमता के आधुनिक चिलिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं, जो सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं।
Q3. बस्तर संभाग में डेयरी विकास के समक्ष क्या प्रमुख भौगोलिक और जैविक चुनौती है?
बस्तर संभाग के सात जिलों में गायों की लगभग 88% आबादी स्थानीय देसी नस्ल की है, जिनकी औसत दुग्ध उत्पादकता काफी कम होती है। इस चुनौती को दूर करने के लिए योजना के तहत पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, पोषक चारा वितरण और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन पर विशेष बल दिया जा रहा है।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- बस्तर और सरगुजा पर विशेष फोकस: छत्तीसगढ़ डेयरी विकास योजना के तहत बस्तर के 88% देसी गौवंश के नस्ल सुधार और सरगुजा के पर्वतीय अंचलों में डेयरी इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
- 1,500+ महिला दुग्ध उत्पादकों का सशक्तिकरण: जशपुर और बलरामपुर के 45 दुग्ध संग्रहण केंद्रों से 1500 से अधिक ग्रामीण आदिवासी महिलाएं सीधे जुड़ी हैं, जो रोजाना लगभग 3,500 लीटर दूध का संग्रहण कर सीधे खातों में भुगतान (DBT) प्राप्त कर रही हैं।
- NDDB के साथ रणनीतिक भागीदारी: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से स्थापित चिलिंग सेंटर्स और देवभोग (CGCDF) ब्रांड का विस्तार राज्य के कृषि-संबद्ध क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने की सुशासित पहल है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का आर्थिक नियोजन, कृषि-संबद्ध क्षेत्र—पशुपालन और डेयरी विकास), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, जनजातीय नीतियां व महिला कल्याण कार्यक्रम), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि से जुड़े सहायक क्षेत्र—पशुपालन, डेयरी विकास की भूमिका, समावेशी विकास और सहकारी मॉडल) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (CGCDF), आदिम जाति विकास विभाग छत्तीसगढ़, और मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हुई संचालन समिति की बैठक के उपरांत जारी की गई आधिकारिक प्रगति विवरणी पर आधारित है।