जयमंती खेस छत्तीसगढ़: दृष्टिबाधा को मात देकर शिक्षक बनने का सपना संजोने वाली जशपुर की बेटी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भेंट किया विशेष सॉफ्टवेयर युक्त लैपटॉप

जयमंती खेस छत्तीसगढ़ जयमंती खेस छत्तीसगढ़

Published on 17 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


दृष्टिबाधा जैसी गंभीर शारीरिक चुनौती को पराजित कर उच्च शिक्षा प्राप्त करने और शिक्षक बनने का सपना संजोने वाली मेधावी छात्रा जयमंती खेस छत्तीसगढ़ के सामाजिक न्याय और संवेदनशील सुशासन की एक नई मिसाल बनकर उभरी हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज 17 अगस्त 2026 को जशपुर जिले के ग्राम बगिया स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित मुलाकात के दौरान जयमंती को विशेष ‘स्क्रीन-रीडर’ सॉफ्टवेयर से युक्त लैपटॉप प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

जयमंती वर्तमान में शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर (डिग्री गर्ल्स) कॉलेज, रायपुर में बी.ए. अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। शत-प्रतिशत दृष्टिबाधित होने के बावजूद शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और जीवन में आगे बढ़ने के उनके जज्बे ने राज्य प्रशासन को उनकी मदद के लिए तुरंत प्रेरित किया, जो यह दर्शाता है कि जब अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो शारीरिक चुनौतियां कभी भी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकतीं।

महत्वपूर्ण संकेतकजयमंती खेस (छत्तीसगढ़) की सफलता के प्रमुख तथ्य व कड़े आंकड़े
मेधावी छात्रा का नामजयमंती खेस (Jaymanti Khes)
गृह ग्राम व विकासखंडग्राम गोरिया, कुनकुरी विकासखंड (जशपुर जिला)
वर्तमान शैक्षणिक प्रोफाइलबी.ए. अंतिम वर्ष (डिग्री गर्ल्स कॉलेज, रायपुर)
दृष्टिबाधा का प्रतिशत100% (शत-प्रतिशत) दृष्टिबाधित छात्रा
कैरियर का मुख्य लक्ष्यपूरी लगन से पढ़ाई कर एक ‘शिक्षक’ (Teacher) बनना
प्रदान किया गया सहायक उपकरणविशेष ‘स्क्रीन-रीडर’ सहायक सॉफ्टवेयर युक्त आधुनिक लैपटॉप
संबद्ध प्रशासनिक विंगकलेक्टर जनदर्शन (Jashpur) और समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़
सॉफ्टवेयर की मुख्य विशेषतास्क्रीन पर उपलब्ध अध्ययन सामग्री (टेक्स्ट) को आवाज के माध्यम से सुनाना (Text-to-Speech)

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Table of Contents

जयमंती खेस छत्तीसगढ़: कलेक्टर जनदर्शन से बगिया कैंप कार्यालय तक का सफर

जशपुर के दूरस्थ अंचल गोरिया गाँव से लेकर रायपुर में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली जयमंती की इस सफलता के पीछे राज्य के जमीनी सुशासन तंत्र की संवेदनशील भूमिका रही है:

  • जनदर्शन में रखी थी आवश्यकता: जयमंती ने अपनी दृष्टिबाधा के कारण पढ़ाई के दौरान नोट्स और डिजिटल किताबों को पढ़ने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए जशपुर ‘कलेक्टर जनदर्शन’ (Collector Jan-Darshan) में लैपटॉप की मांग की थी।
  • संवेदनशीलता से त्वरित समाधान: कलेक्टरेट प्रशासन ने छात्रा की लगन और प्रतिभा को देखते हुए बिना किसी लालफीताशाही (Red Tape) के समाज कल्याण विभाग को तत्काल आवश्यक सहायता देने के निर्देश दिए। समाज कल्याण विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जयमंती की विशेष आवश्यकताओं के अनुकूल सहायक सॉफ्टवेयर तैयार कराया, जिसे आज मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने हाथों से उन्हें प्रदान किया।

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‘स्क्रीन-रीडर’ सहायक सॉफ्टवेयर: जब तकनीक बनेगी जयमंती की आंखें

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए आधुनिक डिजिटल युग में ‘स्क्रीन-रीडर’ सॉफ्टवेयर किसी वरदान से कम नहीं है, जो उनकी आँखें बनकर उन्हें स्वतंत्र रूप से अध्ययन करने में सक्षम बनाता है:

  • आवाज के माध्यम से अध्ययन (Text-to-Speech): इस विशेष लैपटॉप में जेएडब्ल्यूएस (JAWS) या एनवीडीए (NVDA) जैसी आधुनिक सहायक तकनीक स्थापित की गई है। यह सॉफ्टवेयर स्क्रीन पर आने वाले किसी भी पीडीएफ नोट्स, डिजिटल पुस्तकों या वेब पेजों के टेक्स्ट को प्राकृतिक मानवीय आवाज में बदलकर सुनाता है।
  • स्वतंत्र डिजिटल पहुंच: इस तकनीकी सहायता से अब जयमंती बिना किसी ‘रीडर’ (पढ़कर सुनाने वाले सहायक) पर निर्भर रहे, स्वयं स्वतंत्र रूप से अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगी और इंटरनेट से नोट्स डाउनलोड कर सुन सकेंगी।
  • “शिक्षक बनना चाहती हूं”: जब मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान पूछा कि वे आगे क्या बनना चाहती हैं, तो जयमंती ने पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया कि वे ‘शिक्षक’ बनना चाहती हैं। मुख्यमंत्री ने उनके इस संकल्प की सराहना करते हुए कहा, “शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं, कड़े संकल्प और मेहनत से अपने सपने को जरूर साकार करें।”

UPSC Prelims Fact Box: RPwD Act 2016, Assistive Tech & Jan-Darshan

  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act): इस ऐतिहासिक कानून के तहत दिव्यांगता की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 किया गया था। इस अधिनियम की धारा 16 और 20 के तहत सरकारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे दिव्यांग छात्रों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा के समान अवसर और उनकी आवश्यकताओं के अनुकूल ‘सहायक सामग्री’ (Reasonable Accommodation) प्रदान करें।
  • सहायक तकनीक (Assistive Technology): कोई भी ऐसा उपकरण, सॉफ्टवेयर या उत्पाद जो दिव्यांग व्यक्तियों की कार्यक्षमता को बढ़ाने, बनाए रखने या उसमें सुधार करने में मदद करता है (जैसे स्क्रीन रीडर, ब्रेल कीबोर्ड और स्पीच-टू-टेक्स्ट कनवर्टर)।
  • कलेक्टर जनदर्शन (Jan-Darshan): छत्तीसगढ़ के जिला प्रशासन द्वारा सीधे आम नागरिकों, आदिवासियों और जरूरतमंदों की शिकायतों, मांगों और समस्याओं को सुनकर ऑन-द-स्पॉट समाधान करने के लिए प्रति सप्ताह आयोजित किया जाने वाला लोक-संवाद मंच।

UPSC & State PCS Mains Analysis: सहायक तकनीक (Assistive Tech) के माध्यम से मानव पूंजी विकास और कल्याणकारी राज्य का दायित्व

मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, जयमंती खेस छत्तीसगढ़ की यह प्रेरक कहानी भारत में दिव्यंगजन अधिकारों के कानूनी नियमन (RPwD Act, 2016), सुशासन में तकनीक के समावेशन और कल्याणकारी राज्य (Welfare State) के मानवीय दृष्टिकोण को स्पष्ट करती है।

संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित ‘समानता और गरिमा’ तथा राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP – अनुच्छेद 38, 39 और 41) के तहत यह राज्य का मूलभूत कर्तव्य है कि वह समाज के सबसे कमजोर और शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे नागरिकों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता के समान अवसर प्रदान करे। पारंपरिक रूप से दिव्यांग कल्याण को केवल ‘दान’ या ‘भौतिक सहानुभूति’ (जैसे व्हीलचेयर या लाठी वितरण) के रूप में देखा जाता था। लेकिन आधुनिक सुशासन का विज़न यह है कि हम दिव्यांगजनों को ‘निर्भर’ बनाने के बजाय ‘तकनीक आधारित आत्मनिर्भर’ (Technological Autonomy) बनाएं।

जयमंती को एक स्क्रीन-रीडर लैपटॉप प्रदान करना वास्तव में उन्हें आधुनिक ‘नॉलेज इकोनॉमी’ (Knowledge Economy) में भाग लेने योग्य बनाना है, जो देश की मानव पूंजी (Human Capital) के संरक्षण को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, ‘कलेक्टर जनदर्शन’ जैसे विकेंद्रीकृत लोक-प्रशासन मंचों का त्वरित कार्य करना यह साबित करता है कि जब नौकरशाही संवेदनशील और जवाबदेह (Empathetic Bureaucracy) होती है, तो वह सबसे निचले तबके के अंतिम छात्र के सपनों को भी समयबद्ध धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक रीढ़ बनती है। यह मॉडल सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और लक्ष्य-10 (SDG-10: असमानता में कमी) की प्राप्ति में देश के प्रयासों को गति प्रदान करेगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय और प्रशासनिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में चर्चा में रहीं जशपुर की 100% दृष्टिबाधित छात्रा जयमंती खेस छत्तीसगढ़ को अपनी उच्च शिक्षा के लिए किस विशेष विनियामक विंग और विभाग के समन्वय से सहायक सॉफ्टवेयर युक्त लैपटॉप प्रदान किया गया है?

(A) राज्य युवा आयोग और गृह विभाग
(B) कलेक्टर जनदर्शन और समाज कल्याण विभाग (Social Welfare Department)
(C) आदिम जाति विकास विभाग और संस्कृति मंत्रालय
(D) छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल

उत्तर: (B) कलेक्टर जनदर्शन और समाज कल्याण विभाग (Social Welfare Department)
व्याख्या: जयमंती खेस ने जशपुर के ‘कलेक्टर जनदर्शन’ में अपनी पढ़ाई के लिए लैपटॉप का आवेदन किया था, जिसके बाद समाज कल्याण विभाग ने उनकी विशेष जरूरतों के अनुकूल स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर से युक्त लैपटॉप तैयार कर उन्हें प्रदान किया।

प्रश्न 2: भारत के ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ (RPwD Act, 2016) के तहत, शारीरिक रूप से अक्षम और मेधावी छात्रों को शिक्षा के समान अवसर देने के लिए सरकारों के लिए निम्नलिखित में से क्या करना कानूनी रूप से अनिवार्य है?

(A) केवल सामान्य कक्षाओं में उनका प्रवेश वर्जित करना।
(B) उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप बाधामुक्ति वातावरण और सहायक तकनीक/सामग्री (Reasonable Accommodation) प्रदान करना।
(C) केवल मेट्रो शहरों में ही विशेष दिव्यांग विद्यालयों की स्थापना करना।
(D) उन्हें केवल पारंपरिक शारीरिक श्रम कार्यों के लिए प्रशिक्षित करना।

उत्तर: (B) उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप बाधामुक्ति वातावरण और सहायक तकनीक/सामग्री (Reasonable Accommodation) प्रदान करना।
व्याख्या: वर्ष 2016 के अधिनियम के तहत सभी सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह विधिक रूप से अनिवार्य है कि वे दिव्यांग छात्रों को समान अवसर देने के लिए बाधामुक्ति बुनियादी ढांचा और सहायक तकनीक (जैसे स्क्रीन रीडर) प्रदान करें।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. जयमंती खेस छत्तीसगढ़ क्यों चर्चा में हैं और उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य क्या है?

जयमंती खेस छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गोरिया की रहने वाली एक 100% दृष्टिबाधित मेधावी छात्रा हैं, जो वर्तमान में रायपुर के डिग्री गर्ल्स कॉलेज में बी.ए. अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं। उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक ‘शिक्षक’ (Teacher) बनना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है।

Q2. जयमंती खेस को प्रदान किए गए लैपटॉप में स्थापित ‘स्क्रीन-रीडर’ (Screen-Reader) सॉफ्टवेयर की क्या उपयोगिता है?

यह एक अत्यंत उन्नत सहायक तकनीक (Assistive Technology) है, जो लैपटॉप की स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाली किसी भी डिजिटल पुस्तक, नोट्स या वेबसाइट के टेक्स्ट को प्राकृतिक मानवीय आवाज (Text-to-Speech) में बदलकर सुनाती है। इससे दृष्टिबाधित छात्रा बिना किसी की सहायता के स्वतंत्र रूप से स्वयं पढ़ाई कर सकती हैं।

Q3. इस सामाजिक कल्याणकारी पहल में ‘कलेक्टर जनदर्शन’ की क्या प्रशासनिक भूमिका रही है?

जयमंती ने अपनी पढ़ाई की विसंगतियों को दूर करने के लिए जशपुर कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन किया था। जनदर्शन के माध्यम से कलेक्टरेट प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने त्वरित समन्वय स्थापित कर बिना किसी शासकीय देरी के सीधे मुख्यमंत्री के हाथों से उन्हें यह विशेष लैपटॉप प्रदान करवाया।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • दृष्टिबाधा पर तकनीक की विजय: जयमंती खेस छत्तीसगढ़ की यह सफलता यह प्रमाणित करती है कि जब सुदूर वनांचल अंचलों के दिव्यांग मेधावी छात्रों को आधुनिक सहायक तकनीक (Screen Reader) प्रदान की जाती है, तो वे पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
  • त्वरित और संवेदनशील सुशासन: ‘कलेक्टर जनदर्शन’ के माध्यम से प्राप्त आवेदन का बिना किसी विनियामक देरी के समाज कल्याण विभाग द्वारा समय पर निपटारा करना लोक-केंद्रित संवेदनशील नौकरशाही (Empathetic Bureaucracy) की मिसाल है।
  • दिव्यांगों का मानव पूंजी के रूप में विकास: दिव्यांगों को केवल चैरिटी या सहानुभूति देने के बजाय उन्हें डिजिटल रूप से सक्षम बनाना उन्हें देश की ‘नॉलेज इकोनॉमी’ और भावी राष्ट्र निर्माताओं (शिक्षक के रूप में) की मुख्यधारा से जोड़ता है।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का मानव संसाधन विकास, समाज कल्याण विभाग की नीतियां), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य व कमजोर और संवेदनशील वर्गों के कल्याणकारी कार्यक्रम), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (कमजोर और संवेदनशील वर्गों—विशेष रूप से दिव्यांगों व महिलाओं के कल्याण से जुड़ी नीतियां, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन विकास) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग, जशपुर जिला कलेक्टरेट प्रशासन (जनदर्शन विंग), और मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा 17 अगस्त 2026 को जसपुर बगिया कैंप कार्यालय में संपन्न हुई सौजन्य आत्मीय भेंट और लैपटॉप वितरण विवरणी पर आधारित है।

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