छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग: स्थापना दिवस समारोह पर वरिष्ठ साहित्यकारों और भाषा-सेवियों का हुआ भव्य सम्मान; 26 नई साहित्यिक पुस्तकों का किया गया ऐतिहासिक विमोचन

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग

Published on 16 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और इसे प्रशासनिक व जन-संवाद का मुख्य माध्यम बनाने के लिए समर्पित छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का कार्यालय स्थापना दिवस राजधानी रायपुर में भव्य रूप से मनाया गया। आज 16 अगस्त 2026 को जारी विशेष रिपोर्ट के अनुसार, 14 अगस्त को आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्य भर के वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों, भाषा-सेवियों और शोधकर्ताओं का भव्य सम्मान किया गया।

समारोह की मुख्य गरिमा राजभाषा आयोग द्वारा हाल ही में प्रकाशित की गई 26 नई छत्तीसगढ़ी साहित्यिक पुस्तकों के विमोचन से बढ़ी। इस अवसर पर धरमपुरा विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज दयाल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा और सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित छत्तीसगढ़ी साहित्य जगत की कई बड़ी हस्तियां उपस्थित थीं।

महत्वपूर्ण संकेतकछत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग स्थापना दिवस के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
समारोह का नामछत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग कार्यालय स्थापना दिवस समारोह
स्थापना दिवस की वास्तविक तिथि14 अगस्त (प्रतिवर्ष इसी तिथि को कार्यालय स्थापना दिवस मनाया जाता है)
समारोह स्थल व वर्षयोजना भवन सभागार, रायपुर (अगस्त 2026)
विमोचित पुस्तकों की संख्याआयोग द्वारा प्रकाशित कुल 26 अमूल्य छत्तीसगढ़ी पुस्तकों का विमोचन
सम्मानित प्रमुख भाषा-सेवीश्री संजय पाण्डेय (आकाशवाणी), श्रीमती ज्योति सिंह (दूरदर्शन), श्री समीर शुक्ला, श्री चेतन भारती
प्रमुख अतिथि साहित्यकारश्री परदेशी राम वर्मा, श्री अरुण निगम, श्री मीर अली मीर और श्रीमती शशिकला दुबे
मुख्य वक्ता (Keynote Speaker)प्रो. राजन यादव (कला संकाय अधिष्ठाता, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़)
आयोग के वर्तमान अध्यक्षश्री प्रभात मिश्रा (Chairman, CG Rajbhasha Aayog)

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छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग: वरिष्ठ साहित्यकारों और भाषा-सेवियों का भव्य सम्मान

राजभाषा आयोग ने छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और भाषा के प्रचार-प्रसार में लगे हुए जमीनी प्रणेताओं का सम्मान करने की दिशा में कड़े कदम उठाए हैं:

  • भाषा-सेवियों का कूटनीतिक सम्मान: समारोह में छत्तीसगढ़ी लोकवाणी को जन-जन तक पहुंचाने वाले आकाशवाणी के सेवानिवृत्त उद्घोषक श्री संजय पाण्डेय, दूरदर्शन की वरिष्ठ एंकर व पत्रकार श्रीमती ज्योति सिंह, आकाशवाणी के सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिकारी श्री समीर शुक्ला, और रायपुर के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री चेतन भारती व श्री चोवाराम वर्मा ‘बादल’ को उनकी असाधारण भाषाई सेवाओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
  • वरिष्ठ साहित्यकारों का समागम: इस ऐतिहासिक समारोह में छत्तीसगढ़ी माटी के पुरोधा साहित्यकार श्री परदेशी राम वर्मा, श्री अरुण निगम, जनकवि मीर अली मीर और वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती शशिकला दुबे ने शिरकत कर छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य के संरक्षण पर विचार साझा किए।

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छत्तीसगढ़ी साहित्य की समृद्धि के लिए 26 नई पुस्तकों का विमोचन

इस स्थापना दिवस समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित की गई 26 नई पुस्तकों का विमोचन रहा, जो छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य का एक प्रामाणिक प्रलेखन हैं:

  • विरासत का दस्तावेजीकरण: वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकों का प्रकाशन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह देश और राज्य की आने वाली पीढ़ियों को उनकी भाषाई जड़ों और सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
  • भाषा, संस्कृति और सामूहिक स्मृतियों का संबंध: खैरागढ़ कला एवं संगीत विश्वविद्यालय के प्रो. राजन यादव ने अपने मुख्य व्याख्यान में कहा कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं होती, बल्कि वह किसी भी समाज के इतिहास, लोक-संवेदनाओं और उसकी हजारों साल पुरानी सामूहिक स्मृतियों (Collective Memories) को सहेजने वाली मुख्य रीढ़ होती है।

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  • छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग: छत्तीसगढ़ी भाषा को आधिकारिक राजभाषा का दर्जा देने और संविधान की 8वीं अनुसूची (8th Schedule) में शामिल कराने के लिए छत्तीसगढ़ राजभाषा (संशोधन) विधेयक, 2007 के तहत इस आयोग का गठन किया गया था। यह आयोग प्रतिवर्ष 28 नवंबर को ‘छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस’ (Rajbhasha Diwas) मनाता है।
  • संविधान की 8वीं अनुसूची: इसके तहत देश की 22 आधिकारिक भाषाओं को विधिक मान्यता दी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार लगातार छत्तीसगढ़ी को इस अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रयासरत है।
  • इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़: छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित जिले खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में स्थित एशिया का पहला और एकमात्र पूर्णतः संगीत, शास्त्रीय नृत्य और ललित कलाओं को समर्पित विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना वर्ष 1956 में की गई थी।

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मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के स्थापना दिवस समारोह के इन निर्णयों और 26 पुस्तकों के विमोचन को राज्य की भाषाई नीतियों, सांस्कृतिक संप्रभुता (Cultural Sovereignty) और लोक-प्रशासन में क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व के रूप में विश्लेषणात्मक रूप से देखा जाना चाहिए।

किसी भी राज्य का सुशासन (Good Governance) और उसकी नीतियां तभी समावेशी बन सकती हैं जब प्रशासनिक और विधिक सूचनाएं आम जनता तक उनकी मातृभाषा (Mother Tongue) में पहुँचे। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEEP 2020) भी प्रारंभिक शिक्षा और तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने की वकालत करती है। छत्तीसगढ़ी भाषा को केवल एक स्थानीय बोली न मानकर उसे एक पूर्ण प्रशासनिक राजभाषा के रूप में स्थापित करने में इस आयोग का सांगठनिक ढांचा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसके अतिरिक्त, आकाशवाणी और दूरदर्शन के ‘भाषा-सेवियों’ (उद्घोषकों) को सम्मानित करना यह दर्शाता है कि भाषा का विकास केवल साहित्यिक अकादमियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसंचार (Mass Media) और रेडियो-टेलीविज़न की लोक-संवाद प्रणाली इसकी मुख्य संवाहक है। 26 पुस्तकों का यह प्रकाशन छत्तीसगढ़ी व्याकरण, शब्दकोश और लुप्तप्राय लोक कथाओं को एक वैज्ञानिक प्रलेखन (Documentation) प्रदान करेगा, जो अंततः छत्तीसगढ़ी को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सबसे मजबूत प्रशासनिक और नैतिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और राजभाषा विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में 14 अगस्त को मनाए गए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस समारोह के दौरान, छत्तीसगढ़ी साहित्य के संवर्धन के लिए कुल कितनी नई पुस्तकों का विमोचन किया गया है?

(A) 11 पुस्तकें
(B) 15 पुस्तकें
(C) 26 पुस्तकें (26 Books)
(D) 33 पुस्तकें

उत्तर: (C) 26 पुस्तकें (26 Books)
व्याख्या: रायपुर में आयोजित हुए इस भव्य समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित की गई 26 नई अमूल्य छत्तीसगढ़ी पुस्तकों का विमोचन किया गया।

प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा वर्ष 2007 में किस विशिष्ट तिथि को छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा देने के लिए विधेयक पारित किया गया था, जिसकी याद में प्रतिवर्ष राज्य में ‘छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस’ मनाया जाता है?

(A) 14 अगस्त
(B) 1 नवंबर
(C) 28 नवंबर (28 November)
(D) 12 अगस्त

उत्तर: (C) 28 नवंबर (28 November)
व्याख्या: 28 नवंबर 2007 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा देने वाला विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया गया था, इसी कारण प्रतिवर्ष 28 नवंबर को पूरे राज्य में ‘छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस’ मनाया जाता है। (14 अगस्त को राजभाषा आयोग का कार्यालय स्थापना दिवस होता है)।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का कार्यालय स्थापना दिवस कब मनाया जाता है और 2026 में इसका आयोजन कहाँ किया गया?

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का कार्यालय स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है। वर्ष 2026 के इस गरिमामयी समारोह का आयोजन रायपुर में किया गया, जिसमें आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा और राज्य के वरिष्ठ साहित्यकार शामिल हुए।

Q2. इस समारोह में ‘भाषा-सेवी’ सम्मान से किन्हें अलंकृत किया गया है?

इस वर्ष छत्तीसगढ़ी भाषा को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले संचार माध्यमों के प्रणेताओं—श्री संजय पाण्डेय (आकाशवाणी), श्रीमती ज्योति सिंह (दूरदर्शन), श्री समीर शुक्ला (आकाशवाणी), और साहित्यकार श्री चेतन भारती व श्री चोवाराम वर्मा ‘बादल’ को सम्मानित किया गया।

Q3. छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की किस अनुसूची में शामिल कराने के लिए राजभाषा आयोग प्रयासरत है?

छत्तीसगढ़ सरकार और राजभाषा आयोग लगातार छत्तीसगढ़ी भाषा को भारतीय संविधान की ‘8वीं अनुसूची’ (Eighth Schedule) में शामिल कराकर इसे एक आधिकारिक विधिक दर्जा दिलाने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर प्रयासरत हैं।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • 26 साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के स्थापना दिवस पर रिकॉर्ड 26 नई छत्तीसगढ़ी पुस्तकों का विमोचन कर राज्य के लोक साहित्य को एक सुदृढ़ प्रलेखन प्रदान किया गया है।
  • भाषा-सेवियों का ऐतिहासिक सम्मान: आकाशवाणी और दूरदर्शन के अनुभवी उद्घोषकों को सम्मानित करना यह प्रमाणित करता है कि जनसंचार और रेडियो ही लोकभाषा को जीवंत बनाए रखने की मुख्य रीढ़ हैं।
  • 8वीं अनुसूची के लिए कूटनीतिक प्रयास: आयोग के इस निरंतर प्रयास का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराना और युवाओं को अपनी भाषाई जड़ों से जोड़ना है।

UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य, कला और भाषा के विकास में राजभाषा आयोग की भूमिका) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची, संघ और राज्यों की आधिकारिक भाषा नीतियां, ई-गवर्नेंस व भाषाई समावेशन) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग (रायपुर मुख्यालय), और जनसंपर्क विभाग (DPRCG) द्वारा 16 अगस्त 2026 को रायपुर में संपन्न हुए स्थापना दिवस समारोह के उपरांत जारी की गई आधिकारिक प्रेस समीक्षा और विवरणों पर आधारित है।

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