Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026: भारत के पहले पूर्णतः स्वदेशी जेट-संचालित आत्घाती ड्रोन ‘दिव्यास्त्र मार्क-3’ ने भरी पहली उड़ान; रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई इबारत

Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026 Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026

Published on 16 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत की रक्षा विनिर्माण आत्मनिर्भरता और उन्नत स्वदेशी एयरोस्पेस इंजन कूटनीति की दिशा में एक नया स्वर्णिम इतिहास रचते हुए, Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026 ने अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी कर ली है। उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे (UP Defence Industrial Corridor) में मुख्यालय वाली प्रसिद्ध रक्षा-प्रौद्योगिकी कंपनी कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड (HoverIt) ने आज 16 अगस्त 2026 को इस ऐतिहासिक उपलब्धि की आधिकारिक घोषणा की।

इस अत्याधुनिक ‘दिव्यास्त्र मार्क-3’ का सफल उड़ान परीक्षण उत्तर प्रदेश में निर्धारित ड्रोन परीक्षण हवाई पट्टी पर किया गया। यह भारत के रक्षा इतिहास में पहला ऐसा उदाहरण है, जहाँ देश के भीतर ही परिकल्पित, डिजाइन और निर्मित किए गए जेट-संचालित लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) को पूरी तरह से भारत में बने स्वदेशी जेट इंजन से लैस कर सफलतापूर्वक उड़ाया गया है।

महत्वपूर्ण संकेतकDivyastra Mk3 Loitering Munition 2026 के प्रमुख तथ्य व तकनीकी विवरण
हथियार का प्रकारनेक्स्ट-जेनरेशन जेट-पावर्ड लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन)
निर्माण कंपनी (Airframe)कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड (ब्रांड नाम: HoverIt) – लखनऊ, उत्तर प्रदेश
स्वदेशी जेट इंजन निर्माताडीजी प्रोपल्शन (DG Propulsion) – पंजाब, भारत
प्रथम उड़ान की तिथि और स्थान11 अगस्त 2026, विशेष ड्रोन परीक्षण हवाई पट्टी, उत्तर प्रदेश
परियोजना का अनूठा रिकॉर्डएक कैलेंडर वर्ष के भीतर ही परिकल्पना से लेकर उड़ान तक का कार्य संपन्न किया गया
प्रमुख तकनीकी विशेषताएंएआई-सक्षम लक्ष्य ट्रैकिंग, उन्नत स्वायत्त उड़ान नियंत्रण और सटीक हमला क्षमता
इंजन का प्रकार और श्रेणी40 kgf और 100 kgf-श्रेणी के माइक्रो टर्बोजेट इंजन (40 & 100 kgf-class turbojet)
सहायक विनियामक संस्थाएंUP डिफेंस कॉरिडोर, इन्वेस्ट यूपी, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और MoCA

यह भी पढ़ें: भारतीय सेना के राष्ट्रमंडल खेल विजेताओं का सम्मान 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 पदक विजेता सैन्य जांबाजों का किया आत्मीय अभिनंदन


Table of Contents

Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026: एक कैलेंडर वर्ष में परिकल्पना से उड़ान तक का स्वर्णिम सफर

सैन्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समयबद्ध लक्ष्यों को पूरा करना किसी भी रक्षा कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, लेकिन ‘दिव्यास्त्र मार्क-3’ ने इस विनियामक गतिशीलता में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है:

  • रिकॉर्ड समय में विकास: इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2026 की पहली तिमाही में की गई थी, और मात्र कुछ ही महीनों के भीतर 11 अगस्त 2026 को इस जेट-संचालित ड्रोन ने आसमान में अपनी पहली सफल उड़ान भरी। यह भारतीय इंजीनियरों, नीति निर्माताओं और रणनीतिक फोकस के बेहतरीन अभिसरण (Convergence) को प्रमाणित करता है।
  • पूर्णतः स्वदेशी तकनीकी ढांचा: इस प्रणाली का कोई भी महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशी आयात पर निर्भर नहीं है। एयरफ्रेम और नेविगेशन कंट्रोलर से लेकर इसके गाइडेंस सिस्टम और टर्बोजेट इंजन का निर्माण पूरी तरह भारत के भीतर ही किया गया है।

यह भी पढ़ें: Air Marshal Tejpal Singh DCAS IAF 2026: एयर मार्शल तेजपाल सिंह बने भारतीय वायु सेना के नए उप प्रमुख


डीजी प्रोपल्शन (DG Propulsion) का स्वदेशी टर्बोजेट इंजन और क्षमताएं

पंजाब स्थित एयरोस्पेस कंपनी ‘डीजी प्रोपल्शन’ द्वारा निर्मित टर्बोजेट इंजन इस ‘दिव्यास्त्र’ का मुख्य हृदय (Powerplant) है, जिसकी सफलता भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • उड़ान-सत्यापित टर्बोजेट इंजन: दिव्यास्त्र मार्क-3 को उड़ाने में प्रयुक्त टर्बोजेट इंजन ने परीक्षण के दौरान सभी निर्धारित मानकों को शत-प्रतिशत सटीकता से पूरा किया। यह इंजन मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए एक विश्वसनीय और युद्ध-सक्षम शक्ति प्रदान करता है।
  • प्रोपल्शन आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भरता: डीजी प्रोपल्शन देश की पहली निजी कंपनी बन गई है जिसका स्वदेशी टर्बोजेट इंजन किसी घरेलू लोइटरिंग म्यूनिशन पर सफलतापूर्वक प्रमाणित हुआ है। यह भारत के भावी क्रूज मिसाइलों और हाई-स्पीड ड्रोन कार्यक्रमों के लिए रणनीतिक संप्रभुता सुनिश्चित करेगा।
  • एआई और ऑटोनोमस नेविगेशन: दिव्यास्त्र मार्क-3 में उन्नत स्वायत्त उड़ान नियंत्रण (Autonomous flight control) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लक्ष्य खोज प्रणालियों को एकीकृत किया गया है, जो जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के माहौल में भी सटीक निशाना लगाने में सक्षम हैं।

विनियामक समर्थन और ‘मेक इन इंडिया’ कूटनीति

इस महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना की सफलता को धरातल पर उतारने में राज्य और केंद्र सरकार की संवेदनशील नीतियों का बड़ा योगदान रहा है:

  • यूपी डिफेंस कॉरिडोर और इन्वेस्ट यूपी: लखनऊ मुख्यालय वाले कावा यूएवी (HoverIt) को उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे के तहत विश्वस्तरीय अवसंरचना और हवाई पट्टी की परीक्षण सुविधाएं प्राप्त हुईं, जिससे परीक्षण को सुगम बनाया जा सका।
  • DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय: हवाई परीक्षणों के लिए आवश्यक वायुक्षेत्र मंजूरी (Airspace Clearance) और विनियामक अनुमतियां डीजीसीए और मंत्रालय द्वारा समयबद्ध तरीके से प्रदान की गईं, जो ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का उत्कृष्ट उदाहरण है।

UPSC Prelims Fact Box: Loitering Munitions, Defence Corridors & IN-SPACe Rules

  • लोइटरिंग म्यूनिशन (Loitering Munition): इन्हें अनौपचारिक रूप से “आत्मघाती ड्रोन” (Kamikaze Drones) कहा जाता है। यह एक ऐसी मानवरहित हवाई प्रणाली है जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक मँडराती (Loiter) रहती है, और जैसे ही सेंसरों या एआई द्वारा दुश्मन के ठिकाने (जैसे टैंक, बंकर या रडार) की पहचान होती है, यह सीधे उससे टकराकर विस्फोट कर देती है।
  • भारत में रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors): देश में रक्षा विनिर्माण के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए दो गलियारे स्वीकृत किए गए हैं—पहला उत्तर प्रदेश में (लखनऊ, कानपुर, झाँसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट नोड्स) और दूसरा तमिलनाडु में।
  • किम्बरली प्रोसेस और ड्रोन नीतियां: इन-स्पेस (IN-SPACe) द्वारा वर्ष 2024 में जारी किए गए नए ‘पोस्ट-मिशन डिस्पोजल’ नियमों के तहत सभी भारतीय निजी रक्षा ऑपरेटरों के लिए अपने ड्रोन और उपग्रहों के सुरक्षित डी-ऑर्बिटिंग मानकों का पालन करना अनिवार्य किया गया है।

UPSC & State PCS Mains Analysis: रक्षा विनिर्माण का स्वदेशीकरण और रणनीतिक संप्रभुता

मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026 की यह सफल परीक्षण उड़ान भारत के रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उद्योगों में निजी स्टार्ट-अप्स की भूमिका और देश की सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के रूप में विश्लेषणात्मक रूप से देखी जानी चाहिए।

आधुनिक युद्धक्षेत्रों (जैसे हाल के यूरेशिया और पश्चिम एशिया के संघर्षों) में यह सिद्ध हो चुका है कि लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे ‘असममित युद्ध प्रणालियाँ’ (Asymmetric Warfare Systems) युद्ध की दिशा तय करने में अग्रणी भूमिका निभाती हैं। पूर्व में भारत को ऐसे ड्रोन और विशेष रूप से उनके टर्बोजेट इंजनों के लिए पश्चिमी देशों या इसराइल पर निर्भर रहना पड़ता था, जो संकट के समय हमारी संप्रभुता को सीमित कर देता था। पंजाब की डीजी प्रोपल्शन के स्वदेशी टर्बोजेट इंजन के सफल सत्यापन ने इस आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain vulnerability) के जोखिम को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

इसके अतिरिक्त, यह कार्यक्रम सार्वजनिक-निजी-साझेदारी (PPP) के एक नए ‘ट्रिपल हेलिक्स मॉडल’ (जिसमें सरकारी नीतिगत सुगमता, निजी स्टार्ट-अप्स की गतिशीलता और विशिष्ट अनुसंधान शामिल हैं) की जीत को दर्शाता है। एक कैलेंडर वर्ष से भी कम समय में इस जटिल तकनीकी मिसाइल प्रणाली को विकसित कर उड़ा देना यह प्रमाणित करता है कि भारत के निजी रक्षा स्टार्ट-अप अब वैश्विक स्तर पर अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हो चुके हैं। यह तकनीक-आधारित और स्वदेशी विनिर्माण ढांचा अंततः भारत को केवल एक आयातक से बदलकर रक्षा उपकरणों के एक बड़े निर्यातक (Net Exporter) के रूप में रूपांतरित करेगा और विकसित भारत @ 2047 के सामरिक विज़न को समयबद्ध धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस महत्वपूर्ण सैन्य और वैज्ञानिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में सफल परीक्षण उड़ान पूरी करने वाले भारत के पहले पूर्णतः स्वदेशी जेट-संचालित लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) का क्या नाम है?

(A) त्रिशूल मार्क-2
(B) दिव्यास्त्र मार्क-3 (Divyastra Mk3)
(C) पिनाका एमके-4
(D) रूस्तम-3

उत्तर: (B) दिव्यास्त्र मार्क-3 (Divyastra Mk3)
व्याख्या: उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे में स्थित कावा यूएवी (HoverIt) द्वारा डिजाइन और विकसित किए गए भारत के पहले जेट-संचालित लोइटरिंग म्यूनिशन का नाम ‘दिव्यास्त्र मार्क-3’ है, जिसने 11 अगस्त 2026 को अपनी पहली उड़ान भरी।

प्रश्न 2: ‘दिव्यास्त्र मार्क-3’ में प्रयुक्त देश के पहले उड़ान-सत्यापित स्वदेशी माइक्रो टर्बोजेट इंजन का निर्माण भारत के किस राज्य में स्थित एयरोस्पेस स्टार्ट-अप ‘डीजी प्रोपल्शन’ (DG Propulsion) द्वारा किया गया है?

(A) उत्तर प्रदेश
(B) पंजाब (Punjab)
(C) कर्नाटक
(D) छत्तीसगढ़

उत्तर: (B) पंजाब (Punjab)
व्याख्या: दिव्यास्त्र मार्क-3 को संचालित करने वाले स्वदेशी टर्बोजेट इंजन का निर्माण पंजाब स्थित एयरोस्पेस फर्म ‘डीजी प्रोपल्शन’ (DG Propulsion) द्वारा किया गया है, जिसने देश की पहली बार किसी लोइटरिंग म्यूनिशन के लिए जेट इंजन विकसित किया है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026 क्या है और इसके प्राथमिक लक्ष्य क्या हैं?

दिव्यास्त्र मार्क-3 (Divyastra Mk3) भारत का पहला पूर्णतः स्वदेशी और जेट-संचालित लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) है, जिसे कावा यूएवी (HoverIt) द्वारा विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश को सटीक मारक क्षमता (Precision Strike) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और रक्षा आयात निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करना है।

Q2. ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ क्या होते हैं और आधुनिक युद्धक्षेत्र में इनका क्या महत्व है?

लोइटरिंग म्यूनिशन (जिन्हें कामिकेज या आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है) हवा में कुछ समय तक मँडराकर (Loiter) सक्रिय रूप से लक्ष्य की खोज करते हैं। जैसे ही दुश्मन के रडार, बंकर या सैन्य वाहनों की पहचान होती है, ये सीधे उनसे टकराकर उन्हें नष्ट कर देते हैं। आधुनिक युद्धों में ये पारंपरिक तोपखाने की तुलना में अत्यधिक सस्ते और सटीक हमला करने वाले हथियार हैं।

Q3. इस रक्षा परियोजना की सफलता में उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे (UP Defence Corridor) की क्या भूमिका रही है?

उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे ने लखनऊ स्थित इस रक्षा स्टार्ट-अप को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, अत्याधुनिक परीक्षण हवाई पट्टी की सुगमता, तथा ‘इन्वेस्ट यूपी’ के माध्यम से आवश्यक विनियामक और वित्तीय सहयोग प्रदान किया है, जिससे इस जटिल मिसाइल प्रणाली को मात्र एक वर्ष के भीतर विकसित करना संभव हो सका।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • रिकॉर्ड समय में स्वदेशी विकास: Divyastra Mk3 Loitering Munition 2026 के कड़े क्रियान्वयन के तहत भारत ने केवल एक ही कैलेंडर वर्ष के भीतर परिकल्पना से लेकर सफल उड़ान परीक्षण तक का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है।
  • प्रोपल्शन क्षेत्र में ऐतिहासिक आत्मनिर्भरता: पंजाब की ‘डीजी प्रोपल्शन’ द्वारा निर्मित 40 व 100 kgf-श्रेणी के टर्बोजेट इंजनों की सफलता ने देश को पहली बार ड्रोन और मिसाइल इंजनों के विदेशी आयात पर निर्भरता से मुक्त किया है।
  • प्रशासनिक सुगमता का उदाहरण: यूपी रक्षा कॉरिडोर, इन्वेस्ट यूपी और डीजीसीए (DGCA) के बीच मजबूत विनियामक समन्वय के कारण ही इस रणनीतिक ड्रोन परीक्षण को समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक हवाई क्षेत्र मंजूरियां मिल सकीं।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां, रक्षा विनिर्माण का स्वदेशीकरण, एआई और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स का अनुप्रयोग) और राज्य लोक सेवा आयोगों (State PCS) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे (Lucknow Noad), रक्षा मंत्रालय भारत सरकार, कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड (HoverIt), डीजी प्रोपल्शन (पंजाब) और पत्र सूचना कार्यालय (PIB Delhi) द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी किए गए आधिकारिक तकनीकी परीक्षण प्रतिवेदनों पर आधारित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *